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: क्या जिले के बड़े भाजपा नेताओं के फैलाये गए भ्रम से हारे हितानंद सभापति का चुनाव? सुलग रहे कई सवाल

Mukesh Kumar Bharti

Wed, Mar 12, 2025
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नगर पालिका निगम कोरबा के सभापति चुनाव में बागी प्रत्याशी नूतन सिंह ठाकुर को विजय प्राप्त हुई है, तो वही इस विषय को लेकर उठ रहे अनेक सवालों के मध्य भाजपा ने आज फैसला लेते हुए नगर निगम कोरबा के बागी सभापति को 6 वर्ष के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया है, वहीं बागी सभापति नूतन सिंह दावा कर रहे है कि वे पार्षदों की पसंद हैं पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदी नूतन भाजपा पार्षदों की पहली पसंद थे तो वे भाजपा के पदाधिकारीयों को अपने समर्थन में खड़े कर लेने में क्यों नाकाम साबित हुए? आखिर क्यों उन्हें बागी होना पड़ा,? जबकि भाजपा ने ही उन पर अपना भरोसा जताकर उन्हें टिकट प्रदान किया था और उन्हें पार्षद पद पर विजय भी प्राप्त हुई थी। अब सवाल यह भी उठना है कि क्या भाजपा के सभापति प्रत्याशी घोषणा की बैठक भाजपा कार्यालय में सुबह 11 बजे प्रारभ हुई थी किन्तु जिले के एक बड़े नेता के कार्यालय में सुबह सुबह ही कुछ पार्षदों के साथ मिलकर पार्टी के विरोध में सभापति बनाने की पटकथा अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा के पहले ही लिखी जा चुकी थी? क्या भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के नामांकन भरने के पूर्व ही बागी नूतन ठाकुर ने सभापति का नामंकन भर दिया था? यदि पार्षदों में हितानंद का विरोध था तो घोषणा के पूर्व ही नूतन ने नामंकन कैसे भरा ये सवाल सुलग रहा है ?? सूत्रों के हवाले से यदि बात की जाए तो संभवत: बैठक में भाजपा के सभापति प्रत्याशी घोषित होने पर जिले के बड़े नेताओं द्वारा पोषित 4 - 5 पार्षदों ने अनुसूचति जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग से सभापति घोषित करने की मांग करने लगे साथ ही नदी पार तथा महिला सभापति की मांग करने लगे क्या यह क्षेत्रवाद, जातिवाद और लिंगवाद की चिंगारी में घी डालने जैसा नहीं प्रतीत हो रहा? वैसे इस मामले में यह भी सुनने को प्राप्त हो रहा है कि संभवत: बैठक में कुछ पार्षदों द्वारा भाजपा के पार्षदों को जबरन कार्यालय में बंद करके रखा गया था, पार्षदों को लघुशंका के लिए जाने तक नही दिया जा रहा था साथ ही पार्षदों के फ़ोन पर कॉल आने पर उनका मोबाइल भी छीन लिया जा रहा था, जिले के वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्षदों को बरगलाया गया कि प्रदेश नेतृत्व से बात हो गयी है भाजपा का प्रत्याशी नूतन ठाकुर है जिसके कारण भ्रम की स्थिति निर्मित हुई, इसके अलावा सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि मतदान स्थल पर नूतन ठाकुर भाजपा का गमछा लगाकर मत अपील कर रहे थे, जिसपर पर्यवेक्षक पुरंदर मिश्रा ने संज्ञान में लेते हुए जिले के नेताओं को निर्देशित किया कि उसके गले से भाजपा का गमछा हटवाया जाए किन्तु जिले के किसी भी नेता ने इस महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान नही दिया जो हार की कारण बनी और पार्षदों को लगा कि भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी नूतन सिंह है। इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण सवाल लगातार दस्तक दे रहा है कि आखिर नूतन सिंह सामान्य वर्ग से आते है जब भाजपा पार्षद सामान्य वर्ग के खिलाफ थे तो नूतन सिंह किस पैरामीटर में फ़ीट हुए ये कोरबा की जनता के मन मे सवाल है ?? बहरहाल इस तरह के सवालों और गहमा - गहमी को लेकर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी ने अहम बैठक भी ली है, अपनी साफ - सुथरी छवि व विश्व के सबसे बड़े पार्टी के तौर पर उभरे भारतीय जनता पार्टी ने यह तो स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी में किसी भी प्रकार के बागी व अपराधिक प्रवृत्ति रखने वालों का कोई स्थान नहीं। अब इस सभापति चुनाव विषय को लेकर भाजपा पार्टी किस तरह के कदम उठाती है यह तो समय की गर्त में है, किंतु यह तो स्पष्ट है कि इन दिनों छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के भाजपा खेमे में निश्चित ही उथल-पुथल की स्थिति निर्मित है।

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