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: खनन प्रभावित गांवों में जल समस्या, कल एसईसीएल का घेराव करेंगे ग्रामीण : माकपा

Mukesh Kumar Bharti

Wed, Oct 6, 2021
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में कल बांकीमोंगरा क्षेत्र के खनन प्रभावित पुरैना, बांकी बस्ती, मड़वाढोढा और आसपास के गांवों के ग्रामीण निस्तारी, सिंचाई और पीने के लिए जल आपूर्ति जारी रखने की मांग करते हुए एसईसीएल के सुराकछार खदान का घेराव करेंगे। इस संबंध में आंदोलन की रूपरेखा बनाने के लिए आज हुई बैठक में प्रमुख रूप से मोहपाल सिंह, अजित सिंह, शिवरतन सिंह, हीरा सिंह, प्रदीप कुमार, आनंद मोहन, सुरित राम, गुलाब बाई, रामायण बाई, बिमला, पूर्णिमा, राम यादव समेत बडी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। मोंगरा वार्ड की माकपा पार्षद राजकुमारी कंवर ने कहा है कि बांकी खदान 1962 से संचालित है। कोयला खनन के कारण यहां जल स्तर काफी गिर चुका है और अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत एसईसीएल ही पीने, निस्तारी और सिंचाई के लिए पानी का प्रबंध करते आया है। लेकिन बांकी खदान बंद होने के बाद अब अचानक एसईसीएल द्वारा इन गांवों में जल आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे यहां जल संकट गहरा गया है। हालांकि माकपा के दबाव में इन प्रभावित गांवों में तीन टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। माकपा पार्षद ने इन गांवों में जल संकट के स्थायी निराकरण की मांग की है। माकपा जिला सचिव प्रशांत झा और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने बताया कि जल आपूर्ति रोक देना इन खनन प्रभावित गांवों व यहां के रहवासियों के साथ न केवल अमानवीय व्यवहार है, बल्कि उनके मानवाधिकारों का हनन भी है। इस व्यवहार के कारण न केवल पेयजल और निस्तारी का संकट गहरा गया है, बल्कि खदान से बाहर निकलने वाले पानी के भरोसे खेती एवं सब्जी बड़ी करने वाले किसानों की पर भी बुरा असर पड़ रहा है। माकपा नेताओं ने कुछ दिनों पहले ही एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन देकर मांग की थी कि पुरैना और बांकी बस्ती में पाईप लाईन के माध्यम से पेयजल सप्लाई चालू रखा जाए, खदान से बाहर निकलने वाले पानी को बोर होल पम्प लगाकर किसानों को खेती की सिंचाई के लिए तत्काल उपलब्ध कराया जाए तथा आसपास के तालाबों को भरने की व्यवस्था की जाए। आंदोलन की रूपरेखा बनाने के लिए आज हुई बैठक में प्रमुख रूप से मोहपाल सिंह, अजित सिंह, शिवरतन सिंह, हीरा सिंह, प्रदीप कुमार, आनंद मोहन, सुरित राम, गुलाब बाई, रामायण बाई, बिमला, पूर्णिमा, राम यादव समेत बडी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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