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: सनातन वर्णव्यवस्था के परिपालन में ही विश्व का कल्याण सम्भव - पुरी शंकराचार्य

Mukesh Kumar Bharti

Tue, Jun 13, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट कोरबा - ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर एवं हिन्दुओं के सार्वभौम धर्मगुरु तथा हिन्दू राष्ट्र के प्रणेता श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी महाराज एक दिवसीय प्रवास पर कोरबा पहुँचे जहाँ उनके सानिध्य में डीडीएम नगर में निर्मित श्रीराम दरबार मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात मन्दिर प्रांगण में एक विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुये पुरी शंकराचार्यजी ने कहा कि सनातन वर्णव्यवस्था में सबकी जीविका जन्म से सुरक्षित रहता है जीवन दुर्व्यसन मुक्त होता है एवं देवियों की शील की रक्षा होती है। बिना परिवार नियोजन तथा गर्भपात के जनसंख्या संतुलित रहती है। हमारे मठ मन्दिर शिक्षा , रक्षा , अर्थ एवं सेवा के केन्द्र के रूप में स्थापित हैं , वर्णाश्रम व्यवस्था के परिपालन में ही विश्व का कल्याण सम्भव हो सकेगा। आगे शंकराचार्यजी ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व जिस प्रकार से विकास को परिभाषित एवं क्रियान्वित कर रहा है उसके कारण विकास के स्थान पर विनाश ही परिलक्षित हो रहा है। महाराजश्री ने उपस्थित राजनेताओं एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये आगे कहा कि राजनीति का अर्थ राजधर्म , क्षात्रधर्म , दंडव्यवस्था है एवं राजनीति की शास्त्र सम्मत परिभाषा सुसंस्कृत , सुशिक्षित , सुरक्षित , सम्पन्न , सेवापरायण , सर्वहितप्रद , स्वस्थ व्यक्ति एवं समाज की संरचना होती है। विकास के गलत क्रियान्वयन से ऊर्जा के श्रोत पृथ्वी , पानी , तेज , वायु कुपित और दूषित हो रहे हैं। यूरोपीय देशों में जहाँ पर वर्णव्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है वहाँ पर वैकल्पिक ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य आदि की व्यवस्था है इसमें समय अधिक लगता है , जबकि हमारे यहाँ वर्णव्यवस्था से पारंपरिक रूप से सभी वर्णों की उपलब्धता तथा उनके वेद सम्मत कार्य का विभाजन स्पष्ट रूप से चिन्हांकित है। आवश्यकता है हमारे मठ मन्दिरों को केन्द्र बनाकर शिक्षा , रक्षा अर्थ के प्रकल्पों का क्रियान्वयन हो। प्रत्येक हिन्दू परिवार से एक रूपया , एक घंटा निकालकर उस क्षेत्र को सुबुद्ध , स्वावलम्बी बनाने का प्रकल्प चले तो क्षेत्र की अस्सी प्रतिशत समस्याओं का निराकरण सम्भव है। सनातन धर्म की सर्वोत्कृष्टता का उल्लेख करते हुये शंकराचार्यजी ने कहा कि इस कल्प में सृष्टि की आयु लगभग दो अरब वर्ष है और इतनी ही पुरानी हमारी सनातन संस्कृति है। पूरे विश्व को इस सत्य को स्वीकार करना ही होगा कि सभी के पूर्वज सनातनी हिन्दू ही थे क्योंकि ईसा मसीह से पहले कोई क्रिस्चियन नहीं था ठीक इसी तरह मोहम्मद साहब के पूर्व कोई मुसलमान भी नहीं था तात्पर्य यह है कि सभी धर्मों का मूल सनातन धर्म ही है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डा० चरणदास महंत , राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल , छग कांग्रेस प्रदेश प्रभारी शैलजा , प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मोहन मरकाम , छग राज्य गो सेवा आयोग अध्यक्ष रामसुंदर दास , कोरबा लोकसभा सांसद ज्योत्स्ना महंत , बिलासपुर विधायक शैलेष पांडेय , विधायक धर्मजीत सिंह , विधायक वृहस्पति सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि गण और पुरी शंकराचार्यजी द्वारा संस्थापित पीठ परिषद , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी के पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित थे।

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