: बालको के तीन दिवसीय सुरक्षा महाकुंभ से सुरक्षित कार्यशैली को मिला बढ़ावा
Sun, Nov 5, 2023
बालकोनगर, 4 नवंबर, 2023। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में तीन दिवसीय सुरक्षा महाकुंभ कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने संगठन के भीतर सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को चिह्नित किया है। तीन दिवसीय कार्यशाला में 3000 से अधिक कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में मनाने का काम किया। ऐसे आयोजनों से संगठन के भीतर 'सुरक्षा-प्रथम' संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। बालको अपने कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और आस-पास के समुदायों को सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर रहा है।
सुरक्षा महाकुंभ में शॉप फ्लोर, सुरक्षा और संगठन के विभिन्न अन्य विभागों के कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों को शामिल किया गया। आयोजन में चेतना कार्यक्रम सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक था जो पांच मूलभूत सुरक्षा युक्तियों पर केंद्रित है। कार्यक्रम में विभिन्न सुरक्षा दिशानिर्देशों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उपस्थित प्रतिभागियों को कंपनी सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की प्रतिज्ञा दिलाकर प्रोत्साहित किया। इस कार्यशाला ने सभी के लिए सुरक्षित आवाजाही, कार्यों और अनुभवों को सुनिश्चित करते हुए संयंत्र परिसर के भीतर एक सुरक्षित वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।कार्यक्रम में सिक्योरिटी और सेफ्टी के 35 समर्पित व्यक्तियों के उत्कृष्ट योगदान का भी सम्मान किया गया। जिन्हें ‘सुरक्षा नायक’ के रूप में मान्यता दी गई थी। इन व्यक्तियों को अपने-अपने विभागों के भीतर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने, दूसरों कर्मचारियों को कार्यस्थल में सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए पहचाना गया।सुरक्षा महाकुंभ के महत्व पर बात करते हुए बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि बालको में कर्मचारियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता में से एक है जो हमारी कार्य संस्कृति का हिस्सा है। सुरक्षा प्रशिक्षण से लेकर अत्याधुनिक डिजिटल समाधानों तक हम अपने कार्यों, लोगों के व्यवहार और परिचालन क्षेत्र के सभी पहलुओं में सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित हैं। सुरक्षा महाकुंभ कार्यक्रम हमारी अटूट प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है जो सकारात्मक परिवर्तन की सुविधा प्रदान करते हुए सभी के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सुरक्षा-प्रथम मानसिकता विकसित करता है।बालको संयंत्र परिसर के साथ-साथ चोटिया कोयला खदान में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समान कार्यक्रम आयोजित करके सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में लगभग 100 से अधिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों ने भाग लिया। इस आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों को सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया और कोयला खनन और प्रबंधन में उनकी भूमिकाओं से संबंधित आवश्यक सुरक्षा दिशानिर्देशों पर प्रशिक्षण दिया किया गया।कंपनी अपने कर्मचारियों और समुदाय के सदस्यों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए सुरक्षा-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करके हर साल राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का आयोजन करती हभी मनाती है। बालको सुरक्षित ड्राइविंग पाठ्यक्रम, अग्नि सुरक्षा सत्र और सड़क सुरक्षा जागरूकता के साथ-साथ रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सुरक्षा साइनबोर्ड की स्थापना सहित कई सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यशालाओं से कर्मचारियों सहित स्थानीय समुदायों में सुरक्षा जागरूक को बढ़ावा मिला है।
मजबूत सुरक्षा संस्कृति का निर्माण करने के लिए कंपनी कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया है। जैसे- ऑगमेंटेड एंड वर्चुअल रिएलिटी आधारित प्रशिक्षण केंद्र, वीडियो एनालिटिक्स, सस्टेनेबेलिटी मोबाइल ऐप और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम जैसे डिजिटलीकरण के माध्यम से कर्मचारियों को सुरक्षा संस्कृति से जोड़ा गया है। सुरक्षा क्षेत्र में बालको अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर की मदद से यातायात एवं सड़क सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सहित विभिन्न सुरक्षा कार्यों में बेहतर निर्णय लेने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस और डेटा अंतर्दृष्टि का लाभ उठा रहा है। रियल टाइम डेटा की निगरानी, कोयला यार्ड में हॉट स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम जैसी परियोजनाओं सहित एंड-टू-एंड डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थर्मल निरीक्षण का उपयोग करना शामिल है। शॉप फ्लोर में भारी वाहनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए एलईडी लोगो प्रोजेक्टर का प्रयोग किया जाता है।
कार्यस्थल पर सुरक्षा मानदंडों के उत्कृष्ट योगदान के लिए बालको को उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। अपने सुरक्षा संकल्प कुटुंब परियोजना के लिए 5वीं सीआईआई राष्ट्रीय सुरक्षा अभ्यास प्रतियोगिता में प्रतिष्ठित प्लेटिनम पुरस्कार और ग्लोबल रोड सेफ्टी अवार्ड प्राप्त किया।
: शारदा महिला रामायण समिति का अखंड रामायण पाठ संपन्न
Tue, Oct 31, 2023
कोरबा (बाल्कोनगर) - मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराघवेन्द्र सरकार राम लला की असीम अनुकम्पा से शरद पूर्णिमा के पावन पर्व मिलन पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शारदा महिला रामायण समिति के तत्वाधान में श्रीमती रोहिणी पांडेय के नेतृत्व में श्रीराम चरितमानस अखण्ड पाठ का पच्चीसवां आयोजन श्रीमती रेखा रामकिशोर शर्मा के सौजन्य से श्री गौरी शंकर मंदिर सेक्टर -3 बालको में किया गया। श्रीराम चरित मानस गायन/वाचन में कथा वाचकों ने राम चरित मानस के सातों कांड का विशेष महत्व बताते हुये कहा कि राम चरित मानस मानव का सदैव मार्गदर्शन करते हैं , प्रथम कांड बालकांड हमें बताता है कि मानव को सदैव बालक बना रहना चाहिये , बालक बने रहेंगे तो निष्पाप रहेंगे। उसके अंदर किसी प्रकार का दोष नहीं होता क्योंकि वह बालक है। राम चरित मानस के सभी कांड मानव को सदैव सीख देते हैं। दूसरे कांड अयोध्या के बारे में बताया गया कि अपने शरीर को अयोध्या जैसा बनायें इसमें कहीं कोई पापी नहीं रहता था। जब हमारा शरीर अयोध्या बन जायेगा तो निश्चित रूप से वहां प्रभु श्री राम निवास करेंगे। तीसरा अरण्यकांड है जो जंगल है जो बताता है कि व्यक्ति को जीवन भर बासना रहित रहना चाहिये। व्यक्ति के जीवन में जब बासना नहीं रहती है तो उसके हृदय में भगवान का बसेरा हो जाता है। चौथा कांड किष्किंधा कांड है जिसमें प्रभु श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता के बारे में बताया गया है जीवन में मित्र होना जरूरी है परंतु वह राम और सुग्रीव जैसे ही होना चाहिये , किष्किंधा कांड हमें अच्छे मित्रों से परिचय कराता है। पांचवे कांड सुंदरकांड है जिसमें हनुमानजी की कथा है जो हमें भक्ति करना सिखाते हैं , मानव के जीवन में जब भक्ति होगी तो निश्चित रूप से उसे भगवान के दर्शन होंगे। छठवां लंका कांड है जो मानव को युद्ध करना सिखाता है मानव को जीवन में काम क्रोध मोह अहंकार लोभ और मद से युद्ध करना चाहिये , लंका काण्ड में यही सिखाता है। जबकि सातवां उत्तरकांड मानव को त्याग का संदेश देते हुये हमें जीवन के सार को बताता है। इस प्रकार से राम चरित गायन/कथा समापन पश्चात हवन आरंभ करने के पूर्व पंडित चंद्रशेखर जोशी ने चारों ओर रामरक्षास्रोत बोलते हुये एक रेखा खींचा ताकि किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां पूजा तथा संकल्प को खंडित नहीं कर पाये। हवन आरंभ करने के पूर्व इष्टदेव , गुरुदेव तथा पितृगणों तथा बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेकर हवन गौरीशंकर मंदिर बालको में हनुमानजी के समक्ष पूर्णाहुति पूर्ण हुआ।
: अग्नि सुरक्षा से आगे बढ़कर योगदान दे रहे बालको के अग्निशमनकर्मी
Sun, Oct 29, 2023
हर वर्ष 29 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व आघात दिवस आघात की रोकथाम एवं उपचार के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। इस अवसर पर भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के असाधारण अग्निशमनकर्मियों ने अपनी उपलब्धियों से सहज ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित किया। हालांकि विश्व आघात दिवस और अग्निशमनकर्मियों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं दिखाई देता। हालांकि इनमें महत्वपूर्ण और आंतरिक संबंध है जिससे यह प्रकट होता है कि बालको अपने आसपास के समुदाय की मदद करने के लिए दृढ़ संकल्प है।
अग्निशमनकर्मी का नाम आते ही आग बुझाते और जलती इमारतों में फंसे लोगों को बचाते जीवन रक्षक की छवि उभरती है किंतु उनकी भूमिका इससे कहीं अधिक विस्तृत है। अग्निशमनकर्मी अनेक विधाओं में दक्ष होते हैं। वे आघात समेत विभिन्न चिकित्सकीय आपात स्थितियों को संभालने सहित सबसे पहले प्रतिक्रिया करने वाले पेशेवर होते हैं। आपात स्थिति में वक्त बेहद कीमती होता है और अग्निशमनकर्मियों को तेजी और निर्णायक ढंग से कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। भारत की प्रतिष्ठित एल्यूमिनियम उत्पादक बालको में अग्निशमनकर्मियों की समर्पित टीम है जो पूरी कुशलता से अपनी सेवाएं देती है। ये वीर पेशेवर संयंत्र की सुरक्षा के साथ आसपास के समुदायों की मदद करते हैं।बालको में वरिष्ठ शिफ्ट प्रभारी श्री मनोज यादव ने बतौर अग्निशमनकर्मी अपने कैरियर की महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख करते हुए बताया, ’’उसलापुर रेलवे स्टेशन पर एक अप्रत्याशित घटना से मेरा सामना हुआ। एक बुजुर्ग अचानक होश खो बैठे। उनकी जिंदगी को खतरा था। मैं तब ड्यूटी पर नहीं था लेकिन एक अग्निशमनकर्मी होने के नाते मैं यूं ही खड़े रह कर यह होते नहीं देख सकता था। मैंने तुरंत कार्यवाही की। अपने प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को अमल में लाकर मैंने उन्हें सीपीआर दिया। एक प्रमाणित सीपीआर और फायर एड इंस्ट्रक्टर होने की वजह से इस घटना ने मुझे महसूस कराया कि अग्निशमनकर्मी के रूप में हमारी भूमिका अहम है। हमारा काम सिर्फ आग की लपटों का मुकाबला करना नहीं है बल्कि किसी भी आपात स्थिति पर प्रतिक्रिया के लिए हमें हरदम तैयार रहना है। हम ऐसे ही जोखिम में पड़ी जिंदगियों के लिए आशा की किरण बन सकते हैं।’’काम के प्रति अपने जुनून के बारे में मनोज ने बताया, ’’चाहे आग हो या कोई चिकित्सकीय आपात स्थिति, संकट में पड़े लोगों की मदद कर आनंद की जो अनुभूति होती है वह मेरे काम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। जो भी जिंदगी हम बचाते हैं वह समाज सेवा के प्रति हमारी कटिबद्धता की परिचायक है।’’ऐसी दुर्घटनाएं समाज कल्याण की दिशा में बालको अग्निशमन विभाग की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। अग्निशमन के क्षेत्र में बालको में कार्यरत पेशेवर नवीन तकनीकों के प्रयोग संबंधी अनेक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इन सत्रों में अग्निशमन के उन्नत तरीके और चिकित्सा संबंधी आधुनिक प्रतिक्रिया तकनीकें सिखाई जाती हैं।निरंतर उन्नत होते परिवेश में विकास के विभिन्न आयामों के प्रति जागरूकता महत्वपूर्ण है। अग्निशमन विभाग इस ज्ञान को अपने तक सीमित नहीं रखता बल्कि जन जागरुकता कार्यक्रमों के जरिए समुदाय के लोगों तक जानकारी साझा की जाती हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नागरिकों के तैयार रहने की संस्कृति को बढ़ावा देना और समुदाय की सुरक्षा इसका उद्देश्य है।बालको अग्निशमन विभाग का दृष्टिकोण है कि आगे बढ़कर सक्रियता से समुदाय को इस तरह आकार दिया जाए जहां सामाजिक पृष्ठभूमि और पेषे से परे इसके प्रत्येक सदस्य में दूसरों के जीवन की रक्षा में योगदान करने की संभावना और प्रेरणा विकसित हो। ‘सुरक्षा और सेवाएं’ मिषन पर ध्यान केंद्रित कर विभाग नए साधनों और तकनीकों से सदैव परिचित रहता है।अग्नि सुरक्षा संस्कृति पर बालको अग्निशमन विभाग के श्री पीताम्बर माझी ने बताया, ’’अपने कैरियर में मैं आग लगने की अनेक घटनाओं और उससे हुई बर्बादी का गवाह रहा हूं। इन दुर्घटनाओं के विश्लेषण से मैंने जाना कि अक्सर लापरवाही की वजह से चिंताजनक अग्नि दुर्घटनाएं होती हैं। जागरुकता व तैयारियों की कमी से समुदाय को जान-माल का भयंकर नुकसान होता है। बालको में अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम हमारे चिंतन का केंद्रबिंदु है। दर्दनाक दुर्घटनाओं से बचने का यही श्रेष्ठ तरीका है। स्कूलों व समुदाय के बीच अग्निशमन प्रशिक्षण सत्रों के आयोजन के जरिए हम जागरूकता के प्रसार में योगदान देते हैं ताकि आपात स्थितियों में बहुमूल्य जिंदगियां बचाई जा सकें। संयंत्र व टाउनशिप में अग्निशामक उपकरणों की नियमित जांच सुरक्षा सुनिश्चित करने का अहम हिस्सा है। हमारा मानना है कि शिक्षा एवं सक्रिय उपायों के साथ हम आग के जोखिम को काफी हद तक कम कर सभी के लिए सुरक्षित वातावरण बना सकते हैं। हमारा काम केवल आग बुझाना नहीं है बल्कि उससे भी ज्यादा जरूरी है आग की रोकथाम करना।’’अग्निशमन और आघात प्रतिक्रिया के बीच महत्वपूर्ण संबंध के जरिए बालको अग्निशमन विभाग की तकनीकी क्षमता और उपलब्धियां सामने आती हैं साथ ही इससे सामुदायिक कल्याण की दिषा में बालको के समग्र दृष्टिकोण का भी पता चलता है। सामुदायिक कल्याण हेतु बालको की प्रतिबद्धता स्वास्थ्य, शिक्षा, उन्नत कृषि, महिला सशक्तिकरण सहित कई क्षेत्रों में दिखाई देती है। समुदाय का चहुंमुखी विकास कंपनी की मान्यताओं के केंद्र में है। विभिन्न सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से बालको अपने प्रचालन क्षेत्रों में डेढ़ लाख से अधिक लोगों तक पहुंच कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में योगदान दे रहा है।विश्व आघात दिवस पर आघात की रोकथाम और वक्त पर प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है। इसके जरिए बालको के वीर अग्निशमनकर्मियों के योगदान को याद करना विषिष्ट अनुभव है। जरूरतमंदों की मदद और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का विस्तार कर बालको के अग्निशमनकर्मियों ने यह साबित किया है कि उनका दिल केवल साहस से स्पंदित नहीं होता है बल्कि समाज सेवा का संकल्प और दुर्घटना पीड़ितों के प्रति सहानुभूति उनके जज्बे को निरंतरता प्रदान करती है।