: बालको 'सुरक्षा संकल्प' के 3 वर्ष पूरे, सुरक्षा संस्कृति को मिली मजबूती
Tue, Dec 3, 2024
*बालकोनगर, 2 दिसंबर 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अपनी मासिक सुरक्षा पहल 'सुरक्षा संकल्प' के तीन साल पूरा कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस कार्यक्रम में कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों दोनों की भागीदारी शामिल है, जिसने संयंत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने और सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिणामस्वरूप संयंत्र परिसर के भीतर सुरक्षा मानकों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
दिसंबर 2021 से आरंभ सुरक्षा संकल्प कार्यक्रम का उद्देश्य कोचिंग, कॉउंसिलिंग, मॉनिटिरिंग और त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करने में निहित सुरक्षा संस्कृति का पोषण करना है। प्रत्येक महीने के पहले दिन आयोजित होने वाले व्यापक प्रशिक्षण सत्रों ने कर्मचारियों को कार्यस्थल पर रचनात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करते हुए सुरक्षा-प्रथम व्यवहार को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लगातार तीसरने वर्ष में आयोजित 36वें प्रशिक्षण में 1500 से अधिक कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों ने हिस्सा लिया। सभी इस पहल के माध्यम से सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में तीन वर्षों के समर्पित प्रयासों का जश्न मना रहे थे।
सुरक्षा संकल्प कार्यक्रम अपने संचालन के सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई विभिन्न प्रकार की थीम को शामिल करता है। कंपनी सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में शिक्षित करने के साथ विभिन्न टीमों के भीतर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों को पुरस्कृत कर उन्हें प्रोत्साहित किया है। पुरस्कृत व्यक्ति अपने विभागों के भीतर सुरक्षा जागरूकता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई है और दूसरों को कार्यस्थल में सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया है।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि कंपनी में हम जीरो हार्म के अपने दृष्टिकोण का पालन पूरी प्रतिबद्धता के साथ करते हैं। सुरक्षा संकल्प’ एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक रहा है जो हमारे कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों की भलाई को प्राथमिकता देने के साथ एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करता है। हम अपने सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं। इस पहल की निरंतरता और लगातार सुदृढ़ीकरण से सुरक्षा मानसिकता को विकसित करने तथा सुरक्षा व्यवहार में परिवर्तन लाने में सहायक साबित हुआ।मजबूत सुरक्षा संस्कृति का निर्माण करने के लिए कंपनी कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया है। जैसे- ऑगमेंटेड एंड वर्चुअल रिएलिटी आधारित प्रशिक्षण केंद्र, वीडियो एनालिटिक्स, सस्टेनेबेलिटी मोबाइल ऐप और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम जैसे डिजिटलीकरण के माध्यम से कर्मचारियों को सुरक्षा संस्कृति से जोड़ा गया है। सुरक्षा क्षेत्र में बालको अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर की मदद से यातायात एवं सड़क सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सहित विभिन्न सुरक्षा कार्यों में बेहतर निर्णय लेने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस और डेटा अंतर्दृष्टि का लाभ उठा रहा है। रियल टाइम डेटा की निगरानी, कोयला यार्ड में हॉट स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम जैसी परियोजनाओं सहित एंड-टू-एंड डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थर्मल निरीक्षण का उपयोग करना शामिल है। शॉप फ्लोर में भारी वाहनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए एलईडी लोगो प्रोजेक्टर का प्रयोग हो रहा है। टी-पल्स निगरानी प्रणाली जो एआई मॉडल का उपयोग करके कैमरा नेटवर्क के माध्यम से रियल टाईम में संयंत्र के अंदर चल रहे कार्यों की निगरानी करता है। सड़क सुरक्षा को बढ़ाने के लिए आंतरिक वाहन संचालन में अत्याधुनिक एआई तकनीक एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएमएस) को लागू किया गया है।
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: बालको वॉलीबॉल प्रतियोगिता अंबेडकर स्टेडियम में धूमधाम से संपन्न
Tue, Dec 3, 2024
*बालकोनगर, 23 नवम्बर, 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अंतरविभागीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन धूमधाम से संपन्न किया। प्रतियोगिता के महिला वर्ग में प्रोजेक्ट फिमेल्स टीम ने सिक्योरिटी स्पाइकर्स टीम को हराकर फाइनल विजेता टीम का खिताब अपने नाम किया। पुरुष वर्ग में सिक्योरिटी ए ने रोचक मुकाबले में पॉटरूम स्टार्स को मात देकर फाइनल विजेता ट्रॉफी अपने नाम किया। पॉवर राकर्स ने कास्ट बस्टर्स टीम को मात देकर प्रतियोगिता में अपना तीसरा स्थान सुनिश्चित किया। इस प्रतियोगिता में कुल 36 पुरुष और 6 महिला टीमों ने हिस्सा लिया। लगभग 15 दिनों तक चले वॉलीबॉल प्रतियोगिता में कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेका कामगारों, विभिन्न इकाइयों में कार्यरत महिलाएं तथा बालको अस्पताल की महिला एवं पुरुष टीमों ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से खेल प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया।
सभी विजेता टीम को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ट्रॉफी एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुरुष वर्ग में बेस्ट स्पाइकर्स सूरज, बेस्ट स्मैशर बिबेकानंद मोहराना (बापूनी) तथा बेस्ट डिफेंडर विजय मिश्रा को चुना गया। वहीं महिला वर्ग में बेस्ट स्पाइकर्स रुपांजली, बेस्ट स्मैशर सुमन चंद्रवंशी तथा बेस्ट डिफेंडर की खिताब पुष्पांजली चौहान को मिला।
प्रतियोगिता में सभी टीमों को खेल की सराहना करते हुए बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने विजेता टीमों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीम भावना, एकजुटता और पारस्परिक सौहार्द्र बढ़ाने के उद्देश्य से खेल स्पर्धाओं का आयोजन महत्वपूर्ण है। कंपनी अपने कर्मचारियों एवं व्यावसायिक भागीदारों के स्वास्थ्य के लिए नियमित विभिन्न खेलों का आयोजन किया है।वॉलीबॉल प्रतियोगिता में बालको के अधिकारी, कर्मचारी, व्यावसायिक भागीदारों और टाउनशिप सहित कुल महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों को मिलाकर 400 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। टीम भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रतिस्पर्धा मैच के अलावा सद्भावना मैच जिसमें कमेटी बनाम रेफरी टीम तथा मैनेजमेंट बनाम ट्रेड यूनियन के बीच खेला गया। टीमों ने खेल भावना परिचय देते हुए प्रतिस्पर्धा की जिससे संगठन के भीतर सौहार्द और मजबूत हुआ।
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: बालको में अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस धूमधाम से मनाया गया
Tue, Dec 3, 2024
पुरुष को अकसर ताकत एवं हर परिस्थितियों में डटे रहने का प्रतीक माना जाता हैं हालांकि उनकी कहानियाँ इन पारंपरिक धारणाओं से कहीं ज़्यादा व्यापक हैं। घर के भरण-पोषण के साथ-साथ वे देखभाल, मार्गदर्शक, कला से जुड़ाव और खुद को बेहतर करने वाले भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर बालको अपने संयंत्र से जुड़े सभी पुरुषों की विविध पहचान का सम्मान करता है। ऐसे व्यक्ति जिनकी करुणा, रचनात्मकता और समर्पण न केवल रूढ़ियों को तोड़ते हैं बल्कि एक संतुलित और न्यायसंगत दुनिया बनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।बालको अस्पताल के मरीज अटेंडर विकास महंत देखभाल को अपने उद्देश्य की तरह देखते हैं। उन्होंने कहा कि मरीज की सेवा करने में मुझे खुशी मिलती है। हर दिन लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहता हूँ। मरीजों की मदद करना, ख्याल रखना और उनकी मुस्कान देखना मुझे याद दिलाता है कि देखभाल मरीज के उपचार को आसान बना देता है। उन्होंने कहा कि मेरा काम, मुझे जीवन में आगे बढ़ने में मदद तथा परोपकारी बनाता है। इसी तरह प्लांट कैंटीन के सुपरवाईजर आर. प्रदीप पांडिकर ने कहा कि आतिथ्य सिर्फ खाना परोसना या रहने की व्यवस्था करना नहीं वरन आपसी जुड़ाव एवं मानव सेवा के बारे में है। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि बालको में आने वाले आगंतुकों को एक सहज अनुभव मिले। उनके चेहरों पर मुस्कान देखना मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।बालको में ऑपरेशन एडं मेंटेनेंस असिस्टेंट मैनेजर अंकुर सरकार अपने पालतू जानवरों के साथ बेहद जुड़ाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता ने मुझे सभी जीवों का सम्मान करना सिखाया। मेरी मछलियाँ, पक्षी और कुत्ता काम के लंबे दिन के बाद मुझे बिना शर्त प्यार देते हैं। वे मुझे मधुर संबंधों की याद दिलाते हैं। बालको में सीनियर प्रोसेस टेक्नीशियन हरीश देवांगन के लिए कला सच्चे साथी जैसा है। वह याद करते हैं कि बचपन से ही उन्हें पेंटिंग में सुकून मिला है। मेरी रचनाएँ मुझसे बात करती हैं जो मुझे जीवन में आगे बढ़ने एवं धैर्य रखना सिखाती हैं। इस शौक ने मुझे पहचान भी दिलाई है जिसके लिए मैं बालको का बहुत आभारी हूँ।बालको जीईटी हॉस्टल की रसोई में चीफ शेफ जीत सिंह नेगी अपने हुनर पर गर्व करते हुए बताते हैं कि जैसे-जैसे मेरे मसालों की खुशबू फैलती है, वैसे-वैसे मेरी खुशी भी फैलती है। रोजाना 200 से अधिक लोगों को घर जैसा खाना परोसना, भागदौड़ के बावजूद भी खुशी मिलती है। बालको पॉटलाइन में कार्यरत हीरामणि वैष्णव ने अपनी कविता के बारे में बताते हुए कहते है कि मेरी कुछ कविताएं मेरे काम से प्रेरित हैं। शुरू में कविता सिर्फ मेरे लिए थी लेकिन मेरे साथियों से मिले प्रोत्साहन ने इसे कुछ ऐसा बना दिया जिसे मैं अब दुनिया के साथ साझा करता हूं।अपने कार्यबल में बहुमुखी पुरुषों का जश्न मनाते हुए बालको ने अपने संयंत्र में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया। सभी कार्य क्षेत्रो के पुरुषों को मान्यता दी गई और उनकी सराहना की गई। इस उत्सव ने पुरुषों द्वारा निभाई जाने वाली विविध भूमिकाओं को उजागर किया, चाहे वे काम पर हों या उसके अलावा रूढ़ियों को तोड़ने तथा खुद को परिभाषित करते हुए।बालको एक समावेशी कार्यस्थल बनाने के लिए अपने समर्पण की पुष्टि करता है, जहां हर इंसान बिना किसी लैंगिग भेदभाव के समग्र रूप से विकसित हो सकता है। पुरुषों की बहुमुखी पहचान को स्वीकार और सम्मान देकर बालको आपसी सम्मान, संतुलन और समानता पर आधारित संस्कृति को बढ़ावा देता है।
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