: पुरी शंकराचार्यजी संगठन द्वारा की गई सामूहिक हनुमत आराधना
Sun, Oct 1, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर एवं हिन्दू राष्ट्र प्रणेता अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वतीजी महाराज द्वारा सनातन संस्कृति संरक्षणार्थ संस्थापित संगठन धर्मसंघ पीठपरिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा शीघ्र हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आज पूर्णिमा तिथि को श्रीसुदर्शन संस्थानम् शंकराचार्य आश्रम रायपुर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। जिसमें आनंदवाहिनी प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती सीमा तिवारी , आदित्यवाहिनी प्रदेश अध्यक्ष टीकाराम साहू , रुद्रानंद महाराज , संजय सिंह , के. एन मिश्रा , राकेश राजगड़िया , राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय , रविशंकर पाण्डेय , मीना पाण्डेय , हिना पाण्डेय , दानेश्वर पाण्डेय , रोशनी पाण्डेय उपस्थित रहे।इसी कड़ी में मुस्कान भवन बिलासपुर , अभनपुर , दुर्गा मंदिर बरौंडा चौक महासमुंद , तेतरकुटी हिंगलाजिन मंदिर , पामगढ़ , रायगढ़ , मुंगेली सहित सभी जिला इकाईयों में सामूहिक हनुमत आराधना के तहत हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। यह सामूहिक पाठ अब प्रांतीय स्तर पर प्रत्येक माह के पूर्णिमा तिथि को निर्धारित समय शाम छह बजे से सात बजे तक संगठन के बैनर के साथ मठ - मंदिर - कार्यालय में प्रत्येक जिला , जोन , नगर , ग्रामीण स्तर तक समस्त इकाईयों में एक साथ आयोजित किया जाना है। जिससे कि समाज में प्रत्येक स्तर पर हिन्दू राष्ट्र निर्माण के प्रति सक्रियता एवं जागरुकता का वातावरण निर्मित हो। उल्लेखनीय है कि आज से दो वर्ष पूर्व चातुर्मास्य के अवसर पर श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी से पूज्य शंकराचार्यजी ने आगामी साढ़े तीन वर्षों ( 42 माह ) में भारत को हिन्दू राष्ट्र के रूप में उद्भाषित होने की घोषणा की थी। उपरोक्त घोषणा के क्रियान्वयन हेतु लगभग आधा समय बीत चुका है अतः बचे हुये समय में समस्त सनातनी धर्मावलंबियों से अपेक्षा है कि अपने अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर पुरी शंकराचार्यजी के मार्गदर्शन में कार्य करते हुये अपने कार्यक्षेत्र को सुसंस्कृत , सुरक्षित , सम्पन्न , सर्वहितप्रद , सेवा परायण व्यक्ति एवं समाज के समूह के रूप में परिवर्तित करें , यही सशक्त हिन्दू राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होगी।उपरोक्त अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में जनजागरण हेतु प्रत्येक पूर्णिमा को आयोजित सामूहिक हनुमत आराधना में संगठन के सभी सदस्य इस अभियान को सफल बनाने में संघर्षरत हैं। संगठन का मानना है कि हनुमानजी बल , बुद्धि , विद्या के प्रतिमूर्ति हैं , जो भी श्रद्धापूर्वक उनकी आराधना करता है उसको ऐच्छिक फल की प्राप्ति होती है। सामूहिक हनुमत आराधना से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त कर हम सब हिंदू राष्ट्र के संकल्प को पूरा कर सकते हैं।
: श्राद्ध और तर्पण से मिलती है पितृ ऋण से मुक्ति - अरविन्द तिवारी
Fri, Sep 29, 2023
रायपुर - हिन्दू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व है। भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों तक का समय श्राद्धपक्ष कहलाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूर्वजों के आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया प्रत्येक मनुष्य को लिये देवऋण , ऋषिऋण और पितृऋण रहता है जिसमें मनुष्य स्वाध्याय करके ऋषिऋण से , यज्ञ करके देवऋण से और श्राद्ध - तर्पण करके पितृऋण से मुक्त होता है। वैसे तो भारत के अनेकों स्थानों पर पिंड दान किये जाते हैं , लेकिन पिंडदान के लिये गया तीर्थ सर्वोत्तम माना गया है।श्राद्धपक्ष में पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है। श्राद्ध में पितरों का तर्पण करने के लिये तिल , जल , चाँवल , कुशा , गंगाजल आदि का इस्तेमाल जरूर करना चाहिये। वहीं केला , सफेद फूल , उड़द , गाय के दूध , घी , खीर , जौ , मूंग , गन्ना के इस्तेमाल से पितर प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध के दौरान तुलसी ,आम और पीपल के पेड़ पर जल चढ़ायें और सूर्यदेवता को सूर्योदय के समय अर्ध्य जरूर दें। पितरों को याद करने , तर्पण एवं श्राद्ध करने के लिये इन दिन का समय तय किया गया है। पितृपक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं। इस साल पितृपक्ष 29 सितंबर पूर्णिमा से शुरू होकर 14 अक्टूबर विसर्जन तक चलेगा। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्राद्ध पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक कुल सोलह दिनों तक चलता है। इन सोलह दिनों में हर दिन अलग-अलग लोगों के लिये श्राद्ध होता है , इसका प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण है। वैसे अक्सर यह होता है कि जिस तिथि को व्यक्ति की मृत्यु हुई है ,श्राद्ध में पड़ने वाली उस तिथि को उसका श्राद्ध किया जाता है। लेकिन इसके अलावा भी यह ध्यान देना चाहिये कि नियम अनुसार किस दिन किसके लिये और कौन सा श्राद्ध करना चाहिये ?किसको करना चाहिये श्राद्ध ?श्रुति स्मृति पुराणों के अनुसार पिता के श्राद्ध का अधिकार उसके बड़े पुत्र को है लेकिन यदि जिसके पुत्र ना हो तो उसके सगे भाई या उनके पुत्र श्राद्ध कर सकते हैं। यह कोई नहीं हो तो उसकी पत्नी कर सकती है। हालांकि जो कुंआरा मरा हो तो उसका श्राद्ध उसके सगे भाई कर सकते हैं और जिसके सगे भाई ना हो , उसका श्राद्ध उसके दामाद या पुत्री के पुत्र (नाती) को और परिवार में कोई ना होने पर उसने जिसे उत्तराधिकारी बनाया हो ,वह व्यक्ति उसका श्राद्ध कर सकता है।सोलह तिथियों का महत्वपूर्णिमा , प्रतिपदा , द्वितीया , तृतीया , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी और अमावस्या ये श्राद्ध की सोलह तिथियां हैं। उक्त किसी भी एक तिथि में व्यक्ति की मृत्यु होती है चाहे वह कृष्ण पक्ष की तिथि हो या शुक्ल पक्ष की। श्राद्ध में जब यह तिथि आती है तो जिस तिथि में व्यक्ति की मृत्यु हुई है उस तिथि में उसका श्राद्ध करने का विधान है। इसके अलावा प्रतिपदा को नाना-नानी का श्राद्ध कर सकते हैं। जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई है उनके लिये पंचमी तिथि का श्राद्ध किया जाता है। सौभाग्यवती स्त्री की मृत्यु पर नियम है कि उनका श्राद्ध नवमी तिथि को करना चाहिये क्योंकि इस तिथि को श्राद्ध पक्ष में अविधवा नवमी माना गया है। यदि माता की मृत्यु हो गई हो तो उनका श्राद्ध भी नवमी तिथि को कर सकते हैं। जिन महिलाओं की मृत्यु की तिथि मालूम ना हो , उनका भी श्राद्ध नवमी को किया जाता है। इस दिन माता एवं परिवार की सभी स्त्रियों का श्राद्ध किया जाता है।इसे मातृ नवमी श्राद्ध भी कहा जाता है। इसी तरह एकादशी तिथि को सन्यास लेने वाले व्यक्तियों का श्राद्ध करने की परंपरा है जबकि सन्यासियों के श्राद्ध की तिथि द्वादशी (बारहवीं) भी मानी जाती है। श्राद्ध महालय के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को बच्चों का श्राद्ध किया जाता है। जिनकी मृत्यु अकाल हुई हो या जल में डूबने , शस्त्रों के आघात या विषपान करने से हुई हो उनका चतुर्दशी की तिथि में श्राद्ध किया जाना चाहिये। सर्वपितृ अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा है। इसे पितृविसर्जनी अमावस्या , महालय समापन आदि नामों से जाना जाता है।
: हिन्दू राष्ट्र निर्माण हेतु प्रत्येक पूर्णिमा तिथि को होगी सामूहिक हनुमत आराधना
Fri, Sep 29, 2023
रायपुर - ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर एवं हिन्दू राष्ट्र प्रणेता अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वतीजी महाराज द्वारा सनातन संस्कृति संरक्षणार्थ संस्थापित संगठन धर्मसंघ पीठपरिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा शीघ्र हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ प्रतिमाह सामूहिक हनुमत आराधना के तहत हनुमान चालीसा पाठ करने का निर्णय लिया गया है। संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों द्वारा ली गई निर्णय के अनुसार हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ प्रतिमाह पूर्णिमा तिथि को सायं छह बजे से सात बजे तक संगठन के बैनर के साथ मठ - मंदिर - कार्यालय में प्रत्येक जिला , जोन , नगर , ग्रामीण स्तर तक समस्त इकाईयों में एक साथ आयोजित किया जाना है। जिससे कि समाज में प्रत्येक स्तर पर हिन्दू राष्ट्र निर्माण के प्रति सक्रियता एवं जागरुकता का वातावरण निर्मित हो। प्रांतीय कार्यालय ने इस आयोजन के फोटोग्राफ श्रीसुदर्शन संस्थानम् के वाट्सएप ग्रूप में भी प्रेषित करने को कहा है ताकि समेकित रूप से इसे राष्ट्रीय कार्यालय भेजा जा सके। बताते चलें चातुर्मास्य में पूज्यपाद पुरी शंकराचार्यजी श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी ओड़िशा में निवासरत रहते हैं , जहाँ प्रातः कालीन सत्र में बृहदारण्यक उपनिषद तथा सायंकालीन सत्र में श्रीमद्भागवत एवं रात्रि में ब्रह्मसूत्र भाष्य पर प्रवचन श्रवण का अवसर मिलता है। चातुर्मास्य के पश्चात राष्ट्रव्यापी हिन्दू राष्ट्र निर्माण अभियान के प्रथम चरण में महाराजश्री का गोवर्द्धन मठ पुरी से संबद्ध शिव गंगा आश्रम प्रयागराज में 01 अक्टूबर से 05 अक्टूबर तक प्रवास रहेगा , जहाँ पर प्रातःकालीन सत्र में संगोष्ठी के अंतर्गत राष्ट्र रक्षा , विज्ञान , गणित आदि विषयों एवं हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त होगा तथा सायं पांच बजे से पुनः आध्यात्मिक संदेश, दर्शन सुलभ होगा। गौरतलब है कि आज से दो वर्ष पूर्व चातुर्मास्य के अवसर पर श्रीगोवर्द्धनमठ पुरी से पूज्य शंकराचार्यजी ने आगामी साढ़े तीन वर्षों ( 42 माह ) में भारत को हिन्दू राष्ट्र के रूप में उद्भाषित होने की घोषणा की थी। उपरोक्त घोषणा के क्रियान्वयन हेतु लगभग आधा समय बीत चुका है अतः बचे हुये समय में समस्त सनातनी धर्मावलंबियों से अपेक्षा है कि अपने अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर पुरी शंकराचार्यजी के मार्गदर्शन में कार्य करते हुये अपने कार्यक्षेत्र को सुसंस्कृत , सुरक्षित , सम्पन्न , सर्वहितप्रद , सेवा परायण व्यक्ति एवं समाज के समूह के रूप में परिवर्तित करें यही सशक्त हिन्दू राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होगी। उपरोक्त अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में जनजागरण हेतु प्रत्येक पूर्णिमा को आयोजित सामूहिक हनुमत आराधना में संगठन के सभी सदस्य सभी भक्तवृन्दों को शामिल कर धर्मसंघ पीठपरिषद् आदित्य वाहिनी आनन्द वाहिनी के इस अभियान को सफल बनावें।