: विश्वनिर्माता हैं भगवान विश्वकर्मा - अरविन्द तिवारी
Sun, Sep 17, 2023
आज विश्वकर्मा जयंती विशेषनई दिल्ली - दुनियाँ का सबसे पहला इंजीनियर , देवशिल्पी , वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा जयंती के मौके पर आज देश भर में विश्वकर्मा पूजा धूमधाम से मनाया जायेगा। कहा जाता है कि इन्होंने ब्रह्माजी के साथ मिलकर इस सृष्टि का निर्माण किया था। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि श्रमिक समुदाय से जुड़े लोगों के लिये आज का दिन बेहद खास होता है। आज के दिन उद्योगों , कंपनियों , दुकानों एवं घरो में मशीनों, औजारों , अस्त्र-शस्त्र सहित विश्वकर्मा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। सनातन धर्म में विश्वकर्मा को निर्माण एवं सृजन का देवता माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने देवी-देवताओं के लिये ना सिर्फ भवनों का निर्माण किया बल्कि समय-समय पर अस्त्र-शस्त्रों का भी सृजन किया था। यही वजह है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी औजारों या उपकरण पर विश्वकर्मा का प्रभाव माना जाता है। इस दिन कारोबारी और व्यवसायी लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें तो व्यापार में तरक्की मिलती है और भगवान मशीनों पर अपनी कृपा बनाये रखते हैं। भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यक्ति की शिल्पकला का विकास होता है , जिससे व्यक्ति को अपने काम में सफलता हासिल होती है। कलयुग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा हर व्यक्ति के लिये जरूरी और लाभप्रद बतायी गयी है। कलयुग का संबंध कलपुर्जों से माना जाता है और आज के युग में कलपुर्जे का प्रयोग हर शख्स कर रहा है। लैपटॉप , मोबाइल फोन और टैबलेट भी एक प्रकार की मशीन हैं और इनके बिना आज के युग में रह पाना बहुत मुश्किल है। इसलिये भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना हम सबके लिये बेहद शुभ फलदाई मानी जा रही है। विश्वकर्माजी का जन्म कब हुआ ,कैसे हुआ ? इस बात को लेकर अलग-अलग कथायें और तथ्य हैं। वराह पुराण के अनुसार सब लोगों के उपकारार्थ ब्रह्मा परमेश्वर ने बुद्धि से विचारक विश्वकर्मा को पृथ्वी पर उत्पन्न किया था। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी कर्म सृजनात्मक है और जिन कर्मों से जीव का जीवन संचालित होता है , उन सभी के मूल में विश्वकर्मा हैं। अत: उनका पूजन जहां प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक ऊर्जा देता है। विश्वकर्मा को देवशिल्पी कहा जाता है उन्होंने सतयुग में स्वर्गलोक , त्रेतायुग में सोने की लंका , द्वापर में द्वारिका और कलियुग में भगवान जगन्नाथ , बलभद्र एवं सुभद्रा की विशाल मूर्तियों का निर्माण करने के साथ ही यमपुरी , वरुणपुरी , पांडवपुरी , कुबेरपुरी , शिवमंडलपुरी तथा सुदामापुरी , हस्तिनापुर , पुष्पक विमान के साथ-साथ भगवान विष्णु के लिये सुदर्शन चक्र , भगवान शिव के लिये त्रिशूल और यमराज का कालदंड और सोने की लंका का निर्माण किया। पुराणों में जिक्र है कि भगवान शिव ने माता पार्वती के लिये एक महल का निर्माण करने के बार में सोचा और इसकी जिम्मेदारी भगवान विश्वकर्मा को सौंपी , तब उन्होंने सोने का महल बना दिया। इस महल की पूजा के लिये रावण को बुलाया गया , लेकिन रावण महल को देखकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने दक्षिणा के रूप में महल को ही मांग लिया। भगवान शिव उस महल को रावण को सौंपकर खुद कैलाश पर्वत चले गये।महर्षि दधीचि द्वारा दी गई उनकी हड्डियों से ही विश्वकर्माजी ने “बज्र” का निर्माण किया , जो कि देवताओं के राजा इंद्र का प्रमुख हथियार है। ऋग्वेद में ग्यारह ऋचाओं में इनके महत्व का वर्णन किया गया है। एक अन्य कथा के अनुसार संसार की रचना के शुरुआत में भगवान विष्णु क्षीरसागर में प्रकट हुये। विष्णुजी के नाभि-कमल से ब्रहाजी की उत्पत्ति हुई। ब्रह्माजी के पुत्र का नाम धर्म रखा गया। धर्म का विवाह संस्कार वस्तु नामक स्त्री से हुआ। धर्म और वस्तु के सात पुत्र हुये , उनके सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया। वास्तु शिल्पशास्त्र में निपुण था , वास्तु के पुत्र का नाम विश्वकर्मा था। वास्तुशास्त्र में महारथ होने के कारण विश्वकर्मा को वास्तुशास्त्र का जनक कहा गया। इस तरह भगवान विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ , जो अपने माता पिता की भांति महान शिल्पकार हुये। विश्वकर्माजी ने ही धरती , आकाश , जल सहित पूरे ब्रह्मांड की रचना की। विश्वकर्मा के पांच महान पुत्र: विश्वकर्मा के उनके मनु , मय , त्वष्टा , शिल्पी एवं दैवज्ञ नामक पांच पुत्र थे। ये पांचों वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में पारंगत थे। मनु को लोहे में , मय को लकड़ी में , त्वष्टा को कांसे एवं तांबे में , शिल्पी को ईंट और दैवज्ञ को सोने-चांदी में महारात हासिल थी।
: पीएम मोदी आज रहेंगे मध्यप्रदेश और छग दौरे पर
Thu, Sep 14, 2023
नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह करीब सवा ग्यारह बजे मध्यप्रदेश के बीना पहुंचेंगे , जहां वह ‘बीना रिफाइनरी में पेट्रोकैमिकल कॉम्प्लेक्स’ और राज्य भर में दस नई औद्योगिक परियोजनाओं सहित 50,700 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। वहीं दोपहर करीब सवा तीन बजे वह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ पहुंचेंगे , जहां वे रेल क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनायें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के नौ जिलों में ‘क्रिटिकल केयर ब्लॉक’ की आधारशिला भी रखेंगे और एक लाख सिकल सेल परामर्श कार्डों का वितरण करेंगे।मध्यप्रदेश दौराप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज राज्य में औद्योगिक विकास को एक प्रमुख प्रोत्साहन प्रदान करने की पहल के अंतर्गत प्रधानमंत्री भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी में पेट्रोकैमिकल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखेंगे। इस अत्याधुनिक रिफाइनरी को लगभग 49,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जायेगा। यह लगभग 1200 केटीपीए (किलो-टन प्रति वर्ष) एथिलीन और प्रोपलीन का उत्पादन करेगी जो कपड़ा , पैकेजिंग , फार्मा जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिये एक महत्वपूर्ण घटक हैं। इससे देश की आयात निर्भरता कम होगी और यह प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इस व्यापक परियोजना से रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा और पेट्रोलियम क्षेत्र में छोटे उद्यमों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री नर्मदापुरम जिले में ‘विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण क्षेत्र’ में दस परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इनमें इंदौर में दो आईटी पार्क; रतलाम में एक मेगा औद्योगिक पार्क और पूरे मध्य प्रदेश में छह नये औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
‘विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण क्षेत्र’ नर्मदापुरम को 460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया जायेगा और यह क्षेत्र में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में बड़ी पहल होगी। लगभग 550 करोड़ की लागत से इंदौर में बनने वाले ‘आईटी पार्क-3 और 4 से सूचना प्रौद्योगिकी और आईटीईएस क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा और इससे युवाओं के लिये रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।रतलाम में 460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मेगा इंडस्ट्रियल पार्क बनाया जायेगा और इसे कपड़ा , ऑटोमोबाइल , फार्मास्यूटिकल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिये एक प्रमुख केंद्र बनाने की अवधारणा की गई है। यह पार्क दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से बेहतर तरीके से जुड़ा होगा और पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। इससे युवाओं के लिये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। राज्य में संतुलित क्षेत्रीय विकास और समान रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 310 करोड़ रुपये की लागत से शाजापुर , गुना , मऊगंज , आगर मालवा , नर्मदापुरम और मक्सी में छह नये औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किये जायेंगे।छत्तीसगढ़ मेंप्रधानमंत्री के देश भर में सम्पर्क में सुधार से रायगढ़ में सार्वजनिक कार्यक्रम में लगभग 6350 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण रेल क्षेत्र परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करने को प्रोत्साहन मिलेगा। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ पूर्व रेल परियोजना चरण-1, चांपा से जमगा के बीच तीसरी रेल लाइन , पेंड्रा रोड से अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन और तलाईपल्ली कोयला खदान को एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (एसटीपीएस) से जोड़ने वाली एमजीआर (मेरी-गो-राउंड) प्रणाली शामिल है। रेल परियोजनायें क्षेत्र में यात्रियों की आवाजाही के साथ-साथ माल ढुलाई को सुविधाजनक बनाकर सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान करेंगी। छत्तीसगढ़ पूर्व रेल परियोजना चरण-1 को महत्वाकांक्षी पीएम गतिशक्ति-बहुआयामी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है और इसमें खरसिया से धरमजयगढ़ तक 124.8 किलोमीटर की रेल लाइन शामिल है , जिसमें गारे-पेलमा के लिये एक छोटी लाइन और छाल , बरौद , दुर्गापुर और अन्य कोयला खदानें को जोड़ने वाली 3 फीडर लाइनें शामिल हैं। लगभग 3,055 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह रेल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉड गेज लेवल क्रॉसिंग और यात्री सुविधाओं के साथ फ्री पार्ट डबल लाइन जैसी व्यवस्था से सुसज्जित है। यह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में स्थित मांड-रायगढ़ कोयला क्षेत्रों से कोयला परिवहन के लिये रेल सम्पर्क प्रदान करेगी। पेंड्रा रोड से अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन 50 किमी लंबी है और इसका निर्माण लगभग 516 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। चांपा और जामगा रेलखंड के बीच 98 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन का निर्माण करीब 796 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। नई रेल लाइनों से क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार होगा और पर्यटन एवं रोजगार दोनों के अवसरों में वृद्धि होगी। लगभग 65 किलोमीटर लंबी विद्युतीकृत एमजीआर (मेरी-गो-राउंड) प्रणाली की सहायता से एनटीपीसी की तलाईपल्ली कोयला खदान से छत्तीसगढ़ में 1600 मेगावाट एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन तक कम लागत में उच्च श्रेणी के कोयले का वितरण किया जा सकेगा। इससे एनटीपीसी लारा से कम लागत के साथ विश्वसनीय बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा , जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। वहीं 2070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित एमजीआर प्रणाली , कोयला खदानों से बिजली स्टेशनों तक कोयला परिवहन में सुधार के लिये एक शानदार तकनीकी उपलब्धि है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के नौ जिलों में 50 बिस्तरों वाले ‘क्रिटिकल केयर ब्लॉक’ का भी शिलान्यास करेंगे।प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत कुल 210 करोड़ रुपये की लागत से दुर्ग , कोंडागांव , राजनांदगांव , गरियाबंद , जशपुर , सूरजपुर , सरगुजा , बस्तर और रायगढ़ जिलों में नौ क्रिटिकल केयर ब्लॉकों का निर्माण किया जायेगा। विशेष रूप से जनजातीय जनसंख्या के बीच सिकल सेल रोग के कारण होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से, सिकल सेल रोग की जांच की गई आबादी को प्रधानमंत्री एक लाख सिकल सेल परामर्श कार्डों का भी वितरण करेंगे। सिकल सेल परामर्श कार्ड का वितरण राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (एनएसएईएम) के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा जुलाई 2023 में मध्य प्रदेश के शहडोल में किया गया था।सुरक्षा के कड़े इंतजामरायगढ़ के कोड़ातराई में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस सुरक्षा मापदंडों के अनुरूप पूरे कार्यक्रम स्थल को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रखा गया है। कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्तियों की पुलिसकर्मियों द्वारा फिजिकल जांच के साथ एचएचएमडी और डीएफएमडी से जांच करेंगे की व्यवस्था की गई है कार्यक्रम स्थल में सभी प्रकार के मादक पदार्थ-बीड़ी सिगरेट , तंबाकू , गुटखा , पान मसाला ले जाने की मनाही होगी। ज्वलशील पदार्थ- माचिस , लाईटर , लेजर तथा धारदार वस्तुयें - चाकू , कैंची , कटर , नेलकटर , ऑलपिन , पेचकस , प्लास जैसा धारदार हथियार या अग्नि सामग्री कार्यक्रम स्थल तक ना पहुंचे , इसके निर्देश पुलिस अधिकारी को दिया गया है।
कार्यक्रम स्थल में प्रशासन द्वारा पेयजल की व्यवस्था की गई है, इसलिये कार्यक्रम में शामिल होने वाले व्यक्ति आपने साथ पानी बोतल , कोल्ड ड्रिंक , कैन या अन्य खाने पीने की चीजें टिफिन , डिब्बा , थैला लाना मना है। कार्यक्रम में शामिल होने बस , निजी वाहन एवं दुपहिया से आने वालों के लिये कार्यक्रम से सामान्य दूरी पर पार्किंग स्थल बनाये गये हैं , कार्यक्रम स्थल में व्हीव्हीआईपी/व्हीआईपी के लिये अलग-अलग दो पार्किंग- पार्किंग क्रमांक-1 और पार्किंग क्रमांक-2 बनाया गया है तथा पास धारित मीडिया एवं शासकीय वाहनों के लिये पार्किंग क्रमांक- 3 बनाया गया है।
: सम्पूर्ण विश्व समुदाय के लिये वरदान स्वरूप हैं गांधी - महामहिम राष्ट्रपति
Wed, Sep 6, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - महात्मा गांधी सम्पूर्ण विश्व समुदाय के लिये एक वरदान हैं। उनके आदर्शों और मूल्यों ने पूरी दुनियां को एक नई दिशा दी है। उन्होंने उस समय अहिंसा का मार्ग दिखाया , जब विश्व युद्धों के दौर में दुनियां कई तरह की नफरत और कलह से पीड़ित थी। गांधी के सत्य और अहिंसा के प्रयोग ने उन्हें एक महान इंसान का दर्जा दिया। गांधी ने सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी पवित्रता पर बहुत जोर दिया। उनका मानना था कि नैतिक शक्ति के आधार पर ही हिंसा का सामना अहिंसा के माध्यम से किया जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि आत्मविश्वास के बिना कोई भी विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता के साथ कार्य नहीं कर सकता है। आज की तेजी से बदलती और प्रतिस्पर्धी दुनिया में आत्मविश्वास और संयम की बहुत जरूरत है।
उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राजघाट पर महात्मा गांधी की बारह फूट ऊंची प्रतिमा का अनावरण और गांधी वाटिका का उद्घाटन करने के बाद संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा कि आज की तेजी से बदलती और प्रतिस्पर्धी दुनियां में आत्मविश्वास और संयम की बहुत जरूरत है। उन्होंने बताया कि गांधी की प्रतिमायें कई देशों में स्थापित हैं और दुनियां भर के लोग उनके आदर्शों में विश्वास करते हैं। उन्होंने नेल्सन मंडेला , मार्टिन लूथर किंग जूनियर और बराक ओबामा का उदाहरण देते हुये कहा कि कई महान नेताओं ने गांधीजी द्वारा दिखाये गये सत्य और अहिंसा के मार्ग को विश्व कल्याण का मार्ग माना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके बताये रास्ते पर चलकर ही विश्व शांति का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक भाई - चारे , सहयोग और शांति को प्रोत्साहित कर रहा है और जी-20 का नेतृत्व कर रहा है। राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि जी-20 सम्मेलन में विदेशी प्रतिभागी गांधी दर्शन का भी दौरा करेंगे और गांधी के बारे में जानेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि गांधी के आदर्श और मूल्य हमारे देश और समाज के लिये बहुत प्रासंगिक हैं। उन्होंने सभी से प्रयास करने का आग्रह किया ताकि प्रत्येक नागरिक , विशेषकर युवा और बच्चे गांधी के बारे में अधिक से अधिक पढ़ें और उनके आदर्शों को आत्मसात करें। उन्होंने कहा विभिन्न मुद्राओं में महात्मा गांधी की मूर्तियां स्थापित इस गांधी वाटिका में महात्मा गांधी की प्रतिमायें आगंतुकों , विशेषकर बच्चों को प्रेरित करेंगी। आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिये गांधी वाटिका के भीतर एक सेल्फी प्वाइंट स्थापित किया गया है। गांधी वाटिका में महात्मा गांधी की कई मूर्तियां भी हैं जो उन्हें विभिन्न मुद्राओं में दर्शाती हैं। महामहिम ने कहा कि इस संबंध में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति और ऐसी अन्य संस्थाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने आगे कहा कि वे किताबों , फिल्मों , सेमिनारों , कार्टूनों और अन्य मीडिया के माध्यम से युवाओं और बच्चों को गांधी के जीवन की शिक्षाओं के बारे में अधिक जागरूक करके गांधी के सपनों के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और गांधी दर्शन के उपाध्यक्ष विजय गोयल उपस्थित थे।राष्ट्रपति करेंगी आयुष्मान भव अभियान का शुभारंभमहामहिम राष्ट्रपति 13 सितंबर को आयुष्मान भव अभियान को भी लॉन्च करेंगी , ताकि सभी स्वास्थ्य योजनाओं का वितरण अंतिम छोर तक के लाभार्थियों को सुनिश्चित किया जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया द्वारा सभी कैबिनेट मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को लिखे गये एक पत्र के मुताबिक इस अभियान को 17 सितंबर से 02 अक्तूबर तक चलने वाले 'सेवा पखवाड़े' के दौरान पेश किया जायेगा। जिसके तहत स्वास्थ्य सेवा पहुंच और जागरूकता बढ़ाने के लिये कई गतिविधियों की योजना बनाई गई है। पत्र में मंडाविया ने कहा है कि 'अंत्योदय' के दृष्टिकोण का पालन करते हुये सभी के लिये स्वास्थ्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिये हर गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, भारत का सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का लक्ष्य तभी संभव होगा जब भारत का प्रत्येक गांव स्वस्थ होगा। विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और हर गांव में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के लिये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'आयुष्मान भव' अभियान की योजना बनाई है।