: आदि शंकराचार्य महाभाग के दर्शन आज भी प्रासंगिक एवं सर्वोत्कृष्ट - डा० तोयनिधि
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - आदि शंकराचार्यजी ने अल्प अवधि में ही सनातन संस्कृति एवं वैदिक सार्वभौम सिद्धांत की स्थापना के लिये जो महान कार्य किया वह अत्यंत आश्चर्यजनक तथा श्लाघनीय है। आचार्यचरण ने मठाम्नायमहानुशासनम् की रचना कर अपने द्वारा प्रतिष्ठित चतुष्पीठ पर आसीन आचार्यों की महत्ता, उपयोगिता, कार्यक्षेत्र सीमा, सीमा का उल्लेख किया है। उनके शिष्य प्रशिष्यों के द्वारा आज भी आचार्य के सिद्धांतो का ही प्रतिपादन किया जाता है। चारों दिशाओं में शंकराचार्य की सुदीर्घ परंपरा अभी अविच्छिन्न रूप से चलते आने के बावजूद भी तथाकथित नामधारी शंकराचार्य के रूप में शासन प्रशासन के प्रश्रय से हमारी आचार्य परंपरा को कलंकित करने का षड्यंत्र हमारे ही इस भारतवर्ष में किया जा रहा है , जो अत्यंत दुखद है।
उक्त उद्गार श्रीसुदर्शन संस्थानम् , पुरी शंकराचार्य आश्रम रावाभांठा में आयोजित आदि शंकराचार्य जयंती के अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य डॉ. तोयनिधी वैष्णव ने व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि चौबीस वर्ष की आयु से एकतीस वर्ष की आयु तक भगवद्पाद ने बौद्ध, कापालिकादि 89 मतों का निराकरण कर धर्म नियन्त्रित, पक्षपात विहीन, शोषण विनिर्मुक्त वैदिक शासनतंत्र की भारत में स्थापना की और भारत को अखण्ड भारत के रूप में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने अनेक देव स्थानों की प्रतिष्ठा कर सनातन मान बिन्दुओं का संरक्षण किया। उन्होंने योगियों सन्यासियों और साधको के निवास और साधना के अनुरूप वन, पर्वत, सागर, तीर्थ, आश्रम, गिरी, पुरी, सरस्वती, और भारती इन दस भागो में अपने सन्यासी शिष्यों को शिक्षण संस्थानों के अनुसार विभक्त किया। इसी क्रम में इनके द्वारा प्रकाश, स्वरुप, आनंद और चैतन्य नामक चतुर्विध ब्रम्हचारी निर्धारित किया गया जो गूढ़ अर्थ को प्रकट करते है।उन्होंने देव विग्रह, उपासनापरक वेदवाणी को सार्थक सिद्ध किया, जीव ईश्वर को औपाधिक भेद सिद्ध कर अभेद अद्वैत सिद्धांत का प्रतिपादन किया , आत्मा को सच्चिदानंदस्वरुपब्रम्हरूपता बताकर मुक्ति मार्ग प्रशस्त किया। अंत में आचार्य वैष्णव ने कहा कि पुरीपीठ के पूर्वाचार्य एवं वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के सिद्धांतो, विचारो एवं ग्रंथो में पूर्णतः शाङ्कर सिद्धान्त अनुस्यूत है। हमारे लिये यह अत्यंत गौरव का विषय हैं की पुरीपीठ के आचार्यचरण का मार्गदर्शन भारतवर्ष के निवासियों को सुलभ है। उनके द्वारा हिन्दूराष्ट्र का उद्घोष सर्वहित प्रद शासनतंत्र की स्थापना में सहायक होगा । जयंती के इस पावन अवसर पर हम उनके पदचिन्हो पर चलें यही जयंती मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी। बताते चलें आज आदि शंकराचार्यजी की जयंती पर शंकराचार्य आश्रम में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सर्वप्रथम आचार्य सुमन महाराज ने यजमानों को पार्थिव शिवलिंग का रूद्राभिषेक कराया। इसके पश्चात आदि शंकराचार्यजी के चित्र पर षोडशोपचार पूजन और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। ब्याख्यान कार्यक्रम को पूर्व कमिश्नर जी०एस०मिश्रा और आनन्दवाहिनी श्रीमति सीमा तिवारी ने भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन उत्तम शर्मा और आभार व्यक्त टीकाराम साहू ने किया। इस कार्यक्रम में संदीप पाण्डेय , जयप्रकाश द्विवेदी , सुनीता शर्मा, रविशंकर पांडेय , हीना पांडेय , रमेश शुक्ला , उषा शुक्ला , पार्षद संतोष साहू बिरगांव , परसराम साहू , हुमेश साहू सहित पीठ परिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी के पदाधिकारी एवं सदस्य विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी कड़ी में आज प्रदेश के राजनांदगांव , दुर्ग , बिलासपुर , जांजगीर चाम्पा , कोरबा , कवर्धा इत्यादि जिला इकाई में भी आदि शंकराचार्यजी की जयंती कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। उक्ताशय की जानकारी श्रीसुदर्शन संस्थानम् , पुरी शंकराचार्य आश्रम / मीडिया प्रभारी अरविन्द तिवारी ने दी।
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