Friday 5th of June 2026

ब्रेकिंग

बालको ने किया मल्टी-स्पेशलिटी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

बालको द्वारा आयोजित किसान मेला से कृषि नवाचार को मिला बढ़ावा

बालको द्वारा आयोजित किसान मेला से कृषि नवाचार को मिला बढ़ावा

बालको ने सुरक्षा को बनाया कार्य संस्कृति का आधार, ‘सुरक्षा संकल्प’ के 4 साल पूरे

draft title

सुचना

Welcome to the Samachar Bharti News, for Advertisement call +91-6261565687

: बालको स्थित मिनी माता स्कूल में धूल के गुबार में खेलते हैं स्कूली बच्चे, स्कूली बच्चों के सेहत से प्राचार्य कर रहे खिलवाड़, भवन विवाद के चलते बच्चों का शोषण शर्मनाक

कोरबा जिले के उपनगरीय क्षेत्र बालको सेक्टर 3 स्थित मिनी माता उत्तर माध्यमिक विद्यालय अपने कृतियों के चलते हमेशा से सुर्खियों में रहा है, चाहे वह स्कूल विवाद हो, नन्हे मुन्ने बच्चों हेतु अनैतिक गेट निर्माण हो, अवैध भवन निर्माण हो, पत्रकार को झूठ बोलकर बदनाम करना हो, शिक्षक की ग्रेजुएटी का मामला हो, शिक्षिका के मातृत्व अवकाश में दिए जाने वाले मानदेय का मामला हो,या फिर शिक्षकों के न्यूनतम वेतनमान का ही मामला हो, मिनीमाता स्कूल इन सभी मामलों में अपनी सुर्खियां बटोर चुका है। वही मिनीमाता स्कूल में कई ऐसे शिक्षक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं जो की अपात्र तथा अयोग्य भी हैं इस विषय में भी जांच कर कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना किया जा सके। जैसा कि हम सब जानते हैं मिनीमाता व मदर्स केयर स्कूल के मध्य विवाद सालों पुराना है जिसमें अनेकों शिकायतें भी दर्ज हैं साथ ही यह मामला हाई कोर्ट में भी लंबित है, इसी विवाद के चलते जहां मिनीमाता स्कूल के खिलाफ अनेकों शिकायते दर्ज हैं तो वहीं मिनीमाता स्कूल के द्वारा अमानवीय तरीके से प्रवेश द्वार का निर्माण करना भी शामिल है जिसमें नन्हे मुन्ने बच्चे टकराकर गिरते आए हैं जिसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई थी तथा यह विषय समाचार पत्रों की सुर्खियां भी बनी, इसी कड़ी में मिनीमाता स्कूल परिसर में अवैध भवन निर्माण भी कराया गया जिसकी शिकायत पर तत्कालीन नगर प्रशासन प्रमुख अवतार सिंह के द्वारा कार्रवाई भी कराई गई तथा अवैध भवन निर्माण पर रोक भी लगा दी गई थी यह और बात है कि बाद में छुप-छुपाके भवन निर्माण कर दिया गया। इसी कड़ी में वर्तमान में समाचार भारती न्यूज़ 24 के प्रधान संपादक व राष्ट्रीय संवाददाता पत्रकार मुकेश भारती द्वारा खबर चलाई जाने पर उन्हें झूठे आरोप में फसाने की भी पुरजोर कोशिश की गई, 2 वर्ष पहले की गई इस कोशिश में वे पूरी तरह असफल रहे, वैसे झूठा आरोप प्रत्यारोप जड़ना कोई इस स्कूल से सीखे, जहां पर प्राचार्य शिक्षक तो झूठ का सहारा ले ही रहे हैं अब उन्होंने छात्रों को भी झूठ बोलने हेतु आगे कर दिया है जो की एक अपराध की श्रेणी में भी आता है। हालांकि पत्रकार मुकेश भारती ने छात्रों द्वारा झूठ बोले जाने की बात को साबित भी कर दिया है। मिनीमाता हाई स्कूल के कई शिक्षक शामिल है जिन्हे अपनी ग्रेजयूटी को लेकर कोर्ट कचहरी के भी चक्कर काटने पड़ रहे हैं, तो वही एक शिक्षिका का मामला तो अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा ऐसी भी शिक्षिकाएं शामिल हैं जिन्हें मातृत्व अवकाश में जाने के पश्चात उसका मानदेय प्राप्त ही नहीं हुआ, यह भी एक जांच का विषय है। इसके अलावा कई ऐसे हैं जिन्हें न्यूनतम वेतनमान प्राप्त नहीं हो रहा यह तमाम विषय एक महत्वपूर्ण जांच के विषय में शामिल है। मिनीमाता स्कूल जहां पर अपने इन तमाम कृत में अपनी ख्याति बटोर रहा है तो वहीं अब स्कूली बच्चों को दो-दो खेल ग्राउंड होते हुए भी एक छोटे से कैंपस में जहां पर मिट्टी में बिना जल छिड़काव किए धूल के गुबार में तकरीबन 100 से भी ज्यादा की तादात में भेड़ बकरियों की भांति उन्हें ठूस दिया जाता है, स्कूल प्रबंधन को यह सोचने की आवश्यकता है कि यह नन्हे मुन्ने स्कूली बच्चे हमारा भविष्य है इन्हें मवेशी ना समझे, अपने निजी स्वार्थ हेतु इनका इस्तेमाल किया जाना कतई उचित नहीं। जब यह स्कूली बच्चे खेल रहे होते हैं वहां पर स्वयं कुछ शिक्षक मुंह में रुमाल व गमछी लपेटे हुए हमें अनायास ही दिख जाएंगे क्योंकि उन्हें भी पता है की धूल उड़ रही है किंतु जानबूझकर कैंपस में स्थित मिट्टी पर जल का छिड़काव नहीं किया जाता है क्योंकि यह वह समय होता है जब मदर्श केयर नर्सरी स्कूल के नन्हे- मुन्ने बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर अपनी कक्षाओं से बाहर निकलते हैं तथा उनके पालक बाहर निकालने हेतु मिनीमाता स्कूल के बच्चों से भीड़ भरी कैंपस से बाहर निकालने की जद्दो- जेहद करतें हैं। यह भी सोचनीय विषय है कि जहां पर स्कूल में बारी- बारी से एक-एक करके अलग-अलग कक्षाओं के खेल पीरियड लिए जाने चाहिए वहीं इस स्कूल में तकरीबन आधे से भी ज्यादा कक्षाओं के तकरीबन 100 से भी ज्यादा बच्चे एक छोटे से कैंपस में एक साथ ठूस दिए जाते हैं ऐसे में स्कूली बच्चों को जहां पर उनके सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है तो वहीं आपसी विवाद के चलते बच्चों के खेल कूद का पीरियड नहीं होने के बावजूद भी अनायास ही उन्हें खेलने हेतु एक छोटे से कैंपस में ठूस दिया जाता है ताकि मदर्स केयर नर्सरी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई लिखाई को बाधित किया जा सके। यह एक विशेष जांच का विषय है जिस पर संबंधित विभाग को जांच कर संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई करते हुए इस स्कूल की मान्यता भी रद्द कर देनी चाहिए ताकि संबंधित स्कूल के बच्चे किसी अन्य बेहतर स्कूल में पठन-पाठन कर अपना भविष्य संवार सके।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें