: बालको की परियोजना मोर जल मोर माटी से लगभग 2000 किसान लाभान्वित
Wed, Jul 27, 2022
भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने साढ़े पांच दशकों में विश्वस्तरीय धातु उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता और उत्कृष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में मिसाल बनाई है। सामुदायिक विकास परियोजना के जरिए किसानों को आधुनिक खेती के अनेक आयामों से परिचित कराया है। बालको स्थानीय समुदाय के आर्थिक-सामाजिक विकास को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के सामुदायिक विकास परियोजना ‘मोर जल मोर माटी’ का प्रमुख उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने, फसल उत्पादन में वृद्धि, किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों से अवगत कराने के साथ जल और मृदा प्रबंधन को उत्कृष्ट बनाना है। परियोजना का मुख्य घटक कृषि, जल प्रबंधन, पशुपालन, मत्स्य पालन, बाड़बंदी, वनोपज एवं वन संरक्षण और लाख की खेती शामिल है।
परियोजना 1200 एकड़ से अधिक भूमि के साथ 2000 किसानों तक अपनी पहुंच बना चुका है। 500 से अधिक किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया है जिससे उनकी औसत वार्षिक आय के साथ-साथ उत्पादन में लगभग दो गुना वृद्धि हुई है। तकनीकी सहयोग से लागत में 35% की कमी आई है। आसपास के लगभग 60% किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। इस परियोजना से युवा कृषि को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं। 'मोर जल मोर माटी' पहल में लगभग 25% लाभार्थी युवा किसान हैं।बालको द्वारा कृषि उन्नयन को सदैव ही सर्वोपरि स्थान देने पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक अभिजीत पति ने कहा कि हमारे किसान देश के आर्थिक विकास के प्रमुख अंग हैं। कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्र में कंपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बालको प्रशिक्षित किसानों ने जैविक खेती, कृषि नवाचार और नवीन तकनीकों की मदद से विभिन्न फसलों का उत्पादन बढ़ाने में सफलता पाई है। कृषि प्रोत्साहन परियोजना ‘मोर जल मोर माटी’ से किसानों को लाभ मिल रहा है। श्री पति कहा कि हम अपने सामुदायिक विकास कार्यक्रम के जरिए जरूरतमंदों किसानों की हरसंभव मदद करने के लिए कटिबद्ध है।स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने एवं उनकी आय में बढ़ोत्तरी करने हेतु बालको ने कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में संसाधन उपलब्ध कराए हैं। कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए बालको की प्रतिबद्धता के अनुरूप बोरवेल (सौर संचालित), कुआं, तालाब, चेक डेम का निर्माण एवं नवीनीकरण के माध्यम से सुरक्षित सिंचाई को सुनिश्चित कर, बिजली और डीजल पंपों के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई तथा ड्रिप सिंचाई प्रणाली और सौर संचालित पंपों को बढ़ावा देकर किसानों को जल प्रबंधन पालन के प्रति जागरूक किया है। सिस्टमेटिक राइस इंटेंसीफिकेशन (एसआरआई) और डीएसआर तकनीक से धान की उत्पादकता में बढ़ोत्तरी, जैविक खेती तकनीक से रबी और साग-सब्जी के फसल तथा बाड़बंदी के माध्यम से फसल को जंगली जानवरों से बचाने में सहायक साबित हुआ है।कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों से ग्रामीणों को परिचित कराने के उद्देश्य से मॉडल एग्री-फार्म वेदांत एग्रीकल्चर रिसोर्स सेंटर (वीएआरसी) विकसित किया गया है। इसका संचालन कृषक उत्पादक संघ (एफ.पी.ओ.) द्वारा किया जाता है। इस केंद्र में कृषकों को मृदा परीक्षण, सिंचाई की अत्याधुनिक सुविधाएं, सब्जी की खेती, मल्टीलेयर फार्मिंग, एसआरआई, एसडब्ल्यूआई, ट्रेलिस फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक्स और बायो फ्लोक के माध्यम से मत्स्य पालन तथा सब्जियों के संरक्षण विशेषज्ञों द्वारा कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है। कृषि नवाचार को बढ़ावा देने की दृष्टि से कुछ विदेशी सब्जियों के उत्पादन की परियोजना भी शुरू हो चुकी है।बेला गांव के किसान अनिल कुमार राठिया ने कहा कि हम जैविक खेती और चावल के नवीन विधि एसआरआई पद्धति की शुरूआत करने के लिए बालको के बहुत आभारी हैं। तकनीकों ने वास्तव में फसल लागत को कम करने और उपज की उत्पादकता बढ़ाने में हमारी मदद की है।बालको अपने सामुदायिक विकास संकल्प से स्थानीय किसानों को सशक्त बनाने का मजबूत स्तंभ साबित हुआ है।परिवर्तन की एक ऐसी कहानी बेलकछार गांव के स्वर्गीय मनीराम विश्वकर्मा की पत्नी मांगली बाई की है। पति की मृत्यु के बाद मांगली बाई अपनी आजीविका चलाने में मुश्किल का सामना कर रही थी। उनके पास केवल 0.4 एकड़ भूमि थी जिसका उपयोग आवासीय और खेती दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाता था। 1.5 एकड़ भूमि पर मांगली बाई को बिना किसी किराए केवल उपज के एक हिस्से के साथ एक किसान ने भूमि पर खेती करने की अनुमति दी।मोर जल मोर माटी परियोजना के तहत मांगली बाई ने रबी फसल के दौरान 0.3 एकड़ भूमि के लिए परियोजना के माध्यम से फूलगोभी, मूली, लाल सब्जी और पालक की खेती के लिए बीजों, जैव कीटनाशकों और उर्वरक के रूप में सहायता प्रदान की गई। शेष भूमि के लिए स्वयं मंगली बाई ने की व्यवस्था थी। परियोजना टीम ने विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों के साथ उनकी सहायता की। इस रबी फसल 2022 में पहले से ही 1 एकड़ भूमि पर लौकी, ककड़ी, भिंडी और हरी पत्तियों की खेती करने के लिए हैंडहोल्डिंग सपोर्ट और तकनीकी सहायता से खेती शुरू कर चुकी हैं।मोर जल मोर माटी के प्रशिक्षण से पहले मंगली बाई बिना जानकारी पारंपरिक तरीके से जमीन के एक छोटे हिस्से में सब्जी की खेती करने के परिणामस्वरूप कम उत्पादन और लाभ हुआ। परियोजना टीम द्वारा नियमित प्रशिक्षण सत्रों से मंगली बाई भूमि की तैयारी, उर्वरता, मौसम के अनुसार अच्छे बीजों की पहचान और प्रत्यारोपण विधियों के साथ कीटनाशकों और पौधों के उपयोग में उन्नत प्रक्रियाओं को सीखने में सक्षम हो पाई। परियोजना और सभी के समर्थन से अब मांगली बाई सब्जियों को बाजार में बेचती हैं जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।बालको अपने सामुदायिक विकास परियोजना के माध्यम से सालाना लगभग 1.5 लाख लोगों के जीवन को छूती है। कंपनी के सामुदायिक विकास के बुनियादी ढांचे में शिक्षा, स्थायी आजीविका, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य संपदा, स्वच्छता, खेल और संस्कृति आदि शामिल है। सामुदायिक विकास प्रयास 123 से अधिक गांवों तक पहुंच चुका है। कंपनी की सीएसआर नीतियों और प्रणालियों का जमीन पर स्थायी प्रभाव स्थानीय समुदाय में दिखाई पड़ता है। जिससे ये समुदाय राष्ट्र की प्रगति में समान भागीदार का हिस्सा बनते हैं।
: बालको डीपीएस के छात्र सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में अव्वल
Sat, Jul 23, 2022
बालकोनगर, 23 जुलाई 2022। बालको प्रबंधन ने शिक्षा के उन्नयन को सदैव ही सर्वोपरि रखा है। बालकोनगर ने साढ़े पांच दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में भरपूर प्रगति की है। बालको के सहयोग से संचालित दिल्ली पब्लिक स्कूल, बालकोनगर के छात्र-छात्राओं ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 में सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड में बेहतरीन प्रदर्शन किए। 12वीं में कॉमर्स स्ट्रीम से अनादि अग्रवाल ने 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर और 10वीं की सृजनी रे ने 99 प्रतिशत अंक के साथ जिले में टॉप किया।
बारहवीं कक्षा के परिणाम में साइंस स्ट्रीम की श्रद्धा सिंह ने 96.6 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। 12वीं के 11 विद्यार्थियों को 90 फीसदी से अधिक अंक मिले तथा 94 प्रतिशत विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। दसवीं कक्षा के परिणाम में मो. शम्स ने 98.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय तथा अक्षांश नामदेव 97.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान हासिल किया।10वीं के 38 विद्यार्थियों को 90 फीसदी से अधिक अंक मिले तथा लगभग सभी विद्यार्थियों प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। दस छात्रों ने अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में पूरे 100 अंक हासिल किए।बालको डीपीएस की स्थापना 2012 में हुई जिसका उद्देश्य बालकोनगर के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई थी। इसके साथ बालको टाउनशिप में 15 स्कूल हैं जिनके संचालन में बालको प्रबंधन मदद करता है। बालकोनगर क्षेत्र में संचालित स्कूलों से शिक्षित विद्यार्थी देश-विदेश में अपनी प्रतिभा से सफलताएं अर्जित कर रहे हैं। बालको को अपनी युवा प्रतिभाओं पर गर्व है जो सभी बाधाओं के बावजूद अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत हैं।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति ने समस्त छात्र-छात्राओं को बेहतरीन परीक्षा परिणामों की हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। श्री पति ने कहा कि बालको ने अपने स्थापना काल से ही शैक्षणिक सुविधाओं के विकास पर भरपूर निवेश किया है। बालको के साढ़े पांच दशकों की यात्रा सिर्फ एक उद्योग के विस्तार की यात्रा नहीं है बल्कि इसकी प्रगति ने कोरबा क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूती दी है। श्री पति ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को नया आयाम दे सकती है। बालको के योगदान से बालकोनगर एवं कोरबा क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं।डीपीएस बालको के प्रिसिंपल कैलाश पवार ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि हमारे छात्रों का उत्कृष्ट परिणाम महत्वपूर्ण है क्योंकि वे बीते दो वर्षों तक कोरोना के चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया तथा स्कूल भी नियमित नहीं आ सके। बारहवीं के छात्रों ने परीक्षा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में दिया था। श्री पवार ने कहा कि तमाम प्रतिकूल स्थिति और महामारी के कठिन समय के बावजूद छात्र आगे बढ़े और अपने परिणामों से खुद के उड़ान को और उंचा किया जो बहुत ही संतोषजनक है।वर्ष 2016 में शुरू ‘परियोजना कनेक्ट’ का उद्देश्य स्थानीय विद्यार्थियों में विज्ञान, अंग्रेजी, गणित और लेखा (सेमा) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए समुदाय की जरूरतों को पूरा करना है। परियोजना मुख्य रूप से बालको कर्मचारियों तथा स्वयंसेवी शिक्षकों के माध्यम से छात्रों के ग्रेड में सुधार, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और करियर परामर्श के लिए एक सक्षम वातावरण बनाकर सरकारी स्कूलों में सीखने के माहौल में सुधार लाने पर केंद्रित है। वित्तीय वर्ष 2022 में एसईएमए विषयों पर 9वीं, 10वीं कक्षा के लिए नियमित और उपचारात्मक कक्षाओं से लगभग 1447 छात्र लाभान्वित हुए।
: वेदांता स्किल स्कूल छत्तीसगढ़ के युवाओं को बना रहा आत्मनिर्भर
Fri, Jul 15, 2022
बालकोनगर 15 जुलाई 2022। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अपने कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से हजारों ग्रामीण युवाओं को सक्षम बना रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन हो रहा है। कुशल मानव संसाधन से किसी राष्ट्र के विकास यात्रा को गति मिलती है। विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था में शामिल होने की भारत की आकांक्षाओं के लिए विकास की गति को बनाए रखने के लिए कुशल जनशक्ति की आवश्यकता है। विशेष रूप से कम सुविधा वाले ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में युवाओं के बीच रोजगार योग्य और उद्यमशीलता कौशल के विकास की आवश्यकता है।समाज को वापस देने का दृष्टिकोण ही बालको के सामुदायिक विकास की आधारशिला है। अपने प्रचालन से सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय समुदायों को सक्षम करने के प्रतिबद्धता के अनुरूप कौशल विकास के माध्यम से युवा को सशक्त बनाने हेतु बालको ने 2010 में कोरबा वेदांता स्किल स्कूल की स्थापना के लिए लर्नेट स्किल्स लिमिटेड के साथ भागीदारी की।वेदांता स्किल स्कूल प्रशिक्षण केंद्र में आतिथ्य उद्योग, वेल्डिंग, सिलाई मशीन ऑपरेटर, सोलर पीवी टेक्निशियन, इलेक्ट्रीशियन और फिटर के छह ट्रेडों में मुफ्त आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 45 से 65 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार किया गया है। वेदांता स्किल स्कूल मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना (एमएमकेवीवाई), नाबार्ड, स्किल इंडिया इम्पैक्ट बॉन्ड (एसआईआईबी) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई) जैसी सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर प्रशिक्षण दे रहा है। कोरबा में कौशल विद्यालय की सफलता के बाद क्रमशः वर्ष 2017 और 2018 में मैनपाट और कवर्धा में दो और केंद्र स्थापित हुए। इन केंद्रों से छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है तथा उन्हें देश भर के विभिन्न उद्योगों में रोजगार मिला है। युवाओं को प्रशिक्षण देने के अलावा, संस्थान इस क्षेत्र में रोजगार दर, जीवन की गुणवत्ता, असमानताओं को कम करने और जीवन के कई अन्य पहलुओं में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति ने कहा कि वेदांता में, सतत आजीविका विकास हमारे सामुदायिक विकास प्रयासों में प्रमुख स्तंभ है। वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से हमारा लक्ष्य स्थानीय युवाओं के बीच कौशल विकास के अवसरों को बढ़ावा देना है, जिससे उन्हें रोजगार योग्य कौशल सीखने के अवसर प्राप्त हों। देश के उत्तरोत्तर विकास में प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। कंपनी समुदाय में प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों के साथ सक्षम बनाने में विश्वास करता है। हमारे विभिन्न सामुदायिक विकास कार्यक्रम उस दृष्टिकोण से जुड़े हुए हैं।होटल बेबीलोन इंटरनेशनल रायपुर के मानव संसाधन प्रबंधक संदीप कुमार राय ने बालको के कौशल विकास कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि हमारे संगठन में नियोजित उम्मीदवारों ने अनुकरणीय पेशेवर कौशल प्रदर्शित किया है। बालको की ओर से प्रारंभ यह केंद्र युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास और संबल देता है और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान करने में सक्षम बनाता है।पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड, पुणे में असेंबली फिटर के पद पर कार्यरत पूर्णेश दरवेश ने कहा कि कौशल स्कूल में दाखिला लेना मेरे जीवन के सबसे अच्छे फैसलों में से एक रहा है। मैं खाद्य और पेय कार्यक्रम में प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुआ था। अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहायता देने और पिता के साथ जिम्मेदारियों को साझा करने पर गर्व है।यंग ब्रांड, तिरुपुर में सिलाई मशीन ऑपरेटर इंदु पकवासा ने बताया कि वेदांत स्किल स्कूल का छात्र होने के लिए भाग्यशाली महसूस करती हूं क्योंकि आत्म-निर्भरता की मेरी यात्रा में सहायक बन मेरे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।पूर्व छात्रा संतोषी धुर्वे ने आभार जताते हुए कहा कि स्किल स्कूल ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। आर्थिक रूप से परिवारजनों की मदद कर उन्हें गौरव की अनुभूति होती है। संस्थान ने आत्मनिर्भरता होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।बालको के लिए समुदायों का सामाजिक-आर्थिक विकास सर्वोपरि है। कंपनी शिक्षा, स्थायी आजीविका, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य संपदा, स्वच्छता, खेल, संस्कृति और बुनियादी जरूरतों के विकास में गहन हस्तक्षेप के माध्यम से सालाना लगभग 1.5 लाख लोगों के जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप रोजगार के अवसर प्रदान करती है। बालको के सामाजिक विकास प्रयास छत्तीसगढ़ के 4 जिलों को कवर करते हुए 123 गांवों तक पहुंचती है। कोरबा, कवर्धा, सरगुजा और रायपुर, और इसकी सीएसआर नीतियों और प्रणालियों को जमीन पर स्थायी प्रभाव देने के लिए तैयार और कार्यान्वित किया जाता है, जिससे इन समुदायों को राष्ट्र की प्रगति में एक समान भागीदार बनाया जाता है।