: पं० कमल तिवारी के श्रीमुख से आज होगा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
Sat, Sep 21, 2024
कोरबा - सच्चिदानंद भगवान बांकेबिहारीजी एवं राधा रानी की असीम कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद के फलस्वरूप आदिवासी भवन निहारिका , मधु स्वीट्स के पास - नया कांशी नगर कोरबा में स्व० डा० राजेन्द्र कुमार सोनी के पुण्य तिथि के निमित्त 21 सितम्बर से 29 सितम्बर तक पं० कमल तिवारी (उमरेली वाले) के मुखारविंद से संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा आयोजित है। इसके मुख्य यजमान श्रीमति राही देवी कुमार सोनी और आचार्य पं० प्रकाश तिवारी होंगे। भागवताचार्य पं० कमल तिवारी ने चर्चा करते हुये अरविन्द तिवारी को बताया कि आज 21 सितम्बर शनिवार को भव्य कलशयात्रा पश्चात वेदी पूजन एवं भागवत महात्म्य के साथ कथा का शुभारंभ होगा। वहीं दूसरे दिन से प्रतिदिन की कथा का शुभारंभ दोपहर तीन बजे से होगा , जो हरि इच्छा तक चलेगी। कथा की अगली कड़ी में 22 सितम्बर रविवार को परीक्षित जन्म - पाण्डवों की कथा , 23 सितम्बर सोमवार को भरत चरित्र - सति चरित्र और ध्रुव चरित्र की कथा , 24 सितम्बर मंगलवार को प्रहलाद चरित्र और गजेंद्र मोक्ष की कथा , 25 सितम्बर बुधवार को वामन अवतार - श्री रामावतार एवं श्री कृष्णावतार की कथा , 26 सितम्बर गुरूवार को श्रीकृष्ण बाल लीला और गोवर्धन लीला की कथा , 27 सितम्बर शुक्रवार को कंस वध और रुखमणि मंगल की कथा , 28 सितम्बर शुक्रवार को सुदामा चरित्र - परीक्षित मोक्ष - चढ़ोत्तरी के साथ कथा विश्राम , 29 सितम्बर रविवार को तुलसी वर्षा - हवन - सहस्त्रधारा के साथ पूर्णाहुति का कार्यक्रम सम्पन्न होगा।कथा आयोजक ने इस लोक मंगलकारी कल्याणमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में सभी को सपरिवार , इष्टमित्रों सहित पधारकर कथा श्रवण कर पुण्य के भागी बनने की अपील की है।
: श्रीमद्भागवत कथा का बार बार पान करें - पं० दिनेश दुबे
Sat, Sep 21, 2024
जांजगीर चाम्पा - श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि और सर्व वेदान्तों का सार है। अठारह पुराणों के उपवन में श्रीमद्भागवत कल्पतरु की भांति शोभायमान है। बारह स्कंध तथा अठारह हजार श्लोकों वाले यह पुराण ज्ञान का अक्षय भंडार तथा विद्धता की कसौटी है। यह जीव तभी तक अज्ञानवश इस संसारचक्र में भटकता है, जब तक क्षण भर के लिये भी कानों में इस शुकशास्त्र की कथा नहीं पड़ती। जिस प्रकार रस पेड़ ठी जड़ से लेकर शाखा तक व्याप्त रहता है , किंतु इस स्थिति में उसका आस्वादन नहीं किया जा सकता। वही रस जब अलग होकर फल के रूप में आता है तब सभी को प्रिय लगता है। भागवत वेदरूपी कल्पकृक्ष का परिपक्व फल है। शुकदेव रूपी शुक के मुख का संयोग होने से अमृत रस से परिपूर्ण है। यह रस ही रस है। इसमें ना छिलका है , ना गुठली। यह इसी लोक में सुलभ है। इसलिये जब तक शरीर में चेतना रहे तब तक बार-बार इसका पान करें। इसके पठन एवं श्रवण से भोग और मोक्ष सुलभ होने के साथ ही साथ भगवान के चरणकमलों की अविचल भक्ति भी सहज प्राप्त हो जाती है। मन की शुद्धि के लिये इससे बड़ा कोई अन्य साधन नहीं हैं , इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं।
उक्त बातें ब्राह्मणपारा चाम्पा में गोलोकवासी श्रीमति आशा द्विवेदी की स्मृति में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस आज भागवताचार्य पं० दिनेश कुमार दुबे ( पुरगांव वाले) ने मुख्य यजमान श्रीमति श्वेता जयप्रकाश द्विवेदी सहित उपस्थित श्रोताओं को कथा श्रवण कराते हुये कही। आगे राजा परीक्षित की कथा का श्रवण कराते हुये भागवताचार्य ने कहा महाभारत युद्ध में कौरवों ने पांडवों के सारे पुत्रों का वध कर दिया था , तब उनका एकमात्र वंशधर अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहा था। पांडवों के पूरे वंश को खत्म करने के लिये कौरवों के साथी अश्वत्थामा ने उस गर्भस्थ बालक पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया , तब भगवान श्रीकृष्ण ने उतरा के गर्भ में प्रवेश कर उस बालक की ब्रहस्त्र से रक्षा की। गर्भ में कठिन परीक्षा होने के कारण यही बालक परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुये और आगे चलकर राजा हुये। पांडवों ने संसार त्याग करते समय इनका राज्याभिषेक किया था , इन्होंने नीति के अनुसार पुत्र के समान प्रजा का पालन किया। एक समय ये दिग्विजय करने को निकले तो वहां कुरुक्षेत्र में इन्होंने देखा एक आदमी बैल को मार रहा है। वह आदमी जो वास्तव में कलियुग था , उसको इन्होंने तलवार खींचकर आज्ञा दी की यदि तुझे अपना जीवन प्यारा है तो मेरे राज्य से बाहर हो जा। तब कलियुग ने डरकर हाथ जोड़कर पूछा कि महाराज समस्त संसार में आपका ही राज्य है फिर मै कहां जाकर रहूं। राजा ने पांच स्थान बताते हुये कहा जहां मदिरा , जुआ , जीव हिंसा , वैश्यागमन और सुवर्ण हो वहां जाकर रहो। एक बार राजा सुवर्ण का मुकुट पहनकर आखेट खेलने के लिये गये और शिकार करते हुये वे वन में भटकते हुये भूख-प्यास से व्याकुल होकर ऋषि शमीक के आश्रम में पहुंचे। ऋषि उस समय ध्यान में लीन थे , राजा ने उन्हें पुकारा तो भी ऋषि का उन पर ध्यान नहीं गया। राजा को लगा कि ऋषि शमीक ने जानबूझकर उनका अपमान किया है , गुस्से में एक मरे हुये सांप को तीर से उठाकर ऋषि के गले में डाल वे वहां से चले गये। बाद में पहुंचे ऋषि शमीक के तेजस्वी पुत्र श्रृंगी ऋषि को इसका पता लगा तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को सात दिन में तक्षक नाग से काटे जाने का श्राप दे दिया। कथा की अगली कड़ी में व्यासाचार्य ने वराह अवतार की कथा श्रवण कराते हुये कहा पुरातन समय में दैत्य हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया तब भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुये। भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर सभी देवताओं व ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की। सबके आग्रह पर भगवान वराह ने पृथ्वी को ढूंढना प्रारंभ किया और अंतत: पृथ्वी का पता लगाकर समुद्र के अंदर जाकर अपने दांतों पर रखकर वे पृथ्वी को बाहर ले आये। जब हिरण्याक्ष दैत्य ने यह देखा तो उसने भगवान विष्णु के वराह रूप को युद्ध के लिये ललकारा। दोनों में भीषण युद्ध हुआ और अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। भागवताचार्य ने बताया कि का अर्थ है हिरण्य मतलब स्वर्ण और अक्ष मतलब आंखें। जिसकी आंखें दूसरे के धन पर लगी रहती हों , वो वही हिरण्याक्ष है। हिरण्याक्ष का वध करने के बाद भगवान वराह ने अपने खुरों से जल को स्तंभित कर उस पर पृथ्वी को स्थापित कर दिया। इसके पश्चात भगवान वराह अंतर्धान हो गये।
: महानदी में बंद बोरी में मिली लाश का हुआ पर्दाफाश
Fri, Sep 20, 2024
जांजगीर चाम्पा - मृतक के दुर्व्यवहार से तंग आकर लोहे के धारदार हथियार एवं डण्डा से मारकर निर्मम हत्या करने और लाश को छुपाने के उद्देश्य से मृतक के शव को बोरी में भरकर हसदेव नदी में बहाने के दो आरोपियों को शिवरीनारायण पुलिस ने विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उसे न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस हत्याकाण्ड का खुलासा करते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र जायसवाल ने बताया मृतक संतोष कश्यप उम्र 37 वर्ष निवासी सलखन विगत दिवस 13 सितम्बर के लगभग पांच बजे बिना बताये घर से निकला था , जो दूसरे दिन 14 सितम्बर के दस बजे तक घर वापस नहीं आया। मृतक की पत्नी की सूचना पर थाना शिवरीनारायण में गुम इंसान कायम कर पतासाजी की जा रही थी। गुम इंसान जांच के दौरान थाना शिवरीनारायण पुलिस को 15 सितम्बर को सूचना मिला कि ग्राम करही थाना बिर्रा महानदी में एक सफेद प्लास्टिक बोरी में अज्ञात व्यक्ति का शव मिला है। सूचना पर थाना बिर्रा में मर्ग कायम कर जांच पंचनामा कार्यवाही में लिया गया , जिसकी पहचान मृतक संतोष कश्यप उम्र 37 वर्ष निवासी सलखन का होना पाया गया। प्राप्त पीएम रिपोर्ट में डॉक्टर साहब द्वारा मृतक की मृत्यु को होमीसाईडल लेख किये जाने से अज्ञात आरोपी के विरूद्ध मूल अपराध थाना शिवरीनारायण में अपराध कमांक 373/2024 धारा 103(1) , 238 बीएनएस कायम कर विवेचना कार्यवाही में लिया गया। हत्या जैसे मामले की गंभीरता को देखते हुये विवेक शुक्ला (आईपीएस) पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा के निर्देशन में अज्ञात आरोपी की पतासाजी हेतु तत्काल टीम गठित किया जाकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र कुमार जायसवाल एवं एसडीओपी चांपा यदुमणि सिदार के मार्गदर्शन में मृतक को जहां आखिरी बार ग्राम खलखन में देखा गया था , घटनास्थल के आसपास के लोगो को मृतक के संबंध में पूछताछ की जा रही थी। इसी क्रम में विश्वसनीय सुचना मिलने पर संदेही आरोपी रॉकी कश्यप एवं जगदीश कश्यप को हिरासत में लेकर कड़ाई से पुछताछ किया गया। जिसके द्वारा बताया कि मृतक संतोष कश्यप अक्सर आरोपी रॉकी के किराना दुकान में आकर जब चाहे बिना पुछे किसी भी सामान को उठाकर खा देता था एवं ले जाता था। पैसा के लिये बोलने पर तुम गलत काम करते हो तुमको मैं जेल भेजवा दूंगा कहकर धमकी देता था। मृतक के द्वारा दिये गये धमकी से आरोपी रॉकी परेशान हो गया था , तब आरोपी राकी ने अपने दोस्त जगदीश कश्यप के साथ मिलकर उसे मारने का प्लान बनाया। विगत दिवस 13 सितम्बर को शाम लगभग सात बजे के आसपास अपने दोस्त जगदीश कश्यप के साथ शराब पी रहा था उसी समय मृतक संतोष कश्यप भी वहीं पर आया और आरोपी रॉकी के साथ वाद विवाद कर वहां से चला गया। उसके बाद रात्रि लगभग दस बजे संतोष कश्यप फिर दुकान से कुछ दुर रोड पर खड़े होकर गाली गलौच कर शराब मांग रहा था जिसे दोनो आरोपी, मृतक को जान से मारने की नियत से दुकान अंदर से एक लोहे का धारदार हथियार दरैती लाया तथा मृतक के गर्दन के पीछे मारा जिससे मृतक संतोष के गले का पिछला हिस्सा कटकर खेन बहने लगा और मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गई। मृतक के लाश को छिपाने के उद्देश्य से एक प्लास्टिक की सफेद रंग की बोरी में बांधकर दोनो आरोपी मिलकर मोटर सायकल लाल रंग का पैशन प्रो ले जाकर उसी रात लगभग साढ़े बारह बजे ग्राम सलखन , गोधना , कुरियारी , तुस्मा , मुड़पार , कनस्दा , नगारीडीह केरा को पारकर ग्राम सिलादेही के पहले बने हसदेव नदी के पुल पर गये तथा संतोष कश्यप के शव को नदी के तेज बहती पानी में फेक दिये। पुलिस विवेचना दौरान दोनो आरोपियों से वारदात में प्रयुक्त धारदार हथियार , लाठी , मोटर सायकल क्रमांक पैशन प्रो सीजी-11-सीएफ- 1827 को बरामद किया गया है। आरोपियों के विरूद्ध कृत्य धारा सदर का अपराध घटित करना सबूत पाये जाने से शिवरीनारायण पुलिस ने विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया। उक्त कार्यवाही मे एसडीओपी चाम्पा यदुमणी सिदार , उपनिरीक्षक सागर पाठक थाना प्रभारी शिवरीनारायण , सायबर टीम से उपनिरी पारस पटेल प्रभारी सायबर सेल, सउनि विवेक सिंह, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, विवेक सिंह, आरक्षक रोहित कहरा, गिरीश कश्यप एवं सउनि प्रमोद महार , प्रधान आरक्षक विजय निराला, आरक्षक विकाश शर्मा, द्वारिका साहू, महेंद्र राज, रामकुमार कश्यप तेरस साहू थाना शिवरीनारायण का सराहनीय योगदान रहा।गिरफ्तार आरोपीगण -राकी कश्यप पिता स्व० दिलीप कश्यप उम्र 33 वर्ष निवासी सलखन थाना शिवरीनारायण और जगदीश कश्यप पिता स्व० मनहरण कश्यप उम्म्र 29 वर्ष निवासी सलखन थाना शिवरीनारायण जिला जांजगीर चांपा (छत्तीसगढ़)