: बरपाली अग्रेसन जयंती में हितानंद अग्रवाल होंगे मुख्य अतिथि
Mon, Sep 26, 2022
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अग्रवाल सभा बरपाली द्वारा 26 सितंबर को महाराजा श्री अग्रसेन जी महाराज की जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई जाएगी इस वर्ष जयंती समारोह के मुख्य अतिथि नगर पालिक निगम कोरबा के नेता प्रतिपक्ष श्री हितानंद जी अग्रवाल होंगे कार्यक्रम की अध्यक्षता अग्रवाल सभा बरपाली के अध्यक्ष किशन अग्रवाल करेंगे सर्वप्रथम कार्यक्रम के पूर्व शिव मंदिर बरपाली से अग्रसेन भवन तक गाजे-बाजे के साथ सभी अग्र बंधुओं महिला मंडल एवं नवयुवक सदस्यों के गरिमामय उपस्थिति में शाम 4:00 बजे से महाराजा श्री अग्रसेन जी महाराज की शोभायात्रा निकाली जावेगी जो नगर भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल में पहुंचेगी तत्पश्चात महाराजा श्री अग्रसेन जी की आरती एवं अतिथियों की उपस्थिति में मंचीय कार्यक्रम संपन्न होगा। अग्रवाल सभा के अध्यक्ष किशन अग्रवाल ने समस्त अग्र बंधुओं से आग्रह किया है कि दोपहर से सभी लोग अपना अपना प्रतिष्ठान बंद कर शोभायात्रा में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें
: नवरात्रि दशरहा उत्सव के लिऐ हरदीबाजार चौकी में हुई शांति समिति की बैठक
Mon, Sep 26, 2022
हरदीबाजारः - हरदीबाजार पुलिस चौकी में नवरात्रि व दशहरा उत्सव के मद्देनज़र रखते हुऐ शांति समिति की बैठक आज शाम 5 बजे तहसीलदार रविशंकर राठौर ,चौकी प्रभारी मयंक मिश्रा की उपस्थिति में संपन्न हुई । बैठक में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों व जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने सुझाव दिये । नवरात्रि पर्व पर हरदीबाजार में इस बार बस स्टैंड, बगीचापारा,पुरानी बस्ती मंच, ज्वारा चौक एवं दशहरा मैंदान में श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन होना है । वही ग्राम रेंकी,रलिया में आयोजित दशरहा उत्सव के संबंध में शांति व सौहार्दपूर्ण मनाने पुलिस गस्त करने पर चर्च हुई,साथ ही रलिया दशरहा उत्सव पर रात्रि को अमगांव चौक व बजरंग चौक पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने,शराब पीकर बाईक,वाहन चलाने वालों पर कार्यवाही करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई । बैठक में विधायक प्रतिनिधि रमेश अहिर,जनपद सदस्य व सभापति कटघोरा श्रीमती प्रभासिंह तंवर,प्रेस क्लब संरक्षक बाबूराम राठौर,जगदीश अग्रवाल, अध्यक्ष राजाराम राठौर,उपाध्यक्ष विनोद उपाध्याय, सचिव निलेंद्र राठौर, ब्लाक अध्यक्ष युवा कांग्रेस कमेटी हरसेन महंत,मयंक राठौर,हबीब खान,पंकज ध्रुवा,विक्की जायसवाल, मन्नु राठौर,मो.रफीक खान,चंद्रभान सिंह,संजय कैवर्थ,सहित अन्य गणमान्य नागरिक व पुलिस स्टाप उपस्थित थे ।
: मोक्षदायिनी है सर्वपितृ अमावस्या – अरविन्द तिवारी
Mon, Sep 26, 2022
रायपुर - हिन्दू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या तिथि का बहुत महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष के आखिरी दिन सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाती है , जो इस बार आज है। यह पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है जिसे विसर्जनी या महालया अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि 16 दिन से धरती पर आये हुये पितर इस अमावस्या के दिन अपने पितृलोक में पुनः चले जाते हैं। इस दिन पितरों के निमित्त ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है एवं दान-दक्षिणा के साथ उन्हें संतुष्ट कर विदा किया जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष के आखिरी दिन पड़ने वाली इस अमावस्या तिथि पर पिंडदान , श्राद्ध , व पितरों के निमित्त दान करने का खास महत्व होता है। आश्विन मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध करके पितरों को विधिपूर्वक विदाई देने की भी परंपरा है। इस दिन तर्पण , श्राद्ध और पिंडदान आदि का विशेष महत्व होता है। इस दिन पितरों के नाम से तर्पण व दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं व अपना आशीर्वाद देते हैं। इसलिये इस दिन को सर्वपितृ विसर्जन अमावस्या श्राद्ध भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार पितृपक्ष में पितर धरती पर विचरण करते हैं , अगर पितरों का श्राद्ध ना किया जाये तो उनकी आत्मा पृथ्वी पर भटकती रहती है। जिसके प्रभाव से घर-परिवार के लोगों को भी आये दिन दु:ख-तकलीफ का सामना करना पड़ता है। इसलिये बहुत जरूरी है कि अगर आप पितरों की पुण्य तिथि भूल चुके हैं तो इस तिथि पर उनका श्राद्ध अवश्य ही कर दें। मान्यताओं के अनुसार इस दिन वे लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं जिनकी मृत्यु किसी महीने की अमावस्या तिथि को हुई हो या जिन्हें अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि आदि के बारे में जानकारी नहीं होती। इस दिन हर कोई अपने पूर्वजों का श्राद्ध व पितृ तर्पण कर सकता है इसलिये इस अमावस्या को बहुत खास माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध किये जाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन पीपल पेंड़ में जल , पुष्प , अक्षत , दूध , गंगाजल , काला तिल चढ़ाकर दीपक जलाने एवं नाग स्तोत्र , महामृत्युंजय मंत्र , रूद्रसूक्त , पितृस्तोत्र , नवग्रह स्तोत्र , विष्णु मंत्र का जाप , गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने से पितरों को शांति मिलती है एवं पितृदोष में कमी आती है। इस दिन पितरों के योगदान को याद करते हुये उनका आभार व्यक्त करना चाहिये। इस दिन पितरों को विदाई देते समय उनसे किसी भी भूल की क्षमा याचना भी करनी चाहिये।इन चीजों से करें परहेजसर्व पितृ अमावस्या में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिये। इस दिन हर प्रकार की बुराई से बचने का प्रयास करना चाहिये , नशा आदि से भी बचना चाहिये। क्रोध और अहंकार के साथ लोभ से भी दूर रहना चाहिये। यूं तो पूरे पितृ पक्ष में तेल नहीं लगाना चाहिये , लेकिन इस दिन तो विशेषकर तेल लगाना निषेध ही है। इस दिन जब आप श्राद्ध करें तो उसमें लोहे के बर्तन , बासी फल-फूल और अन्न का उपयोग ना करें। इसके अलावा मांस-मदिरा , उड़द दाल , मसूर , चना , खीरा , जीरा , सत्तू और मूली का भी सेवन ना करें, यह पूर्णतया वर्जित है।सर्व पितृ अमावस्या कथापौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रेष्ठ पितृ अग्निष्वात और बर्हिषपद की मानसी कन्या अक्षोदा घोर तपस्या कर रही थीं। वह तपस्या में इतनी लीन थीं कि देवताओं के एक हजार वर्ष बीत गये , उनकी तपस्या के तेज से पितृ लोक भी प्रकाशित होने लगा। प्रसन्न होकर सभी श्रेष्ठ पितृगण अक्षोदा को वरदान देने के लिये एकत्र हुये। उन्होंने अक्षोदा से कहा कि हे पुत्री ! हम सभी तुम्हारी तपस्या से अति प्रसन्न हैं , इसलिये जो चाहो वर मांग लो। लेकिन अक्षोदा ने पितरों की तरफ ध्यान नहीं दिया , वह उनमें से एक अति तेजस्वी पितृ अमावसु को अपलक निहारती रही। पितरों के बार-बार कहने पर उसने कहा हे भगवन ! क्या आप मुझे सचमुच वरदान देना चाहते हैं ? इस पर तेजस्वी पितृ अमावसु ने कहा, ‘हे अक्षोदा वरदान पर तुम्हारा अधिकार सिद्ध है , इसलिये निस्संकोच कहो। अक्षोदा ने कहा भगवन यदि आप मुझे वरदान देना ही चाहते हैं तो मैं तत्क्षण आपके साथ का आनंद चाहती हूं। अक्षोदा के इस तरह कहे जाने पर सभी पितृ क्रोधित हो गये। उन्होंने अक्षोदा को श्राप दिया कि वह पितृ लोक से पतित होकर पृथ्वी लोक पर जायेगी। पितरों के इस तरह श्राप दिये जाने पर अक्षोदा पितरों के पैरों में गिरकर रोने लगी। इस पर पितरों को दया आ गई , उन्होंने कहा कि अक्षोदा तुम पतित योनि में श्राप मिलने के कारण मत्स्य कन्या के रूप में जन्म लोगी। भगवान ब्रह्मा के वंशज महर्षि पाराशर तुम्हें पति के रूप में प्राप्त होंगे और तुम्हारे गर्भ से भगवान व्यास जन्म लेंगे। उसके उपरांत भी अन्य दिव्य वंशों में जन्म लेते हुये तुम श्राप मुक्त होकर पुन: पितृ लोक में वापस आ जाओगी। पितरों के इस तरह कहे जाने पर अक्षोदा शांत हुई। अक्षोदा के प्रणय निवेदन को अस्वीकार किये जाने पर सभी पितरों ने अमावसु की प्रशंसा की और वरदान दिया- हे अमावसु ! आपने अपने मन को भटकने नहीं दिया, इसलिये आज से यह तिथि आपके नाम अमावसु के नाम से जानी जायेगी। ऐसा कोई भी प्राणी जो वर्ष में कभी भी श्राद्ध-तर्पण नहीं करता है , अगर वह इस तिथि पर श्राद्ध पर करेगा तो उसे सभी तिथियों का पूर्ण फल प्राप्त होगा। तभी से इस तिथि का नाम अमावसु (अमावस्या) हो गया और पितरों से वरदान मिलने के फलस्वरूप अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध के लिये सर्वश्रेष्ठ पुण्य फलदायी माना गया।