: भारत बंगलादेश के बीच बहुआयामी परियोजनाओं से संबंध हुआ मजबूत -- पीएम मोदी
Wed, Nov 1, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - ये बहुत खुशी की बात है कि हम एक बार फिर भारत-बांग्लादेश की सफलता को मनाने के लिये एक साथ जुड़े हैं , हमारे संबंध नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। पिछले नौ वर्षों में जितना काम किया गया है , उतना कई दशकों में नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट और मैरीटाइम एग्रीमेंट किया गया। दोनों देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये विशेष बल दिया। तीन नये बसों की सेवा शुरू की गई और पिछले नौ साल में तीन रेल सेवायें भी शुरू की गईं।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ बीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय सहायता प्राप्त तीन परियोजनाओं का संयुक्त रूप से उद्घाटन करते हुये कही। पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति , सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने के लिये हमने दशकों से लंबित भूमि सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किये। हमने समुद्री सीमा का भी समाधान किया। पिछले नौ वर्षों में ढाका , शिलांग , अगरतला , गुवाहाटी और कोलकाता को जोड़ने वाली तीन नई बस सेवायें शुरू की गई हैं। पिछले 9 वर्षों में तीन नई ट्रेन सेवायें भी शुरू हुईं। भारत और बांग्लादेश के बीच 2020 से पार्सल और कंटेनर ट्रेनें भी चल रही हैं। दोनों देशों के बीच दुनियां का सबसे बड़ा क्रूज गंगा विलास शुरू करके पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है। वहीं भारत और बांग्लादेश के बीच तीन विकास परियोजनाओं के उद्घाटन पर पीएम शेख हसीना ने कहा - मैं हमारे दोनों देशों के बीच दोस्ती के बंधन को मजबूत करने की आपकी प्रतिबद्धता के लिये आभार व्यक्त करती हूं। शेख मुजीबुर रहमान की बायोपिक 'मुजीब द मेकिंग ऑफ ए नेशन' की स्क्रीनिंग बांग्लादेश के साथ भारत में भी चल रही है। इसके लिये शेख हसीना ने पीएम मोदी का आभार जताया। बता दें बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बायोपिक बनाने की पहल पीएम मोदी ने ही की थी। उल्लेखनीय है जिन तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया उनमें अखौरा-अगरतला क्रॉस बॉर्डर रेल लिंक, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और बांग्लादेश के रामपाल में मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट का दूसरा यूनिट शामिल है। ये तीनों परियोजनायें भारत की सहायता से क्रियान्वित की गई हैं। उल्लेखनीय है कि अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक परियोजना को भारत सरकार की ओर से बांग्लादेश को दी गई 392.52 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता के तहत क्रियान्वित किया गया है। पीएमओ के बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश में 6.78 किमी दोहरी गेज रेल लाइन और त्रिपुरा में 5.46 किमी के साथ रेल लिंक की लंबाई 12.24 किमी है। वहीं खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार की रियायती कर्ज सुविधा के तहत 38.83 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कुल परियोजना लागत के साथ तैयार किया गया है। इस परियोजना में मोंगला बंदरगाह और खुलना में मौजूदा रेल नेटवर्क के बीच करीब 65 किमी ब्रॉड गेज रेल मार्ग का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह मोंगला ब्रॉड-गेज रेलवे नेटवर्क से जुड़ गया है। इसी तरह से 15 किमी लम्बा अगरतला-अखौरा क्रॉस बॉर्डर रेल संपर्क (भारत में 5 किमी और बांग्लादेश में 10 किमी) सीमा पार व्यापार को बढ़ावा देगा और ढाका के रास्ते अगरतला से कोलकाता आने-जाने में लगने वाला समय भी घटायेगा। फिलहाल ट्रेन को अगरतला से कोलकाता पहुंचने में 31 घंटे लगते हैं , जो इस परियोजना के शुरू होने के बाद 21 घंटे रह जायेंगे। इस परियोजना के काम में तेजी लाने के लिये भारतीय रेल ने अपने बजट से 153.84 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं। वहीं मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट परियोजना बांग्लादेश-भारत मैत्री पावर कंपनी (प्राइवेट) लिमिटेड (बीआईएफपीसीएल) द्वारा कार्यान्वित की गई है , जो भारत की एनटीपीसी लिमिटेड और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (बीपीडीबी) के बीच फिफ्टी - फिफ्टी की संयुक्त उद्यम कंपनी है। मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट की यूनिट -1 का सितंबर 2022 में दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से अनावरण किया गयाथा। मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट के परिचालन से बांग्लादेश में ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी। इन परियोजनाओं के लिये बांग्लादेश सरकार ने भारत का आभार जताया है।
: स्त्री शक्ति का प्रतीक पर्व है करवा चौथ – अरविन्द तिवारी
Wed, Nov 1, 2023
नई दिल्ली – करवा चौथ हर वर्ग , आयु , जाति के हिन्दू सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है ,जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है जिसे कर्क चतुर्थी भी कहते है। इस दिन सुहागिन महिलायें अपने पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन सुखमय होने की कामना पूर्ति के लिये निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ आज 01 नवंबर बुधवार को पड़ रही है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि आज करवा चौथ के दिन सर्वार्थ सिद्धि और शिव योग का संयोग बन रहा है। इन दो दुर्लभ संयोग कारण इस साल करवा चौथ का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। ऐसा माना जाता है कि कुछ शुभ योगों में पूजा करने और कुछ उपाय करने से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। उन्होंने आगे बताया कि व्रत रखने का अर्थ ही है संकल्प लेना। वह संकल्प चाहे पति की रक्षा का हो , परिवार के कष्टों को दूर करने का या कोई और। यह संकल्प वही ले सकता है जिसकी इच्छा शक्ति मजबूत हो। यह पर्व संकेत देता है कि स्त्री अबला नहीं , बल्कि सबला है और वह भी अपने परिवार को बुरे वक्त से उबार सकती है। करवा चौथ की प्रचलित कथाओं में स्त्रियां सशक्त भूमिका में नजर आती है , इस देश में सावित्री जैसे उदाहरण हैं , जिसने अपने पति सत्यवान को अपने सशक्त मनोबल से यमराज से छीन लिया था। यह व्रत पति पत्नी में भावनात्मक लगाव और विश्वास को बढ़ाता है। इस व्रत को पहली बार करवा चौथ यानि नवविवाहिता महिलाओं के लिये बहुत अच्छा फलदायी बताया जा रहा है।करवा चौथ का पर्व महिलाओं के लिये सुखद अहसास है जिनका उन्हें साल भर इंतजार रहता है। ये व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है , इसलिये चांद निकलने का व्रत रखने वाली सभी महिलाओं की नजर आसमान की ओर रहती है , सबको चांद का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस व्रत में कहीं सरगी खाने का रिवाज है तो कहीं नही भी है।किवदंती के अनुसार महाभारत काल से यह व्रत किया जा रहा है , भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने अर्जुन के लिये इस व्रत को किया था। आज के दिन सभी सुहागिन स्त्रियाँ सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लम्बी उम्र, स्वास्थ्य , सौभाग्य एवं सुखद दांपत्य की कामना के लिये यह व्रत रखती हैं जो बहुत ही कठिन होता है।
करवा चौथ व्रत को विवाहित महिलाओं के साथ - साथ मनचाहा वर पाने की कामना से कुंवारी कन्यायें , अपने पति के लिये सगाईशुदा लड़कियां और पत्नी सहयोगी पति भी रख सकते हैं। इस व्रत में कुछ नियम है जिनका कड़ाई से पालन किया जाता है। इस व्रत अवधि में जल भी ग्रहण नही किया जाता अर्थात निर्जला रखा जाता है। यह व्रत सूर्योदय से पहले और चाँद निकलने तक रखा जाता है। रात्रि में चाँद और पति का दीदार के लिये सुहागिन स्त्रियाँ चाँद के उदय होने का इंतजार करती हैं। मान्यता है कि चांद दर्शन के बाद ही व्रत पूरा होता है , उसके बाद ही महिलायें व्रत का समापन करती हैं। यह भी कहा जाता है कि बिना चांद दर्शन के व्रत का पूरा-पूरा फल नहीं मिलता है। चाँद निकलने पर शिव परिवार की पूजन करती हैं। फिर छलनी में घी का दीपक रखकर चंद्रमा को अर्घ्यं देकर , छलनी में से चंद्रमा के साथ अपने चाँद यानि पति का चेहरा देखती हैं। फिर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं और पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। करवा चौथ के व्रत में माता पार्वती समेत शिव परिवार की पूजा की जाती है। इस दिन खास तौर पर गणेश जी का पूजन होता है और उन्हें ही साक्षी मानकर व्रत शुरु किया जाता है। गणेश जी को चतुर्थी का अधिपति देव माना गया है। पूजा करते और कथा सुनते समय सींक रखने की परंपरा है जो करवा माता की उस शक्ति का प्रतीक है जिसके बल पर उन्होंने यमराज के सहयोगी भगवान चित्रगुप्त के खाते के पन्नों को उड़ा दिया था। पूजन के पश्चात अर्घ्य दिये जाने का विधान है। करवा यानि मिट्टी का एक प्रकार का बर्तन जिसके द्वारा चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है , यहां अर्घ्य का मतलब चंद्रमा को जल देने से है। महिलाओं को श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल अथवा मिट्टी का करवा भरना चाहिये। इस व्रत में चंद्रमा को अर्ध्य देकर चलनी से चंद्रमा को देखने के बाद पति को देखते है। इसके बाद पति अपने पत्नी को अपने हाथों से पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। इस दिन करवे में जल भरकर कथा सुनने का विधान है। चंद्रमा के माता का कारक होने की वजह से करवाचौथ के दिन किसी भी महिला को अपनी सास , मांँ या फिर दूसरी महिला का अपमान नहीं करना चाहिये। करवा चौथ वाले दिन महिलायें सफेद रंग की चीजें जैसे दही , चावल , दूध या फिर सफेद रंग का कपड़ा किसी को ना दें क्योंकि सफेद रंग चंद्रमा का कारक माना जाता है। इस दिन इन चीजों का दान करने से आपको आपकी पूजा का फल नहीं मिलेगा। इस दिन महिलायें काले, नीले और भूरे रंग के कपड़े पहन कर पूजा ना करें इससे उसको पूजा का फल नहीं मिलता है।इनसे करें परहेजकरवा चौथ के खास मौके पर महिलायें ध्यान रखें कि इस दिन किसी दूसरी महिला की चूड़ी बिल्कुल ना पहनें , ये अशुभ माना जाता है और व्रत कभी भी सफल नहीं होता। इस दिन सुहागिन महिलायें भूल कर भी हाथों को खाली ना रखें , हाथों में चूड़ियां अवश्य पहनी हों। इस दिन सफेद रंग की चूड़ियां बिल्कुल ना पहनें , इसे भी बहुत अशुभ माना जाता है। इस शुभ दिन हाथों में चूड़ियां पहनते समय इस बात का ध्यान भी रखें कि हाथों में सिंगल चूड़ी ना पहनें , बल्कि चूड़ियां जोड़े से पहनें। एक या तीन चूड़ी कभी नहीं पहनें , साथ ही इस बात को ध्यान में रखें कि चूड़ी चटकी हुई ना हो। करवाचौथ की शॉपिंग के दौरान कुछ चीजों को भूलकर भी ना खरीदें। करवाचौथ के दिन ना तो सफेद कपड़े खरीदने और ना ही पहनने चाहिये। इस दिन लाल , पीले , हरे और संतरी रंग के कपड़ों की खरीददारी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन सुहागिन महिलाओं को तेज धार वाली वस्तुओं की खरीददारी नहीं करनी चाहये इनमें चाकू , कैंची और सुई जैसी चीजें शामिल हैं।सोलह श्रृंगार क्या है ?करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाओं को पूर्ण श्रृँगार के साथ तैयार होना चाहिये। मान्यता है कि पूर्ण श्रृंगार में सोलह तरह के श्रृंगार महत्वपूर्ण होते हैं जिनमें सिंदूर , मंगलसूत्र , बिंदी , मेंहदी , लाल रंग के कपड़े , चूड़ियांँ , बिछिया , काजल , नथनी , कर्णफूल (ईयररिंग्स) , पायल , मांग टीका , तगड़ी या कमरबंद , बाजूबंद , अंगूठी , गजरा।
: असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है दशहरा – अरविन्द तिवारी
Tue, Oct 24, 2023
नई दिल्ली - दशहरा हिंदुओं का एक प्रमुख एवं राष्ट्रीय पर्व है जिसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमीं तिथि को देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जाता है।मान्यता है कि त्रेतायुग में आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन प्रभु श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके चंगुल से आजाद किया था। तब से हर साल इस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है , दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया भगवान श्रीराम ने आज ही के दिन रावण का वध किया था तथा दस दिन के युद्ध के बाद देवी दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था , इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशहरा का पर्व हमें अच्छाई की जीति आशा के साथ नेक कार्यों में भरोसा करना सिखाता है। आज के दिन असत्य पर सत्य की जीत होने की वजह से सभी लोगों को यह प्रण लेना चाहिये कि वह अपने मन की बुराइयों को मारेंगे। दशहरा के दिन कई लोग अपने घरों में पूजन करते हैं। आज के दिन जगह-जगह मेला लगता है , रामलीला का आयोजन होता है जिसमें भगवान राम की वीरगाथा दिखायी जाती है और रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। विजयादशमी के दिन लोग अस्त्र शस्त्रों का भी पूजन करते हैं। इस दिन अपराजिता देवी एवं शमी वृक्ष के पूजन का भी विशेष महत्व है। विजयादशमी के दिन प्रदोषकाल में शमी वृक्ष के समीप दीपक जलाकर उसे प्रणाम करें। पूजन के उपरांत हाथ जोड़कर निम्न प्रार्थना करें-
‘शमी शम्यते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी।।
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता।।’
रावण दहन के पश्चात घर आने पर सभी की आरती उतारकर स्वागत एवं भेंट किया जाता है। इसके साथ ही गाँव और पड़ोस में शमी पत्ता बांट कर बड़ों से हर कार्य में विजयश्री का आशीर्वाद भी लिया जाता है। आज के दिन नया काम शुरू करने की भी मान्यता है। कहा जाता है कि आज के दिन शुरू किये गये किसी भी काम में विजय यानि सफलता निश्चित रूप से मिलती है। अगर आपके परिवार में अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की जाती है तो एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सभी शस्त्र उस पर रखें। फिर गंगाजल छिड़क कर पुष्प अर्पित करें। साथ ही यह प्रार्थना करें कि संकट पड़ने पर यह आपकी रक्षा करें। इस दिन भगवान श्रीराम की उपासना करने का बहुत अधिक महत्व होता है। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। फिर धूप , दीप और अगरबत्ती जलाकर भगवान श्रीराम की उपासना करें और अंत में आरती करें।नीलकंठ का दर्शन होता है शुभदशहरे के पर्व को लेकर कई तरह की मान्यतायें प्रचलित है। नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि माना गया है। एक मान्यता के अनुसार इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना भी अत्यंत शुभ होता है। कहते हैं कि दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन से आपके सभी बिगड़े काम सही हो जाते हैं और जीवन में सुख समृद्धि भी आती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम जब रावण का वध करने जा रहे थे तो उस दौरान उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुये थे। इसके बाद भगवान श्रीराम को रावण पर विजय प्राप्त हुई थी। इसके अलावा कहा जाता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। भगवान श्रीराम ने उस पाप से मुक्ति पाने के लिये शिवजी की आराधना की थी। मान्यता है कि श्रीराम को इस पाप से मुक्ति दिलाने के लिये शिव जी ने नीलकंठ पक्षी के रूप में दर्शन दिया था। तभी से दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन की परंपरा है।