: महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बालको का योगदान उत्कृष्ट
Sat, Mar 5, 2022
बालकोनगर, 5 मार्च। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने महिला सशक्तिकरण को अपनी कार्य शैली का महत्वपूर्ण अंग बनाया है। बालको का यह मानना है कि सशक्त नारियों के योगदान से ही समाज और देश की चहुंमुखी प्रगति संभव है। बालको ने सदैव ही विविधतापूर्ण कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित किया है। सीखने के आधुनिक तरीकों ने महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही वजह है कि चाहे प्रत्यक्ष रोजगार के माध्यम से महिलाओं को सामाजिक-आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने की बात हो या फिर सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के जरिए उन्हें सबल बनाने की बात, महिला सशक्तिकरण के हर मोर्चे पर बालको पूरी मुस्तैदी से तैनात है।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति कहते हैं कि ‘‘हम महिला कार्यबल का अनुपात 50 फीसदी तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए देश के विभिन्न महाविद्यालयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को मौके दिए जा रहे हैं। डिजीटल शक्ति से परिपूर्ण दुनिया में महिलाएं और भी ऊर्जावान हो रही हैं। अपने सपनों को पूरा करने के लिए वे हर कार्य करने में सक्षम हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि महिला कार्यबल को वरिष्ठ प्रबंधन के सदस्यों के साथ संवाद के अधिक से अधिक अवसर मिले।’’ श्री पति ने विश्वास जताया कि भविष्य में महिलाओं को नेतृत्व करने के अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे कंपनी द्वारा संचालित कैरियर विकास और सशक्तिकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अनेक योजनाओं में बढ़चढ़ कर भागीदारी सुनिश्चित करें।
यदि बालको में सीधे नियोजन की बात की जाए, तो इस वक्त बड़ी संख्या में कुशल महिलाएं सफलतापूर्वक विभिन्न महत्वपूर्ण परिचालन एवं तकनीकी भूमिकाएं निभा रही हैं, जिनमें धातु उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, सिविल कार्य, आधारभूत संरचना, वित्त, सुरक्षा एवं कमोडिटी प्रोक्योरमेंट आदि कार्य शामिल हैं। उन्हें प्रबंधन और कर्मचारी हित से जुड़े सभी मामलों में पूरी बराबरी से निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है। बालको में कार्य स्थल पर तथा टाउनशिप में महिलाएं अपने आपको पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं क्योंकि बालको के सुरक्षा संबंधी इंतजाम काफी पुख्ता हैं। टाउनशिप परिसर में जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति का अनाधिकृत प्रवेश वर्जित है वहीं कार्य स्थल पर महिला अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित है।
प्रदर्शन मूल्यांकन, वेतन पुनरीक्षण, संगठन के उच्च नेतृत्वकारी पदों में तैनाती के मौके आदि के जरिए बालको ने महिला कार्यबल की निरंतर प्रगति की रणनीति तैयार की है। इंडस्ट्री लीडर्स के साथ समय-समय पर संवाद कार्यक्रमों के जरिए महिला कर्मचारियों को नेतृत्वकारी भूमिकाओं की तैयारी के गुर सिखाए जाते हैं। ‘व्ही-लीड’ जैसे मेंटरशिप कार्यक्रम से महिलाओं को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है। स्वास्थ्य के समस्त आयामों के प्रति जागरूकता के लिए बालको की ओर से महत्वपूर्ण योजना क्रियान्वित की गई हैं। कर्मचारियों के लिए अभिभावक अवकाश नीति को अधिक प्रभावशाली बनाया गया है। मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया है। दत्तक ग्रहण अवकाश 12 सप्ताह का है जबकि पितृत्व अवकाश एक सप्ताह का दिया जाता है। बालको की अभिभावक अवकाश नीति इस श्रेणी के उद्योगों में श्रेष्ठ है। मातृत्व लाभ के साथ ही ऐसे कार्यक्रम संचालित हैं जिससे महिलाओं को मातृत्व अवकाश के उपरांत कार्यभार ग्रहण करने के दौरान बच्चे की देखरेख में काफी सुविधा होती है। बालको में महिलाओं को बच्चे के छह वर्ष के होने तक नर्सिंग ब्रेक दिया जाता है जबकि उद्योगों में यह मानदंड बच्चे के डेढ़ वर्ष की आयु तक देने का है। महिला कर्मचारियों के बच्चों के लिए संयंत्र परिसर में ही झूलाघर की सुविधा है। बालको में मेरिट के आधार पर जीवनसाथी रोजगार नीति भी लागू है जिसके अंतर्गत महिला कर्मचारियों को उनके जीवनसाथी की तैनाती के अनुसार पोस्टिंग दी जाती है।
1200 मेगावॉट विद्युत संयंत्र की इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस प्रमुख श्रीमती स्तुति चंद्राकर कहती हैं कि बालको का मानव संसाधन प्रबंधन उत्कृष्ट है। प्रबंधन की नीतियों का ही परिणाम है कि वर्ष 2006 में प्रशिक्षु स्नातक इंजीनियर के तौर पर कैरियर की शुरूआत करके आज वह इस मुकाम पर हैं। वह कहती हैं कि बालको ने महिलाओं को कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने के मौके दिए हैं। वर्ष 2018 में प्रशिक्षु स्नातक इंजीनियर के तौर पर बालको में अपने करियर शुरू करने वाली सुश्री सृजना घोष बताती हैं कि प्रबंधन के मार्गदर्शन में आज वह रिफ्रैक्ट्री एरिया का नेतृत्व कर रही हैं। बालको में संचालित विभिन्न कार्यक्रम महिलाओं को नेतृत्वकर्ताओं के तौर पर विकसित होने में मदद करते हैं। वर्ष 2012 में प्रशिक्षु स्नातक इंजीनियर के तौर पर बालको में अपने करियर की शुरूआत करने वाली श्रीमती दिव्या तिवारी बिजनेस एक्सीलेंस विभाग में अवॉर्ड सर्टिफिकेशन एंड डिजिटल इनिशिएटिव का नेतृत्व करती हैं। वह बताती हैं कि वी-रीच, वी-लीड जैसे कार्यक्रम महिला कर्मचारियों के आगे बढ़ने के अनेक अवसर मुहैया कराती हैं। शीट रोलिंग शॉप में कार्यरत सुश्री उपासना आचार्य कहती हैं कि बालको का सकारात्मक परिवेश महिला कर्मचारियों को निरंतर श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करता है। आरपी एक्टअप कार्यक्रम के जरिए उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका में आने का अवसर मिला। वर्ष 2021 में प्रशिक्षु स्नातक इंजीनियर के तौर पर बालको में करियर की शुरूआत करने वाली सुश्री रिया बरनवाल कहती हैं कि संयंत्र से लेकर हॉस्टल तक महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित वातावरण है। उनकी निरंतर प्रगति के लिए बालको में भरपूर अवसर मौजूद हैं।
: विश्व गुणवत्ता माह के दौरान बालको में जागरूकता कार्यक्रम
Fri, Feb 25, 2022
बालकोनगर, 25 नवंबर, 2022। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने विश्व गुणवत्ता माह के दौरान अपने विभिन्न प्रचालनों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। बड़ी संख्या में बालको अधिकारियों, कर्मचारियों, व्यवसाय के साझेदारों और समुदाय के नागरिकों ने आयोजन में भागीदारी की। कार्यक्रमों का उद्देष्य प्रतिभागियों को गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बनाना और उसके महत्व से परिचित कराना था ताकि वे गुणवत्तापूर्ण कार्य संस्कृति का विकास और उसकी निरंतरता सुनिष्चित कर सकें।
विश्व गुणवत्ता माह के दौरान दुनिया भर में विभिन्न संगठनों द्वारा हर वर्ष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनके माध्यम से विभिन्न प्रक्रियाओं में गुणवत्ता को सर्वोपरि रखते हुए प्रचालन पर जोर दिया जाता है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण कार्य शैली के विकास की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों की समीक्षा की जाती है। इस वर्ष की थीम ‘ क्वालिटी कनसाइंस : डूइंग द राइट थिंग’ के आधार पर बालको प्रबंधन ने संयंत्र के अनेक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, नारा एवं कविता लेखन, चित्रकला, फोटोग्राफी आदि स्पर्धाओं के साथ कार्य स्थलों पर जागरूकता रैलियां आयोजित कीं। माह भर चलने वाले जागरूकता अभियानों में बालकोनगर स्थित विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इनके माध्यम से प्रतिभागी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण कार्य संस्कृति की महत्ता और गुणवत्ता संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करने के उपायों से परिचित हुए।संयंत्र के प्रत्येक कार्य क्षेत्र में गुणवत्ता के अनुरक्षण के प्रति बालको की कटिबद्धता पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेषक श्री अभिजीत पति ने कहा कि ‘‘प्रचालन की उत्कृष्टता के लिए हम जो कुछ भी करते हैं उसमें गुणवत्ता महत्वपूर्ण पहलू है। एल्यूमिनियम एवं ऊर्जा उत्पादन की सभी प्रक्रियाओं में गुणवत्तापूर्ण कार्य शैली अपनाई जाती है। मानव संसाधन को इस दिषा में लगातार प्रषिक्षित किया जाता है ताकि वे विष्वस्तरीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रदर्षन कर सकें। श्रेष्ठ उत्पादन और क्षमता में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी के लिए बालको प्रबंधन दृढ़संकल्प है।’’प्रचालन श्रेष्ठता की निरंतरता के लिए बालको ने रोल्ड उत्पादों (शीट, प्लेट कंडक्टर्स तथा प्लेट-सामान्य इंजीनियरिंग), वायर रॉड, एलॉय इनगॉट, ईसी इनगॉट, प्राइमरी इनगॉट आदि सात प्रकार के उत्पादों के लिए बीआईएस लाइसेंस (भारतीय मानक ब्यूरो-भारत सरकार) प्राप्त किए हैं। ग्राहक संतुष्टि के लिए बालको ने आंतरिक संसाधनों की मदद से कोल्ड पोरस डिस्क फिल्ट्रेशन अपैरेटस (पीओडीएफए) सैंपलिंग और टेस्टिंग सुविधा विकसित की है। पीओडीएफए तकनीक के जरिए गर्म धातु में मौजूद विभिन्न प्रकार की बनावट वाले कणों का पता लगाया जाता है ताकि फिनिष्ड उत्पाद के निर्माण के दौरान अनचाहे कणों को गर्म धातु में मिश्रित होने से रोककर उत्पाद की गुणवत्ता में इजाफा किया जा सके।गुणवत्ता के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की दिषा में बालको ने क्वालिटी कॉन्सेप्ट के अनेक चैप्टर कन्वेंशन में बेहतरीन प्रदर्षन किए। वर्ष 2022 में 29 क्वालिटी सर्कल टीमों ने विभिन्न कन्वेंशन में भाग लिया। 8 टीमों ने सुपर गोल्ड अवार्ड, 17 टीमों ने गोल्ड अवार्ड और 4 टीमों ने सिल्वर अवार्ड हासिल किए। इसके अलावा विभिन्न चैप्टर कन्वेंशन में बालको को नॉलेज टेस्ट सम्मान और बेस्ट पेज सेटिंग अवार्ड दिए गए।
: बालको ने दिव्यांगों को दिया माहवारी स्वच्छता प्रबंधन प्रशिक्षण
Sun, Feb 6, 2022
बालकोनगर, 6 दिसंबर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने सामुदायिक विकास कार्यक्रम की परियोजना ‘नई किरण’ के अंतर्गत इनरव्हील एजुकेशन सोसाइटी संचालित दिव्य ज्योति स्कूल के दिव्यांग छात्राओं के लिए एक दिवसीय माहवारी स्वच्छता प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यशाला में प्रतिभागियों को माहवारी स्वच्छता के अनेक आयामों से परिचित कराया गया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को यौन एवं प्रजनन संबंधी अधिकारों की जानकारी भी दी गई। ‘नई किरण’ परियोजना का उद्देश्य महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को माहवारी स्वच्छता के जैव वैज्ञानिक पहलुओं, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों और उनके समाधान, पोषण आहार आदि से परिचित कराना है।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति ने कहा कि बालको की नई किरण परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की महिलाओं के स्वास्थ्य स्तर में उत्तरोत्तर सुधार तथा माहवारी संबंधी भ्रांतियों और शंकाओं का समाधान करना है। इसके अंतर्गत लक्षित महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के लिए उन्हें अनेक गतिविधियों से जोड़ा गया है। माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियानों के निरंतर संचालन के जरिए समाज में माहवारी के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के प्रति बालको प्रबंधन कटिबद्ध है।इनरव्हील एजुकेशन सोसाइटी की अध्यक्ष एवं दिव्य ज्योति स्कूल, कोरबा की प्राचार्य श्रीमती रीता खेत्रपाल ने बालको के अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि दिव्यांग छात्राओं को माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने की दृष्टि से कार्यशाला का आयोजन महत्वपूर्ण है। उन्होंने आयोजन के लिए बालको प्रबंधन को साधुवाद दिया।बालको ने वर्ष 2019 से सार्थक जन विकास संस्थान के सहयोग से कोरबा जिले के 45 गांवों एवं नगर पालिक निगम क्षेत्रों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता परियोजना लागू की। परियोजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की 200+ महिलाओं, 600+ किशोर बालिकाओं और अग्रिम पंक्ति की 60 कार्यकर्ताओं को नेतृत्वकर्ताओं के तौर पर विकसित किया गया है जिससे वे समुदाय में जाकर माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति बालिकाओं और महिलाओं को जागरूक करनें में सक्षम हुई हैं। अभियान के अंतर्गत पुरुषों को भी शामिल किया गया है ताकि वे महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल में योगदान कर सकें। 60 किशोर बालकों को माहवारी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए कम्यूनिटी चैंपियन के तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। इस वर्ष बालको ने ग्रामीण क्षेत्रों में चार स्वास्थ्य सुविधा केंद्र विकसित किए जहां महिलाओं और किशोरियों को माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जानकारी दी जाती है। परियोजना के दायरे में लगभग 45000 महिलाएं, किशोरी बालिकाएं, पुरुष और किशोर बालक शामिल हैं।