: नौकरी छोड़ बेजूबानों की सेवा कर रही निधि तिवारी (महिला दिवस पर विशेष)
Tue, Mar 7, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टबिलासपुर - मानवता मनुष्य के लिये सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर वो सारे भाव हैं जिससे वह सामने वाले की पीड़ा को समझ सकता है। इस धरती पर ईश्वर मनुष्य को जन्म देता है , साथ ही अन्य जीव जंतुओ को भगवानजी की रचना के अनुसार मानव जाति अन्य जीव जंतुओ , असहाय एवं पीड़ित जीवों की मदद कर सकें इसलिये उन्होंने हमारे शरीर की रचना ऐसी बनाई , हमें दो हाथ दिये , ज़ुबान दिये ताकि हम भूखे को खाना दे सकें और बेज़ुबानो की मदद कर सकें। ईश्वर ने हमें खुद की जीविका के लिये ये जीवन नही दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम चर्चा करते हैं मानवता को परिभाषित करने वाली बिलासपुर की जीव प्रेमी निधि तिवारी के बारे में। जिन्होंने मूकजीवों की सेवा में अपना जीवन समर्पण किया है। ये हालमुकाम बिलासपुर छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं जबकि इनका जन्म 1996 में ग्राम ढनढन में हुआ। इनके परिवार में माता कविता तिवारी , पिता ओमप्रकाश तिवारी , एक बड़ा भाई नवीन तिवारी एवं एक बड़ी बहन नीलम है। परिवार वालों के सहयोग से ये एक आश्रय चलाती हैं जहाँ जितने भी असहाय जीव जंतु हैं उनको आश्रय प्रदान किया हुआ है। इन्होंने सरवस्ती शिशु मंदिर से अपने स्कूल की शिक्षा प्राप्त की और लखमीचंद कॉलेज से इनजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। अपनी नौकरी छोड़कर बेजूबानों की सेवा करने वाली निधि बताती हैं कि मुझे बचपन से ही जीवों के प्रति लगाव था , मेरी माँ हमेशा मुझे समझाया करतीं थीं कि हर एक जीव एक समान है बस शरीर की रचना अलग है। हर जीवों में एक ही आत्मा है और हर एक मूकजीव को दर्द का एहसास होता है। बस वो बोलकर अपना दर्द नही बता सकते , ये सारी बाते मेरे दिमाग़ में घर कर गई थीं। मैं कभी भी किसी भी जीव को कष्ट में नही देख पाती थी , घायल जीवों को घर ले आती थी और उनकी सेवा कर उन्हें ठीक करती थी। इस सेवा में परिवार वाले हमेशा साथ देते थे। बंदरों के प्रति बचपन से लगाव के बारे में निधि ने बताया जब मैं छोटी थी तब मेरे पापा एक घायल बंदर लेकर आये थे , जिसे माँ-पापा ने मिलकर ठीक किया था। सैकड़ों बंदर हमारे घर आते थे और माँ उन्हें अपने हाथ से खिलाती पिलाती थी , बस यही सब देखकर मेरे मन में इनके लिये संवेदना आई और मन से डर ख़त्म हो गया। बंदरों द्वारा हमला करने के बारे में पूछे जाने पर निधि कहती हैं चूँकि बंदर एक जंगली जानवर है , जो घायल होने पर काटते भी हैं। रेस्क्यू करते समय अभी तक पंद्रह- बीस बंदरो ने मुझे काटा है। रेस्क्यू के समय खतरा के बारे में पूछे जाने पर निधि बताती हैं कि छोटे घायल बच्चे को माँ से अलग करके लाना भी एक बड़ी चुनौती रहती है। माँ किसी भी हाल में अपने बच्चे को छोड़ने के लिये तैयार नही रहती। जैसे तैसे उनका ध्यान भटका कर बच्चे का रेस्क्यू किया जाता है , उस वक़्त माँ आक्रामक हो जाती है और काट लेती है। इस सेवा में जान का ख़तरा भी होता है , क्योंकि ये ग़ुस्से में आक्रमण करते हैं। निधि बताती हैं कि लगातार जीव जंतुओं की रेस्क्यू करने से घर में काफ़ी सारे बेज़ुबान होने लगे तब हमने किराये से जगह लेकर इन्हें वहाँ रखना शुरू किया। वहाँ भी लोगों को परेशानी होने लगी फिर हमने कई बार जगह बदला और अंत में शहर से दूर एक जगह नज़र आई जहाँ एक जीवाश्रय बनाया। वर्तमान में यहां एक सौ से भी अधिक घायल बंदर , बिल्ली , श्वान एवं अन्य जीव जंतुओं का रखरखाव किया जा रहा है। अब तक मेरे द्वारा लगभग तीन सौ घायल बंदरो को ठीक करके उनके परिवेश में छोड़ा जा चुका है , जबकि अन्य जीव जंतु में हज़ारों श्वान , गौ माँ , इत्यादि जीवों को जीवन दान मिला है। ईलाज एवं खाने पीने का खर्चा मेरे परिवार वाले वहन करते हैं , बाक़ी कोई दानी भी कुछ दान दे जाते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के द्वारा भी मदद मिलती है। इंस्टग्राम में दो लाख लोग अलग अलग जगहों से जुड़े हुये हैं जो सहयोग करते हैं। मेरी प्रेणना मेरी माँ रही हैं , उनका यही सपना था की एक जीवाश्रय हो जहाँ हम हर एक बेसहारा जीवों को रख सकें। निधि ने आगे बताया कि अभी तक लगभग उनके द्वारा तीन सौ घायल बंदरो को ठीक कर उन्हें उनके परिवेश में छोड़ा गया है , इनमे सबसे ज़्यादा करेंट के मामले होते हैं। करेंट लगने से वे बुरी तरह जल जाते हैं , जिससे कोई अपना हाथ पैर गँवा बैठता है तो किसी का चेहरा जल जाता है। निधि ने प्रशासन से भी मांग की है कि इन जीवों के लिये कुछ सोचें। सारे जंगल कटते जा रहे हैं , जिसकी वजह से ये शहर की ओर पलायन कर रहे और दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। बिजली लाइन अंडर ग्राउंड कराने का सोचें और ट्रांसफार्मर भी पैक कराया जाये ताकि ये मासूम जीव सुरक्षित हो सकें। निधि ने बताया कि अभी तक लगभग उनके द्वारा तीन सौ घायल बंदरो को ठीक कर उन्हें उनके परिवेश में छोड़ा गया है , इनमे सबसे ज़्यादा करेंट के मामले होते हैं। करेंट लगने से वे बुरी तरह जल जाते हैं , जिससे कोई अपना हाथ पैर गँवा बैठता है तो किसी का चेहरा जल जाता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 35 बंदर हमारे सेवा स्थल में हैं जिनका ईलाज चल रहा है , प्रतिदिन तीन हज़ार से चार हज़ार का फल उनके लिये पापा लेकर आते हैं। अब तक की गंभीर मामलों के बारे में निधि बताती हैं इन्ही सेवा के बीच अभी एक ऐसा मामला आया कि मादा बंदर का बच्चा आधा निकला हुआ था , जिसका ऑपरेशन कर बच्चे और माँ को बचा लिया गया। अंत में निधि तिवारी ने अपने संक्षिप्त संदेश में कहा कि सभी प्रियजनो को ख़ासकर अभिभावक़ो को अपने बच्चों को शिक्षा के साथ साथ जीव प्रेम का संस्कार ज़रूर दें। स्कूल में एक ऐसा विषय भी होना चाहिये , जिसमें मुकजीवो के प्रति प्रेम का पाठ पढ़ा जा सके।
: भेदभाव को मिटाने वाला पर्व है होली - अरविन्द तिवारी
Tue, Mar 7, 2023
रायपुर - होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला हिंदू धर्म के मुख्य त्यौहारों में से एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है जिसे हर धर्म में मनाया जाता है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है जो आज विश्व भर में उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाने लगा है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के अगली सुबह यानि कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली मनायी जाती है जबकि पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। इस पर्व को देश भर में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली को कई जगह धुलेंदी भी कहा जाता है। मथुरा-वृंदावन और ब्रज में जिस तरह से होली मनाई जाती है वो देश भर में नामी है। होली में लोग घरों में तरह तरह के पकवान बनाते हैं। होली वाले दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाकर होली की शुभकामनायें देते हैं। रंग और प्रेम का त्यौहार होली पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर एक दूसरे को अबीर- गुलाल लगाते हुये बधाई का दिन है। होली खेलने के बाद दोपहर में लजीज व्यंजनों का आनंद लिया जाता है। देश के अलावा विदेशों में भी नई उमंग और खुशियों के साथ मनाया जाने वाला होली का यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। होली भेदभाव को मिटाने वाला पर्व है। भारत में अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न तरीके से होली का पर्व मनाया जाता है। चूंकि यह प्रसंग राधा-कृष्ण से जुड़ा हुआ माना जाता है इसलिये मथुरा – वृंदावन और बरसाने में इस पर्व की शोभा देखने लायक होती है। यहां पर होली काफी दिन पहले ही शुरू हो जाती है। जिसमें अलग-अलग तरीकों से होली मनायी जाती है। कहीं लट्ठमार होली तो कहीं फूलों से भी होली खेली जाती है। इसके अलावा हमारे देश में विविध ढंग से होली मनायी और खेली जाती है। जैसे कि कुमाऊं की बैठकी होली , बंगाल की दोल-जात्रा , महाराष्ट्र की रंगपंचमी , गोवा का शिमगो , हरियाणा के धुलंडी में भाभियों द्वारा देवरों की फजीहत , पंजाब का होला-मोहल्ला , तमिलनाडु का कमन पोडिगई , मणिपुर का याओसांग , एमपी मालवा के आदिवासियों का भगोरिया आदि। लेकिन ब्रजभूमि की होली; विशेषकर बरसाने की लट्ठमार होली तो पूरी दुनियां में प्रसिद्ध है।होली की शुरुआतमाना जाता है कि अबीर और गुलाल से होली खेलने का रिवाज बहुत पुराना है। पौराणिक कथाओं अनुसार रंग-गुलाल की यह परंपरा राधा और कृष्ण से शुरु हुई थी। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण बाल उम्र में माता यशोदा से अपने सांवले रंग की शिकायत किया करते थे। वे कहते थे कि मां राधा इतनी सुंदर और गोरी है और मैं इतना काला क्यों हूं ? माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिये सुझाव दिया कि वह राधा को जिस रंग में देखना चाहते हैं उसी रंग से राधा को रंग दें। भगवान श्रीकृष्ण को अपनी माता का ये सुझाव पसंद आया। स्वभाव से चंचल और नटखट श्रीकृष्ण ने राधा को कई रंगों से रंग दिया और श्री अपने मित्रों के साथ उन्होंने गोपियों को भी जमकर रंग लगाया। माना जाता है कि इसी दिन से होली पर रंग खेलने की परंपरा शुरु हो गई।पौराणिक कथापौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप स्वयं को परमशक्तिशाली मानता था। इसी वजह से उसने अपनी प्रजा को आदेश दिया था कि वे किसी भगवान की पूजा नहीं करेंगे , वही उनका भगवान है । लेकिन हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद नारायण का परम भक्त था। वह हर समय श्रीहरि का नाम जपता रहता था। अपने बेटे को भगवान की भक्ति में लीन देखकर हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल हो जाता था। उसने कई बार बेटे को प्रभु की भक्ति से हटाने के प्रयास किया , लेकिन प्रह्लाद तो हर पल श्रीहरि में ही लीन रहता था। कई प्रकार से प्रहलाद को मारने की योजनाओं में असफल होने पर हिरण्यकश्यप ने हारकर अपनी बहन होलिका से मदद मांगी और होलिका से प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठने को कहा जिससे प्रह्लाद उसमें जलकर भस्म हो जाये। दरअसल हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को एक वरदान प्राप्त था जिसकी वजह से अग्नि उसे छू भी नहीं सकती थी। होलिका अग्नि में प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ गई , लेकिन प्रह्लाद की भक्ति की विजय हुई और उस अग्नि में होलिका ही जलकर भस्म हो गई और हरि भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका ना हुआ। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक इसी कहानी को कहा जाता आ रहा है और होली के समय इसे याद किया जाता है।
: जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के महामंत्री फूलदास महंत ने किया बालको प्रबंधन के खिलाफ आगाज
Tue, Mar 7, 2023
पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के जिला महामंत्री फूलदास महंत ने रिंग रोड बालको थाना से होते हुए रिस्दी तक सडक बनाने एवं चौडी करण करते हुए साथ में बीच में पड़ने वाला पुल का भी मरम्मत एवं नवनीकरण के लिये बालको प्रबंधन से मांग की हैं ,साथ ही रिंग रोड में भारी गाडिया दिन भर जाम करके खडी रहती हैं जिसके कारण वह के व्यापारी एवं आम नागरिक बहुत परेशान हैं जिसका तत्काल निराकरण किया जाये एवं यह के स्थानीय शिक्षित बेरोजगरो को शत प्रतिशत रोज़गार देने के लिये भी बालको प्रबंधन से कहा हैं अगर ये मांगे पूरी नही हुई तो 21/03/2023 को बालको की सभी भारी गाड़ियों को पुर्ण तरीके से अनिश्चित काल के लिये बंद करवाया जाएगा।
इस आन्दोलन में नगरवासियों,व्यापारियो एवं सभी ने सहयोग करने को कहा हैं।