: बालको ने बाल दिवस पर आयोजित किया पुस्तक महोत्सव
Thu, Nov 14, 2024
*बालकोनगर, 14 नवंबर 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने बाल दिवस के अवसर पर सात दिवसीय पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया है। शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनी ने विद्या भवन सोसाइटी के सहयोग से अपने सामुदायिक विकास पहल ‘प्रोजेक्ट कनेक्ट’ के अंतर्गत महोत्सव आयोजित किया। यह महोत्सव बच्चों, परिवारजन तथा सभी उम्र के पुस्तक प्रेमियों के लिए खुला है जो समुदाय को साहित्य से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है। 17 नवंबर, 2024 तक चलने वाला महोत्सव पुस्तकों का एक जीवंत वातावरण प्रदान करता है जहाँ बच्चे आलोचनात्मक पठन कौशल के साथ नई रुचियों को खोजने तथा सीखने की ललक को बढ़ा सकते हैं। पिछले 3 दिनों में इस महोत्सव में 1200 से अधिक लोगों ने भाग लिया है, जो समुदाय की मजबूत भागीदारी और उत्साह को दर्शाता है।
पुस्तक महोत्सव का उद्देश्य युवाओं में साहित्य तथा पढ़ने के प्रति रूचि उत्पन्न करना है। 2000 से अधिक पुस्तकों के साथ बच्चों की विविध रुचियों के अनुरूप इंटरैक्टिव कहानी सत्र, आकर्षक कार्यशालाएँ तथा शैक्षिक खिलौने शामिल हैं। जानकारीपूर्ण पुस्तक संग्रह के साथ महोत्सव में रोचक पठन सत्र, लेखक चर्चा, शब्दावली निर्माण तथा गणित-केंद्रित गतिविधियाँ भी शामिल हैं। ये सभी रोचक जानकारी जिज्ञासा जगाने तथा साझा सीखने का अवसर प्रदान करती हैं। इंटरैक्टिव माहौल में बच्चों तथा अभिभावकों के लिए शैक्षिक खेल भी शामिल हैं जिससे परिवार के साथ जुड़ने का अनुभव तथा आलोचनात्मक सोच तथा रचनात्मकता का विकास होता है।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि कहा कि हम अपने समुदाय में युवाओं के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा बाल दिवस पुस्तक महोत्सव पढ़ने के उत्सव के साथ एक आनंदमय समागम है जो परिवार और समुदाय के बंधन को मजबूत करता है। प्रोजेक्ट कनेक्ट के माध्यम से हम कोरबा में शैक्षिक मानकों को उंचाई प्रदान कर रहे हैं। अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने के लिए सार्थक मार्ग तैयार कर रहे हैं जिससे उज्जवल भविष्य की नींव रखी जा सके।जिला शिक्षा संस्थान (डाइट) के प्राचार्य श्री रामहरी शराफ कार्यक्रम में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवा दिमागों को प्रेरणा प्रदान करने का कार्य करती हैं जो सीखने की लालसा को बढ़ावा देने तथा उनके भविष्य की यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं। पुस्तक महोत्सव के माध्यम से बालको का बाल दिवस समारोह बच्चों को उनके विकास में मदद करने के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन प्रदान कर रहा है।
बेटी के साथ कार्यक्रम में शामिल होने वाली सुश्री आशा ने कहा कि हमारे समुदाय में इस तरह के आयोजन को देखना उत्साहजनक है। मेरी बेटी नई पुस्तकों की खोज करने के लिए उत्साहित है। उसके पढ़ने के प्रति विकसित लगाव को देखकर मैं रोमांचित हूं। महोत्सव बच्चों के लिए सीखने, बढ़ने और कल्पनाओं को प्रज्वलित करने का एक शानदार अवसर है।बालको अपने प्रोजेक्ट कनेक्ट के माध्यम से कोरबा के 6 सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं आयोजित करता है। कक्षा 6 से 8 तक बुनियादी साक्षरता और कक्षा 9 से 12 के लिए विज्ञान, अंग्रेजी, गणित और वाणिज्य (सेमा) विषय पर केंद्रित है। शिक्षण और अतिरिक्त शिक्षण घंटों के साथ छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देना और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करना है। अबतक प्रोजेक्ट कनेक्ट से 2,500 से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं। इसमें करियर परामर्श, शिक्षक प्रशिक्षण और ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन शिविर और रीडिंग मेला जैसी सुविधा प्रदान की गई हैं। एक समग्र शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर प्रोजेक्ट कनेक्ट कोरबा समुदाय में आत्मविश्वास से भरपूर शिक्षार्थियों को आकार देता है।
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: लूट की योजना बनाकर अंधेकत्ल की घटना को अंजाम देने के चार आरोपी जेल दाखिल
Sun, Nov 10, 2024
सक्ती - लालच के कारण पैसा व जेवर लूटने की योजना बनाकर अंधेकत्ल की घटना को अंजाम देने वाले चार आरोपियों को हसौद थाना पुलिस ने विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उसे न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदया सुश्री रमा पटेल ने अरविन्द तिवारी को बताया गत दिवस 09 जनवरी को सूचनाकर्ता हीरालाल मधुकर ग्राम धमनी थाना हसौद के द्वारा सूचना दर्ज करायी गयी कि इसकी बुआ मृतिका मंगली बाई मित्तल उम्र करीबन 70 वर्ष अपने घर में अकेले रहती थी , आज सुबह लगभग छह बजे उसके हत्या हो जाने की सूचना मिली। उसके घर जाकर देखने पर मंगली बाई अपने घर के अंदर जमीन पर मृत अवस्था में पड़ी थी , संभवतः किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मंगली बाई की हत्या की 'गयी है। सूचक की रिपोर्ट पर थाना हसौद में मर्ग क्र. 33/ 2024 धारा 194 वीएनएसएस. पंजीवद्ध कर घटनास्थल पर पहुंचकर एफएसएल. फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ एवं डॉग स्क्वाड की टीम के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की उपरिथिति में बारिकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। मृतिका के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। शार्ट पीएम. रिपोर्ट में पीएम.कर्ता चिकित्साधिकारी द्वारा मृतिका मंगली वाई का दम घुटने के कारण मृत्यु होना लेख किया गया है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य एवं शार्ट पीएम.रिपोर्ट कें आधार पर अज्ञात आरोपी द्वारा मृतिका मंगली बाई की प्रथम 'दृष्टया हत्या करना पाये जाने से अपराध क्रमांक 147 / 2024 धारा 103(1) , 332(क) , 309(4) , 61(2)(क) , 317(5) 36) बीएनएस पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुये सुश्री अंकिता शर्मा पुलिस अधीक्षक सक्ती के निर्देशन पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सक्ती सुश्री रमा पटेल , अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) चन्द्रपुर (डभरा) श्रीमती अंजली गुप्ता मौके पर पहुंचे। पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मो द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) चन्द्पुर के नेतृत्व में टीम गठित की गयी। टीमों द्वारा घटना स्थल का बारिकी से निरीक्षण कर घटनास्थल के आसपास सीसीटीव्ही फुटेज का अवलोकन एवं घटनास्थल के आसपास के लोगों तथा मृतिका के परिजनों से लगातार पूछताछ कर साक्ष्य एकत्रित करते हुये संदेहियों से कड़ाई से पूछताछ किया गया एवं तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की पतासाजी की गयी। आरोपीगण विकास मधुकर , समीर रात्रे , सुभाष खुंटे एवं प्रहलाद श्रीवास के द्वारा घर में घुसकर मंगली बाई की हत्या एवं करना स्वीकार किये। प्रकरण की विवेचना पर पाया गया कि मृतिका मंगली बाई के पति हेमलाल मित्तल एसईसीएल. राजनगर मनेन्द्रगढ़ में नौकरी करते थे तथा दस वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त होने के वाद ग्राम धमनी में रहते थे। मंगली बाई एवं हेमलाल के कोई बच्चे नही थे। करीवन तीन वर्ष पूर्व हेमलाल के निधन होने के बाद से मंगली बाई अकेली घर में रहती थी। उसे प्रतिमाह पेंशन मिलता था जिससे वह पैसा व जेवर घर में रखती थी। मृतिका मंगली बाई ग्रांग धमनी निवासी आरोपी विकास मधुकर के रिश्ते में दादी लगती थी। विकास मधुकर का मंगली बाई के घर आना जाना था तथा उसे जानकारी थी कि मंगली बाई पैसा व जेवर घर में रखी है। घटना के करीबन तीन दिन पहले वह मंगली वाई के घर गया तो देखा बैंक से काफी पैसा निकालकर घर मे लाकर रखी थी। पैसे के लालच के कारण पैसा व जेवर लूटने की योजना बनाया। आरोपियों से लूट की गयी रकम , मृतिका के पहने जेवर , घर की अलमारी के जेवर , मृतिका का टूटा मोबाइल , आरोपीगणों की स्कूटी आदि जप्त किया गया। धारा सदर अपराध सबूत पाये जाने से हसौद पुलिस ने चारों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस अंधेकत्ल की गुत्थी सुलझाने में निरीक्षक विन्टन साहू थाना प्रभारी हसौद एवं समस्त स्टाफ , निरीक्षक प्रवीण राजपूत थाना प्रभारी डभरा , निरीक्षक अमित सिंह , प्रभारी सायवर सेल सक्ती , निरीक्षक कमलकिशोर महतो थाना प्रभारी यायायात , उप निरीक्षक अनवर अली थाना प्रभारी बाराद्वार , उप निरीक्षक कमल मैरिपा चौकी प्रभारी फगुरम , सउनि. जन्मेजय वर्मा थाना हसौद , प्रधान आरक्षक प्रेमनारायण राठौर , आरक्षक गोपाल साहू सायवर सेल सक्ती एवं आरक्षक योगेश राठौर थाना बाराद्वार का सराहनीय योगदान रहा।गिरफ्तार आरोपीगण -विकास मधुकर पिता प्रेमलाल मधुकर उम्र 20 वर्ष ग्राम धमनी थाना हसौद , सुमाष कुमार खूंटे उर्फ राकी पिता मोहरसाय खूंटे उम्र 20 वर्ष ग्राम धमनी थाना हसौद , समीर रात्रे पिता पदमन रात्रे उम्र 20 वर्ष ग्राम हसौद , थाना हसौद एवं प्रहलाद श्रीवास पिता दुलार साय श्रीवास उम्र 19 वर्ष ग्राम हसौद थाना हसौद जिला सक्ती (छत्तीसगढ़)।
: रत्नों के समान मूल्यवान है आंवला का फल - अरविन्द तिवारी
Sun, Nov 10, 2024
(आज आंवला नवमीं विशेष)रायपुर - कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमीं यानि आज आंँवला नवमीं मनायी जा रही है , इसे अक्षय नवमीं भी कहा जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये श्री सुदर्शन संस्थानम , पुरी शंकराचार्य आश्रम / मीडिया प्रभारी अरविन्द तिवारी ने बताया कि श्रुतिस्मृति पुराणों के अनुसार आंवला नवमी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन की गलियां छोड़कर मथुरा प्रस्थान किया था। इसी दिन उन्होंने अपनी बाल लीलाओं का त्याग करके कर्तव्य के पथ पर पहला कदम रखा था। इसी दिन से वृंदावन की परिक्रमा भी प्रारंभ होती है। आंवला नवमी का व्रत संतान और पारिवारिक सुखों की प्राप्ति के लिये किया जाता है। यह व्रत पति-पत्नी साथ में रखें तो उन्हें इसका दोगुना शुभ फल प्राप्त होता है। आज के दिन आंवले के पेड़ की विधिवत तरीके से पूजा कर इसी वृक्ष के नीचे सपरिवार भोजन किया जाता है। अगर आसपास आँवले का पेंड़ नही है और उसके नीचे भोजन करना संभव नही है तो आज के दिन आँवले के फल खाने का भी प्रावधान है। वहीं अक्षय नवमीं के दिन स्नान , तर्पण ,अन्न दान तथा पूजा आदि करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने आगे बताया कि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आंँवले के पेड़ में देवों के देव महादेव और भगवान विष्णु वास करते हैं इसलिये इसकी पूजा करने का खास महत्व है। कहा जाता है कि आंँवले की पूजा करने से आरोग्य और सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आंँवला नवमी के दिन पूजा करने और जप-तप , दान करने से अनंत गुना फल मिलता है। आँवला विष्णुप्रिय और साक्षात भगवान विष्णु का ही स्वरूप है। इसके स्मरण मात्र से गोदान के बराबर फल मिलता है , इसे स्पर्श करने पर दोगुना तथा फल सेवन करने पर तीन गुना फल मिलता है , यह फल सदा सेवन योग्य है। जो प्राणी इस वृक्ष का रोपण करता है , उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। आंँवले का फल पौराणिक दृष्टिकोण से रत्नों के समान मूल्यवान माना जाता है। इस फल का प्रयोग कार्तिक मास से आरम्भ करना अनुकूल माना जाता है। इस फल के सटीक प्रयोग से आयु , सौन्दर्य और अच्छे स्वस्थ्य की प्राप्ति होती है। मात्र यही ऐसा फल है जो सामान्यतः नुकसान नहीं करता है। आंवला नवमी के दिन स्नान आदि करके किसी आंवला वृक्ष के समीप जायें और उसके आसपास साफ-सफाई करके आंवला वृक्ष की जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें। फिर उसकी जड़ में कच्चा दूध डालकर षोडशोपचार पूजन सामग्रियों से वृक्ष की पूजा करें और उसके तने पर कच्चा सूत या मौली आठ परिक्रमा करते हुये लपेटें। कुछ जगह 108 परिक्रमा भी की जाती है। इसके बाद परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करके वृक्ष के नीचे ही बैठकर परिवार , मित्रों सहित भोजन किया जाता है।महत्वशास्त्रों में आंँवला , पीपल , वटवृक्ष , शमी , आम और कदम्ब के वृक्षों को हिन्दू धर्म में वर्णित चारों पुरुषार्थ दिलाने वाला बताया गया है। इन वृक्षों की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा भक्तों पर बरसाते हैं। आंवला नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन कई यज्ञों के बराबर शुभ फल देने वाला बताया गया है। आंँवला नवमी पर आंँवले के पेड़ के नीचे पूजा और भोजन करने की प्रथा की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी। कथा के अनुसार एक बार मांँ लक्ष्मी पृथ्वी पर घूमने के लिये आयी। धरती पर आकर मांँ लक्ष्मी सोचने लगीं कि भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा एक साथ कैसे की जा सकती है ? तभी उन्हें याद आया कि तुलसी और बेल के गुण आंँवले में पाये जाते हैं। तुलसी भगवान विष्णु को और बेल शिवजी को प्रिय है। उसके बाद मांँ लक्ष्मी ने आंँवले के पेड़ की पूजा करने का निश्चय किया। मांँ लक्ष्मी की भक्ति और पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिवजी साक्षात प्रकट हुये। माता लक्ष्मी ने आंँवले के पेड़ के नीचे भोजन तैयार करके भगवान विष्णु व शिवजी को भोजन कराया और उसके बाद उन्होंने खुद भी वहीं भोजन ग्रहण किया।मान्यताओं के अनुसार आंवला नवमी के दिन अगर कोई महिला आंँवले के पेड़ की पूजा कर उसके नीचे बैठकर भोजन ग्रहण करती है , तो भगवान विष्णु और शिवजी उसकी सभी इच्छायें पूर्ण करते हैं। इस दिन महिलायें अपनी संतान की दीर्घायु तथा अच्छे स्वास्थ्य लेकर कामना करती हैं। इस दिन आँवला नवमीं की कथा भी सुनी जाती है। मान्यता है कि इस कथा को सुनने से व्रत रखने वाली महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और माता लक्ष्मी भी उनके परिवार पर प्रसन्न होती है।आंँवले के फल का विशेष प्रयोगअगर धन का अभाव हो तो हर बुधवार को भगवान को आंँवला अर्पित करें। अगर उत्तम स्वास्थ्य चाहिये तो कार्तिक माह में आंँवले के रस का नियमित प्रयोग करें। आंँवले के वृक्ष के नीचे शयन , विश्राम और भोजन करने गोपनीय से गोपनीय बीमारियांँ और चिंतायें दूर हो जाती हैं। आंँवले के फल को दान देने से मानसिक चिंतायें दूर होती हैं। आंवले का चूर्ण खाने से वृद्धावास्था का प्रकोप नहीं होता है। कार्तिक मास में आंँवले को भोजन में शामिल करें अथवा आंँवले के रस में तुलसी मिलाकर सेवन करें। कार्तिक में आंँवले का पौधा लगाने से संतान और धन की कामनायें पूर्ण होती हैं , आंँवले के फल को सामने रखकर कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है। अगर कर्ज से परेशान हों तो घर में आंँवले का पौधा लगाकर इसमें रोज सुबह पानी डालें।आंवला दान के प्रभाव से हुई स्वर्ण की वर्षाआंवला को वेद-पुराणों में अत्यंत उपयोगी और पूजनीय कहा गया है। आंवला का संबंध कनकधारा स्तोत्र से भी है। एक कथा के अनुसार गुरूकुल में रहते हुये एक बार आदि शंकराचार्य भिक्षा मांगने एक कुटिया के सामने रुके। वहां एक बूढ़ी औरत रहती थी , जो अत्यंत गरीबी और दयनीय स्थिति में थी। शंकराचार्य की आवाज सुनकर वह बूढ़ी औरत बाहर आई , उसके हाथ में एक आमलकी फल (आंवला) था। वह बोली महात्मन मेरे पास इस आंवले के सिवाय कुछ नहीं है जो आपको भिक्षा में दे सकूं। शंकराचार्य को उसकी स्थिति पर दया आ गई और उन्होंने उसी समय उसकी मदद करने का प्रण लिया। उन्होंने अपनी आंखें बंद की और मंत्र रूपी कनकधारा स्तोत्र के बाईस श्लोक बोले। इससे प्रसन्न होकर मां लक्ष्मी ने उन्हें दिव्य दर्शन दिये और कहा कि इस औरत ने अपने पूर्व जन्म में कोई भी वस्तु दान नहीं की। यह अत्यंत कंजूस थी और कभी किसी को कुछ देना ही पड़ जाये तो यह बुरे मन से दान करती थी। इसलिये इस जन्म में इसकी यह हालत हुई है , यह अपने क्मों का फल भोग रही है इसलिये मैं इसकी कोई सहायता नहीं कर सकती। शंकराचार्य ने देवी लक्ष्मी की बात सुनकर कहा - हे महालक्ष्मी इसने पूर्व जन्म में अवश्य दान-धर्म नहीं किया है , लेकिन इस जन्म में इसने पूर्ण श्रद्धा से मुझे यह आंवला भेंट किया है। इसके घर में कुछ नहीं होते हुये भी इसने यह मुझे सौंप दिया। इस समय इसके पास यही सबसे बड़ी पूंजी है , क्या इतना भैंट करना पर्याप्त नहीं है ? शंकराचार्य की इस बात से देवी लक्ष्मी प्रसन्न हुई और उसी समय उन्होंने गरीब महिला की कुटिया में स्वर्ण के आंवलों की वर्षा कर दी और महिला की कुटिया में सोने के आंवले बरसने लगे। अत: आंवला नवमी के दिन यह कथा पढ़ने और सुनने का बहुत महत्व माना गया है।