: लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को श्रधांजलि देकर शुरू हुई “हसदेव बचाओ पदयात्रा”
Mon, Oct 4, 2021
जल जंगल जमीन बचाने के लिए हसदेव बचाओ पदयात्रा आज दिनांक 04 अक्टूबर 2021 को हसदेव अरण्य क्षेत्र से प्रारम्भ हुई | यह पदयात्रा दस दिनों तक 300 किलोमीटर पैदल चलते हुए 13 अक्टूबर को रायपुर पहुंचेगी | सर्वप्रथम इस यात्रा की शुरुआत मदनपुर गाँव के उस ऐतिहासिक स्थान से की गई जहाँ पर वर्ष 2015 में राहुल गाँधी ने हसदेव अरण्य के समस्त ग्राम सभाओं के लोगो को संबोधित करते हुए उनके जल- जंगल -जमीन को बचाने के लिए संकल्प लिया था और कहा था कि वे इस संघर्ष में उनके साथ है|
आज मदनपुर के उसी स्थान पर एकजुट होकर यात्रा प्रारम्भ होने के पहले ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में शहीद हुए किसानो को श्रद्धांजलि अर्पित की और मोदी सरकार की फासीवादी, कॉर्पोरेट परस्त नीतियों पर जम कर हमला बोला l हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने देश के किसानो के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए तत्काल मंत्री को बर्खास्त करने और इस बर्बरता के दोषियों और उसमे शामिल मंत्री के बेटे को तत्काल गिरफ्तार कर कठोर सजा देने की मांग की l संघर्ष समिति ने तीनो किसान विरोधी कृषि कानूनों को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई गई|
मदनपुर से प्रारंभ इस पदयात्रा को संबोधित करते हुए हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्री उमेश्वर सिंह आर्मो ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि आदिवासी हितों का खुद को रक्षक बताने वाली पार्टी, संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास करने वाली राजनीतिक दल के सत्ता में होने के बावजूद भी हमें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए यह पदयात्रा निकालनी पड़ रही है| अडानी को जिस प्रकार मोदी सरकार देश के तमाम संसाधनों को सौंपने की कोशिश कर रही है उस प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ सरकार भी अपनी पूर्ण सहभागिता निभा रही है|
आज पुनः पदयात्रा में निम्नलिखित माँगो को दोहराया गया :
• हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजना निरस्त करो l
• बिना ग्रामसभा सहमती के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत किए गए सभी भूमि अधिग्रहण को तत्काल निरस्त करो l
• पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी कानून से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के पूर्व ग्रामसभा से अनिवार्य सहमती के प्रावधान को लागू करो l
• परसा कोल ब्लाक के लिए फर्जी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई वन स्वीकृति को तत्काल निरस्त करो एवं ग्रामसभा का फर्जी प्रस्ताव बनाने वाले अधिकारी और कम्पनी पर FIR दर्ज करो l
• घाट्बर्रा के निरस्त सामुदायिक वनाधिकार को बहाल करते हुए सभी गाँव में सामुदायिक वन संसाधन और व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता दो l
• पेसा कानून 1996 का पालन करो l
पदयात्रा को समर्थन देने के लिए उदयपुर से सिद्धार्थ सिंह देव जी, जिला पंचायत सदस्य राजनाथ सिंह, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष राजिन सिंह जी, कोरिया से कुमार गिरीश , गांव गणराज्य से जंगसाय पोया, जिला किसान संघ राजनांदगांव से सुदेश टीकम, रमाकांत बंजारे छत्तीसगढ़ किसान सभा के जवाहर सिंह कंवर, प्रशांत झा,दीपक साहू,जय कौशिक सहित हसदेव अरण्य क्षेत्र के सभी सरपंच एवं जनपद सदस्य मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने पदयात्रा का समर्थन करते हुए पदयात्रा में शामिल हुआ।यह तय किया गया कि यह पदयात्रा रायपुर पहुंचेगी और अपनी मागों को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएगी| आज पदयात्रा शाम को केंदई पहुंचेगी और केंदई में रात्रि विश्राम के बाद कल सुबह केंदई से आगे जाएगी|
भवदीय
: हसदेव बचाने पदयात्रा को किसान सभा ने दिया समर्थन
Mon, Oct 4, 2021
अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने हसदेव नदी, जंगल व पर्यावरण को बचाने तथा उस क्षेत्र के रहवासियों की आजीविका, संस्कृति और अस्तित्व को बचाने के लिए के लिए हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति द्वारा आयोजित पदयात्रा को समर्थन देने की घोषणा की है। किसान सभा कोरबा जिले से गुजरने वाले मार्ग पर पदयात्रा में भी शामिल होगी।यह जानकारी छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, सचिव प्रशांत झा तथा सह सचिव दीपक साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए जिस प्रकार पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन कर कोयला खनन की इजाजत दी जा रही है, उससे न केवल जैव विविधता खत्म हो जाएगी, बल्कि आदिवासियों और कमजोर तबके के लोगों को बड़े पैमाने पर विस्थापित भी होना पड़ेगा। किसान सभा नेताओं ने आरोप लगाया कि ग्राम सभाओं के फर्जी प्रस्तावों के आधार पर कोयला खनन की अनुमति दी जा रही है, जबकि इस क्षेत्र के लोगों के विरोध आंदोलन ने या साबित कर दिया है कि ग्राम सभाओं की खनन पर कोई सहमति नहीं है और न ही यहां वनाधिकारों की स्थापना की अनिवार्य शर्त को पूरा करने का ही पालन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि हसदेव उत्तरी कोरबा, दक्षिणी सरगुजा व सूरजपुर जिले में स्थित एक विशाल व समृद्ध वन क्षेत्र है, जो जैव विविधता से परिपूर्ण हसदेव नदी और उस पर बने मिनीमाता बांगो बांध का केचमेंट है और जो जांजगीर-चाम्पा, कोरबा व बिलासपुर जिलों के नागरिकों और खेतों की प्यास बुझाता है। यह हाथी जैसे महत्वपूर्ण वन्य प्राणियों का रहवास और उनके आवाजाही के रास्ते का वन क्षेत्र भी है। सम्पूर्ण क्षेत्र पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र है, इसके बावजूद केंद्र व राज्य सरकार आदिवासियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की बजाए उन्हें खनन कंपनियों के साथ मिलकर जंगलों और जमीनों से उजाड़ने का कार्य कर रही है।पदयात्रा के संबंध में मदनपुर में हुई बैठक। बैठक में हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति, गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन तथा छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रतिनिधियों के साथ खनन प्रभावित गांव के किसान भी उपस्थित थे। यह पदयात्रा 4 अक्टूबर से शुरू होगी और 13 अक्टूबर को रायपुर पहुंचकर राज्य और केंद्र सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगी।
: खनन प्रभावित गांवों में जल आपूर्ति जारी रखने की मांग, वर्ना आंदोलन : माकपा
Mon, Oct 4, 2021
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने बांकीमोंगरा क्षेत्र के खनन प्रभावित पुरैना, बांकी बस्ती, मड़वाढोढा और आसपास के गांवों में निस्तारी, सिंचाई और पीने के लिए जल आपूर्ति जारी रखने की मांग की है। इस संबंध में एसईसीएल महाप्रबंधक कोरबा के नाम उपक्षेत्रिय प्रबंधक सुराकछार पी मवावाला को एक ज्ञापन माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, मोंगरा वार्ड की पार्षद राजकुमारी कंवर, कुदरी पारा वार्ड की पार्षद शैल राठौर, किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर के साथ जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने सौंपा है और जल समस्या का निराकरण न होने पर 7 अक्टूबर को सुराकछार खदान का घेराव करने की चेतावनी दी है।
उल्लेखनीय है कि बांकी खदान 1962 से संचालित है। कोयला खनन के कारण यहां जल स्तर काफी गिर चुका है और अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत एसईसीएल ही पीने, निस्तारी और सिंचाई के लिए पानी का प्रबंध करते आया है। लेकिन बांकी खदान बंद होने के बाद अब अचानक एसईसीएल द्वारा इन गांवों में जल आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे यहां जल संकट गहरा गया है।
माकपा नेता प्रशांत झा ने बताया कि जल आपूर्ति रोक देना इन खनन प्रभावित गांवों व यहां के रहवासियों के साथ न केवल अमानवीय व्यवहार है, बल्कि उनके मानवाधिकारों का हनन भी है। इस व्यवहार के कारण न केवल पेयजल और निस्तारी का संकट गहरा गया है, बल्कि खदान से बाहर निकलने वाले पानी के भरोसे धान की खेती करने वाले किसानों की फसल पर भी बुरा असर पड़ रहा है।माकपा ने अपने ज्ञापन में एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि पुरैना और बांकी बस्ती में पाईप लाईन के माध्यम से पेयजल सप्लाई चालू रखा जाए, खदान से बाहर निकलने वाले पानी को बोर होल पम्प लगाकर किसानों को खेती की सिंचाई के लिए तत्काल उपलब्ध कराया जाए तथा आसपास के तालाबों को भरने की व्यवस्था की जाए।
वार्ड 63मोंगरा और वार्ड 65 कुदरीपारा बांकी बस्ती के पार्षदों ने भी इस समस्या को लेकर एसईसीएल प्रबंधन को पत्र लिख कर चेतावनी दी है।
मोंगरा वार्ड की पार्षद राजकुमारी कंवर ने निगम के अधिकारियों से भी बात कर पानी समस्या का तत्काल समाधान की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने में प्रमुख रूप से अजित,शिवरतन,मोहपाल, श्याम,दिलीप दास,चंद्रभूवन एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।