: बालको ने वेदांता स्किल स्कूल के साथ मनाया विश्व युवा कौशल दिवस
Tue, Jul 16, 2024
बालकोनगर, 16 जुलाई 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) अपने वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को स्वावलंबी बनाया है। कंपनी के इस पहल ने 2010 से अबतक छत्तीसगढ़ के 12,000 युवाओं के जीवन में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाने में सहायक बना। विश्व युवा कौशल दिवस पर बालको ने वेदांता स्किल स्कूल में 100 से अधिक प्रशिक्षुओं के लिए कार्यक्रम का आयोजन कियाजिसमें युवाओं को सशक्त बनाने और उनकी क्षमता को पहचानने में कौशल के महत्व पर जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में व्यक्तिगत विकास और व्यावसायिक विकास दोनों को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई प्रतियोगिताएँ शामिल थीं। इनका उद्देश्य छात्रों के अपने-अपने ट्रेड में कौशल को बढ़ाना और साथ ही उनके समग्र व्यक्तित्व को बढ़ावा देना था। आयोजन मनोरंजन और उत्साह से भरा रहा जिसमें नृत्य प्रदर्शन, फैशन शो, खाना पकाने की चुनौतियाँ और अन्य आकर्षक गतिविधियों के अलावा इलेक्ट्रिकल मॉडल बनाना शामिल था।
सोलर पीवी इंस्टॉलर ट्रेड में प्रशिक्षु कशिश यांगडे ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बोली की मैं आर्थिक रूप से सशक्त तथा परिवार का भरण-पोषण करना चाहती थी। सोलर एनर्जी के साथ काम करना अविश्वसनीय रूप से संतुष्टिदायक है। कंपनियों और सरकारी निकायों द्वारा सोलर स्रोतों पर बढ़ते ध्यान के साथ मुझे इस ट्रेड में कुशल होने पर गर्व है।
फिटर ट्रेड से प्रशिक्षण प्राप्त हिमांशु कुमार साहू एक्वा पंप्स लिमिटेड में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी स्वावलंबी बनने की यात्रा को साझा करते हुए कहा कि वेदांता स्किल स्कूल में 45-दिवसीय प्रशिक्षण जीवन बदलने वाला रहा है। आवासीय सुविधा एक महत्वपूर्ण लाभ था जिसे शिक्षण अनुभव को बेहतर बनाया। प्रशिक्षण ने मुझे नौकरी के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल में निपुण बनाया और मेरे व्यक्तित्व को भी निखारा। हमें औद्योगिक संचालन और प्रभावी संचार को समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।45 दिवसीय सिलाई मशीन ऑपरेटर कोर्स की प्रशिक्षु तामेश्वरी पटेल ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि मुझे हमेशा से सिलाई में रुचि रही है और मैं अपनी गुड़ियों के लिए कपड़े बनाती थी। जब एक मित्र ने मुझे वेदांता स्किल स्कूल के सिलाई कार्यक्रम के बारे में बताया तो मैंने इसमें शामिल होने का फैसला किया। प्रशिक्षण ने मुझे रोजगारपरक कौशल प्रदान किए हैं जो मुझे आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए सशक्त भी बनाते हैं।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने वेदांता स्किल स्कूल पहल के महत्व पर बताया कि वेदांता में सतत आजीविका विकास हमारे सामुदायिक प्रयासों का केंद्र है। छत्तीसगढ़ और भारत के भविष्य को आकार देने के लिए हमारे युवाओं को सही कौशल और शिक्षा से लैस करना आवश्यक है। वेदांता स्किल स्कूल स्थानीय युवाओं को रोजगार योग्य कौशल हासिल करने के लिए मार्ग बनाते हैं जिससे उनकी वित्तीय सुरक्षा और आर्थिक विकास सुनिश्चित होता है। व्यक्तियों को सशक्त बनाकर हम सामुदायिक विकास और सशक्त भारत के बड़े लक्ष्य में योगदान करते हैं।वेदांता स्किल स्कूल हॉस्पिटैलिटी, वेल्डिंग, सिलाई मशीन ऑपरेटर, सोलर पीवी टेक्निशियन, इलेक्ट्रिकल, फिटर-लेवलिंग अलाइनमेंट बैलेंसिंग और मोबाइल रिपेयर ऑपरेटर सहित कुल सात ट्रेडों में मुफ्त आवासीय प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। 45 से 60 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार किया गया है। स्कूल स्किल के साथ व्यावहारिक ज्ञान संचार, सुरक्षा, कानूनी अधिकार और मासिक धर्म स्वास्थ्य पर सत्रों के साथ समग्र विकास पर जोर देता है। इसमें अनुभवी बालको कर्मचारियों से मार्गदर्शन शामिल है। वित्तीय वर्ष 2024 में 1241 व्यक्तियों को कार्यक्रम से लाभ हुआ जिनमें 72% महिला उम्मीदवार थीं। 100% प्रशिक्षुओं को रोजगार का अवसर प्राप्त मिलता है जो भारत भर के प्रतिष्ठित विभिन्न संस्थानों में कार्यरत है।
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: बालको ने इंटरनेशनल प्राईड मंथ पर समुदाय में चलाया जागरूक अभियान
Thu, Jul 11, 2024
*बालकोनगर, 10 जुलाई 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने इंटरनेशनल प्राईड मंथ के दौरान जागरूकता बढ़ाने के लिए अपने संयंत्र और समुदाय में विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया। पूरे माह चले इस जागरूकता अभियान में 250 से अधिक कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। सभी लोग एलजीबीटीक्यू प्लस समुदाय के लिए समावेशी वातावरण को बढ़ावा देने के लिए एकजुट हुए।
मासिक पहल में समुदाय को जागरूक करने वाली कार्यशाला शामिल थीं जिसमें समुदाय के नेतृत्वकर्ता, आमजन और सीएसआर हितधारक को लैंगिक के प्रति संवेदनशील और समावेशी समाज बनाने की दिशा में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के लिए आमंत्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में ऐसी एक अनोखी कार्यशाला का नेतृत्व छत्तीसगढ़ की ट्रांसजेंडर पुलिस कांस्टेबल एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री सबुरी शंकर और उद्यमी एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री आरोही महानंदा ने किया। कार्यशाला में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019’ पर विस्तृत चर्चा कर लोगों को जागरूक किया गया। इसकी मदद से ट्रांसजेंडर के कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के बारे में समुदाय को शिक्षित करके एक आधारभूत समझ स्थापित की जो समावेशी समाज को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि कंपनी ने समावेशी संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कदम उठायें हैं। कंपनी ने धातु उत्पादन केवल पुरुष-प्रधान क्षेत्र है इस धारणा को चुनौती देते छत्तीसगढ़ राज्य में पहली मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी है जिसने अपने प्रचालन में ट्रांसजेंडर को शामिल किया। उन्होंने कहा, आज हम छत्तीसगढ़ समुदाय के भीतर एलजीबीटीक्यू प्लस संवेदीकरण कार्यशालाओं के आयोजन में भी अग्रणी बन गए हैं। कंपनी अपनी प्रचालन क्षमता को 1 मिलियन मैट्रिक टन उत्पादन की तरफ लेकर जा रहा है जहां पर सभी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। एलजीबीटीक्यू प्लस भर्ती अभियान चलाकर अपने समावेशी संस्कृति को और व्यापक बना रहे हैं।
समुदाय के साथ संवादात्मक कार्यशाला के बारे में बात करते हुए छत्तीसगढ़ की ट्रांसजेंडर पुलिस कांस्टेबल और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री सबुरी शंकर ने कहा कि बालको में जागरूकता सत्र एक दिन का प्रयास नहीं बल्कि कंपनी ने दो साल पहले अपने कार्यबल में ट्रांसजेंडर को नियुक्त करने की यात्रा शुरू की थी। कंपनी की यात्रा अब समुदाय की जागरूकता तक पहुंच गई है। सत्र में समुदाय ने शालीनता से मेरी बात सुनी और मेरे साथ बातचीत की। मैं समुदायिक स्तर पर इस तरह के सत्र की शुरुआत करने, समावेशिता फैलाने और समाज के हर कोने में हमें सशक्त बनाने के लिए बालको की आभारी हूं।कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों के साथ कंपनी ने प्राइड मार्च का आयोजन किया। एकजुटता दिखाने और प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्टता का जश्न मनाने के लिए हाथ से पेंटिंग और रिबन बांधने का कार्य किया गया। पोस्टर और स्लोगन बनाने की प्रतियोगिताओं में सभी की सक्रिय भागीदारी ने समावेशी एवं सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया।वेदांता के दृष्टिकोण के अनुरूप बालको एक समावेशी कार्यस्थल विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ हर व्यक्ति सम्मानित, मूल्यवान और सशक्त महसूस करता है। इसके लिए विभिन्न पहल शुरू की हैं। एलजीबीटीक्यू प्लस कर्मचारियों के लिए ‘जेंडर रीअफर्मेशन लीव्स एंड कॉम्पेंसेशन पॉलिसी’ की शुरुआत की गई है जिसमें 2 लाख रुपये का एकमुश्त अनुदान और लिंग पुनर्मूल्यांकन सर्जरी करवाने वाले व्यक्तियों के लिए 30 दिन की सवेतन छुट्टी शामिल है। समावेश और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों के साथ लिंग संवेदीकरण कार्यशालाओं का आयोजन होता है।समाज के हाशिये से आद्यौगिक कार्यों में ट्रांसजेंडर समुदाय के नियोजन के लिए तीन-आयामी दृष्टिकोण अपनाना गया है। सबसे पहले स्किल मैपिंग स्टडजी के माध्यम से प्रचालन के भीतर काम करने के लिए आवश्यक उपयुक्त कौशल प्रदर्शित करने वाले ट्रांसजेंडरों का मूल्यांकन और पहचान करना। काम पर गहरा प्रभाव डालने के लिए उनके कौशल का निर्माण, ऑपरेशनल स्किल, सॉफ्ट स्किल और व्यावसायिक ज्ञान के कौशल को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित है। अंत में बालको लिंग-संवेदनशीलता सत्रों और ‘जेंडर-न्यूट्रल’ बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से एक समावेशी माहौल का निर्माण कर समावेश के लिए एक अनुकूल कार्यस्थल तैयार करता है।
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: बालकोनगर में आयोजित जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव में उमड़े भक्तजन
Thu, Jul 11, 2024
बालकोनगर, 7 जुलाई। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बालकोनगर उत्कल भारती समिति ने धूमधाम से आयोजित की। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार सहित अनेक बालको अधिकारियों, कर्मचारियों, उनके परिवारजनों और नगरवासियों ने धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेकर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा एवं बलभद्र को रथ पर आसीन किया।
श्री राजेश कुमार की अगुवाई में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर पुण्य अर्जित किया। रथ यात्रा के आगे चल रहे कर्मा नर्तकों के दल ने तालबद्ध नृत्य से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रथयात्रा बालकोनगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई रामलीला मैदान में बनाए गए गुंडिचा मंदिर तक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की स्थापना कर उनकी आराधना की। 7 जुलाई से 15 जुलाई तक श्री गुंडिचा मंदिर रामलीला मैदान में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। बालकोनगर में 43 वर्षों से रथ यात्रा उत्सव आयोजित किए जाने की परंपरा है।