: बालको की आरोग्य परियोजना से उभर रहा है एक सशक्त, नशामुक्त समाज
Sat, May 31, 2025
बालकोनगर, 31 मई, 2025।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने आरोग्य परियोजना के अंतर्गत समुदाय में नशे की लत के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया है। इस अभियान का उद्देश्य नशे की आदत से होने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक दुष्प्रभावों को कम करना तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में परिवर्तनकारी प्रयास बन चुका है।
अब तक इस पहल के अंतर्गत 20 नशा मुक्ति समितियों का गठन किया जा चुका है, जिनकी भागीदारी से 7 गांवों में शराब के उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त गाँव में ‘ग्राम नशामुक्ति समिति’ का गठन किया गया जिसमें सार्वजनिक आयोजनों में नशे की हालत में पकड़े जाने पर अर्थदंड का नियम हैं। सामूहिक कर्यक्रम में इसका असर साफ दिखाई दिया, जहाँ लोग शराब से दूरी बना लिए हैं जो समुदाय में अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति चेतना को दर्शाता है।
नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो, दीवार पर संदेश, पोस्टर, स्लोगन और रैलियों जैसे सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यों के ज़रिए यह अभियान समुदाय तक पहुंच रहा है। विशेष रूप से स्कूलों में बच्चों को बचपन से ही नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देकर उन्हें एक सशक्त और जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पिछले वर्ष इस अभियान के माध्यम से 1,941 लोगों को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक किया गया था।‘तम्बाकू निषेध दिवस’ के अवसर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नशा मुक्ति समितियों द्वारा जागरूकता रैलियों, संवाद बैठकों और वालंटियर्स के माध्यम से नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया, जिससे 460 से अधिक लोगों को सीधे रूप से प्रभावित किया गया।बालको की आरोग्य परियोजना एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के साथ-साथ जनचेतना का प्रतीक बन चुका है जो समाज को जागरूकता, जिम्मेदारी और स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जा रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नशामुक्त, सशक्त और संवेदनशील समाज की नींव रख रही है।
: बालको ने प्रोजेक्ट ‘नयी किरण’ के माध्यम से 85,000 लोगों के जीवन को संवारा
Wed, May 28, 2025
बालकोनगर, 28 मई 2025। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अपनी प्रमुख सामुदायिक परियोजना ‘नयी किरण’ के माध्यम से 85,000 से अधिक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इस पहल के अंतर्गत कंपनी ने कोरबा, छत्तीसगढ़ के 45 गांवों में माहवारी से जुड़े मिथकों को तोड़ते हुए, खुली बातचीत को बढ़ावा तथा सतत माहवारी स्वच्छता प्रथाओं को अपनाने की दिशा में प्रयास किए।
प्रोजेक्ट नयी किरण का उद्देश्य माहवारी से जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को जड़ से समाप्त करना है। यह पहल लोगों को माहवारी स्वच्छता पर सही जानकारी और माहवारी संसाधन से सशक्त बना रहा है। परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से समुदाय को सतत एवं सुरक्षित माहवारी स्वच्छता पर जागरूक किया है।बालको द्वारा इस परियोजना के तहत विभिन्न कार्यक्रम संचालित की गई हैं। इसमें अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और किशोरों को प्रशिक्षित करना, जिससे वे परिवर्तन के वाहक बन सकें। साथ ही 50 प्रतिशत सरकारी हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों को ‘माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम)’ अनुकूल बनाया गया है, जहां किशोरावस्था और यौवनावस्था से संबंधित नियमित सत्र आयोजित किए जाते हैं। लगभग 700 सामुदायिक सदस्यों को एमएचएम साथी के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपने समुदाय में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक परिवर्तन लाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि बालको में हम समुदाय की समग्र भलाई को अपने विकास कार्य के केंद्र में रखते हैं। चाहे वह डोर-टू-डोर स्वास्थ्य सेवा, प्रशिक्षण सत्र या अत्याधुनिक अस्पताल हो हमारा लक्ष्य एक ऐसा वातावरण बनाना है जहाँ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। जागरूकता से ही सशक्तिकरण की शुरुआत होती है और हमें इस बदलाव को हर स्तर पर निरंतर रूप से आगे बढ़ाने पर गर्व है।सरकारी स्कूल की अध्यापिका दीप्ति सिंह बताया कि एमएचएम साथी बनने का अनुभव शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों के लिए लिए अत्यंत परिवर्तनकारी रहा है। कभी जो विषय चुप्पी और गलतफहमियों से घिरा था, आज हमारे स्कूल को एक एमएचएम फ्रेंडली स्कूल के रूप में पहचान मिली है। यहाँ किशोरियाँ अब सुरक्षित, जागरूक और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करती हैं। नयी किरणके माध्यम से हम बच्चों को न केवल शिक्षा में बल्कि गरिमा के साथ जीवन जीने में भी सहयोग कर पा रहे हैं।बालको ने वर्षों से व्यवहार परिवर्तन को प्रेरित करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित की हैं। कंपनी ने सामुदायिक सत्र के माध्यम से इंटरएक्टिव सेशन जैसे 'चाय पे चर्चा' और 'रात्रि चौपाल' आयोजित की। साथ ही 'माँ बेटी- सास बहू सम्मेलन' आयोजित किया, जो माहवारी के बारे में पीढ़ी दर पीढ़ी संवाद को प्रोत्साहित करता है। कंपनी ने 'सेफ स्पेस कैंपेन' लॉन्च किया, जिसमें स्थानीय क्लीनिक, दुकान और स्कूल को निर्णय-मुक्त क्षेत्र के रूप में पहचानने का काम किया। बालको ने 'सपोर्टिंग ग्रीन पीरियड्स' नामक एक कर्मचारी स्वंयसेवी कार्यक्रम भी शुरू किया, जिसके तहत महिलाओं को पुनः उपयोगी कपड़े के पैड बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। इसके साथ ही बालको ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई जानकारी, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री और टेराकोटा से बने शारीरिक संरचना के मॉडल वितरित किए।इस पहल को कई प्रतिष्ठित संस्थानों से सराहना मिली है। हाल ही में एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने बालको को "माहवारी स्वच्छता में अधिकतम प्रभाव डालने वाली सीएसआर पहल - कॉर्पोरेट और पीएसयू श्रेणी" में एसोचैम पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया है।2019 में शुरू हुई ‘नयी किरण’ का उद्देश्य माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों एवं मिथकों को तोड़ना, सतत स्वच्छता विकल्प के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित प्रजनन स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण देना है। अब तक इस परियोजना के माध्यम से 45 गांवों में 85,000 से अधिक लोगों को जागरूक किया गया है और 700+ समुदाय सदस्यों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है जो अपने समुदाय में परिवर्तन के अग्रदूत बन सके हैं। इस कार्यक्रम में किशोर लड़के-लड़कियां, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं और आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ता शामिल हैं।
: बालको ने जैव विविधता दिवस पर वन्यजीव संरक्षण जागरूकता का चलाया अभियान
Tue, May 27, 2025
बालकोनगर, 27 मई 2025।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर द एनिमल केयर ऑर्गेनाइजेशन (टाको) के सहयोग से आस-पास के गांवों में जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस वर्ष की थीम ‘प्रकृति के साथ सौहार्द और सतत विकास’ के अनुरूप इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समुदाय को वन्यजीव व्यवहार, संघर्ष निवारण और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूक तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को प्रोत्साहित करना था।
कोरबा के वन क्षेत्रों में पाए जाने वाले स्लॉथ बियर (भालू की एक प्रजाति) के संरक्षण पर केंद्रित सत्र का आयोजन किया गया। जानवरों के व्यवहार को समझाकर मानव तथा वन्यजीव संघर्ष को कम करने के तरीकों को साझा किया गया, जिसमें 300 से अधिक सदस्यों एवं स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से व्यावहारिक परिदृश्य को दर्शाते हुए लोगों को वन्यजीव संरक्षण हेतु संवेदनशील और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कहानी और क्विज़ के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने और स्थानीय वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में जिला वन और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने स्थानीय जैव विविधता पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और वन-आश्रित क्षेत्रों के निवासियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को प्रोत्साहित किया। इस पहल को स्थानीय पंचायत सदस्यों, पर्यावरणविदों और एनजीओ का भी सहयोग मिला।जैव विविधता संरक्षण के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता के तहत बालको ने सोशल रिवाइवल ग्रुप ऑफ अर्बन, रूरल एंड ट्राइबल (श्रोत) के साथ साझेदारी में कई कार्यक्रम आयोजित किये हैं। इनमें नियमित सामुदायिक स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और पशु कल्याण शामिल हैं, जिसका उद्देश्य स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्स्थापित करने और बनाए रखने में समुदाय-आधारित प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि बालको में हमारा मानना है कि वास्तविक प्रगति औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के संतुलन में निहित है। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर हमारी सामुदायिक भागीदारी की पहल हमारे इस संकल्प को मजबूत करती हैं कि हम स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करें और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व को बढ़ावा दें। हम ‘शून्य हानि’, सतत विकास और राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण के साथ अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।पर्यावरणविद् दिनेश दीक्षित ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि जंगल से लगे क्षेत्रों में जैव विविधता के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। बालको जैसी पहल सराहनीय हैं क्योंकि ये वैज्ञानिक जागरूकता और स्थानीय कार्यवाही के बीच सेतु का काम करती हैं।
गांव के निवासी श्री मंगल सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जानवरों के प्राकृतिक व्यवहार को समझना संघर्ष रोकने में सहायक होता है। सुबह जल्दी या रात के समय (जो वन्यजीवों की गतिविधि के मुख्य समय है) आवाजाही कम करने पर मानव तथा वन्य जीव टकराव की संभावना कम हो जाती है। बालको द्वारा यह जानकारी साझा करने के लिए मैं उनका आभारी हूं।बालको, जैव विविधता और पशु कल्याण को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है इनमें 3,000 से अधिक पशुओं को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर का वितरण, 2,500 से अधिक पशुओं के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, 300 से अधिक कुत्तों का रेबीज टीकाकरण तथा गर्मियों में पशुओं के लिए वॉटर बॉउल चैलेंज के अंतर्गत जल पात्र की व्यवस्था शामिल हैं। ये सभी कदम स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन और मानवीय सह-अस्तित्व को मजबूत करते हैं।टाको अप्रैल 2022 में शुरू हुआ द एनिमल केयर ऑर्गनाइजेशन (टाको), वेदांता लिमिटेड की प्रमुख पशु कल्याण पहल है, जिसका उद्देश्य आवारा और सामुदायिक पशुओं के लिए समग्र देखभाल प्रदान करना है। यह संगठन बचाव, पुनर्वास, रोकथाम, वृद्ध पशु देखभाल और निःशुल्क ओपीडी सेवाएं प्रदान करता है। इसके तहत एक सुपर स्पेशियलिटी वेटरनरी हॉस्पिटल भी संचालित किया जाता है। बालको सहित वेदांता लिमिटेड की सभी यूनिट्स में टाको के उद्देश्य को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।