: सर्वोच्च न्यायालय का फैसला प्रेस की आजादी में मील का पत्थर- सीपीआई
Wed, May 22, 2024
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड पवन कुमार वर्मा करने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यूज क्लिक के एडिटर इन चीफ प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को बुनियादी अधिकारों के खिलाफ और गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। इसके बाद प्रबीर पुरकायस्थ जेल से बाहर आ गए हैं। यह भारत के स्वतंत्र, जनसमर्थक, सामाजिक न्याय और जनवादी लेखकों, पत्रकारिता और आजाद मीडिया के लिए स्वर्णिम दिन है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने भारत के जनतंत्र का गला घोटने की लगातार प्रक्रिया पर जैसे रोक लगा दी है और भारत के लोकतंत्र को जैसे जिंदा कर दिया है। इससे भारत की न्यायपालिका की आजादी पर लगातार मंडराते बादल भी दूर हो जाने वाले हैं।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पिछले कई फैसलों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन में जान डाल दी है। इससे पहले भी भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिलकिस बानो के कानूनी हकों की रक्षा की थी और बिलकिस बानो केस के अपराधियों को जेल की सींकचों के पीछे भेजा था। चंडीगढ़ के मेयर चुनावों में साजिशकर्ता चुनाव अधिकारी के जनतंत्र विरोधी कदमों पर रोक लगाकर, चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी, निष्पक्षता और जनतंत्र की रक्षा की थी।
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपने बहुत ही महत्वपूर्ण फैसले में संविधान के धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों की रक्षा की थी और स्पष्ट तौर से स्थापित किया था कि धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत भारतीय संविधान का बुनियादी सिद्धांत है और भारतीय राष्ट्र-राज्य का कोई धर्म नहीं है, वह पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है।
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले कई साल से जेल में सडाये जा रहे गौतम नवलखा को जमानत दी और उन्हें जेल से बाहर निकलने में मदद की। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देकर जेल से बाहर निकाल कर जनतंत्र की हिफाजत की है।
इन सब मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और दूसरी केंद्रीय एजेंसी की दलीलों को सिरे से ही नकार दिया और उनकी तमाम दलीलों को आजादी के बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत और गैरकानूनी बताया और केंद्र सरकार द्वारा अपने विरोधियों को जेल में डालने की मुहिम पर फिलहाल तो रोक लगाकर कानून के शासन को सर्वोच्चता प्रदान की है।
न्यूज़ क्लिक के मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को जमानत देकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की मनमानी, संविधान विरोधी और गैरक़ानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने का काम किया है। प्रबीर पुरकायस्थ की जमानत का मामला भारत की प्रेस की आजादी के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इससे आजाद पत्रकारिता और लेखन को नवजीवन मिलेगा। अब आजाद पत्रकारों के सिर से सरकारी खौफ और मनमानी के बादल हट जाएंगे। अब वे भयभीत हुए बिना, अपनी सही बातों को जनता तक पहुंचने में और ज्यादा समर्थ हो जाएंगे। अब वे बेखौफ होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के भयंकर परिणामों को जनता तक पहुंचने में और ज्यादा समर्थ हो जाएंगे।
प्रबीर पुरकायस्थ या उनके संस्थान का क्या दोष था? बस यही ना कि वे असली खबरों को जनता के बीच ले जाकर अपने पत्रकारता के पेशे को चार चांद लगा रहे थे और बिना किसी लालच और दबाव के पत्रकारिता के महान पेशे को बेचकर पैसा, नाम, पद या अवांछित लोकप्रियता नही कमा रहे थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवीण पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को एकदम अन्यायपूर्ण, बुनियादी अधिकारों के खिलाफ और गैरकानूनी घोषित कर दिया है। इस केस में दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जरूरी कागजात नहीं दिए गए थे और ना ही उनके वकील को जरूरी और कानूनी सूचनाएं दी गई थीं। न्यूज़ क्लिक ने किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन में उस समय बहुत प्रशंसनीय काम किया था और किसानों के हितों की बहुमूल्य और ऐतिहासिक हिफाजत की थी, जब बीजेपी और भारत के प्रधानमंत्री, इस आंदोलन को खालिस्तानियों द्वारा फंड दिए जाने की बात कर रहे थे। उसे समय प्रबीर पुरकायस्थ और उनके संस्थान के समस्त मीडिया कर्मियों ने अपना सब कुछ दाव पर लगाकर, किसानों की जायज मांगों को जोरदार तरीके से उठाया था और सरकार की किसान विरोधी नीतियों और मंशा का पर्दाफाश किया था।
सर्वोच्च न्यायालय का इस मामले में दिया गया यह अति महत्वपूर्ण फैसला सच में जनतंत्र के लिए जीवनदायिनी साबित होने जा रहा है। यह फैसला सरकार और बीजेपी-आरएसएस के फासीवादी और अधिनायकवादी मुहिम के लिए भारी धक्का है। सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान समय में दिया गया यह फैसला भारत के संविधान, जनतंत्र और मीडिया और प्रेस की आजादी के हिफाजत करने में बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
सर्वोच्च न्यायालय के इन फैसलों ने भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की बहुमूल्य हिफाजत की है और उसे एक नया जीवन और हौंसला प्रदान किया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला पत्रकारों, लेखकों, फेसबुक और व्हाट्सेप पर लिखने वालों, विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस व मीडिया की आजादी की बेशकीमती रक्षा करने वाला सिद्ध होने जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला स्वतंत्र पत्रकारों और लेखकों के लिए एक राहत की उम्मीद लेकर आया है और उन्हें नया हौसला प्रदान करने वाला है।
: महापौर ने निगम क्षेत्र में प्याऊ लगाये जाने के लिए आयुक्त को दिया निर्देश
Tue, May 21, 2024
कोरबा नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रान्तर्गत प्रति वर्ष गर्मी के मौसम में राहगीरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर अस्थायी प्याऊ घर बनाया जाता था जिसमें मिट्टी के घड़े में पानी भरकर दिन में राहगीरों को जल सेवा नगर निगम कोरबा के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इस बार भी क्षेत्र की जनता के द्वारा गर्मी के दिन में प्याऊ लगाये जाने की मांग निरंतर की जा रही है। महापौर राजकिशोर प्रसाद के द्वारा इस पर संज्ञान लेते हुए जनता की मांग पर एवं राहगीरों के सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी अस्थायी प्याऊ काउंटर बनाकर जल सेवा गर्मी के मौसम भर उपलब्ध कराये जाने का निर्देश नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त को दिया गया है।चेतनदास मानिकपुरी निज सहायक माननीय महापौर न.पा.नि. कोरबा (छ.ग.)
: बालको ने समुदाय में सुरक्षा संस्कृति के विकास को दिया बढ़ावा
Wed, May 15, 2024
बालकोनगर, 15 मई, 2024। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने सामुदायिक विकास पहल के अंतर्गत समुदाय में सुरक्षा की संस्कृति के विकास को मजबूती प्रदान करने के लिए विभिन्न पहल किये है। कंपनी पूरे साल क्षेत्रों में विभिन्न सुरक्षा जागरूकता सत्र आयोजन करने के लिए कटिबद्ध है। ये सभी प्रशिक्षण सत्र रोड, फायर और होम सेफ्टी पर केंद्रित हैं। सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए कंपनी नें समुदाय के 10 प्रमुख क्षेत्रों में 35 यातायात संकेतक स्थापित किए हैं। इस पहल से समुदाय के 4000 सदस्यों के बीच सड़क सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा मिला है।
कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2024 में सफलतापूर्वक 70 से अधिक सुरक्षा प्रशिक्षण सत्र आयोजित किये। विभिन्न सत्रों, क्विज़, स्लोगन, पोस्टर मेकिंग के माध्यम से कंपनी ने स्कूली बच्चों सहित समुदाय के 2000 लोगों को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया है और जिसमें वेदांता स्किल स्कूल के छात्र भी शामिल है। कंपनी ने 16 मास्टर ट्रेनर विकसित किए हैं जो समुदाय के भीतर बालको के शून्य क्षति संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे। ये सभी ट्रेनर समाज में सक्रिय रहकर सुरक्षा सत्र, सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम और सुरक्षा संस्कृति के महत्व के प्रति समुदाय को जागरूक किया है। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बालको युवाओं के अंदर सुरक्षा संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बालको एक औद्योगिक संगठन के रूप में समुदाय की सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता दिया है। सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत विभिन्न पहल का आयोजित किया गया है। सड़क सुरक्षा के प्रति ट्रक ड्राईवर सहित समुदाय में जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सड़क सुरक्षा कैलेंडर लॉन्च किया था। सुरक्षा कैलेंडर की मदद से रक्षात्मक ड्राइविंग की संस्कृति को बढ़ावा दिया गया। कंपनी ने साईकिल से स्कूल जाने वाले 120 विद्यार्थियों को हेलमेट प्रदान कर उन्हें सुरक्षा के लिए प्रोत्साहित किया।सर्वमंगला मंदिर के डायवर्सन से रिंग रोड पर भारी वाहनों के बढ़े दबाव को देखते हुए कंपनी ने रिश्दी से ध्यानचंद चौक तक की सड़क के जिर्णोद्धार सहित रिश्दी से रुमगढ़ा तक जगह-जगह पर चौड़ीकरण का किया गया। वाहनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने 6 किमी तक थर्मोप्लास्टिक मार्किंग सहित विभिन्न मार्गों पर 12 स्पीड ब्रेकर, कई जेब्रा क्रॉसिंग और 40 रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड तैनात किया है।कंपनी ने आग से बचाव के उपाय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किये। बालको की अग्नि सुरक्षा टीम सभी आपातकालीन परिस्थितियों में समुदाय के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है। वित्त वर्ष 2024 में अग्निशमन विभाग ने 200 से अधिक आपात स्थितियों का जवाब दिया है। प्रशिक्षण में आपातकालीन प्रतिक्रिया में तेजी को बढ़ाने के लिए अग्निशामक यंत्र के उपयोग, सीपीआर तकनीक और आग रोकथाम प्रोटोकॉल पर निर्देश शामिल थे। कंपनी निरंतर जागरूकता और शैक्षिक पहल के माध्यम से समुदाय के भीतर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध है।
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