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सुचना

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: फसलों में कीट व्याधि के प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए दी सलाह,धान की फसलों में नाइट्रोजन और पोटाश की आवश्यक मात्रा का छिड़काव करने की सलाह

Mukesh Kumar Bharti

Thu, Sep 23, 2021
कोरबा 22 सितंबर 2021/बारिश के कारण जिले में तापमान बढ़ने और आवश्यकता से अधिक आर्द्रता के कारण कृषि वैज्ञानिकों ने फसलों में कीट व्याधियों के प्रकोप की आशंका जताई है। कृषि वैज्ञानिकों ने धान, दलहन- तिलहन, फलो और सब्जियों को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए विशेष सलाह जारी की है। धान की फसलों के 60 से 75 दिन की अवधि पूर्ण होने पर नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा का छिड़काव करने की सलाह कृषि विशेषज्ञों ने दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि धान के फसलों में फूल आने पर पोटाश की 25 प्रतिशत मात्रा का छिड़काव करना चाहिए इससे धान के दानों की संख्या और वजन में वृद्धि होती है। खेतों में लगी धान की फसल में तनाछेदक कीटों के लगने पर तना छेदक के अंडा समूह को इकठ्ठा कर नष्ट कर देना चाहिए और धान की सूखी पत्तियों को खींचकर निकाल देना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि तना छेदक की तितली एक मोथ प्रति वर्ग मीटर में होने पर फिपरोनिल 5 एस सी प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए। फसलों को पत्ती मोडक या चितरी रोग से बचाने के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर फिपरोनिल एस. सी. की 800 एम. एल. मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गयी है। धान की फसलों में रोग के प्रारंभिक अवस्था मे पत्तियों में हल्के बैगनी रंग कर धब्बे पड़ते है। इसके नियंत्रण के लिए किसानों को टेबुकोनाजोल की 750 एम. एल. मात्रा को 500 लीटर पानी मे घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने धान की फसल की लगातार निगरानी करने की सलाह किसानों को दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस समय किसानों को फल और सब्जी के खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था कर लेनी चाहिये। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फलदार वृक्षों, पिछले वर्ष रोपित आम के पौधों तथा मुनगे की फसलों की कटाई- छटाई करने की भी सलाह दी है। इस समय पपीते की फसलों में फूल झड़ने की भी समस्या आती है इसके नियंत्रण के लिये किसानों को 20 पी.पी.एम. की दर से नेफ्थलीन एसिटिक एसिड का छिड़काव करने की सलाह दी गयी है। कृषि वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को धान की फसल में तना छेदक, भूरा माहो, गंगई जैसे दूसरे कीटों के लिए भी अनुकुल बताया है। उन्होंने फसलों की सतत निगरानी करने और कीट नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में प्रकाश प्रपंच या समन्वित कीट नियंत्रण विधियों का प्रयोग करने की सलाह किसानों को दी है। कीटों का प्रकोप बढ़ने पर क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर दवाईयां छिड़काव करने के लिए भी कहा है। जिले के किसान तकनीकी मार्गदर्शन और सलाह के लिये कृषि वैज्ञानिकों से चर्चा कर सकते हैं। जिले के किसान जरूरी सलाह एवं मार्गदर्शन के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एस.के. उपाध्याय मो.न. 94242-27313, कीट वैज्ञानिक महिपाल कुर्रे मो.न.- 94060-01348, मृदा वैज्ञानिक दीपक तंवर मो.न. 90980-00593, पर सम्पर्क कर सकते हैं।

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