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: नवरात्र पर्व आसुरी प्रवृत्तियो से विजय प्राप्ति का पर्व -- झम्मन शास्त्री

Mukesh Kumar Bharti

Tue, Oct 12, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट रायपुर - डोगरगढ़ स्थित माँ भगवती बम्लेश्वरी देवी के पावन प्रांगण में शारदीय नवरात्र पर्व के पुण्यमय अवसर पर माँ वेद जननी गायत्री देवी आराधना एवं सहस्त्रार्चन समारोह आचार्य श्री पंडित झम्मन शास्त्री पीठपरिषद् राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेशाध्यक्ष छत्तीसगढ़ के पावन सानिध्य में वैदिक विद्वानों के द्वारा मंगलमय वातावरण में सम्पन्न हो रहा है l परम सिद्धि प्रदायक नवरात्र पर्व एवं देवी उपासना के रस रहस्यों के विषय में प्रकाश डालते हुये आचार्य झम्मन शास्त्री ने सत्संग संगोष्ठी में बताया कि जगत जननी की कृपा होने पर जगतपिता परमात्मा की सहजता पूर्वक प्रेमपूर्ण कृपा सुलभ हो जाता है l माँ भगवती अनन्त रूपों में प्रगट होकर भक्तों के कल्याण हेतु लीला करती है , आसुरी वृत्तियों का दमन कर संत , भक्त और सज्जनों की रक्षा करते हुये सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु पराक्रम पूर्वक युद्ध के मैदान में शुंभ , निशुंभ , मधुकैटभ , महिषासुर , चण्ड , मुण्ड जैसे महादानवों का संहार कर प्रेरणा देती है कि समाज में आध्यात्मिक दैवी शक्ति प्राप्त कर अन्याय , अधर्म , अनीति ,अधर्माचरण के विरोध मे सत्य ,धर्म , न्याय , नीति की स्थापना के लिये व्यूहरचना युक्त संघर्ष करना चाहिये , इसलिये नवरात्र पर्व में सात्विक उपासना के द्वारा शक्ति संचय करने की परम्परा है। आज वर्तमान में तमोगुण , तामसी प्रवृत्तियां बढ रही है ,जो असुरों के समान है जिससे अनैतिकता , अपराध , चोरी , हिंसा , व्याभिचार ,दुराचरण का ताण्डव नृत्य हो रहा है उसे रोकने हेतु प्राचीनकाल से ही माँ दुर्गा , महाकाली , महालक्ष्मी , महासरस्वती , दस महाविद्या , चौंसठ योगनी , बावन शक्ति पीठ, षोडश मातृका अन्नपूर्णा, शीतला,भद्रकाली, चंडिकादेवी आदि की उपासना कर दैवी सम्पदा प्राप्त करने का विधान है। ध्यान आराधना , पूजा, यज्ञ ,व्रत ,तप , दान तभी सफल होता है जब हम शास्त्रों मे बताये विधि नियमों का पालन करते हुये सात्विक भाव से समर्पण की भावना,श्रद्धा ,आस्था पूर्वक सर्वहित की भावना से प्रार्थना समर्पित करें l भक्ति , पूजा ,यज्ञ ,साधना प्रदर्शन का विषय ना बने ,अन्तः करण की पवित्रता के लिये भगवत प्राप्ति के लिये आत्मकल्याण , जन कल्याण की भावना से हिन्दुओं के प्रशस्त मान बिन्दुओं की रक्षा के लिये मठ मंदिरों की सुरक्षा , गौसंरक्षण , भारत की अखण्डता , समाज में सुख शांति , समृद्धि , एकता के लिये आराधना करने पर सम्पूर्ण अभीष्ट फल की प्राप्ति संभव है। आचार्य श्री ने बताया कि पूज्यपाद गुरुदेव भगवान शंकराचार्य महाभाग द्वारा घोषित भारत ,नेपाल ,भूटान , शीघ्र शुभ संकल्प की पूर्ति के लिये हिन्दू राष्ट्र घोषित हो। नित्य माँ के चरणों में प्रार्थना करते हुये समाज में अपने अपने क्षेत्र में साप्ताहिक सेवा प्रकल्प संचालित कर युवा पीढ़ी को आदित्य वाहिनी के सक्रिय सदस्यता अभियान से जोड़ने का कार्यकर पुण्य लाभ प्राप्त करें । नवरात्र पर्व मे मठ मंदिरो को जो हिन्दुओं के गढ़ है किला है उसे शिक्षा , रक्षा , सेवा , संस्कृति , धर्म और मोक्ष का केंद्र बनाकर वहां सामुहिक भजन , संकीर्तन , हनुमान चालीसा का पाठ , स्वाध्याय , साधना , सत्संग , संगोष्ठी के द्वारा भारतीय संस्कृति , सनातन परम्परा का प्रचार प्रसार करते हुये समाज को सुसंस्कृत , सुबुद्ध तथा स्वावलंबी बनाने का अभियान चलावें यही सर्वोत्तम नवरात्र पर्व की साधना की सफलता होगी।

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