: नदी में डूबे युवक का एसडीआरएफ टीम ने किया रेस्क्यू
Tue, Jul 26, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजांजगीर चांपा - जिले के हसौद थाना अन्तर्गत आने वाले ग्राम देवरीमठ के महानदी में डूबने वाले मनोज कुमार (32 वर्षीय) का एसडीआरएफ टीम बिलासपुर ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये एसडीआरएफ के जवान दीपक तिवारी ने अरविन्द तिवारी को बताया कि कल सुबह छह बजे मनोज महानदी में डूब गया था जिसे जांजगीर के गोताखोरों द्वारा ढूंढ़ने का काफी प्रयास किया गया। इसके बावजूद नही मिलने पर अधिकारियों द्वारा एसडीआरएफ बिलासपुर की टीम को सूचना दी गई। सूचना प्राप्त होते ही टीम प्रभारी व्यास नारायण कंवर के नेतृत्व में एसडीआरएफ के जवान देर शाम घटनास्थल पहुंचे। फिर सुबह सभी लोग महानदी में लापता मनोज की खोजबीन में लगे रहे। दीपक ने आगे बताया कि लगभग आठ घंटे की अथक प्रयास के बाद डूबने के जगह से एक किलोमीटर दूरी पर सफलतापूर्वक रेस्क्यू करते हुये मनोज का शव बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान हसौद थाना प्रभारी उपनिरीक्षक योगेष पटेल भी उपस्थित थे। वहीं रेस्क्यू टीम में व्यास नारायण कंवर (टीम प्रभारी) / दीपक तिवारी / भरत बंजारे / राजेन्द्र जगत / देवनारायण राठिया / सुरेश आदित्य / अजय सिदार / रामलखन पटेल का सराहनीय योगदान रहा। उल्लेखनीय है कि एसडीआरएफ के इस टीम को अभी कुछ दिन पहले ही पिहरीद के राहुल रेस्क्यू अभियान के लिये भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मानित किया था।
: कलम आज उनकी जय बोल - अरविन्द तिवारी
Tue, Jul 26, 2022
रायपुर – आज 26 जुलाई को कारगिल का तेइसवां विजय दिवस है। कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के लिये एक महत्वपूर्ण दिवस है। यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का , जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुये वीरगति को प्राप्त हुये। यह दिन समर्पित है उन्हें , जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिये बलिदान कर दिया। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया , जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। इन रणबाँकुरों ने भी अपने परिजनों से वापस लौटकर आने का वादा किया था , जो उन्होंने निभाया भी , मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे , मगर लकड़ी के ताबूत में। उसी तिरंगे मे लिपटे हुये , जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने उठायी थी। जिस राष्ट्रध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुका होता था , वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था। यह कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की जीत के उपलक्ष्य में एवं शहीद हुये जवानों के सम्मान में प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का लाइन ऑफ कंट्रोल यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेह-लद्दाख को भारत से जोड़ने वाली सड़क का नियंत्रण हासिल कर सियाचिन-ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर कर हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिये खतरा पैदा कर रहे थे जिसके चलते यह युद्ध हुआ। लगभग अठारह हजार फीट ऊँचाई में बर्फीली चट्टानों के बीच पूरे दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध में भारतीय थलसेना व वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार ना करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। स्वतंत्रता का अपना ही मूल्य होता है , जो वीरों के रक्त से चुकाया जाता है।वर्ष 1999 में मई से जुलाई तक चलने वाला यह युद्ध जम्मू कश्मीर के कारगिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर हुआ था। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमा लिया था। इस युद्ध में 527 से भी ज्यादा भारतीय सैनिक पाकिस्तान के साथ लड़ाई में शहीद हुये थे वहीं लगभग 1300 से ज्यादा जवान घायल भी हुये थे। अन्त में 26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाये गये ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। भारतीय सैनिकों ने यह जंग जीत कर कारगिल की चोटियों पर फिर से तिरंगा फहराया था। सभी कारगिल शहीदों ने जान की बाजी लगाकर ना केवल दुश्मनों को धुल चटाई थी , बल्कि रणक्षेत्र में उन्हें मार गिराने में भी कामयाब हुये थे। इनकी स्मृति में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। आज भी हम कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन करना नही भूलते। इन शहीदों के घर-आंगन में आज भी मायूसी है। परिजनों को वीर सपूतों के शहादत पर गर्व है , लेकिन उनको खोने का मलाल भी है। मातृभूमि पर सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं , मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिये बसी रहेंगी। आज कारगिल विजय दिवस पर हमारे आज के लिये शहीद होने वाले सभी अमर जवानों को पत्रकारिता जगत के अरविन्द तिवारी की तरफ से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि एवं शत शत नमन।
कलम ✍️ आज उनकी जय बोल।
चढ़ गये जो पुण्यवेदी पर , लिये बिना गर्दन का मोल ।
कलम ✍️ आज उनकी जय बोल ।।
: सावन के दूसरे सोमवार पर सोन नदी के जल से होता है त्रिदेव शिवलिंग का जलाभिषेक (एक ही जलहरी पर विराजमान तीन शिवलिंग)
Tue, Jul 26, 2022
*कोरबा:-* भारतवर्ष में शिव जी की मंदिर लगभग प्रत्येक गांव में देखने को मिल जाती है लेकिन इसी धरा पर शिवजी के अद्भुत मंदिरों का भी दर्शन अलग-अलग महत्व वैदिक पुराणों के अनुसार स्थितियों के अनुसार कई रूपों में भी शिव जी की मूर्ति एवं मंदिरों का दर्शन होता है।
कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम सोहागपुर के सोन नदी से क्षेत्र के शिव भक्त कांवर यात्रा सावन के दूसरे सोमवार पर पिछले 6 वर्षों से निकाली जा रही है जो ग्राम पहाड़ गांव के जंगलों पर विराजित वनसरा देवी मंदिर पास एक ही जलहरी पर विराजमान तीन शिवलिंगों पर शिव भक्त कांवर में जल लेकर अभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्त रस्ते पर भक्ति माहौल के बीच शिव भक्ति पर नाचते थिरकते जंगल के बीच पहुंचते हैं जिससे क्षेत्र में एक भक्ति में माहौल उत्पन्न हो जाता है। खरवानी निवासी लखन राठौर ने बताया कि इस कंवर यात्रा की शुरुआत सावन माह के द्वितीय सोमवार पर सुहागपुर सोन नदी से जल भर कर 8 से 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर वनसरा देवी मंदिर के पहले त्रिदेव शिवलिंग विराजमान है। राठौर ने यह भी बताया कि इस शिवलिंग कि जब से पूजन प्रारंभ की गई है तब से एक अलौकिक शक्ति का भी अनुभूति मुझे स्वयं कई मर्तबा हो चुकी है जिसके कारण मेरे आस्था इस वन पर विराजित मां जगत जननी वनसरा देवी एवं त्रिदेव भोलेनाथ पर अटूट है। मैं सावन सोमवार पर कहीं जा पाऊं या ना जा पाव जब तक मेरे शरीर पर शक्ति ऊर्जा रहेगी तब तक मेरे जीवन काल के प्रत्येक सावन के द्वितीय सोमवार पर कांवर यात्रा कर त्रिदेव शिव जी पर जल अभिषेक करूंगा, देखा जा रहा है कि हर वर्ष इस पर लोगों की आस्था बढ़ रही है।