: उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विजय अग्रवाल ने मतगणना स्थल का किया निरीक्षण
Wed, Nov 29, 2023
उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री विजयअग्रवाल ने आज शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर स्थित मतगणना स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मतगणना के लिए की जा रही तैयारियों का अवलोकन एवं स्ट्रांगरूम की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने मतगणना स्थल पर सी सी टीव्ही कैमरे तथा तैनात सुरक्षा बल, मतगणना तथा डाक मतपत्रों की गणना की तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्था, गणना के लिए मतगणना सामग्री, डाक मतपत्रों की गणना, ईव्हीएम में दर्ज मतों की गणना, वीवीपैट स्लीप गणना, मतगणना की समाप्ति के बाद ईव्हीएम और निर्वाचन सामग्री को मुहरबंद करने और परिणाम की घोषणा के संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर श्री एसपी वैद्य, उप निर्वाचन अधिकारी श्रीमती निशा नेताम मड़ावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी ,रिटर्निंग अधिकारी श्री ज्ञानेन्द्र ठाकुर, श्री निरनिधि नंदेहा ,राज्य निर्वाचन आयोग से श्री हार्दिक श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
स/क्र
: महिला से छेड़छाड़ करने का आरोपी जेल दाखिल
Mon, Nov 27, 2023
संजय पांडे की रिपोर्टजांजगीर चांपा - रात्रि के समय घर के आंगन में सो रही महिला से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को अकलतरा पुलिस ने विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली विस्तृत जानकारी अनुसार गत दिवस 25 नवंबर को रात्रि में पीड़िता अपने सास के साथ धान की रखवाली करते घर आंगन मे सोई थी। रात्रि करीबन साढ़े ग्यारह बजे हरिराम केंवट पीछे मे गलत निगाह से आकर सो गया और छेड़छाड़ करने लगा और पीड़िता चिल्लाई तो भाग गया। मामले की रिपोर्ट पर आरोपी के विरुद्ध थाना अकलतरा में अपराध क्रमांक 607/23 धारा 354 , 354 (क) भादवि कायम कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान आरोपी हरिराम केवट निवासी कल्याणपुर थाना अकलतरा को हिरासत में लेकर घटना के संबध में पूछताछ किया तो जुर्म स्वीकार किये जाने से तथा आरोपी के विरुद्ध अपराध धारा सदर का सबूत पाये जाने से विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।उपरोक्त कार्यवाही मे निरीक्षक टी.एस.पट्टावी , उप निरीक्षक लालन पटेल , महिला प्रधान आरक्षक अनिता पाटले , आरक्षक अजय भानू , बृजपाल बर्मन का सराहनीय योगदान रहा।गिरफ्तार आरोपी -हरिराम केंवट उम्र 23 वर्ष निवासी कल्याणपुर , थाना अकलतरा , जिला - जांजगीर चांपा
: अनंत फलदाई है कार्तिक पूर्णिमा - अरविन्द तिवारी
Mon, Nov 27, 2023
जांजगीर चांपा – सनातन धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। पुराणों में सभी कार्तिक माह को आध्यात्मिक और शारीरिक ऊर्जा संचय के लिये उचित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और भगवान शंकर की आराधना की जानी चाहिये। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि शास्त्रों में बारहों महीनों में कार्तिक महीने को आध्यात्मिक एवं उर्जा संचय के लिये सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वैसे तो साल भर में बारह पूर्णिमा होती है लेकिन अधिकमास या मलमास को भी जोंड़ दिया जाये तो कुल मिलाकर तेरह पूर्णमायें हो जाती हैं लेकिन इनमें कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। कार्तिक महीने का यह सबसे अन्तिम दिन और कार्तिक पूर्णिमा आज है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान , दान के साथ साथ दीपदान का पुण्य अन्य दिनों के अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। स्वयं नारायण ने भी कहा है कि महिनों में , मैं कार्तिक माह हूंँ। कार्तिक मास परम पावन होता है , इस महीने में किये गये पुण्य कर्मों का अनन्त गुणा फल मिलने की मान्यता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत रखना बेहद शुभ माना जाता है , धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ का फल मिलता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि स्वयं विष्णुजी ने ब्रह्माजी को , ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को और नारदजी ने महाराज पृथु को कार्तिक मास का महत्व बताया। इस माह की त्रयोदशी , चतुर्दशी और पूर्णिमा को पुराणों में अति पुष्करिणी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग से देवतागण भी आकर गंगा में स्नान करते हैं , इसलिये इस दिन गंगा स्नान जरूर करें। अगर आपके लिये यह कर पाना संभव ना हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर नहा लें। स्कन्द पुराण के अनुसार जो प्राणी कार्तिक मास में प्रतिदिन स्नान नहीं करता है वह यदि केवल इन तीन तिथियों में सूर्योदय से पूर्व स्नान करे तो भी माह के पूर्ण फल का भागी हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजन करके बछड़ा दान करने से शिवलोक की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धूल जाते हैं , वहीं दीपदान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूर्णिमा के दिन सुबह किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान और दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान दस यज्ञों के समान माना गया है। यदि आपके घर के पास नदी नहीं है तो आप किसी मंदिर में जाकर दीपदान करें , इससे आपकी परेशानियां दूर होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कार्तिक पूर्णिमा का व्रत रखने वालों को इस दिन हवन जरूर करना चाहिये और किसी जरुरतमंद को भोजन कराना चाहिये। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में या तुलसी के पास दीप जलाने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार देवता अपनी दिवाली कार्तिक पूर्णिमा की रात को ही मनाते हैं , इसलिये यंह सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।कार्तिक पूर्णिमा के दिन शिवा , सम्भूति , प्रीति , संतति , अनुसुइया समेत क्षमा नामक छह तपस्विनी कृतिकाओं का पूजन करने का विशेष महत्व है , शाम को चंद्रमा निकलने पर इनका पूजन करना चाहिये। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें कार्तिक की माता माना गया है , इनकी पूजा करने वालों के घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।आज देव दीपावलीइसी दिन महादेव ने त्रिपुरासूर नामक राक्षस का संहार किया था , जिससे देवगण बहुत प्रसन्न हुये। इस दिन भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेकों नामों में से एक है। इसलिये इस पूर्णिमा का एक नाम त्रिपुरी पूर्णिमा भी है। त्रिपुरासुर के वध होने की खुशी में सभी देवता स्वर्गलोक से उतरकर काँशी में दीपावली मनाते हैं। तभी से इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा कांँशी में गंगा नदी के घाटों पर दीपदान कर दीपावली मनायी जाती है। यही नहीं यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने धर्म , वेदों की रक्षा के लिये मत्स्यावतार धारण किया था।धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु इस मास में मत्स्य रूप में जल में विराजमान रहते हैं और आज ही के दिन मत्स्य स्वरूप को छोंड़कर वापस बैकुंठ चले जाते हैं। इसी दिन देवी तुलसी भी बैकुंठधाम गयी थी। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सोनपुर में गंगा गंडकी के संगम पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था। गज की करुणामयी पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने ग्राह का संहार कर भक्त की रक्षा की थी। इस वजह से देवताओं ने स्वर्ग में दीपक जलाये थे। तभी से देवताओं की दीपावली होने के कारण इस दिन देवताओं को दीपदान किया जाता है। दीपदान करने से सभी प्रकार की मनोकामनायें पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली परेशानियाँ भी दूर होती हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस दिन गौ , अश्व और घी आदि के दान से संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। इस दिन सत्यनारायणजी की कथा , विष्णुपुराण , विष्णु सहस्रनाम , कनकधारा का पठन , श्रवण करने वाले जातकों को मोक्ष प्राप्त होता है। इस दिन सरसों का तेल , तिल , काले वस्त्र किसी जरूरतमंद को दान करना चाहिये , ऐसा करने से आपको पुण्य फल प्राप्त होगा। ऐसा करने से आप कई क्षेत्रों में सफलता अर्जित करेंगे , साथ ही सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। कार्तिक पूर्णिमा की शाम को तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर तुलसी माता का स्मरण करते हुये पौधे के चारो तरफ परिक्रमा करने से भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आर्थिक समस्यायें दूर होती हैं।देव दीपावली की पहली कथादेव दीपावली की कथा महर्षि विश्वामित्र से जुड़ी है। मान्यता है कि एक बार विश्वामित्रजी ने देवताओं की सत्ता को चुनौती देते हुये अपने तप के बल से त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया। यह देखकर देवता अचंभित रह गये , क्योंकि विश्वामित्र जी ने ऐसा करके उनको एक प्रकार से चुनौती दे दी थी। इस पर देवता त्रिशंकु को वापस पृथ्वी पर भेजने लगे , जिसे विश्वामित्र ने अपना अपमान समझा। उनको यह हार स्वीकार नहीं थी तब उन्होंने अपने तपोबल से उसे हवा में ही रोक दिया और नई स्वर्ग तथा सृष्टि की रचना प्रारंभ कर दी , इससे देवता और भी भयभीत हो गये। उन्होंने अपनी गलती की क्षमायाचना तथा विश्वामित्र को मनाने के लिये उनकी स्तुति प्रारंभ कर दी। अंतत: देवता सफल हुये और विश्वामित्र उनकी प्रार्थना से प्रसन्न हो गये , और उन्होंने दूसरे स्वर्ग और सृष्टि की रचना बंद कर दी। इससे सभी देवता प्रसन्न हुये और उस दिन उन्होंने दिवाली मनायी जिसे देव दीपावली कहा गया।