: पत्रकार बघेल पर हमलावर राशन माफिया को गिरफ्तार करने की मांग की माकपा ने
Mukesh Kumar Bharti
Sat, Oct 9, 2021
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मैनपुर, गरियाबंद के पत्रकार रविशंकर बघेल पर हमला करने वाले राशन माफिया को गिरफ्तार करने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि हमलावरों को राजनैतिक-प्रशासनिक संरक्षण दिया जा रहा है।
आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने पत्रकार बघेल पर जानलेवा हमले की तीखी निंदा की है। वेयर हाउस से राशन दुकानों के बीच परिवहन के दौरान ट्रकों से हो रही राशन चोरी की रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद उन पर यह हमला किया गया है। राशन की इस तरह और इतने बड़े पैमाने पर चोरी वेयर हाउस अधिकारियों की मिलीभगत और उच्च राजनैतिक संरक्षण के बिना नहीं हो सकती। इस रिपोर्ट और इस हमले से नागरिकों को खाद्य सुरक्षा देने के सरकार के दावे की पोल खुल गई है।
माकपा नेता ने कहा है कि पत्रकार को पीटते हुए थाने ले जाने और एस पी के निर्देश के बाद ही उनका चिकित्सीय परीक्षण कराने से स्पष्ट है कि हमलावर राशन माफिया की स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ किस तरह की मिलीभगत है। हमले के चार दिनों बाद भी नामजद हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से इसी बात की पुष्टि होती है।
उन्होंने कहा है कि जन पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों पर हमले और उन पर फर्जी मुकदमे थोपने की घटनाएं प्रदेश में लगातार बढ़ रही है, जो चिंताजनक है। ऐसे में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के मामले में कांग्रेस सरकार का चुप्पी साधे रखना उसकी चुनावी वादाखिलाफी का ही सबूत है। माकपा ने 'नवभारत' प्रबंधन से भी अपील की है कि अपने इस ग्रामीण पत्रकार के हित मे हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए सरकार को बाध्य करें।
आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने पत्रकार बघेल पर जानलेवा हमले की तीखी निंदा की है। वेयर हाउस से राशन दुकानों के बीच परिवहन के दौरान ट्रकों से हो रही राशन चोरी की रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद उन पर यह हमला किया गया है। राशन की इस तरह और इतने बड़े पैमाने पर चोरी वेयर हाउस अधिकारियों की मिलीभगत और उच्च राजनैतिक संरक्षण के बिना नहीं हो सकती। इस रिपोर्ट और इस हमले से नागरिकों को खाद्य सुरक्षा देने के सरकार के दावे की पोल खुल गई है।
माकपा नेता ने कहा है कि पत्रकार को पीटते हुए थाने ले जाने और एस पी के निर्देश के बाद ही उनका चिकित्सीय परीक्षण कराने से स्पष्ट है कि हमलावर राशन माफिया की स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ किस तरह की मिलीभगत है। हमले के चार दिनों बाद भी नामजद हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से इसी बात की पुष्टि होती है।
उन्होंने कहा है कि जन पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों पर हमले और उन पर फर्जी मुकदमे थोपने की घटनाएं प्रदेश में लगातार बढ़ रही है, जो चिंताजनक है। ऐसे में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के मामले में कांग्रेस सरकार का चुप्पी साधे रखना उसकी चुनावी वादाखिलाफी का ही सबूत है। माकपा ने 'नवभारत' प्रबंधन से भी अपील की है कि अपने इस ग्रामीण पत्रकार के हित मे हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए सरकार को बाध्य करें।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन