: रोजगार की मांग पर भू विस्थापित किसानों का धरना 29 वें दिन भी जारी,भू विस्थापितों ने आक्रोश सभा कर निकाली विशाल मशाल जुलूस,1 दिसंबर को कुसमुंडा खदान बंद को मिल रहा है व्यापक जनसमर्थन
कुसमुंडा क्षेत्र के भू विस्थापित किसान 31 अक्टूबर को 12 घंटे कुसमुंडा खदान को पूर्ण रूप से बंद करने के बाद रोजगार की मांग को लेकर एसईसीएल के कुसमुंडा मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के बेनर तले बैठे है अपने वायदे अनुसार एसईसीएल 30 नवंबर तक सभी को रोजगार नहीं देगी तो 1 दिसंबर को कुसमुंडा खदान को पूर्ण रूप से बंद किया जाएगा। धरना के 29वें दिन भू विस्थापित किसानों ने धरना स्थल पर विशाल आक्रोश सभा में भरा हुंकार और एसईसीएल कुसमुंडा मुख्यालय के सामने से 4 किलोमीटर तक निकाला विशाल मशाल जुलूस।
आक्रोश सभा को संबोधित करते हुए माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि पूरे देश मे आजादी के बाद से अब तक विकास परियोजना के नाम पर दस करोड़ से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया गया है और अपने पुनर्वास और रोजगार के लिए भू विस्थापित परिवार आज भी भटक रहे हैं।सरकार की कॉरपोरेटपरस्त नीतियां गरीबों की आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों को उनसे छीन रही है। यही कारण है कि कुछ लोग मालामाल हो रहे हैं और अधिकांश जिंदा रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं।इसलिए विस्थापन के खिलाफ और रोजगार के लिए संघर्ष इस देश में चल रहे व्यापक राजनैतिक संघर्ष का एक हिस्सा है और इन सरकारों की कॉरपोरेटपरस्त नीतियों को बदलकर ही इसे जीता जा सकता है।
आक्रोश सभा को संबोधित करते हुए रोजगार एकता संघ के सचिव दामोदर और उपाध्यक्ष रेशम यादव ने कहा कि सरकार को विस्थापितों को ऐसा जीवन प्रदान करना चाहिए जिससे उनको लगे की उन्होंने अपनी जमीन नहीं खोया है लेकिन सरकार गरीबों की जमीन लेकर गरीबों को जमीन पर लाकर खड़ा कर देती है। गरीब भू विस्थापित कोर्ट भी नहीं जा सकते उनके पास इतने पैसे भी नहीं है इसके अलावा सालो साल अदालतों में मामले लंबित रह जाते हैं। गरीबों के पास संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा एसईसीएल प्रबंधन और सरकार सभी भू विस्थापित परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की प्रक्रिया जल्द शुरू करे।
रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष राधेश्याम कश्यप ने कहा कि रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं अब भू विस्थापित बिना रोजगार के घर वापस नहीं जाने वाले हैं आंदोलन रोजगार मिलने तक जारी रहेगा 1 दिसंबर से पहले रोजगार की मांग पूरी नहीं होने पर 1 दिसंबर को कुसमुंडा खदान को पूर्ण रूप से बंद किया जाएगा आंदोलन को राजनैतिक, सामाजिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
आक्रोश सभा को किसान सभा के दीपक साहू,जवाहर कंवर, जय कौशिक और रोजगार एकता संघ के अमरपाल, बलराम,दीनानाथ ने भी संबोधित किया।
आक्रोश सभा के बाद राधेश्याम कश्यप, गणेश प्रभु, दामोदर,रेशम,पुरषोत्तम के नेतृत्व में भू विस्थापितों ने कुसमुंडा मुख्यालय के सामने से चार किलोमीटर तक निकाला विशाल मशाल जुलूस भू विस्थापितों ने कहा रोजगार मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
आज के आक्रोश सभा और मशाल जुलूस में प्रमुख रूप से दीनानाथ कौशिक, मोहन लाल कौशिक, बलराम कश्यप,सनत,विजय, दीपक, अनिरुद्ध, रामप्रसाद, बजरंग सोनी,अनिल बिंझवार,अमरपाल, नरेंद्र, हरिशंकर, अश्वनी,अजय, हेमलाल, चंद्रशेखर, राजेश,रामेश्वर,कृष्णा बिंझवार,रवि शंकर, लंबोदर,ताकेश्वर, विनय उपस्थित थे
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