: कोरबा यूनियन ने बिजली विभाग कोरबा के अधीक्षण अभियंता को बिजली की समस्याओं बाबत सौपा गया ज्ञापन
Sun, Jul 28, 2024
कोरबा। कोरबा यूनियन के पदाधिकारियों ने तुलसी नगर स्थित बिजली ऑफिस जाकर अधीक्षण अभियंता पी एल सिदार से मुलाकात की एवं बिजली संबंधित अव्यवस्थाओं पर चर्चा कर उनके निराकरण हेतु ज्ञापन सौपा।पी एल सिदार ने बिजली की समस्याओं को गंभीरता से सुना एवं उसके निराकरण के समुचित कदम उठाए जाने की बात कही।
इस मौके पर कोरबा यूनियन की अध्यक्ष सिमरन कौर,उपाध्यक्ष विकास डालमिया,कार्यकारिणी सदस्य लता बौद्ध एवं सरोज पांडे उपस्थित थे।
गौरतलब हैं कि विगत दिनों कोरबा यूनियन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने बिजली की समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन जिलाधीश महोदय को सौंपा था।जिस पर बिजली विभाग ने संज्ञान लेते हुए कार्य किया था लेकिन फिर भी आम जनमानस को बिजली की समस्याओं से कुछ खास निजात नहीं मिल पायी थी । जिस पर तत्परता दिखाते हुए कोरबा यूनियन के पदाधिकारियों ने बिजली विभाग के दफ्तर पहुंचकर निराकरण न होने की स्थिति में उग्र आंदोलन करने की बात कही हैं।
: बालको सीईओ टॉउनहॉल में सुरक्षा संस्कृति पर हुई चर्चा
Sat, Jul 27, 2024
बालकोनगर, 19 जुलाई 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने सीईओ टाउनहॉल आयोजित किया। वरिष्ठ प्रबंधन की उपस्थिति पर कंपनी के रणनीति कार्यों पर चर्चा की गई जिसमें कंपनी के उत्कृष्ट उत्पादन के साथ कार्यस्थल को सुरक्षित बनाना शामिल था। सीईओ ने मजबूत सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 300 से अधिक शॉपफ्लोर, सेफ्टी और संगठन के विभिन्न अन्य विभागों के कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों को एकजुटता के साथ सुरक्षा प्रथम दृष्टिकोण के पालन के लिए प्रोत्साहित किया। सीईओ ने कहा कि हमने समुदाय में सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा दिया है। सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता कर्मचारियों के साथ-साथ समुदाय के प्रति भी है।
बालको एक औद्योगिक संगठन के रूप में समुदाय की सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता दिया है। मानसून ध्यान में रखते हुए कंपनी ने संयंत्र परिसर और टाउनशिप के जल निकासी को सुदृढ़ किया है। बालको अपने दैनिक पत्रिका में प्रतिदिन वन पॉंइट सेफ्टी लेसन मुहिम चलाया है। इसका उद्देश्य है कर्मचारियों को प्रतिदिन सुरक्षा संबंधित एक नई जानकारी देना है। सभी कर्मचारियों के अंदर किसी भी असुरक्षित कार्य को ना कहने के लिए स्वयं को सशक्त महसूस करने के भाव में वृद्धि हुई है। कंपनी संयंत्र के साथ बालको टाउनशिप में यातायात नियमों को लागू करके सभी के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने में भी योगदान दे रहा है।कंपनी ने अपने मासिक सुरक्षा कार्यक्रम ‘सुरक्षा संकल्प’ के जुलाई माह की थीम, "मानसून में सुरक्षित ड्राइविंग- फिसलन/ट्रिप से बचाव" ने मौसम की वजह से आने वाली चुनौतियों के लिए सभी को संबोधित किया। कंपनी का उद्देश्य सभी कर्मचारियों के साथ समुदाय के बीच सुरक्षा जागरूकता को अधिकतम करना है। कंपनी नियम तथा सभी दिशा निर्देशों का पालन कर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाए रखने के महत्वपूर्ण महत्व पर जोर देना है।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों और परिसंपत्तियों की सुरक्षा बालको के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रचालन के विभिन्न स्तरों पर स्मार्ट तकनीकों के अपनाए जाने से उत्पादकता में बढ़ोत्तरी तो होने के साथ सुरक्षा संस्कृति को भी बढ़ावा मिला है। कंपनी अपने ज़ीरो हार्म दृष्टिकोण के अनुरूप सुरक्षा प्रथम नीति को प्राथमिकता देता है जो कंपनी की कार्य संस्कृति में शामिल है। सीईओ ने कहा कि सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ नियमों का पालन करना नहीं है बल्कि यह हमारे कार्य करने के तरीके में समाहित है।विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बालको युवाओं के अंदर सुरक्षा संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वाहनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने 6 किमी तक थर्मोप्लास्टिक मार्किंग सहित विभिन्न मार्गों पर 12 स्पीड ब्रेकर, कई जेब्रा क्रॉसिंग और 40 रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड तैनात किया है। कंपनी ने आग से बचाव के उपाय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किये। कंपनी निरंतर जागरूकता और शैक्षिक पहल के माध्यम से समुदाय के भीतर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध है।कंपनी के सुरक्षा कार्यक्रमों में ‘चेतना’ सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है जो पांच मूलभूत सुरक्षा युक्तियों पर केंद्रित है जो सभी के लिए सुरक्षित आवाजाही, कार्यों और अनुभवों को सुनिश्चित करते हुए संयंत्र परिसर के भीतर एक सुरक्षित वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
: कलम आज उनकी जय बोल - अरविन्द तिवारी
Sat, Jul 27, 2024
रायपुर – आज 26 जुलाई को कारगिल का पच्चीसवां विजय दिवस है। कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के लिये एक महत्वपूर्ण दिवस है। यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का , जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुये वीरगति को प्राप्त हुये। यह दिन समर्पित है उन्हें , जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिये बलिदान कर दिया। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया , जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। इन रणबाँकुरों ने भी अपने परिजनों से वापस लौटकर आने का वादा किया था , जो उन्होंने निभाया भी , मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे , मगर लकड़ी के ताबूत में। उसी तिरंगे मे लिपटे हुये , जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने उठायी थी। जिस राष्ट्रध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुका होता था , वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था। यह कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की जीत के उपलक्ष्य में एवं शहीद हुये जवानों के सम्मान में प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का लाइन ऑफ कंट्रोल यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेह-लद्दाख को भारत से जोड़ने वाली सड़क का नियंत्रण हासिल कर सियाचिन-ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर कर हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिये खतरा पैदा कर रहे थे जिसके चलते यह युद्ध हुआ। लगभग अठारह हजार फीट ऊँचाई में बर्फीली चट्टानों के बीच पूरे दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध में भारतीय थलसेना व वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार ना करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। स्वतंत्रता का अपना ही मूल्य होता है, जो वीरों के रक्त से चुकाया जाता है। वर्ष 1999 में मई से जुलाई तक चलने वाला यह युद्ध जम्मू कश्मीर के कारगिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर हुआ था। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमा लिया था। इस युद्ध में 527 से भी ज्यादा भारतीय सैनिक पाकिस्तान के साथ लड़ाई में शहीद हुये थे वहीं लगभग 1300 से ज्यादा जवान घायल भी हुये थे। अन्त में 26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाये गये ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। भारतीय सैनिकों ने यह जंग जीत कर कारगिल की चोटियों पर फिर से तिरंगा फहराया था। सभी कारगिल शहीदों ने जान की बाजी लगाकर ना केवल दुश्मनों को धुल चटाई थी , बल्कि रणक्षेत्र में उन्हें मार गिराने में भी कामयाब हुये थे। इनकी स्मृति में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। आज भी हम कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन करना नही भूलते। इन शहीदों के घर-आंगन में आज भी मायूसी है। परिजनों को वीर सपूतों के शहादत पर गर्व है , लेकिन उनको खोने का मलाल भी है। मातृभूमि पर सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं , मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिये बसी रहेंगी। आज कारगिल विजय दिवस पर हमारे आज के लिये शहीद होने वाले सभी अमर जवानों को पत्रकारिता जगत के अरविन्द तिवारी की तरफ से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि एवं शत शत नमन।
कलम ✍️ आज उनकी जय बोल।
चढ़ गये जो पुण्यवेदी पर , लिये बिना गर्दन का मोल ।
कलम ✍️ आज उनकी जय बोल ।।