: ब्रह्मलीन पायलट बाबा की उत्तराधिकारी बनीं जापानी साध्वी कैवल्या
Mon, Aug 26, 2024
हरिद्वार - श्री पंचदश नाम जूना अखाड़े के ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर पायलट बाबा के उत्तराधिकारी की आज आयोजित सभा में जूना अखाड़े के महंत व संतों ने घोषणा कर दी है। घोषणा के तहत बाबा की जापान की रहने वाली शिष्या योगमाता साध्वी कैवल्या देवी (केको आईकोवा) को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया है। इन्हें पायलट बाबा आश्रम ट्रस्ट का अध्यक्ष और दो अन्य शिष्याओं महामंडलेश्वर साध्वी चेतनानंद गिरि और साध्वी श्रद्धा गिरि को ट्रस्ट का महामंत्री बनाया गया है। इस मौके पर तमाम साधु संत मौजूद रहे , जिन्होंने विधिवत तरीके से बाबा के उत्तराधिकारी और महामंत्रियों की घोषणा की।
कौन हैं कैवल्या देवीयोग माता केको आईकावा जापान की जानी मानी भू समाधि विशेषज्ञ है। ये हिमालय में ध्यान और योग की अंतिम अवस्था प्राप्त करके सिद्ध गुरू बनने वाली पहली और एकमात्र महिला के साथ ही एकमात्र विदेशी भी हैं। चालीस से अधिक वर्षों से ध्यान और योग पर एक विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने जापान में इन प्रथाओं को पोषित करने में सक्रिय रूप से भाग लिया है। वर्ष 1985 में योगमाता केको आईकावा ने जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक हरि गिरि महाराज से मुलाकात कर उनके मार्गदर्शन में हिमालय में 5000 से 6000 मीटर की ऊंचाई पर कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने परम समाधि प्राप्त की , जिसका अर्थ अपने मन और शरीर पर पूर्ण नियंत्रण रखना है। वर्ष 1991 से 2007 तक उन्होंने सत्य को प्रमाणित करने और विश्व शांति को बढ़ावा देने के लिये पूरे भारत में समाधि के अठारह सार्वजनिक दर्शन किये। वर्ष 2007 में योगमाता आईकावा को भारत के सबसे बड़े आध्यात्मिक तप संघ , जूना अखाड़ा से 'महामंडलेश्वर' की उपाधि मिली।कौन है पायलट बाबादेश के प्रसिद्ध पायलट बाबा का असली नाम कपिल सिंह था और उनका जन्म बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में एक राजपूत परिवार में हुआ था। बाबा ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद भारतीय वायु सेना में विंग कमांडर के पद पर सेवा दी। उन्होंने वर्ष 1962 , 1965 और 1971 की लड़ाईयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके लिये उन्हें सम्मानित भी किया गया। पायलट बाबा का जीवन बदलने वाला क्षण वर्ष 1996 में आया , जब वे पूर्वोत्तर भारत में मिग विमान उड़ा रहे थे। उस समय उनके विमान का नियंत्रण खो गया था और उसी दौरान उन्हें उनके गुरु हरि गिरी महाराज का दर्शन प्राप्त हुआ। इस अनुभव ने बाबा को वैराग्य की ओर प्रेरित किया और उन्होंने शांति और अध्यात्म का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने सेना की लड़ाई से दूरी बना ली और अपने जीवन को अध्यात्म के प्रति समर्पित कर दिया। पायलट बाबा ने सैन्य जीवन के बाद सन्यास धारण कर लिया और जूना अखाड़े से जुड़ गये। वर्ष 1998 में उन्हें जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर का पद प्राप्त हुआ और वर्ष 2010 में उन्हें उज्जैन के जूना अखाड़ा शिवगिरी आश्रम नीलकंठ मंदिर का पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया। इस तरह से वे आध्यात्म की राह अपनाकर आध्यात्मिक गुरू बन गये। लम्बे समय से बीमार चल रहे महामण्डलेश्वर पायलट बाबा (86 वर्षीय) बीते दिनों 20 अगस्त मंगलवार को उपचार के दौरान मुम्बई के अस्पताल में ब्रह्मलीन हो गये थे , उसके बाद उसका पार्थिव शरीर हरिद्वार स्थित आश्रम लाया गया और गुरूवार को उन्हें जगजीतपुर स्थित आश्रम में हजारो साधु संतों की उपस्थिति में भू-समाधि दी गई। पायलट बाबा के सबसे ज्यादा अनुयायी रूस , यूक्रेन और जापान में हैं। देश में बिहार , नैनीताल , हरिद्वार , उत्तरकाशी , गंगोत्री आदि स्थानों पर पायलट बाबा के आश्रम हैं। पायलट बाबा की स्थिति यह रही कि वह कुंभ और विशेष पर स्नान पर अपने अलग साज-सज्जा के साथ शाही स्नान में शामिल हुआ करते थे।
: बारह मई को खुलेंगे चार धामों में प्रमुख श्रीबद्रीनाथ धाम के कपाट
Fri, Feb 16, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनरेंद्रनगर (टिहरी) - उत्तराखंड के प्रतिष्ठित चार धाम की मुख्य बद्रीनाथ धाम की यात्रा की शुरुआत का ऐलान कर दिया गया है। धार्मिक समारोह शुरू होने के साथ ही पूजा अर्चना , पंचांग गणना के बाद बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि आज बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर परंपरागत रूप से नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में तय की गई।टिहरी राजदरबार नरेंद्रनगर में आज प्रातः से कपाट खुलने की तिथि घोषित करने के लिये कार्यक्रम शुरू हआ। महाराजा मनुज्येंद्र शाह की उपथिति में पंचांग गणना पश्चात राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ गणेश पूजन, पंचांग पूजन और चौकी पूजन के बाद महाराजा का वर्षफल और ग्रह नक्षत्रों की दशा देखकर कपाट खोलने की तिथि तय कर महाराजा के सम्मुख रखी। तत्पश्चात महाराजा मनुज्येंद्र शाह ने कपाट खुलने की तिथि की विधिवत घोषणा की , इस दौरान राजमहल परिसर जय बद्रीविशाल के उद्घोष से गूंज उठा। महाराजा मनुज्येंद्र शाह ने बताया कि करोड़ों हिन्दूओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट 12 मई को सुबह छह बजे खोले जायेंगे। चौदह फरवरी बुधवार को बसंत पंचमी के अवसर पर श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत द्वारा गाडू घड़ा नरेंद्र नगर स्थित राजमहल को सौंपा गया। इसके बाद राजमहल में 25 अप्रैल को गाडू घड़ा में तिलों का तेल पिरोकर कपाट खुलने से पूर्व बद्रीनाथ धाम पहुंचाया जायेगा। कपाट खुलने के बाद यह तेलकलश भगवान श्री बद्रीविशाल के नित्य अभिषेक में प्रयोग किया जायेगा। बताते चलें इस वर्ष अक्षय तृतीया 10 मई को है , इस कारण गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 10 मई को खुल जायेंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख का ऐलान किया जाता है। बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तारीख का ऐलान हर साल बसंत पंचमी के दिन होता है। बुधवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि का ऐलान कर दिया गया। अब केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि का ऐलान किया जायेगा। चौदह मई तक केदारनाथ यात्रा शुरू होने का भी अनुमान जताया जा रहा है। विधिवत तरीके से महाशिवरात्रि के मौके पर केदारनाथ यात्रा की शुरुआत होने की घोषणा की जायेगी। आज श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय होने के अवसर पर राजमहल में कपाट खुलने की तिथि तय होने के अवसर ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामीश्री: अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती '१००८' महाराज के शिष्य मुकुन्दानंद ब्रह्मचारी, भगवान बद्रीविशाल के मुख्यपुजारी ईश्वरप्रसाद नम्बूदरी , सांसद राज्यलक्ष्मी शाह , बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय, डिमरी पंचायत अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, मंदिर समिति सदस्य वीरेंद्र असवाल, श्रीनिवास पोस्ती, पुष्कर जोशी भास्कर डिमरी, राजपाल जड़धारी, हरीश डिमरी, विनोद डिमरी, सुरेश डिमरी, मुख्यकार्याधिकारी योगेंद्र सिंह, अनुसचिव धर्मस्व रमेश रावत, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी, निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़, माधव नौटियाल, संजय डिमरी, ज्योतिष डिमरी, शिवानन्द उनियाल सहित कई विशिष्टजन एवं बड़ी संखा में श्रद्धालुगण विशेष रूप से उपस्थित थे।
मंदिर को पिकनिक स्पाट ना बनायें - अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीउत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती महाराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि आजकल बड़ी संख्या में हम लोग तीर्थों, मंदिरों की ओर आ रहे हैं। जब हम घर से निकलें तो हमें ये ध्यान रखना चाहिये कि मंदिर पिकनिक स्पाट या टाइमपास करने की जगह नही है। अपितु आध्यात्मिक अनुभूति और परमानन्द प्राप्त करने की जगह है , जितना हो सके कष्ट सहकर अपने ज्ञात-अज्ञात पापों का प्रायश्चित करें।
: उत्तराखंड पर्यटन के क्षेत्र में बनेगा सशक्त ब्रांड - पीएम मोदी
Fri, Dec 8, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टदेहरादून - आज भारत को देखने के लिये भारतीयों और विदेशियों दोनों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। हम पूरे देश में थीम बेस्ड टूरिज्म सर्किट तैयार कर रहे हैं। कोशिश ये है कि भारत के नेचर और हेरिटेज दोनों से ही दुनियां को परिचित कराया जाये। इस अभियान में उत्तराखंड , टूरिज्म का एक सशक्त ब्रांड बनकर उभरने वाला है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का उद्घाटन करते हुये कही। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में भारत दुनियां की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि स्थिर सरकार , नीति और परिवर्तन की इच्छाशक्ति के कारण मेरे तीसरे कार्यकाल के दौरान ऐसा होगा। पीएम मोदी ने कहा कि इक्कीसवीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक है , मुझे खुशी है कि अपने उस कथन को लगातार चरितार्थ होते देख रहा हूं। उत्तरकाशी में बीते दिनों टनल से निकालने का जो अभियान चला उसके लिये मैं राज्य सरकार समेत सभी का विशेष तौर पर अभिनन्दन करता हूं। आज भारत विकास भी और विरासत भी जिस मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है उत्तराखंड उसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत हम सभी की जिम्मेदारी है। पीएम ने आगे कहा कि मेक इन इंडिया' की तरह एक मूवमेंट चलना चाहिये 'वेड इन इंडिया ', शादी हिंदुस्तान में करो। मैं तो चाहूंगा आने वाले पांच साल में अपने परिवार की एक डेस्टिनेशन शादी उत्तराखंड में करिये। अगर एक साल में पांच हजार शादियां भी यहां होने लग जाये तो एक नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा हो जायेगा और दुनियां की शादियां यहां होने लग जायेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा एक संकल्प है , आने वाले कुछ समय में इस देश में दो करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति बनाने के लिये मैंने 'लखपति दीदी' अभियान चलाया है। हाउस ऑफ हिमालय ब्रांड से दो करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति बनाने का काम तेजी से पूरा हो जायेगा। पीएम ने कहा कि आपको आज देश में नीति-संचालित शासन दिखेगी , आपको आज राजनीतिक स्थिरता के लिये देशवासियों का मजबूत आग्रह दिखेगा। आकांक्षी भारत आज अस्थिरता नहीं चाहता , वह आज स्थिर सरकार चाहता है। पीएम मोदी ने हाल में जारी हुये पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर कहा कि लोगों ने मजबूत सरकार चुनी है। लोगों को स्थिरता पसंद हैं , जनता अब स्थिर सरकार चुनती है। इस विधानसभा चुनाव में हमने ये देखा है और उत्तराखंड के लोगों ने इसे पहले ही करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वो राज्य है , जहां आपको देवत्व और विकास दोनों का अनुभव एक साथ होता है और मैंने तो उत्तराखंड की भावनाओं और संभावनाओं को निकट से देखा है। मैंने उसे जिया है , अनुभव किया है। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड वह राज्य है जहां हम दिव्यता और विकास को एक साथ अनुभव कर सकते हैं। देवभूमि यहां होने वाले निवेश के नये द्वार खोलने की क्षमता रखती है। आज देश में नीति-संचालित शासन और राजनीतिक स्थिरता है। पीएम ने कहा कि आज भारत सरकार इक्कीसवीं सदी के आधुनिक कनेक्टिविटी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर उत्तराखंड में अभूतपूर्व निवेश कर रही है। केंद्र सरकार के इन प्रयासों के बीच राज्य सरकार भी छोटे शहरों और गांव-कस्बों को जोड़ने के लिये पूरी शक्ति से काम कर रही है। वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से , दिल्ली और देहरादून की दूरी ढाई घंटे होने वाली है। उन्होंने कहा कि हम सीमावर्ती गांवों को लास्ट विलेज नहीं , बल्कि देश के फर्स्ट विलेज के रूप में विकसित करने में जुटे हैं। आज भारत और भारतीयों को दुनियां जिस उम्मीद और सम्मान से देख रही है , उसे हर भारतीय एक दायित्व के रूप में ले रहा है। हर देशवासी को लगता है कि विकसित भारत का निर्माण उसकी जिम्मेदारी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के तो हर जिले और हर ब्लॉक में ऐसे प्रोडक्ट हैं , जो लोकल हैं लेकिन उनमें ग्लोबल बनने की संभावनायें हैं। गौरतलब है कि दो दिवसीय उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज देहरादून पहुंचे , जहां सीएम धामी ने उनका आत्मीय स्वागत किया। पीएम मोदी ने यहां 'उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट' का उद्घाटन किया , उन्होंने 44000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की अधारशिला रखी , इसमें मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े 16 प्रोजेक्ट शामिल हैं। तीन केन्द्रीय मंत्री , पंद्रह देशों के राजदूत , गौतम अडानी , नवीन जिंदल समेत कॉर्पोरेट जगत के तमाम दिग्गज इस समिट में शामिल हुये। उद्घाटन से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने देहरादून में रोड शो किया। इसके बाद उन्होंने आयोजन स्थल पर एक प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और पारंपरिक गीत का आनंद भी लिया। उत्तराखंड में दो दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन में देश-दुनियां के पांच हजार से अधिक निवेशक और प्रतिनिधि शामिल होंगे।हम उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने हेतु संकल्पित - सीएम धामीकार्यक्रम को संबोधित करते हुये सीएम धामी ने कहा आज केवल भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व माननीय प्रधानमंत्री मोदी की सोच , उनकी रणनीति और उनके विचारों का अनुसरण करते हैं। हम भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिये संकल्पित हैं। पीएम मोदी भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिये जिस प्रकार कठिन परिश्रम कर रहे हैं , उससे केवल मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति को ही नहीं बल्कि सभी भारतवासियों के मन में और अधिक परिश्रम करने के लिये आशा और विश्वास का बीज भी रोपित होता है।सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुये वाइब्रेंट गुजरात शुरू किया गया जो सिर्फ भारत के अंदर ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का मॉडल बन गया। उसी से प्रेरणा लेकर हमने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया है। डेस्टिनेशन उत्तराखंड का मुख्य उद्देश्य इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन बनाते हुये राज्य का चतुर्दिक विकास और अधिकाधिक रोजगार उपलब्ध कराना है। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जिस प्रकार गुजरात में महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर एंड एग्जीबिशन सेंटर बनाया गया है , उसी के तर्ज पर हम शीघ्र ही उत्तराखंड में एक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण करेंगे।