किसान सभा के नेतृत्व में रोजगार,बसावट,जमीन वापसी सहित 9 मांगों को लेकर हजारों भू विस्थापितों ने एसईसीएल के कुसमुंडा खदान बंद करते हुए मुख्यालय में तालाबंदी करके डाला डेरा, अधिकारी-कर्मचारी ऑफिस नहीं पहुंच पाए कार्यालय रहा पूर्ण बंद
त्रिपक्षीय बैठक के बाद 29 जुलाई को बिलासपुर के अधिकारियों के साथ बैठक के आश्वाशन के बाद आंदोलन समाप्त,11घंटे कार्यालय और घंटो बंद रहा खदानकुसमुंडा (कोरबा)। छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने बरसों पुराने भूमि अधिग्रहण के बदले लंबित रोजगार प्रकरण, मुआवजा, पूर्व में अधिग्रहित जमीन की वापसी, प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को खदान में काम देने,शासकीय भूमि पे कबीजों को रोजगार-बसावट एवं मुआवजा, महिलाओं को स्वरोजगार, पुनर्वास गांव में बसे भू विस्थापितों को काबिज भूमि का पट्टा देने आदि 9 मांगो को लेकर हजारों भू विस्थापिति के साथ आज एसईसीएल के कुसमुंडा खदान को घंटो बंद कर मुख्यालय के दोनों मुख्य द्वार में तालाबंदी करते हुए डेरा डाल दिया। खदान बंद से एसईसीएल को करोड़ों का नुकसान हुआ और आंदोलनकारियों द्वारा दोनों गेटों को जाम कर देने से आज एक भी अधिकारी-कर्मचारी ऑफिस नहीं पहुंच पाए कोई कार्य नहीं हो पाया कार्यालय के अंदर सन्नाटा छाया रहा। दो दौर की वार्ता विफल हो जाने के बाद आंदोलनकारियों द्वारा घेराव जारी रखने की घोषणा से रात में भी आंदोलन जारी रहने की संभावना को देखते हुए तीसरे दौर की त्रिपक्षीय वार्ता कुसमुंडा भवन में हुई जिसमें दर्री तहसीलदार के के लहरे,कटघोरा तहसीलदार एस मारिया, बांकी थाना प्रभारी , एसईसीएल से एपीएम एस मल्लिक,आर के बधावन किसान सभा की और से जवाहर सिंह कंवर,दीपक साहू,माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, भू विस्थापित रेशम यादव,दामोदर श्याम,रघु,दीनानाथ,बृजमोहन,मोहन यादव,अमृत बाई,तेरस बाई,आशा,छत बाई,हेम बाई उपस्थित थे। बैठक में 29 जुलाई को बिलासपुर के अधिकारियों के साथ बैठक का आश्वाशन दिया और कुसमुंडा में रोजगार से संबंधित रुके फाइल को सात दिवस के अंदर मुख्यालय भेजा जाएगा। उसके बाद 7 बजे रात में आंदोलन समाप्त हुआ।
घेराव कर रहे लोगों में महिलाओं की संख्या बहुत ज्यादा थी। एसईसीएल के आश्वासन से थके भूविस्थापितों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है।उल्लेखनीय है कि रोजगार,मुआवजा और पुनर्वास से संबंधित 9 सूत्रीय मांगों पर छत्तीसगढ़ किसान सभा और रोजगार एकता संघ ने 25 जुलाई से कुसमुंडा खदान बंद और महाप्रबंधक कार्यालय में तालाबंदी करने और घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन करने की घोषणा की थी। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए पिछले कई दिनों से चल रहे अभियान के नतीजे में बड़ी संख्या में महिलाओं सहित हजारों भू विस्थापित किसान सड़कों पर उतर पड़े और मुख्यालय के दोनों गेट को आज सुबह 8 बजे से ही घेर लिया थे। किसान सभा ने ऐलान किया है कि उनका आंदोलन रोजगार, मुआवजा, बसावट के सवाल पर उनके पक्ष में निर्णायक फैसला तक जारी रहेगा। भू विस्थापितों के इस आंदोलन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन दिया।40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन के लिए किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण इस क्षेत्र में किया गया था। आज हजारों भूविस्थापित किसान जमीन के बदले रोजगार और बसावट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पुराने लंबित रोजगार, बसावट, पुनर्वास गांव में पट्टा, किसानों की जमीन वापसी एवं अन्य समस्याओं को लेकर विस्थापित ग्रामीण एसईसीएल पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगा रहे हैं। माकपा जिला सचिव प्रशांत झा,किसान सभा के जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक, भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के दामोदर श्याम, रेशम, रघु यादव, सुमेन्द्र सिंह ठकराल, दीना के साथ प्रभावित गांवों के ललित पटेल,राजू यादव, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।पहले और दूसरे दौर के वार्ता में एसईसीएल प्रबंधन ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा, जिसे आंदोलनकारियों ने ठुकरा दिया है और बिलासपुर मुख्यालय से जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाकर वार्ता करने की मांग पर अड़ गए हैं। माकपा नेता प्रशांत झा का कहना है कि इन मांगों पर ज्ञापन देने और घेराव की चेतावनी देने और इन्हीं मांगों पर कई-कई बार आंदोलन करने के बाद स्थानीय प्रबंधन के साथ वार्ता करने का कोई तुक नहीं है।विकास के नाम पर अपनी गांव और जमीन से बेदखल कर दिए गए विस्थापित परिवार की जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर हो गई है। जिसके बाद अधिकारियों ने 29 जुलाई को बिलासपुर के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक का आश्वाशन दिया।किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने कहा कि 40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन के लिए किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन इसके बाद भी किसी सरकार ने और खुद एसईसीएल ने विस्थापित परिवारों की कभी सुध नहीं ली। आज भी हजारों भूविस्थापित किसान जमीन के बदले रोजगार और बसावट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस क्षेत्र में एसईसीएल ने अपने मुनाफे का महल किसानों और ग्रामीणों की लाश पर खड़ा किया है। किसान सभा इस बर्बादी के खिलाफ भूविस्थापितों के चल रहे संघर्ष में हर पल उनके साथ खड़ी है।
किसान सभा के नेता दीपक साहू, जय कौशिक आदि ने कहा कि पुराने लंबित रोजगार, बसावट, पुनर्वास गांव में पट्टा, किसानों की जमीन वापसी एवं अन्य समस्याओं को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है और उनके साथ धोखाधड़ी कर रही है। इसलिए किसान सभा और अन्य संगठनों को मिलकर संघर्ष तेज करना होगा, ताकि सरकार और एसईसीएल की नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके।
भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के दामोदर श्याम,रेशम यादव,रघु ने कहा कि जिनकी जमीन अधिग्रहण की गई है उन्हे बिना किसी सर्त तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
किसान सभा ने एलान किया है की अगर 29 जुलाई की बैठक में भू विस्थापितों के पक्ष में निर्णय नहीं आया तो अनिश्चित कालीन महाघेराव किया जाएगा।घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन की *प्रमुख मांगों* मांगे :-
1) पूर्व में अधिग्रहित गांव के पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों के तत्काल निराकरण के संबंध में
A) जिन भू विस्थापितों का फाईल बिलासपुर मुख्यालय में हैं उन्हें दस दिवस के अंदर रोजगार प्रदान किया जाए।
B) भू विस्थापित जिनकी जमीन सन् 1978 से 2004 तक अर्जन की गई है उन प्रत्येक खातेदार की रोजगार संबंधित प्रक्रिया पूरी कर एसईसीएल मुख्यालय भेजा जाए।
C) भू विस्थापित जिन्होंने नामांकन के लिए आवेदन किया है उन्हे तत्काल नामांकन फार्म दिया जाए।2) जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और कि जा रही है(खोडरी,पाली, जटराज) गांव के सभी छोटे बड़े खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जाये।
3) बरपाली,गेवरा के शासकीय भूमि पर कबीजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा प्रदान किया जाये।
4) अधिग्रहित ग्रामों को पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
5) कोल इंडिया द्वारा पूर्व में अधिग्रहित ग्राम खमहरिया के मूल किसानों को जमीन वापस किया जाये।
6) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापित परिवार के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
7) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
8) पुनर्वास गांव में काबिज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
9) भैसमाखार,मनगांव,वैशालीनगर समेत पुनर्वास सभी गांव को पूर्ण विकसित मॉडल गांव बनाया जाये और सभी मूलभूत सुविधाएं पानी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराया जाये।