: पीडिया मुठभेड़ की हो न्यायिक जांच दोषियों पर हो कड़ी कार्यवाही_सीपीआई
Wed, May 22, 2024
सीपीआई जिला कोरबा के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने कहा जंगल में नही हुई मुठभेड़ गांव में ही वनोपज इक्कठे कर रहे आदिवासी आम जनता को घेर कर किया गया निर्मम हत्या जिसमें घूंगे बहरे और नाबालिग भी हैं शामिल । यह घटना दर्दनाक और बेहद निंदनीय दोषियों पर हो कड़ी कार्यहवी*
वर्मा ने आज महामहिम मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली भारत, माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन रायपुर, को माननीय कलेक्टर महोदय जिला कोरबा द्वारा ज्ञापन दिया गया जिसमें वर्मा द्वारा उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य जिला बीजापुर, ग्राम पीडिया रहने वाले आदिवासियों नक्सली बताकर उन पर गोलियां चलाई गई , जिसकी जानकारी आदिवासियों के मसीहा पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव कामरेड मनीष कुंजाम जी को जानकारी मिली तो वह 15 मई 2024 को 15 सदस्यों के साथ पीड़ित आदिवासियों से मिलने पहुंचे, वहां के ग्रामीणों ने मनीष कुंजाम जी को बताया कि हम तेंदू पत्ता वनोपज इक्कठे कर रहे थे तभी पुलिस वालो ने चारों तरफ़ से घेरा और एक जगह लेजाकर गोली मारा गया कइयों ने गुहार लगाई की हमे मत मारिए फिर भी पुलिस ने एक नही सुनी सबकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी।
ताजुब की बात यह है कि उसमे एक ग्रामीण गूंगा भी है अवलम सन्नू जो बोल, सुन नही सकता वहा पत्थर पर बैठा था उसे भी पुलिस ने गोली मारी जिसके चार बच्चे भी हैं ।दूसरा मोटू अवलम जो नाबालिग है उम्र 16 बर्ष
तीसरा ओयम भीमा जो पेड़ पर चढ़ा था उसे वहीं गोली मारा गया
ऐसे करके बारी बारी से सभी को मौत के घाट उतारा गया और एक नाबालिग जिसके पैर में तीन गोली लगी है वह घायल है।
वहां पर जब महिलाएं ऐसे करने से माना करने की बात कही तो उन्हे डंडों और लात घुसे से मारा गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का मानना है कि यदि वह आदिवासी नक्सली थे तो पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए था और फिर पूछताछ करने चाहिए थी लेकिन पुलिस ने बिना सोचे समझे निर्दोष ग्रामीण आदिवासियों पर गोलियां चलाना शुरु कर दिया जो कि सरासर गलत है।
*दूसरा ज्ञापन जिलाधीश महोदय को दिया गया जिसमें बिजली विभाग की लापरवाही के संबंध में उल्लेख किया गया है* कि बिजली विभाग के द्वारा ट्रांसफार्मर लगाया जाता है लेकिन उसे बैरिकेड (घेरा) नहीं किया जाता है। ट्रांसफार्मर में जो पैनल लगे होते हैं उसका दरवाजा भी खुला रहता है या कई पैनल का दरवाजा टूट गये है ट्रांसफार्मर रोड के नजदीक लगे हुए हैं तार भी बिखरा हुआ रहता है जानवर आसपास घास खाने के लिए जाते हैं छोटे-छोटे बच्चों का भी उनसे खतरा बना रहता है पैनल खुला होने के कारण, तार बिखराव के कारण एवं बेरिकेट न होने के कारण कभी-कभी अप्रिय घटना घट सकती है ।
यह की कुछ दिन पहले भदरापारा बालकों में एक गाय ट्रांसफार्मर की पास गई और खंभे के संपर्क में आने से गाय की मृत्यु हो गई क्योंकि खंबे में करंट सप्लाई हो रहा था ।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का यह सुझाव है कि जहां-जहां ट्रांसफार्मर लगे हैं वहां वैरिकेड लगाया जाए एवं लोहे की खंबे की जगह कंक्रीट का खंभा का उपयोग किया जाए जिससे कि अप्रिय घटना घटने से बचा जा सके।वर्मा ने कबीरधाम जिले ग्राम बाहपनी में हुई दुर्घटना में 18 लोगों की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि *छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पीड़ित प्रत्येक परिवारों को 50-50 लाख रुपए दिया* जाए। यह देखा गया है कि ठेकेदारों द्वारा मजदूरों को पिकअप में जानवरों की तरह भरकर ले जाया जाता है इस पर शासन को ध्यान देने की जरूरत है।
ज्ञापन देते समय जिला सचिव कामरेड पवन कुमार वर्मा जिला परिषद सदस्य कामरेड राम मूर्ति दुबे, कामरेड सुनील सिंह उपस्थित थे।
सभी सम्मानित प्रेस के साथियों से मेरा निवेदन है कि इस खबर को अपने न्यूज़ चैनल, पोर्टल में प्रकाशित करने का कष्ट करें।
: सर्वोच्च न्यायालय का फैसला प्रेस की आजादी में मील का पत्थर- सीपीआई
Wed, May 22, 2024
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड पवन कुमार वर्मा करने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यूज क्लिक के एडिटर इन चीफ प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को बुनियादी अधिकारों के खिलाफ और गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। इसके बाद प्रबीर पुरकायस्थ जेल से बाहर आ गए हैं। यह भारत के स्वतंत्र, जनसमर्थक, सामाजिक न्याय और जनवादी लेखकों, पत्रकारिता और आजाद मीडिया के लिए स्वर्णिम दिन है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने भारत के जनतंत्र का गला घोटने की लगातार प्रक्रिया पर जैसे रोक लगा दी है और भारत के लोकतंत्र को जैसे जिंदा कर दिया है। इससे भारत की न्यायपालिका की आजादी पर लगातार मंडराते बादल भी दूर हो जाने वाले हैं।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पिछले कई फैसलों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन में जान डाल दी है। इससे पहले भी भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिलकिस बानो के कानूनी हकों की रक्षा की थी और बिलकिस बानो केस के अपराधियों को जेल की सींकचों के पीछे भेजा था। चंडीगढ़ के मेयर चुनावों में साजिशकर्ता चुनाव अधिकारी के जनतंत्र विरोधी कदमों पर रोक लगाकर, चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी, निष्पक्षता और जनतंत्र की रक्षा की थी।
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपने बहुत ही महत्वपूर्ण फैसले में संविधान के धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों की रक्षा की थी और स्पष्ट तौर से स्थापित किया था कि धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत भारतीय संविधान का बुनियादी सिद्धांत है और भारतीय राष्ट्र-राज्य का कोई धर्म नहीं है, वह पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है।
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले कई साल से जेल में सडाये जा रहे गौतम नवलखा को जमानत दी और उन्हें जेल से बाहर निकलने में मदद की। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देकर जेल से बाहर निकाल कर जनतंत्र की हिफाजत की है।
इन सब मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और दूसरी केंद्रीय एजेंसी की दलीलों को सिरे से ही नकार दिया और उनकी तमाम दलीलों को आजादी के बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत और गैरकानूनी बताया और केंद्र सरकार द्वारा अपने विरोधियों को जेल में डालने की मुहिम पर फिलहाल तो रोक लगाकर कानून के शासन को सर्वोच्चता प्रदान की है।
न्यूज़ क्लिक के मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को जमानत देकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की मनमानी, संविधान विरोधी और गैरक़ानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने का काम किया है। प्रबीर पुरकायस्थ की जमानत का मामला भारत की प्रेस की आजादी के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इससे आजाद पत्रकारिता और लेखन को नवजीवन मिलेगा। अब आजाद पत्रकारों के सिर से सरकारी खौफ और मनमानी के बादल हट जाएंगे। अब वे भयभीत हुए बिना, अपनी सही बातों को जनता तक पहुंचने में और ज्यादा समर्थ हो जाएंगे। अब वे बेखौफ होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के भयंकर परिणामों को जनता तक पहुंचने में और ज्यादा समर्थ हो जाएंगे।
प्रबीर पुरकायस्थ या उनके संस्थान का क्या दोष था? बस यही ना कि वे असली खबरों को जनता के बीच ले जाकर अपने पत्रकारता के पेशे को चार चांद लगा रहे थे और बिना किसी लालच और दबाव के पत्रकारिता के महान पेशे को बेचकर पैसा, नाम, पद या अवांछित लोकप्रियता नही कमा रहे थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवीण पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को एकदम अन्यायपूर्ण, बुनियादी अधिकारों के खिलाफ और गैरकानूनी घोषित कर दिया है। इस केस में दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जरूरी कागजात नहीं दिए गए थे और ना ही उनके वकील को जरूरी और कानूनी सूचनाएं दी गई थीं। न्यूज़ क्लिक ने किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन में उस समय बहुत प्रशंसनीय काम किया था और किसानों के हितों की बहुमूल्य और ऐतिहासिक हिफाजत की थी, जब बीजेपी और भारत के प्रधानमंत्री, इस आंदोलन को खालिस्तानियों द्वारा फंड दिए जाने की बात कर रहे थे। उसे समय प्रबीर पुरकायस्थ और उनके संस्थान के समस्त मीडिया कर्मियों ने अपना सब कुछ दाव पर लगाकर, किसानों की जायज मांगों को जोरदार तरीके से उठाया था और सरकार की किसान विरोधी नीतियों और मंशा का पर्दाफाश किया था।
सर्वोच्च न्यायालय का इस मामले में दिया गया यह अति महत्वपूर्ण फैसला सच में जनतंत्र के लिए जीवनदायिनी साबित होने जा रहा है। यह फैसला सरकार और बीजेपी-आरएसएस के फासीवादी और अधिनायकवादी मुहिम के लिए भारी धक्का है। सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान समय में दिया गया यह फैसला भारत के संविधान, जनतंत्र और मीडिया और प्रेस की आजादी के हिफाजत करने में बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
सर्वोच्च न्यायालय के इन फैसलों ने भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की बहुमूल्य हिफाजत की है और उसे एक नया जीवन और हौंसला प्रदान किया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला पत्रकारों, लेखकों, फेसबुक और व्हाट्सेप पर लिखने वालों, विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस व मीडिया की आजादी की बेशकीमती रक्षा करने वाला सिद्ध होने जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला स्वतंत्र पत्रकारों और लेखकों के लिए एक राहत की उम्मीद लेकर आया है और उन्हें नया हौसला प्रदान करने वाला है।
: महापौर ने निगम क्षेत्र में प्याऊ लगाये जाने के लिए आयुक्त को दिया निर्देश
Tue, May 21, 2024
कोरबा नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रान्तर्गत प्रति वर्ष गर्मी के मौसम में राहगीरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर अस्थायी प्याऊ घर बनाया जाता था जिसमें मिट्टी के घड़े में पानी भरकर दिन में राहगीरों को जल सेवा नगर निगम कोरबा के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इस बार भी क्षेत्र की जनता के द्वारा गर्मी के दिन में प्याऊ लगाये जाने की मांग निरंतर की जा रही है। महापौर राजकिशोर प्रसाद के द्वारा इस पर संज्ञान लेते हुए जनता की मांग पर एवं राहगीरों के सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी अस्थायी प्याऊ काउंटर बनाकर जल सेवा गर्मी के मौसम भर उपलब्ध कराये जाने का निर्देश नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त को दिया गया है।चेतनदास मानिकपुरी निज सहायक माननीय महापौर न.पा.नि. कोरबा (छ.ग.)