: सीएम धामी ने केदारनाथ धाम में किया निर्माण कार्यों का निरीक्षण
Thu, Apr 28, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टकेदारनाथ - उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज केदारनाथ मंदिर परिसर में पहुंच केदारनाथ धाम में हो रहे निर्माण कार्यों एवं आगामी यात्रा संबंधित तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने केदारनाथ धाम में पूर्ण हो चुके सरस्वती आस्था पथ का निरीक्षण करते हुये निर्माणाधीन मंदाकिनी आस्था पथ को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने केदारनाथ परिसर के आस-पास हो रहे पहाड़ी शैली में भवनों के निर्माण कार्यों की भी जानकारी ली। सीएम ने मंदिर परिसर के आसपास मुख्य मार्ग में अस्त-व्यस्त पड़े मलबे , निर्माणाधीन सामग्री को हटाये जाने और बर्फ पिघलने के साथ ही निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ तेजी लाने के निर्देश दिये। निरीक्षण कार्य के दौरान सीएम ने केदार घाटी के निर्माण में अहम योगदान दे रहे श्रमिकों का हालचाल जाना एवं उनकी हर समस्या को दूर करने के निर्देश दिये। सीएम धामी ने निर्माण कार्यों में अहम योगदान के लिये श्रमिकों का धन्यवाद किया।उन्होंने केदारनाथ ट्रैक की जानकारी लेते हुये यात्रियों की सुविधा अनुसार विभिन्न जगहों पर ठहरने , पानी एवं बरसात के दौरान रेन शेल्टर के निर्माण कार्यों में गति लाने की बात कही। मुख्यमंत्री धामी ने मंदाकिनी एवं सरस्वती नदी के किनारे सुरक्षा दीवार के साथ ही रेलिंग के निर्माण कराये जाने और वासुकी ताल ट्रैक को विकसित किये जाने के लिये शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने मुख्यमंत्री धामी को निर्माण कार्यों की जानकारी दी।पर्यटन सचिव ने मुख्यमंत्री को बताया कि केदारघाटी में लगभग 700 श्रमिक कार्यरत हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा अनुसार प्रवेश द्वार बनाया जायेगा। साथ ही बरसात के दौरान यात्रियों की सुविधा अनुसार ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जायेगा। उन्होंने बताया केदारघाटी में ब्रह्म कमल वाटर पार्क का निर्माण किया जायेगा। वहीं चार धाम यात्रा की तैयारियों और निर्माण कार्यों का जायजा लेने के लिये केदारनाथ रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि पीएम के नेतृत्व में वहां लगातार तीन चरणों का काम चल रहा है और आगे का काम भी चल रहा है , वहां कोई रुकावट न हो उसके मैं वहां जा रहा हूं। चारधाम यात्रा के लिये तैयारी हम पूरी कर रहे हैं और हमारा अनुमान है कि इस बार की यात्रा ऐतिहासिक होनी वाली है। गौरतलब है कि चार धाम यात्रा की तैयारियों के बीच आगामी 06 मई से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा को लेकर पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ धाम पहुंचे। यहां पहुंचकर सीएम ने बाबा केदारनाथ के दर पर अपनी हाजिरी लगाई और उनका आशीर्वाद लिया। बताते चलें आगामी छह मई को केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जायेंगे। इस यात्रा को लेकर सीएम ने प्रशासनिक विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा की। बतौर मुख्यमंत्री दूसरे कार्यकाल में बाबा केदार धाम का सीएम धामी का यह पहला दौरा रहा।इस दौरान सीएम धामी के साथ केदारनाथ विधायक शैलारानी रावत भी मौजूद रहीं।
: नकली शंकराचार्यों पर लगे प्रतिबंध - पुरी शंकराचार्य
Tue, Nov 30, 2021
नैनीताल - ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज राष्ट्रोत्कर्ष अभियान में हिन्दू राष्ट्र निर्माण हेतु जनजागरण के लिये अनेकों राज्यों के प्रवास पर हैं। प्रवास कार्यक्रम में संगोष्ठी एवं धर्मसभा में उन्होंने उपस्थित भक्तों के जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। उन्होंने राममन्दिर निर्माण के साथ मस्जिद के लिये भूमि देने का विरोध किया और कहा कि इससे भविष्य में काशी एवं मथुरा में भी मस्जिद के लिये भूमि प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा तथा भारत में तीन नये पाकिस्तान बनने का बीजारोपण होगा। हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संकल्प के सबंध में पुरी शंकराचार्य जी ने कहा कि भारत निश्चित ही हिन्दू राष्ट्र है तथा शीघ्र ही इसकी उद्घोषणा भी होगी। हिन्दू राष्ट्र निर्माण सम्पूर्ण विश्व में मानवता के हित में है। हिन्दू राष्ट्र का तात्पर्य राम राज्य की स्थापना और सनातन संविधान के अनुसार शासन व्यवस्था का संचालन है जहाँ सभी वर्ण व्यवस्था का पालन करते हुये एक दूसरे के हित का पोषण करें सबके आजीविका की समुचित व्यवस्था हो। देश में बढ़ते नकली शंकराचार्यो के प्रकरण पर आक्रोश व्यक्त करते हुये कहा कि देश में सिर्फ चार मान्य शंकराचार्य पीठ हैं , अन्य सभी नकली शंकराचार्यो पर सरकार को तुरंत कार्यवाही करने चाहिये। जब देश में नकली मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनकर कोई व्यक्ति नहीं घूम सकता तो व्यासपीठ के साथ भी यह नियम लागू होना चाहिये और नकली शंकराचार्यो पर प्रतिबंध होना चाहिये। धर्म के क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि राजधर्म ही राजनीति है , राजनीति को शास्त्र सम्मत विचार से परिभाषित करने की आवश्यकता है। धर्मनियन्त्रित पक्षपातविहीन शोषणविनिर्मुक्त सर्वहितप्रद शासन तन्त्र की स्थापना ही राजनीति की विश्वस्तर पर स्वस्थ परिभाषा होना चाहिये। मंत्र में बहुत शक्ति होती है इसका जाप अधिकृत व्यक्ति के द्वारा ही फलीभूत हो सकता है। यन्त्रों के सीमित उपयोग की आवश्यकता है क्योंकि महायन्त्रों प्रचुर प्रयोग सम्पूर्ण मानव के लिये घातक सिद्ध हो रहा है तथा इससे दिव्य वस्तु एवं व्यक्तियों का विलोप हो रहा है। बताते चलें
राष्ट्रोत्कर्ष अभियान यात्रा के तहत पुरी शंकराचार्य जी एक दिसंबर से तीन दिसंबर तक रुद्रपुर (उत्तराखंड) प्रवास पर रहेंगे। जहां प्रतिदिन 11:30 बजे से संगोष्ठी , दीक्षा का कार्यक्रम होगा वहीं , शाम पांच बजे महाराजश्री का उद्बोधन होगा।
: भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में गायत्री परिवार का प्रयास सराहनीय - महामहिम राष्ट्रपति
Mon, Nov 29, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टहरिद्वार - अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भारत के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द , उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) गुरमीत सिंह एवं उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज पहुंचे। देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचने पर प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या , कुलपति शरद पारधी , कुलसचिव बलदाउ देवांगन ने माननीय राष्ट्रपति महोदय का पुष्प गुच्छ प्रदान कर स्वागत अभिनन्दन किया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित मृत्युंजय सभागार में राष्ट्रपति , राज्यपाल एवं उच्च शिक्षा मंत्री के साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रमुख पदाधिकारियों एवं आचार्यों का सामूहिक छायाचित्र का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने माननीय राष्ट्रपति को शांतिकुंज स्वर्ण जयंति वर्ष के गायत्री प्रतिमा स्मृति चिन्ह , गंगाजलि , देसंविवि स्वावलंबन विभाग निर्मित जूट बैग एवं पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित सार्वभौम प्रज्ञा योग मार्गदर्शिका भेंट किया। तत्पश्चात् राष्ट्रपति ने देसंविवि के पावन प्रांगण में स्मृति स्वरूप रुद्राक्ष के पौधे का भी रोपण किया। साथ ही परिवार सहित प्रज्ञेश्वर महादेव मन्दिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। यहां विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक वैदिक मंत्रोच्चारण कर विश्व कल्याण की प्रार्थना की गई। भारत एवं बाल्टिक देशों के संबंधों की मधुरता एवं मजबूती बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित एशिया का प्रथम बाल्टिक सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र का अवलोकन करते हुये राष्ट्रपति ने इसके माध्यम से किये जा रहे प्रयासों और अनुसंधानों की प्रशंसा की व राज्यपाल एवं उच्च शिक्षा मंत्री से इन गतिविधियों को अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर ले जाने के लिये प्रोत्साहित किया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय भ्रमण के दौरान यहां के मूल्यपरक शिक्षण प्रणाली , वैज्ञानिक अध्यात्मवाद , योग आयुर्वेद , अनुसंधान , स्वावलंबन एवं विभिन्न रचनात्मक व शैक्षणिक गतिविधियों का राष्ट्रपति ने अवलोकन करते हुये विवि द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रपति ने यहां शांतिकुंज चौके में निर्मित सात्विक भोजन प्रसाद ग्रहण किया। गायत्री परिवार की संरक्षिका माता भगवती देवी शर्मा अपने हाथों से इसी चौके पर गायत्री परिवार परिजनों को भोजन प्रसाद कराती रही जिसके बल पर छोटा सा परिवार आज अठारह करोड़ परिजनों का परिवार बन गया है। इसके पश्चात् वे गायत्री तीर्थ शांतिकुंज पहुंचे। यहां उन्होंने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा जी के पवित्र पावन कक्ष का दर्शन किया जहां आचार्यश्री ने विश्वमानवता के लिये साधना एवं साहित्य सृजन का महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न किया था। युगऋषि द्वारा वर्ष 1926 से प्रज्जवलित अखण्ड दीपक का दर्शन किये जिसके समक्ष युगऋषि ने गायत्री महामंत्र के चौबीस- चौबीस लाख के चौबीस महापुरश्चरण चौबीस साल तक अनवरत सम्पन्न किये। यह अखण्ड दीपक गायत्री परिजनों के श्रद्धा का केन्द्र है। गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी जी ने माननीय राष्ट्रपति का शांतिकुंज स्वर्ण जयंती वर्ष में शांतिकुंज आगमन पर स्वागत अभिनंदन एवं भेंटवर्ता की। डॉ. प्रणव पण्ड्या ने शांतिकुंज द्वारा चलाये जा रहे युवा जागरण , नारी जागरण , पर्यावरण आंदोलन सहित सप्त आंदोलन एवं विभिन्न रचनात्मक व सृजनात्मक कार्यक्रमों की जानकारी दी। राष्ट्रपति महोदय ने शांतिकुंज द्वारा चलाये जा रहे भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार हेतु गायत्री परिवार कार्यकर्ता एवं समाज में उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने माननीय राष्ट्रपति को गायत्री महामंत्र चादर एवं युगऋषि पूज्य आचार्यश्री द्वारा रचित साहित्य भेंटकर सम्मानित किया।