: पुरी शंकराचार्यजी के सानिध्य में चतुर्थ हिन्दू राष्ट्र सम्मेलन आज
Wed, Nov 30, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टकुरूक्षेत्र - आज से लगभग पच्चीस सौ वर्ष पूर्व शंकर दिग्विजय यात्रा अभियान के अंतर्गत भारत को एक सूत्र में पिरोने वाले आदि शंकराचार्यजी की पावन परम्परा में ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ के 145 वें शंकराचार्य पुरीपीठाधीश्वर एवं हिन्दू राष्ट्र के प्रणेता अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी आदि शंकराचार्य महाभाग के पदचिन्हों का अनुसरण करते हुये पुनः अखण्ड भारत एवं हिन्दू राष्ट्र के लक्ष्य की पूर्ति हेतु विगत तीस वर्षों से भी अधिक समय से प्रत्येक वर्ष में 250 से भी अधिक दिनों तक राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के अन्तर्गत पूरे भारत में जन- जागरण कर स्वस्थ वैचारिक क्रान्ति का सूत्रपात कर रहे हैं। भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के संकल्प की पूर्ति हेतु राष्ट्रोत्कर्ष अभियान यात्रा के अन्तर्गत उत्तरप्रदेश , महाराष्ट्र , उड़ीसा , छत्तीसगढ़ , गुजरात के अहमदाबाद , नई दिल्ली तथा हरियाणा प्रदेश में सोनीपत , करनाल , कैथल , अंबाला , युमनानगर आदि क्षेत्रों की यात्रा के बाद सैनी समाज भवन , ढाण्ड रोड , कुरुक्षेत्र में आज शाम पांच बजे से श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाराज जी के पावन सान्निध्य में चतुर्थ हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन आयोजित है। जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के समय आमजनों ने भारत को आज़ादी दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ठीक उसी प्रकार भव्य भारत , अखण्ड भारत एवं हिन्दू राष्ट्र के निर्माण में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुये इस अभियान में भी आगे बढ़कर अपना योगदान एवं भागीदारी सुनिश्चित करना होगा। गौरतलब है कि पिछले चातुर्मास्य के समय पुरी शंकराचार्यजी ने साढ़े तीन वर्षों में भारत की भव्य हिन्दू राष्ट्र के रूप में उद्भाषित होने की भविष्यवाणी की थी। उपरोक्त उद्घोषणा के क्रियान्वयन के एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। हिन्दू राष्ट्र निर्माण की व्यूह रचना हेतु अब तक हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के तीन चरण पूर्ण हो चुके हैं तथा चतुर्थ चरण के तहत हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन हरियाणा में आयोजित हो रहा है जिसमें देश विदेश के प्रतिनिधि भाग लेंगे तथा आगामी रूपरेखा पर पूज्यपाद पुरी शंकराचार्यजी के सानिध्य में चर्चा होगी। आज जब विश्व की सम्पूर्ण मानवता खतरे में है तब पुरी शंकराचार्यजी का संदेश है कि सनातन सिद्धान्त जो कि वर्तमान राकेट , कम्प्यूटर और मोबाइल के युग में प्रासंगिक है। उस सर्वकालिक सनातन सिद्धान्त को अपनाने के साथ साथ हमको उसके क्रियान्वयन की विधि भी सनातन सिद्धान्त पर आधारित रखना होगा तभी हम सार्थक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। अन्यथा मन:कल्पित विधा के प्रयोग से विनाश ही परिलक्षित होगा। आईये सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिये पूज्यपाद पुरी शंकराचार्यजी द्वारा संचालित इस दिव्य अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
: पुरी शंकराचार्य के प्रथम दर्शन से हुई रथयात्रा की शुरुआत
Fri, Jul 8, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजगन्नाथपुरी — पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने पच्चीस सौ वर्षों से चली आ रही परंपरानुसार रथारुढ़ भगवान जगन्नाथ का प्रथम दर्शन कर विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथपुरी रथयात्रा की शुरुआत की। तत्पश्चात गजपति महाराज ने सोने की झाड़ू से रास्ता बुहारकर रथ को आगे बढ़ाने की शुरुआत किया। इस संबंध में इतिहास है कि शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य महाभाग ने आज से चौबीस सदी पूर्व जगन्नाथ मंदिर में भगवान के विग्रहों को पुनः प्रतिष्ठित कर साथ ही चार आम्नाय पीठों में से एक पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ में अपने प्रमुख शिष्य पद्माचार्य जी को इस पीठ के प्रथम शंकराचार्य के रूप में अपने करकमलों से अभिषिक्त किया था , तब से श्रीजगन्नाथ मंदिर में पुरी शंकराचार्य जी की विशेष महत्ता है तथा उनका मंदिर में प्रवेश एक विशेष द्वार से होता है। रथारूढ़ भगवान के विग्रह स्पर्श संबंधी नियम एवं अधिकार के संबंध में पुरी शंकराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा निर्धारित नियमावली को न्यायालय ने यह उद्घृत करते हुये स्वीकार किया कि धार्मिक क्षेत्र में शंकराचार्य जी सर्वोच्च न्यायाधीश हैं तथा उनके द्वारा प्रदत्त नियमों को अक्षरशः स्वीकार किया जाता है तथा राज्य शासन इसका परिपालन सुनिश्चित करे। आज रथयात्रा में
देव प्रतिमाओं को रथों में स्थापित करने के बाद पुरी के राजा गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव ने सोने की झाड़ू से रथों को बुहारने की परंपरा को निभाया। इसके बाद गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने देव प्रतिमाओं का दर्शन किया और फिर रथों को खींचा गया।ढोल, मंजीरे और शंख की ध्वनि तथा ‘हरि बोल’ के उद्घोष के साथ भगवान जगन्नाथ , बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक रथयात्रा को शुरुआत हुई।यह जगन्नाथ रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से आरंभ होकर दशमी तिथि को समाप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथयात्रा निकालकर भगवान जगन्नाथ को प्रसिद्ध गुंडिचा माता के मंदिर पहुंचाया जाता हैं , जहां भगवान सात दिनों तक विश्राम करते हैं। इसके बाद भगवान जगन्नाथ की वापसी की यात्रा शुरु होती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पूरे भारत में एक त्योहार की तरह मनायी जाती है। श्री जगन्नाथ मंदिर से तीन किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक देव प्रतिमाओं को ले जाने वाले तीन रथों के आसपास पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जिसे 10 जोन और 29 सेक्टरों में विभाजित किया गया था।शाह ने अहमदाबाद में की मंगला आरतीइस बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद में जगन्नाथ मंदिर में ‘मंगला आरती’ की। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर में मंगला आरती में सम्मिलित होकर महाप्रभु जगन्नाथ जी का आशीर्वाद लिया। रथ यात्रा के शुभ अवसर पर यहां आकर महाप्रभु की आराधना करना मेरे लिये हमेशा एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूति का क्षण होता है। जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर शुभकामना देते हुये गृहमंत्री ने हिंदी और ओडिया भाषा में ट्वीट कर कहा कि आस्था और भक्ति के अनूठे संगम श्री जगन्नाथ रथयात्रा के पवित्र अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनायें। महाप्रभु जगन्नाथ जी से सभी के सुखी व आरोग्यमय जीवन , समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करता हूं। जय जगन्नाथ। केन्द्रीय गृहमंत्री के मंगला आरती पश्चात गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सुबह ‘पहिंद विधि’ रस्म अदा की , जिसमें रथ यात्रा की शुरुआत से पहले एक सुनहरी झाड़ू का उपयोग करके रथों का रास्ता साफ किया जाता है। इसके बाद, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ जमालपुर क्षेत्र के चार सौ साल पुराने जगन्नाथ मंदिर से वार्षिक यात्रा के लिये निकले।सीएम बघेल ने निभाई छेरा पहरा रश्मछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में छेरा पहरा की रस्म पूरी कर सोने की झाड़ू से बुहारी लगाकर रथ यात्रा की शुरुआत की। इसके पहले मुख्यमंत्री ने यज्ञशाला के अनुष्ठान में शामिल हुये और हवन कुंड की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ , उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की आरती की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख , समृद्धि , खुशहाली और प्रदेश में अच्छी बारिश की कामना की।राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनायेंरथयात्रा के पावन अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों , विशेष रूप से ओड़िशा में सभी श्रद्धालुओं को मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। मैं कामना करता हूँ कि प्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद से सभी देशवासियों का जीवन सुख , समृद्धि और स्वास्थ्य से परिपूर्ण बना रहे। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर लोगों को बधाई दी और सभी के अच्छे स्वास्थ्य एवं खुशियों की कामना की। मोदी ने ट्वीट किया कि रथयात्रा के खास दिन की बधाई। हम भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करते हैं कि वह अपना आशीर्वाद हम पर हमेशा बनाये रखें। सभी के लिये अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की कामना करता हूं।
: पुरी शंकराचार्य जी का प्राकट्य महोत्सव इस बार 26 जून को भाटापारा छत्तीसगढ़ में
Wed, May 25, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजगन्नाथपुरी - ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज राष्ट्रोत्कर्ष अभियान अंतर्गत हिन्दू राष्ट्र निर्माण हेतु निरन्तर नेपाल एवं भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास पर रहते हैं। वर्तमान में पूज्यपाद पुरी शंकराचार्य जी श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी में निवासरत हैं। इसी महीने 28 मई से उनकी हिन्दू राष्ट्र निर्माण यात्रा पुनः आरम्भ होगी। इस यात्रा के प्रथम चरण में महाराज श्री का 29 एवं 30 मई को चंदौली (उत्तरप्रदेश) में प्रवास होगा। तत्पश्चात 31 मई से 03 जून तक दक्षिणामूर्ति आश्रम - अस्सी घाट काशी (उत्तरप्रदेश) ; 04 जून से 11 जून तक शिवगंगा आश्रम प्रयागराज ; 12 एवं 13 जून टाटा जमशेदपुर ; 14 एवं 15 जून रायगढ़ (छत्तीसगढ़) ; 16 जून रायपुर शहर , 17 एवं 18 जून रावांभाठा रायपुर ग्रामीण क्षेत्र ; 19 से 24 जून तक श्रीसुदर्शन संस्थानम् शंकराचार्य आश्रम, रायपुर ; 25 जून से 28 जून तक भाटापारा (बलौदाबाजार)। उक्त भाटापारा प्रवास में श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य महाभाग का आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी 26 जून 2022 को भव्य प्राकट्य महोत्सव आयोजित है। इसके बाद 29 जून को महाराजश्री छत्तीसगढ़ प्रवास से श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी (उड़ीसा) प्रस्थान करेंगे। पुरी शंकराचार्य जी आगामी चातुर्मास्य तक पुरी मठ में निवासरत रहेंगे। पुरी शंकराचार्य द्वारा संस्थापित धर्मसंघ पीठपरिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी संगठन ने उपरोक्त प्रवास कार्यक्रम में राष्ट्र के सभी सनातनी धर्मावलम्बियों से अपील की है कि वे अपने अपने क्षेत्रों में हिन्दू राष्ट्र संगोष्ठी एवं धर्मसभा में सभी इष्टजनों के साथ उपस्थित रहकर पूज्यपाद पुरी शंकराचार्य जी के उद्घोषणा अनुरूप भव्य हिन्दू राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनकर जीवन को धन्य बनावें। इस यात्रा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ पीठ परिषद के प्रो०बी०डी०दीवान ने दी।