: एनएसयूआई द्वारा पीसीसी अध्यक्ष को बिर्रा कॉलेज मे भवन निर्माण के लिए ज्ञापन दिए
Thu, Nov 25, 2021
जैजैपुर विधानसभा के पूर्व एनएसयूआई कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप पटेल जी व सह संतोष लहरे जी के नेतृत्व में बिर्रा नवीन महाविद्यालय के छात्र-छात्रा द्वारा जन जागरण अभियान पदयात्रा में निकले माननीय प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम जी का भव्य स्वागत किये तथा ग्राम बिर्रा में विगत चार वर्षों से शासकीय नवीन महाविद्यालय के छात्र- छात्रा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के एक छोटे से भवन में अध्ययन कर रहे थे पर वर्तमान समय में छात्र-छात्रा की वृद्धि होने से वहां छात्र छात्रा को भवन के बाहर बैठकर अध्ययन करना पड़ रहा है, इस समस्या को जैजैपुर विधानसभा के भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन तथा बिर्रा कॉलेज के समस्त छात्र छात्रा द्वारा बिर्रा में शासकीय नवीन महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष माननीय मोहन मरकाम जी को ज्ञापन दिए तथा इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर जी, जांजगीर-चांपा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह जी तथा गयाराम पटेल ,प्रभात लहरे,ब्रीटली, धर्मेंद्र भारद्वाज, विवेक , सुशीला पटेल, समारिन यादव , दुर्गेश्वरी पटेल ,गायत्री बर्मन व शासकीय नवीन महाविद्यालय बिर्रा के समस्त छात्र-छात्रा उपस्थित थे|
: पीएम मोदी के कथनी और करनी में अंतर - मो० अमजद
Thu, Nov 25, 2021
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष मो.अमजद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा पहले घोषणा करके नरेंद्र मोदी जी जुमला परोसते है फिर अपनी जुबान से ही मुंह फेर लेते है,एक गरिमा-शाली कुर्सी पर बैठने वाले प्रधानमंत्री को ऐसी दो-मुंही बातें शोभा नही देता इससे देश की मर्यादा और देश का स्वाभिमान-अभिमान को ठेंस पहुंचता है पर नरेंद्र मोदी जी संघ की शाखा से शिक्षा-दीक्षा लेकर आये है इसलिए उन्हें झूठ शोभा देता होगा किंतु देश वासियों को झूठ बर्दाश्त नही होने वाला है"
यह पहला घोषणा नहीं है ऐसे कई घोषणा प्रधानमंत्री जी कर चुकें है जिसका धरातल पर कोई सकारात्मक असर नही है जब भी भाषण देना हो झूठ से सुरू करतें है और झूठ पर ही खत्म करतें है - चूनावी सीजन में यह झूठ मशीन बड़ा विक्राल रूप धारण कर लेता है और जहां भी जाता है सिर्फ झूठ ही बोलता है ऐसी नरेंद्र मोदी सरकार से देश वासियों को सावधान रहने की आवश्यकता है BJP की वास्तविकता ही गुमराह कर सत्ता पर काबिज़ करना है,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस परिवार श्री राहुल गांधी जी की मांग है लाखों लोगों ने कोरोना महामारी में जान गंवाई है उनकी जान तो वापस नही की जा सकती पर उनके परिवार को 4 लाख का कंपनसेशन देकर इस दुख की घड़ी में राहत पहुंचाई जा सकती है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ मुख्यालय रायपुर''
: लक्ष्मी-पूजन से हुई अगहन गुरूवार की शुरुआत
Thu, Nov 25, 2021
रायपुर - अगहन माह की शुरूआत गुरूवार यानि आज से विशेष महत्व के साथ हुई। हिन्दू पंचांग में हर माह का अपना अलग ही महत्व है। शास्त्रों के अनुसार अगहन माह में मांँ भगवती की उपासना शुभ फलदायी होती है। अगहन मास श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इस माह को भगवान ने स्वयं की ही संज्ञा दी है। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अपने मुख से कहते हैं, ‘मैं मार्गशीर्ष माह हूंँ” तथा सतयुग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही साल का प्रारम्भ किया था। जिसकी वजह से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि सतयुग में देवताओं ने मार्गशीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारंभ किया था। अगहन को मार्गशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है। मार्गशीर्ष में किये गये धार्मिक अनुष्ठानों , जप , तप और योग का जीवन में बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष मास में अन्न का दान करना सर्वश्रेष्ठ पुण्य कर्म माना गया है। ऐसा करने पर हमारे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं , साथ ही सभी कामनायें पूरी हो जाती हैं। इस माह जो सुहागन लक्ष्मी की श्रद्धा से उपासना करती हैं , उनके घर में धन के साथ खुशहाली आती है। साथ ही लक्ष्मी और तुलसी साथ में पूजी जाती है। इसके चलते परिवार में लक्ष्मी का वास हमेशा रहता है। इस महीने में व्रत रखकर मां लक्ष्मी की पूजा करता है उस पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और उसके भंडार धन-धान्य से भर जाते हैं। इस बार अगहन माह 20 नवंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा जिसमें 25 नवंबर , 02 दिसंबर , 09 दिसंबर और 16 दिसंबर कुल चार गुरूवार पड़़ेंगे। मान्यताओं के आधार पर अगहन गुरुवार में व्रत रखने का विधान है। इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प किया जाता है। शाम को चंद्रमा के उदित होने के उपरांत पुष्प , नैवेद्य , धूप , दीप प्रज्वलित कर पूजा की जाती है।गुरुवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही माता लक्ष्मी की भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद उन्हें विशेष प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगहन महीने के गुरुवारी पूजा में माता लक्ष्मी को प्रत्येक गुरुवार को अलग-अलग व्यंजनों का भोग लगाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।सजाये गये घर-द्वारगुरुवार के दिन ब्रह्ममुहूर्त में ही घरों के द्वार सजाये गये। महिलाओं ने घर-द्वार सजाने के साथ ही पूजा की तैयारी बुधवार से ही शुरू कर ली थी। बुधवार को महिलायें घर के द्वार से लेकर पूजा स्थल तक चाँवल आटे के घोल से मांँ लक्ष्मी के पद चिन्ह बनायी। गुरुवार की सुबह सूर्य निकलने से पहले महिलायें स्नान-ध्यान कर घर के द्वार पर दीप प्रज्वलित कर मांँ लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की। वहीं महिलाओं ने माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिये घर का द्वार खोल दिया था। सुबह में शंख , घंटी बजाकर आरती के साथ माता लक्ष्मी का स्वागत किया। यही क्रम पूरे अगहन माह हर गुरूवार दोपहर व शाम को भी चलेगा।अगहन गुरुवार की मान्यतामान्यता है कि अगहन गुरुवार में मांँ लक्ष्मी पृथ्वी लोक का विचरण करने आती हैं। गुरुवार को इनका आगमन ऐसे भक्त के यहां होता है , जिनके घर में साफ-सफाई , सजावट व मन , वचन और कर्म से पूरी सात्विकता रहती है। यही वजह है कि महिलायें हर बुधवार को घर-द्वारा को रंगोली से सजा कर मांँ पूजा स्थल तक देवी के पग चिन्ह बना कर गुरुवार को भोर में उनका आह्वान करते हैं। इस अवसर पर जो श्रद्धालु घर-द्वार की विशेष साज-सज्जा के साथ मांँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना करता है , उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।