: डबल इंजन की सरकार , यूपी का विश्वास - पीएम मोदी
Wed, Dec 8, 2021
गोरखपुर - जब डबल इंजन की सरकार होती है तो डबल तेजी से काम भी होता है। जब नेक नीयत से काम होता है , तो आपदायें भी अवरोध नहीं बन पातीं। जब गरीब - शोषित - वंचित की चिंता करने वाली सरकार होती है , तो वो परिश्रम कठिन करती है और बेहतर परिणाम भी लाकर दिखाती है। कोरोना के संकट काल में भी डबल इंजन की सरकार विकास कार्य में जुटी रही , कोई काम रूकने नहीं दिया। यही डबल इंजन का डबल विकास है और इसीलिये डबल इंजन की सरकार पर यूपी को विश्वास है। आज का आयोजन इस बात का भी सबूत है कि नया भारत जब ठान लेता है तो इसके लिये कुछ भी असंभव नहीं है।
उक्त बातें आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोरखपुर में खाद कारखाना , एम्स गोरखपुर और आईसीएमआर जांच केंद्र का लोकार्पण करते हुये कही। पीएम ने यहां 9600 करोड़ से भी अधिक की लागत से निर्मित परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित कर कहा खाद कारखाना और एम्स के लिये लोगों का इंतजार अब खत्म हो गया हैै। पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी में करते हुये कहा - धर्म , आध्यात्म और क्रांति का नगरी गोरखपुर के देव तुल्य लोगन के प्रणाम करत बानी। ये पावन धरती के कोटि-कोटि नमन। आप सब लोग जोवने खाद कारखाना और एम्स का बहुत दिन से इंतजार करत रहलीं आज ऊ घड़ी आ गईल बात। आप सबके बहुत बहुत बधाई। पीएम ने कहा कि पांच साल पहले मैं यहां एम्स और खाद कारखाने का शिलान्यास करने आया था , आज इन दोनों का एक साथ लोकार्पण करने का सौभाग्य भी आपने मुझे ही दिया है। आईसीएमआर के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर को भी आज अपनी नई बिल्डिंग मिली है , मैं यूपी के लोगों को बधाई देता हूं। पीएम ने जनसभा को संबोधित करते हुये कहा लाल टोपी वाले सत्ता के लालची और आतंकियों के समर्थक हैं। आज पूरा यूपी भली-भांती जानता है कि लाल टोपी वालों को लाल बत्ती से मतलब रहा है , आपकी दुख-तकलीफों से नहीं। लाल टोपी वालों को घोटालों के लिये , अपनी तिजोरी भरने के लिये , अवैध कब्जों के लिये , माफियाओं को खुली छूट देने के लिये , आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिये , आतंकियों को जेल से छुड़ाने के लिये ही सत्ता चाहिये। याद रखिये लाल टोपी वाले यूपी के लिये रेड अलर्ट यानि खतरे की घंटी है। पहले की सरकारों ने अपराधियों को संरक्षण देकर यूपी का नाम बदनाम कर दिया था। आज माफिया जेल में हैं और निवेशक दिल खोल कर यूपी में निवेश कर रहे हैं , यही डबल इंजन का डबल विकास है। पीएम ने कहा कि सब जानते थे कि गोरखपुर का फर्टिलाइजर प्लांट इस पूरे क्षेत्र के किसानों के लिये , यहां रोजगार के लिये कितना जरूरी था ? लेकिन पहले की सरकारों ने इसे शुरू करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। सब जानते थे कि गोरखपुर में एम्स की मांग बरसों से हो रही थी लेकिन वर्ष 2017 से पहले जो सरकार चला रहे थे , उन्होंने एम्स के लिये जमीन देने में हर तरह के बहाने बनाये। पीएम ने कहा कि गोरखपुर खाद कारखाने की बहुत बड़ी भूमिका देश को यूरिया के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में भी होगी। देश के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे पांच फर्टिलाजर प्लांट शुरु होने के बाद 60 लाख टन अतिरिक्त यूरिया देश को मिलेगा। यानि भारत को हजारों करोड़ रुपये विदेश नहीं भेजने होंगे , भारत का पैसा भारत में ही लगेगा। ये फर्टिलाइजर प्लांट राज्य के अनेक किसानों को पर्याप्त यूरिया तो देगा ही , इससे पूर्वांचल में रोजगार और स्वरोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे।पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह भागीरथी गंगा को लेकर आये , वैसे ही इस फर्टिलाइजर तक ईंधन पहुंचाने के लिये ऊर्जा गंगा को लाया गया है। पीएम ऊर्जा गंगा गैस पाइप लाइन के तहत हल्दिया से जगदीशपुर तक पाइप लाइन बिछायी गई है , इस पाइप लाइन की वजह से गोरखपुर पाइप लाइन तो शुरू हुई ही है , अन्य भागों में भी सस्ती गैस मिलनी शुरू हो चुकी है। पीएम ने कहा किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिये यह जरूरी है कि वहां की स्वास्थ्य सेवायें सुलभ हों , स्वास्थ्य सुविधायें अच्छी , सस्ती और सबकी पहुंच में होनी चाहिये। पहले सोचा जाता था कि एम्स जैसे संस्थान सिर्फ बड़े शहरों के लिये होते हैं , लेकिन हमारी सरकार इसे दूर - दराज के जिलों तक ले जा रही है। आज़ादी के बाद से इस सदी की शुरुआत तक देश में सिर्फ 01 एम्स था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बाजपेयी ने 06 और एम्स स्वीकृत किये थे , बीते 07 वर्षों में 16 नये एम्स बनाने पर देश भर में काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य ये है कि देश के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज जरूर हो। अपने संबोधन में एम्स का जिक्र करते हुये पीएम मोदी ने कहा गोरखपुर में एम्स और आईसीएमआर रिसर्च सेंटर बनने से अब इंसेफेलाइटिस से मुक्ति के अभियान को और मजबूती मिलेगी , इससे दूसरी संक्रामक बीमारियां , महामारियों के बीच उसके बचाव में भी यूपी को बहुत मदद मिलेगी। गोरखपुर में एम्स से इंसेफेलाइटिस सहित तमाम संक्रामक बीमारियों पर अंकुश लगेगा। इस दौरान पीएम योगी ने गन्ना किसानों हेतु लाभकारी मूल्य तीन सौ रुपये तक बढ़ाये जाने के लिये योगी सरकार की तारीफ भी की।
गौरतलब है कि पीएम मोदी आज विशेष विमान से गोरखपुर पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डा. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे। गोरखपुर खाद कारखाना परिसर में पीएम की अगुवानी में लोक कलाकारों के कार्यक्रमों की रंग बिरंगी छटा देखने को मिली। कार्यक्रम स्थल पहुंचकर पीएम ने गोरखपुर खाद कारखाने के मॉडल
का अवलोकन किया। मंच पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी ने पूर्वांचल को ट्रिपल गिफ्ट दिया। उन्होंने रिमोट का बटन दबाकर लगभग 9600 करोड़ रूपये के अधिक के लागत मूल्यों की विकास परियोजनाओं गोरखपुर खाद कारखाना , अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और मेडिकल रीजनल रिसर्च सेंटर का लोकार्पण किया। पीएम द्वारा उद्घाटन किये जाने के बाद लोगों को स्क्रीन पर गोरखपुर खाद कारखाना , गोरखपुर एम्स और मेडिकल रीजनल रिसर्च सेंटर के बारे में बारी-बारी लघु फिल्में दिखायी गई।यहां लगभग 600 एकड़ क्षेत्रफल में 8603 करोड़ रूपये लागत से निर्मित खाद कारखाने में 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का उत्पादन किया जायेगा , इससे क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलने के साथ ही लोगों रोजगार भी मिलेगा। इसी तरह 112 एकड़ क्षेत्र में 1011 करोड़ रूपये लागत से निर्मित एम्स का वर्ष 2016 में पीएम मोदी ने ही शिलान्यास किया था। इसके अलावा आज लोकार्पित हुये नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी’ पुणे की तर्ज पर आईसीएमआर का एक क्षेत्रीय केन्द्र भी गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बन चुका है। इस केंद्र का शिलान्यास वर्ष 2018 में तत्कालीन केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे०पी० नड्डा ने किया था। आरएमआरसी के निर्माण में लगभग 36 करोड़ रूपये की लागत आयी है। आरएमआरसी के लैब्स में इम्युनोलॉजी , मॉलीक्यूलर बायोलॉजी , माइकोलॉजी , माइक्रोबायोलॉजी , मेडिकल इंटेमोलॉजी , नान कम्युनिकेबल डिजीजेज , सोशल बिहैवियर स्टडीज , हेल्थ कम्युनिकेशन और इंटरनेशनल हेल्थ पालिसी उप विभागों के जरिये बीमारियों के कारक वेक्टर/वायरस आदि की पहचान हो सकेगी। यह ना सिर्फ इंसेफलाइटिस , कालाजार , चिकनगुनिया और डेंगू बल्कि कोविड-19 जैसी महामारी से जुड़े वायरस की भी पहचान करने के साथ-साथ उनके उपचार के लिये अनुसंधान को आगे बढ़ाने इत्यादि का काम भी करेगा।
: पीएम मोदी आज उत्तराखण्ड को देंगे कई विकास कार्यों की सौगात
Sat, Dec 4, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टदेहरादून - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के दौरा पर रहेंगे। जहां वे 18 हजार करोड़ रुपये लागत की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसमें करीब 8300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा भी शामिल है। पीएम के चुनावी रैली को देखते हुये पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। जमीन से लेकर आसमान तक तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है , वहीं परेड ग्राउंड के चारों तरफ का इलाका पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वाह्न 11:40 बजे दिल्ली हेलीपैड से वायुयान आईएएफ बीबीजे से उत्तराखंड के लिये रवाना होकर दोपहर 12:25 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट देहरादून पहुंचेंगे। जहां दोपहर 12:30 बजे तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत होगा। फिर जौलीग्रांट एयरपोर्ट से एमआई-17 हेलीकॉप्टर के माध्यम से देहरादून स्थित परेड ग्राउंड के लिये रवाना होकर दोपहर एक बजे वे कार्यक्रम स्थल परेड ग्राउंड पहुंचेंगे। यहां दस मिनट प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद वे दोपहरं 01:10 बजे मंच पर पहुंचेंगे। दोपहर 01:33 से 01:40 बजे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इसके बाद दोपहर 01:40 से 02:15 बजे तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को संबोधित करेंगे। संबोधन पश्चात दोपहर 02:30 बजे वे खेल परिसर हेलीपैड से एमआई-17 हेलीकॉप्टर के माध्यम से जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिये रवाना होकर दोपहर 02:50 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से दोपहर 02:55 बजे प्रधानमंत्री जौलीग्रांट एयरपोर्ट से वायुयान आईएएफ बीबीजे से दिल्ली के लिये रवाना होकर दोपहर 03:40 बजे प्रधानमंत्री दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच जायेंगे।
: भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ होंगी आईएमएफ की प्रथम डिप्टी मैनेंजिग डायरेक्टर
Sat, Dec 4, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
वाशिंगटन - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्ट के तौर पर इस बार भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ (49 वर्षीया) को चुना गया है। वे ज्यॉफ़्रे ओकामोटो की जगह लेंगी। ओकामोटो के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद पर भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ 21 जनवरी से उनका पदभार सम्हालेंगी। यह आईएमएफ में दूसरे नंबर का पद है , भारतीय मूल का कोई व्यक्ति पहली बार आईएमएफ में इस पद पर पहुंचा है।इससे पहले पूर्व गवर्नर रघुराम राजन आईएमएफ की चीफ बनने वाले पहले भारतीय थे। अपनी नई जिम्मेदारी के तहत वे आईएमएफ की तरफ से नीतियों और शोध कार्यों पर निगरानी रखेंगी ताकि संगठन की रिपोर्ट और अन्य प्रकाशित सामग्रियों की गुणवत्ता उच्च बनी रहे। गीता तीन वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में बतौर चीफ इकोनॉमिस्ट के पद पर कार्यरत थी। गीता एक बार फिर जनवरी 2022 से हार्वर्ड विश्वविद्यालय में फिर से शैक्षणिक कार्य शुरू करने वालीं थीं , लेकिन उन्हें पदोन्नति देकर फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है। इस मौके पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मैनेजिंग डायरेक्टर जियोग्रेविया ने कहा कि गीता गोपीनाथ पहली महिला चीफ इकोनॉमिस्ट थीं , हमें इस बात की खुशी है कि वह अपनी सेवायें जारी रखेंगी और अब फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में काम करेंगी। गीता गोपीनाथ का भारत से काफी करीबी नाता रहा है। उनका जन्म केरल (भारत) में हुआ , इनकी नागरिकता अमेरिका और भारत दोनों की है। इन्होंने वर्ष 1992 में दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की पढ़ाई की थी। इसके बाद में उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में ही मास्टर की पढ़ाई की थी। इसके बाद में वर्ष 1994 में वह वाशिंगटन यूनिवर्सिटी चली गईं और वर्ष 1996 से 2001 तक उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की। पोस्टग्रेजुएशन के दौरान उनकी मुलाकात इकबाल से हुई। दोनों ने बाद में शादी कर ली। इस दंपति का 18 साल का एक बेटा है जिसका नाम राहिल है। गीता गोपीनाथ वर्ष 2001 से 2005 तक शिकागो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं, जिसके बाद उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर जॉइन किया। अगले पांच वर्षों में यानि वर्ष 2010 में वह इसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बन गईं। व्यापार एवं निवेश , अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट , मुद्रा नीतियां , कर्ज और उभरते बाजारों की समस्याओं पर उन्होंने लगभग 40 शोध-पत्र भी लिखे हैं। गीता को अंतर्राष्ट्रीय वित्त और मैक्रोइकनॉमिक्स संबंधी अपने शोध के लिये जाना जाता है। उनके शोध कई इकनॉमिक्स जर्नल्स में प्रकाशित हुये हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2019 में उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान दिया था जो प्रवासी भारतीयों और भारतवंशियों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है।