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: बालिका शिक्षा से राष्ट्र की प्रगति का मार्ग होता है प्रशस्त - महामहिम राष्ट्रपति

Mukesh Kumar Bharti

Sun, Aug 6, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट चेन्नई - बालिका शिक्षा में निवेश से राष्‍ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्‍त होता है क्‍योंकि वे अर्थव्‍यवस्‍था और समाज में समग्र रूप से एक सकारात्‍मक और महत्‍वपूर्ण योगदान करती हैं। हम लड़कियों की शिक्षा में निवेश करके अपने देश की प्रगति में निवेश कर रहे हैं। शिक्षित महिलायें अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दे सकती हैं , विभिन्न क्षेत्रों का नेतृत्व कर सकती हैं और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज मद्रास विश्वविद्यालय के 165वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुये कही। इस दीक्षांत समारोह में उन्‍होंने शिक्षा के माध्‍यम से स्‍त्री-पुरूष समानता और बालिका सशक्तिकरण को बढावा देने में मद्रास विश्‍वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा इस समय लगभग 1.85 लाख छात्र विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ रहे हैं , जिनमें पचास प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं। मद्रास विश्वविद्यालय लैंगिक समानता का एक ज्वलंत उदाहरण है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि 1857 में स्थापित इस विश्वविद्यालय को भारत के सबसे पुराने आधुनिक विश्वविद्यालयों में से एक होने का गौरव प्राप्त है। आज के दीक्षांत समारोह में 105 छात्रों को स्वर्ण पदक दिया गया , जिसमें से 70 प्रतिशत छात्रायें है , जो हमें खुशी प्रदान कर रही है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि मद्रास विश्‍वविद्यालय देश के सबसे पुराने विश्‍वविद्यालयों में से एक है और इसने ज्ञान के प्रसार , समाजिक परिर्वतन और प्रगति में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुये कहा कि मद्रास विश्वविद्यालय सीखने का केंद्र रहा है , जिसने अनगिनत विद्वानों, नेताओं और दूरदर्शी लोगों को जन्म दिया है। विगत 165 वर्षों से अधिक की अपनी यात्रा के दौरान मद्रास विश्वविद्यालय ने शिक्षाविदों के उच्च मानकों का पालन किया है , एक ऐसा वातावरण प्रदान किया है जो बौद्धिक जिज्ञासा और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देता है। मद्रास विश्वविद्यालय का एक समृद्ध इतिहास और गौरवशाली विरासत है। यह वास्तव में बहुत गर्व की बात है कि भारत के कई पूर्व राष्ट्रपति और जानी मानी हस्तियां इस विश्वविद्यालय के छात्र थे और उन्हीं गलियारों में चले थे जिनसे आप आज गुजरते हैं। इनमें पूर्व राष्‍ट्रपति ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम , वी.वी. गिरि , के.आर. नारायणन , राजगोपालाचारी और सर सी.वी. रमण शामिल है। राष्‍ट्रपति ने सुब्रमण्‍य भारती का जिक्र करते हुये पारम्‍परिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान दोनों के समावेश के महत्‍व की चर्चा की। उन्होंने कहा देश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और देश के पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी , स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं प्रतिष्ठित महिलायें सरोजिनी नायडू और दुर्गाबाई देशमुख , नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी० वी० रमन और एस० चंद्रशेखर , भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम पतंजलि शास्त्री और न्यायमूर्ति के सुब्बाराव भी कभी मद्रास विश्वविद्यालय के छात्र थे। उन्होंने कहा मद्रास विश्वविद्यालय को देश और दुनियां के सामने आने वाली समस्याओं का सीखने-आधारित समाधान खोजने में सबसे आगे रहना चाहिये। मद्रास विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उत्कृष्टता के वैश्विक केंद्र के रूप में इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विश्वविद्यालय ने उनकी सफलता में कई तरह से योगदान दिया है , इसलिये उन्हें अपने मातृ संस्थान को कुछ वापस देने का प्रयास करना चाहिये। मैं सभी विद्यार्थियों से अपील करती हूं कि कभी भी किसी चिंता को अपने ऊपर हावी ना होने दें। हमेशा कोई ना कोई अवसर या अवसर होता है जो कुछ समय तक दिखाई नहीं देता। अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखें और आगे बढ़ते रहें। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को बधाई देते हुये कहा कि यह क्षेत्र सभ्यता और संस्कृति का उद्गम स्थल रहा है। संगम साहित्य की समृद्ध परंपरा भारत की अनमोल विरासत है। तिरुक्कुरल में संरक्षित महान ज्ञान सदियों से हम सभी का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि भक्ति काव्य की महान परंपरा तमिलनाडु से शुरू हुई और इसे भ्रमण करने वाले संत देश के उत्तरी हिस्से में लेकर गये। तमिलनाडु के मंदिरों की वास्तुकला और उनकी मूर्तियां मानवीय उत्कृष्टता को दर्शाती है। इस दीक्षांत समारोह में तमिलनाडु के राज्‍यपाल आर.एम. रवि, मुख्‍यमंत्री एम.के. स्‍टालिन और मद्रास विश्‍वविद्यालय के कुलपति एस. गौरी भी उपस्थित थे। इसके पहले मद्रास विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिये चेन्नई पहुंचने पर राजभवन में महामहिम राष्ट्रपति को ‘गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया।

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