: कुसमुंडा एसईसीएल प्रबंधन के साथ महाघेराव को लेकर वार्ता विफल, 9 सूत्रीय मांगों को लेकर 25 जुलाई को एसईसीएल कुसमुंडा कार्यालय में महाघेराव के साथ होगा खदान बंद
Mukesh Kumar Bharti
Mon, Jul 24, 2023
गांव गांव में नुक्कड़ सभा, पर्चे बांटकर पीड़ित भू विस्थापित किसानों को किया जा रहा है एकजुट*
*प्रभावित गांव के भू विस्थापितों का आंदोलन को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन
छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने बरसों पुराने भूमि अधिग्रहण के बदले लंबित रोजगार प्रकरण,मुआवजा, पूर्व में अधिग्रहित जमीन वापसी, प्रभावित गांव के बेरोजगारों को खदान में काम देने,महिलाओं को स्वरोजगार, पुनर्वास गांव में बसे भू विस्थापितों को काबिज भूमि का पट्टा देने के साथ 9 मांगो को लेकर 25 जुलाई को कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय का महाघेराव के साथ खदान बंद की घोषणा की है। एसईसीएल के आश्वासन से थके भूविस्थापितों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने की तैयारी को लेकर गांव गांव में पोस्टर चपकाने ,नुक्कड़ सभा,के साथ घर घर पर्चे बांटे जा रहे हैं। 25 जुलाई को कोल इंडिया के मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के महाघेराव और खदान बंद को सफल बनाने की तैयारी ने जोर पकड़ लिया है आंदोलन को आम जनता का व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
*इधर महाघेराव को टालने के लिए किसान सभा के प्रतिनिधि मंडल के साथ एसईसीएल प्रबंधन ने बैठक कर आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया। बैठक में एसईसीएल की ओर से कुसमुंडा एपीएम एस. मल्लिक,स्टाफ ऑफिसर ए.झा, आर.के. बधावन किसान सभा के प्रतिनिधि मंडल की ओर से किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर,जय कौशिक, माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, भू विस्थापित रोजगार एकता संघ से रेशम यादव,दामोदर श्याम,रघु,सुमेन्द्र सिंह ठकराल उपस्थित थे। बैठक में किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल की ओर से उपस्थित सभी सदस्यों ने प्रबंधन के आंदोलन स्थगित करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि मांगो पर निर्णय लेने का अधिकार आपके पास है ही नहीं तो आपसे क्या बात करें बिलासपुर के अधिकारियों को भू विस्थापितों से बात करने के लिए बिलासपुर के ऐसी दफ्तरों को छोड़कर सड़कों पर आना ही होगा तभी आगे की बात होगी यह बोलते हुए किसान सभा के साथ शामिल सभी प्रतिनिमंडल के सदस्य बैठक छोड़कर बाहर आ गए।
बैठक में शामिल माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि भू विस्थापितों की मांगों पर निर्णय लेने का अधिकार कुसमुंडा प्रबंधन के पास है ही नहीं तो बैठक का कोई मतलब नहीं है बिलासपुर के सक्षम अधिकारियों को बैठक में आना चाहिए जो निर्णायक निर्णय ले सके। आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा निर्णायक निर्णय एसईसीएल को लेना ही होगा। विकास के नाम पर अपनी गांव और जमीन से बेदखल कर दीये गए विस्थापित परिवारों की जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर हो गई है।
किसान सभा ने कहा कि 25 जुलाई से कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय पर घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन करने की घोषणा की है आंदोलन तभी खत्म होगा, जब एसईसीएल प्रबंधन पुराने रोजगार प्रकरणों के निराकरण,मुआवजा, बसावट, के सवाल पर उनके पक्ष में निर्णायक फैसला करेगा। भू विस्थापितों के आंदोलन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन दिया है।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर,दीपक साहू ने कहा कि 40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन के लिए किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस और भाजपा की सरकार ने और खुद एसईसीएल ने विस्थापित परिवारों की कभी सुध नहीं ली। आज भी हजारों भूविस्थापित किसान जमीन के बदले रोजगार और बसावट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस क्षेत्र में एसईसीएल ने अपने मुनाफे का महल किसानों और ग्रामीणों की लाश पर खड़ा किया है। किसान सभा इस बर्बादी के खिलाफ भूविस्थापितों के चल रहे संघर्ष में हर पल उनके साथ खड़ी है।
किसान सभा के नेता जय कौशिक, सुमेंद्र सिंह ठकराल आदि ने कहा कि पुराने लंबित रोजगार, बसावट, पुनर्वास गांव में पट्टा, किसानों की जमीन वापसी एवं अन्य समस्याओं को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है और उनके साथ धोखाधड़ी कर रही है। इसलिए किसान सभा और अन्य संगठनों को मिलकर संघर्ष तेज करना होगा, ताकि सरकार और एसईसीएल की नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके।
उल्लेखनीय है कि 31अक्टूबर 2021 को लंबित प्रकरणों पर रोजगार देने की मांग को लेकर कुसमुंडा क्षेत्र में 12 घंटे खदान जाम करने के बाद एसईसीएल के महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष दस से ज्यादा गांवों के किसान 630 दिनों से अनिश्चित कालीन धरना पर बैठे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ किसान सभा शुरू से ही उनके साथ खड़ी है।
भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम, रेशम यादव,रघु यादव, सुमेन्द्र सिंह कंवर ठकराल ने कहा कि भू विस्थापितों को बिना किसी शर्त के जमीन के बदले रोजगार देना होगा और वे अपने इस अधिकार के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
प्रचार अभियान में प्रमुख रूप से मोहन यादव,हरिहर, बृजमोहन,होरी,हेमलाल,जितेंद्र,अनिल,कृष्णा,मानिक,फणींद्र,नरेंद्र,आनंद,विजय के साथ बड़ी संख्या में भू विस्थापित शामिल रहे।
*घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन की प्रमुख मांगे*
1) पूर्व में अधिग्रहित गांव के पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों के तत्काल निराकरण के संबंध में
A) जिन भू विस्थापितों का फाईल बिलासपुर मुख्यालय में हैं उन्हें दस दिवस के अंदर रोजगार प्रदान किया जाए।
B) भू विस्थापित जिनकी जमीन सन् 1978 से 2004 तक अर्जन की गई है उन प्रत्येक खातेदार की रोजगार संबंधित प्रक्रिया पूरी कर एसईसीएल मुख्यालय भेजा जाए।
C) भू विस्थापित जिन्होंने नामांकन के लिए आवेदन किया है उन्हे तत्काल नामांकन फार्म दिया जाए।
2) जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और कि जा रही है(खोडरी,पाली, जटराज) गांव के सभी छोटे बड़े खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जाये।
3) बरपाली,गेवरा के शासकीय भूमि पर कबीजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा प्रदान किया जाये।
4) अधिग्रहित ग्रामों को पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
5) कोल इंडिया द्वारा पूर्व में अधिग्रहित ग्राम खमहरिया के मूल किसानों को जमीन वापस किया जाये।
6) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापित परिवार के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
7) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
8) पुनर्वास गांव में काबिज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
9) भैसमाखार,मनगांव,वैशालीनगर समेत पुनर्वास सभी गांव को पूर्ण विकसित मॉडल गांव बनाया जाये और सभी मूलभूत सुविधाएं पानी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराया जाये।
*इधर महाघेराव को टालने के लिए किसान सभा के प्रतिनिधि मंडल के साथ एसईसीएल प्रबंधन ने बैठक कर आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया। बैठक में एसईसीएल की ओर से कुसमुंडा एपीएम एस. मल्लिक,स्टाफ ऑफिसर ए.झा, आर.के. बधावन किसान सभा के प्रतिनिधि मंडल की ओर से किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर,जय कौशिक, माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, भू विस्थापित रोजगार एकता संघ से रेशम यादव,दामोदर श्याम,रघु,सुमेन्द्र सिंह ठकराल उपस्थित थे। बैठक में किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल की ओर से उपस्थित सभी सदस्यों ने प्रबंधन के आंदोलन स्थगित करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि मांगो पर निर्णय लेने का अधिकार आपके पास है ही नहीं तो आपसे क्या बात करें बिलासपुर के अधिकारियों को भू विस्थापितों से बात करने के लिए बिलासपुर के ऐसी दफ्तरों को छोड़कर सड़कों पर आना ही होगा तभी आगे की बात होगी यह बोलते हुए किसान सभा के साथ शामिल सभी प्रतिनिमंडल के सदस्य बैठक छोड़कर बाहर आ गए।
बैठक में शामिल माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि भू विस्थापितों की मांगों पर निर्णय लेने का अधिकार कुसमुंडा प्रबंधन के पास है ही नहीं तो बैठक का कोई मतलब नहीं है बिलासपुर के सक्षम अधिकारियों को बैठक में आना चाहिए जो निर्णायक निर्णय ले सके। आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा निर्णायक निर्णय एसईसीएल को लेना ही होगा। विकास के नाम पर अपनी गांव और जमीन से बेदखल कर दीये गए विस्थापित परिवारों की जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर हो गई है।
किसान सभा ने कहा कि 25 जुलाई से कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय पर घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन करने की घोषणा की है आंदोलन तभी खत्म होगा, जब एसईसीएल प्रबंधन पुराने रोजगार प्रकरणों के निराकरण,मुआवजा, बसावट, के सवाल पर उनके पक्ष में निर्णायक फैसला करेगा। भू विस्थापितों के आंदोलन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन दिया है।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर,दीपक साहू ने कहा कि 40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन के लिए किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस और भाजपा की सरकार ने और खुद एसईसीएल ने विस्थापित परिवारों की कभी सुध नहीं ली। आज भी हजारों भूविस्थापित किसान जमीन के बदले रोजगार और बसावट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस क्षेत्र में एसईसीएल ने अपने मुनाफे का महल किसानों और ग्रामीणों की लाश पर खड़ा किया है। किसान सभा इस बर्बादी के खिलाफ भूविस्थापितों के चल रहे संघर्ष में हर पल उनके साथ खड़ी है।
किसान सभा के नेता जय कौशिक, सुमेंद्र सिंह ठकराल आदि ने कहा कि पुराने लंबित रोजगार, बसावट, पुनर्वास गांव में पट्टा, किसानों की जमीन वापसी एवं अन्य समस्याओं को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है और उनके साथ धोखाधड़ी कर रही है। इसलिए किसान सभा और अन्य संगठनों को मिलकर संघर्ष तेज करना होगा, ताकि सरकार और एसईसीएल की नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके।
उल्लेखनीय है कि 31अक्टूबर 2021 को लंबित प्रकरणों पर रोजगार देने की मांग को लेकर कुसमुंडा क्षेत्र में 12 घंटे खदान जाम करने के बाद एसईसीएल के महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष दस से ज्यादा गांवों के किसान 630 दिनों से अनिश्चित कालीन धरना पर बैठे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ किसान सभा शुरू से ही उनके साथ खड़ी है।
भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम, रेशम यादव,रघु यादव, सुमेन्द्र सिंह कंवर ठकराल ने कहा कि भू विस्थापितों को बिना किसी शर्त के जमीन के बदले रोजगार देना होगा और वे अपने इस अधिकार के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
प्रचार अभियान में प्रमुख रूप से मोहन यादव,हरिहर, बृजमोहन,होरी,हेमलाल,जितेंद्र,अनिल,कृष्णा,मानिक,फणींद्र,नरेंद्र,आनंद,विजय के साथ बड़ी संख्या में भू विस्थापित शामिल रहे।
*घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन की प्रमुख मांगे*
1) पूर्व में अधिग्रहित गांव के पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों के तत्काल निराकरण के संबंध में
A) जिन भू विस्थापितों का फाईल बिलासपुर मुख्यालय में हैं उन्हें दस दिवस के अंदर रोजगार प्रदान किया जाए।
B) भू विस्थापित जिनकी जमीन सन् 1978 से 2004 तक अर्जन की गई है उन प्रत्येक खातेदार की रोजगार संबंधित प्रक्रिया पूरी कर एसईसीएल मुख्यालय भेजा जाए।
C) भू विस्थापित जिन्होंने नामांकन के लिए आवेदन किया है उन्हे तत्काल नामांकन फार्म दिया जाए।
2) जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और कि जा रही है(खोडरी,पाली, जटराज) गांव के सभी छोटे बड़े खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जाये।
3) बरपाली,गेवरा के शासकीय भूमि पर कबीजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा प्रदान किया जाये।
4) अधिग्रहित ग्रामों को पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
5) कोल इंडिया द्वारा पूर्व में अधिग्रहित ग्राम खमहरिया के मूल किसानों को जमीन वापस किया जाये।
6) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापित परिवार के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
7) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
8) पुनर्वास गांव में काबिज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
9) भैसमाखार,मनगांव,वैशालीनगर समेत पुनर्वास सभी गांव को पूर्ण विकसित मॉडल गांव बनाया जाये और सभी मूलभूत सुविधाएं पानी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराया जाये।Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन