: किसानों, पशुपालकों का किया गया सम्मान
Mon, Jul 17, 2023
जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ जायसवाल ने बुंदेली गौठान में सर्वाधिक गोबर बिक्री करने वाले गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों, पशुपालकों, सर्वाधिक वर्मी खाद खरीदी करने वाले किसानों को शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया। उन्होंने श्रीमती ईश्वरी बाई, हेमेन बाई, सुनीता बाई, उर्मिला बाई, झूलबाई तथा किसान मनहरण लाल, शंभुनाथ, घनश्याम को सम्मानित किया। इसके साथ ही आजीविका संवर्धन हेतु जय माँ शक्ति स्वसहायता समूह के सदस्यों को मछली जाल एवं आइस बॉक्स तथा जिला खनिज न्यास अंतर्गत किसान, संतोष कुमार, मालिक राम, पुराइन बाई को 03 हॉर्स पॉवर का ओपन वॉल विद्युत पंप प्रदान किया। ग्रामीण रामकृष्ण, सुरेश, दिलेश्वर, समारू, चंद्रिका आदि को कटहल के पौधों का वितरण किया गया।
: किसान सभा ने रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर सीएमडी के नाम गेवरा महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन
Sun, Jul 16, 2023
छत्तीसगढ़ किसान सभा,मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी,भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने संयुक्त रूप से एसईसीएल के सभी क्षेत्रों में भू विस्थापितों के लंबित रोजगार, बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर एसईसीएल के सीएमडी के नाम गेवरा महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपते हुये 19 जुलाई को गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय के महाघेराव करने की चेतावनी दी है।
ज्ञापन सौंपने में प्रमुख रूप से माकपा जिला सचिव प्रशांत झा किसान सभा के जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक,सुमेंद्र सिंह ठकराल, रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम,रेशम यादव,रघु यादव,शिवदयाल कंवर,बसंत चौहान,वीर सिंह,पवन यादव,नरेंद्र राठौर के साथ बड़ी संख्या में भू विस्थापित उपस्थित थे गेवरा महाप्रबंधक एस के मोहंती के साथ भू विस्थापितों ने बैठक में लंबित रोजगार और पुनर्वास की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी देते हुए ज्ञापन सौंपा।माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने बताया कि एसईसीएल द्वारा पूर्व में गेवरा,कुसमुंडा,दीपका,कोरबा क्षेत्र द्वारा कई गांवों का अधिग्रहण किया गया लेकिन आज भी हजारों भू विस्थापित रोजगार के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे है कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 632 दिनों से किसान सभा के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन चल रहा है लेकिन प्रबंधन भू विस्थापितों को गुमराह करने का काम करते आ रही है किसी भी पुनर्वास ग्राम में बुनियादी मानवीय सुविधाओं के साथ बसाहट नहीं दी गई है और न ही यहां के लंबित रोजगार प्रकरणों का निराकरण किया गया है। इन समस्याओं की ओर कई बार प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू विस्थापितों की इन समस्याओं के निराकरण के प्रति प्रबंधन गंभीर नहीं है हर बार आंदोलन के समय झूठा आश्वाशन देने का काम प्रबंधन करता आ रहा है जिससे भू विस्थापितों में काफी आक्रोश है।किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक ने कहा कि ज्ञापन में प्रभावित होने वाले सभी छोटे-बड़े खातेदारों को स्थाई नौकरी देने,शासकीय भूमि पर काबिजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा देने ,पुनर्वास गांव गंगानगर में तोड़े गये मकानों और शौचालयों का क्षतिपूर्ति मुआवजा तत्काल दिये जाने,पुनर्वास गांव को माडल गांव बनाने के साथ 11 सूत्रीय मांगपत्र एसईसीएल प्रबंधन को सोंपा गया है।
किसान सभा नेता ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रामीणों के रोजगार और पुनर्वास के सवाल पर प्रबंधन सकारात्मक पहलकदमी नहीं करती है, तो 19 जुलाई को गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय में अनिच्छित कालीन घेरा डालो डेरा डालते हुए महाघेरव आंदोलन किया जाएगा।
भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम,रेशम यादव,रघु यादव, सुमेंद्र सिंह ठकराल,शिवदयाल कंवर,वीर सिंह,पवन यादव,बसंत चौहान ने कहा कि जिनकी जमीन एसईसीएल ने ली है उन्हें बिना किसी शर्त के रोजगार दिया जाये क्योंकि जमीन ही उनके जीने का एकमात्र सहारा था। आज भुखमरी के कगार पर भू विस्थापित खड़े है। अब आर पार की लड़ाई का समय आ गया है 19 जुलाई को पूरे परिवार सहित हजारों भू विस्थापित आंदोलन में शामिल होंगे। ज्ञापन की प्रति को विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजा गया है।मांगे :-
1) पूर्व में अधिग्रहित गांव के पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों का तत्काल निराकरण कर सभी भू विस्थापितों को रोजगार प्रदान किया जाये।
2) जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और कि जा रही है उन सभी छोटे बड़े खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जाये।
3) शासकीय भूमि पर कबीजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को रोजगार प्रदान किया जाये।
4) अधिग्रहित ग्रामों को पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
5) कोल इंडिया द्वारा पूर्व में अधिग्रहित किये गये जमीनों को मूल किसानों को वापस किया जाये।
6) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
7) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
8) पुनर्वास गांव में काबिज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
9) पुनर्वास गांव गंगानगर में तोड़े गए मकानों, शोचालयो का क्षतिपूर्ति मुआवजा तत्काल दिया जाये।
10) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।
11) विजयनगर(बरेली,खुसरूडीह, कोसमंदा,बिंझरा),गंगानगर,नेहरू नगर,भैसमाखार,वैशालीनगर, बेलटिकरी,सिरकी समेत पुनर्वास सभी गांव को पूर्ण विकसित मॉडल गांव बनाया जाये और सभी मूलभूत सुविधाएं पानी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराया जाये।
: बालको की मोर जल मोर माटी परियोजना से महुआ किसान आर्थिक रूप से लाभान्वित
Fri, May 5, 2023
बालकोनगर, 05 मई 2023। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने छत्तीसगढ़ के महुआ किसानों के आय में वृद्धि को बढ़ावा दिया। कंपनी की 'मोर जल, मोर माटी' परियोजना के अंतर्गत किसानों को गुणवत्ता के आधार पर छंटाई, भंडारण और समग्र प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कौशल में प्रशिक्षित किया जो उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता के अनुरूप आय प्राप्त करने में सक्षम बनाया।
छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में बहुतायत में पाया जाने वाला महुआ का पेड़ आदिवासी समुदाय की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। समुदाय के लोग महुआ के फूलों का उपयोग खाने के साथ ही आय के लिए बाजार में इसका विक्रय भी करते हैं। महुआ के फूल हाइग्रोस्कोपिक होते हैं इसीलिए मंडियों में विक्रय से पहले इसे सुखाया जाता है। वरना अधिक वायुमंडलीय नमी को अवशोषित करने से इनके खराब होने का खतरा होता है। प्रशिक्षण से पहले महुआ किसान अपनी उपज को बिना छांटे सीधे मंडियों में ले जाते थे जहां ग्राहकों को गुणवत्ता में कमी के कारण कम आय प्राप्त होता था।
किसान को इन्हीं नुकसानों से बचाने के लिए बालको ने स्वयं सेवी संगठन एक्शन फॉर फूड प्रोडक्शन (एएफपीआरओ के साथ मिलकर गुणवत्ता प्रबंधन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। सत्र में किसानों को छँटाई एवं श्रेणीबद्ध महुआ के नमूने दिखाए गए तथा अच्छी उपज को अलग करने और उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए उत्पादन को ग्रेड देने की आवश्यकता को बताया गया। साथ ही उत्पादन प्रबंधन तथा बिक्री से जुड़ी सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों और उन्हें खराब मौसम में बेहतर दर अर्जित करने के लिए प्रभावी भंडारण तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। प्रशिक्षण सत्रों से 11 विभिन्न समुदायों के 110 से अधिक किसान लाभान्वित हुए।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने 'मोर जल मोर माटी' परियोजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि बालको में, हम मानते हैं कि हमारा कृषक समुदाय इस क्षेत्र और बड़े पैमाने पर देश में आर्थिक विकास की रीढ़ है। अपने किसानों को आवश्यक कौशल और प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने एवं स्थायी व्यवसाय बनाने के लिए सशक्त बना रहे हैं। हम राष्ट्र निर्माण में सहयोग करने के उद्देश्य से तकनीकी और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से कृषक समुदाय का समर्थन करना जारी रखेंगे। हमें विश्वास है हमारे समर्पित प्रयास वास्तव में स्थानीय समुदायों के जीवन में बदलाव लाएंगे।
सत्र से लाभान्वित डुमरडीह गांव के किसान शिदार सिंह ने कहा कि मैंने महुआ को एक निश्चित मूल्य पर बाजार में बेचने से अच्छा फूलों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटना सीखा। यह हमारे लिए फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि तीनों श्रेणियों से अधिक मूल्य अर्जित करने से मेरी वार्षिक आय में वृद्धि हुई है।
प्रशिक्षण से किसानों की आय में वृद्धि के साथ उनके ग्राहकों को बिना जोखिम गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल रहा हैं तथा जिसका लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाया जाएगा। इस साल लगभग 50 क्विंटल महुआ के फूलों को किसानों द्वारा अलग-अलग श्रेणियों में संग्रहीत किया गया। प्रशिक्षित किसानों द्वारा अपनाई ग्रेडिंग और मानकीकरण से कई अन्य किसानों को समान तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। जिले में महुआ के लिए एक उचित और खुले बाजार को बढ़ावा मिला
वर्तमान में मोर जल मोर माटी परियोजना 32 गांवों में 1400 एकड़ से अधिक भूमि के साथ 2400 किसानों तक अपनी पहुंच बना चुका है। इस परियोजना के तहत 70% से अधिक किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया है जिसमें सिस्टमेटिक राइस इंटेंसीफिकेशन (एसआरआई), ट्रेलिस, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल फसल, सब्जी और गेहूं की खेती आदि जैसी आजीविका बढ़ाने वाली गतिविधियों में लगे हुए हैं। लगभग 15% किसान आजीविका के लिए कृषि से साथ पशुपालन, बागवानी और वनोपज जैसी गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। किसानों के औसत वार्षिक आय में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि और लागत में 40 प्रतिशत की कमी आई है।