: अमोद्य फलदायी है देवउठनी एकादशी - अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
Sat, Nov 5, 2022
नई दिल्ली - हिन्दू धर्म में सबसे शुभ और पुण्यदायी और सभी व्रतों में श्रेष्ठ देवउठनी एकादशी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष यानि आज मनायी जाती है। इसे हरिप्रबोधिनी , देवोत्थान , देवप्रबोधिनी और ठिठुअन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस मनोरथ का फल त्रिलोक में भी ना मिल सके , वो देवोत्थान एकादशी का व्रत कर प्राप्त किया जा सकता है। देवोत्थान एकादशी से पूर्णिमा तक भगवान शालिग्राम एवं तुलसी माता का विवाहोत्सव का पर्व मनाया जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन से ही चतुर्मास समाप्त हो रहे हैं और शुभ व मांगलिक कार्य शुरू होंगे। शास्त्रों के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन ही सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं और पुन: सृष्टि का कार्यभार सम्हालते हैं। इस दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी विवाह का धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाता है। यह व्रत सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाने के साथ साथ सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इस एकादशी का फल अमोघ पुण्यफलदायी बताया गया है। इस दिन वैष्णवों के साथ साथ स्मार्त श्रद्धालु भी बड़ी आस्था के साथ व्रत रखते हैं , इस दिन उपवास रखना बेहद शुभ माना जाता है वहीं निर्जल या जलीय पदार्थों पर उपवास रखना विशेष फलदायी है , एकादशी व्रत को व्रतराज की उपाधि दी गई है क्योंकि यह सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ है और इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है।हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण होता है। पूरे वर्ष में चौबीस एकादशी होती हैं। लेकिन अगर किसी वर्ष मलमास है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। कहा जाता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी के दिन से श्रीहरि क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं। चतुर्मास में उनके विश्राम करने तक कोई भी शुभ कार्य नही किये जाते हैं। चातुर्मास के समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन देवउठनी-उत्सव होता है , इस एकादशी को ही देवउठनी कहा जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन चतुर्मास का अंत हो जाता है और शादी-विवाह इत्यादि मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु को जगाने का आह्वान कर भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती है।तुलसी विवाह का है विधानदेवउठनी एकादशी के दिन श्रद्धालुओं द्वारा घरों में चाँवल आटे से चौक बनाया जाता है। तुलसी माता चौरा के चारो ओर गन्ने का मंडप बनाकर विधि विधान से पूजन किया जाता है। इस दिन तुलसी माता को महंदी , मौली धागा , फूल , चंदन , सिंदूर , सुहाग के सामान की वस्तुयें , अक्षत , मिष्ठान और पूजन सामग्री आदि भेंट की जाती हैं। तुलसी और शालिग्राम का धूमधाम से विवाह कराया जाता है। आज के दिन तुलसी , शालिग्रामजी की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह का आयोजन करने पर एक कन्यादान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। भगवान शालिग्राम ओर माता तुलसी के विवाह के पीछे की एक कहानी प्रचलित है। दरअसल शंखचूड़ नामक दैत्य की पत्नी वृंदा अत्यंत सती थी। शंखचूड़ को परास्त करने के लिये वृंदा के सतीत्व को भंग करना जरूरी था। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने छल से रूप बदलकर वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया और उसके बाद भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध कर दिया। इस छल के लिये वृंदा ने भगवान विष्णु को शिला रूप में परिवर्तित होने का शाप दे दिया। उसके बाद भगवान विष्णु शिला रूप में तब्दील हो गये और उन्हें शालिग्राम कहा जाने लगा। फिर वृंदा ने तुलसी के रूप में अगला जन्म लिया था , भगवान विष्णु ने वृंदा को आशीर्वाद दिया कि बिना तुलसी दल के उनकी पूजा कभी संपूर्ण नहीं होगी। भगवान शिव के विग्रह के रूप में शिवलिंग की पूजा होती है , उसी तरह भगवान विष्णु के विग्रह के रूप में शालिग्राम की पूजा की जाती है। यह भी मान्यता है कि वृँदा के सती होने के बाद उनकी राख से ही तुलसी के पौधे का जन्म हुआ था। इसके बाद तुलसी पौधे के साथ शालिग्राम के विवाह रचाने की परंपरा शुरु हुई।इन उपायों से होता है लाभदेवउठनी एकादशी के शुभ दिन पर भगवान श्रीहरि विष्णु का दूध और केसर से अभिषेक करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर कामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं। जो लोग आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं वे इस दिन पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलायें। ऐसा करने से हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है। इसी तरह से धन की कमी को दूर करने के लिये देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि विष्णु को पैसे अर्पित कर उन्हें अपने पर्स में रख लें। ऐसा करने से व्यक्ति को धन लाभ होता है , साथ ही कभी भी धन की कमी नहीं आती है। देवउठनी एकादशी के शुभ दिन व्यक्ति को भगवान विष्णु को तुलसी पत्र के साथ सफेद रंग की चीज का भोग लगायें। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।पंच तीर्थ महास्नान की शुरुआतदेवउठनी एकादशी से पंच तीर्थ महास्नान पर्व भी शुरू होगा जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा। यह पर्व उन लोगों के लिये बेहद खास होता है जो पूरे कार्तिक महीने में सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं। मान्यता है कि इन पांच दिनों में व्रत रखने से धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष की प्राप्ति होती है।पद्मपुराण के अनुसार देवउठनी एकादशी का व्रत करने से और विधि-विधान से पूजा करने से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ और एक सौ राजसूय यज्ञ करने जितना फल मिलता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्म के पाप दूर होते हैं और साथ ही मोक्ष भी मिलता है।
: अनंत फलदायी है आंवला नवमीं पर जप और दान - अरविन्द तिवारी
Wed, Nov 2, 2022
नई दिल्ली - कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमीं यानि आज आंँवला नवमीं मनायी जा रही है। इसे अक्षय नवमीं भी कहा जाता है। श्रुतिस्मृति पुराणों के अनुसार त्रेतायुग का प्रारंभ इसी दिन हुआ था।आज के दिन आंवले के पेड़ की विधिवत तरीके से पूजा कर इसी वृक्ष के नीचे सपरिवार भोजन किया जाता है। अगर आसपास आँवले का पेंड़ नही है और उसके नीचे भोजन करना संभव नही है इस दिन आँवले के फल खाने का भी प्रावधान है। वहीं अक्षय नवमीं के दिन स्नान , तर्पण ,अन्न दान तथा पूजा आदि करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आंँवले के पेड़ में देवों के देव महादेव और भगवान विष्णु वास करते हैं इसलिये इसकी पूजा करने का खास महत्व है। कहा जाता है कि आंँवले की पूजा करने से आरोग्य और सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आंँवला नवमी के दिन पूजा करने और जप-तप, दान करने से अनंत गुना फल मिलता है। आँवला विष्णुप्रिय और साक्षात भगवान विष्णु का ही स्वरूप है। इसके स्मरण मात्र से गोदान के बराबर फल मिलता है , इसे स्पर्श करने पर दोगुना तथा फल सेवन करने पर तीन गुना फल मिलता है , यह फल सदा सेवन योग्य है। जो प्राणी इस वृक्ष का रोपण करता है उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है।महत्वशास्त्रों में आंँवला, पीपल, वटवृक्ष, शमी, आम और कदम्ब के वृक्षों को हिन्दू धर्म में वर्णित चारों पुरुषार्थ दिलाने वाला बताया गया है। इन वृक्षों की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा भक्तों पर बरसाते हैं। आंवला नवमी के दिन आंवला वृक्ष का पूजन कई यज्ञों के बराबर शुभ फल देने वाला बताया गया है। आंँवला नवमी पर आंँवले के पेड़ के नीचे पूजा और भोजन करने की प्रथा की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी। कथा के अनुसार एक बार मांँ लक्ष्मी पृथ्वी पर घूमने के लिये आयी। धरती पर आकर मांँ लक्ष्मी सोचने लगीं कि भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा एक साथ कैसे की जा सकती है ? तभी उन्हें याद आया कि तुलसी और बेल के गुण आंँवले में पाये जाते हैं। तुलसी भगवान विष्णु को और बेल शिवजी को प्रिय है। उसके बाद मांँ लक्ष्मी ने आंँवले के पेड़ की पूजा करने का निश्चय किया। मांँ लक्ष्मी की भक्ति और पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिवजी साक्षात प्रकट हुये। माता लक्ष्मी ने आंँवले के पेड़ के नीचे भोजन तैयार करके भगवान विष्णु व शिवजी को भोजन कराया और उसके बाद उन्होंने खुद भी वहीं भोजन ग्रहण किया।मान्यताओं के अनुसार, आंवला नवमी के दिन अगर कोई महिला आंँवले के पेड़ की पूजा कर उसके नीचे बैठकर भोजन ग्रहण करती है, तो भगवान विष्णु और शिवजी उसकी सभी इच्छायें पूर्ण करते हैं। इस दिन महिलायें अपनी संतना की दीर्घायु तथा अच्छे स्वास्थ्य लेकर कामना करती हैं। इस दिन आँवला नवमीं की कथा भी सुनी जाती है। मान्यता है कि इस कथा को सुनने से व्रत रखने वाली महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। माता लक्ष्मी भी उनके परिवार पर प्रसन्न होती है।क्यों इतना मूल्यवान आंँवला?आंँवले का फल पौराणिक दृष्टिकोण से रत्नों के समान मूल्यवान माना जाता है। कहते है कि शंकराचार्य ने इसी फल को स्वर्ण में परिवर्तित कर दिया था। इस फल का प्रयोग कार्तिक मास से आरम्भ करना अनुकूल माना जाता है। इस फल के सटीक प्रयोग से आयु, सौन्दर्य और अच्छे स्वस्थ्य की प्राप्ति होती है। मात्र यही ऐसा फल है जो सामान्यतः नुकसान नहीं करता है।आंँवले के फल का विशेष प्रयोगअगर धन का अभाव हो तो हर बुधवार को भगवान को आंँवला अर्पित करें। अगर उत्तम स्वास्थ्य चाहिये तो कार्तिक माह में आंँवले के रस का नियमित प्रयोग करें। आंँवले के वृक्ष के नीचे शयन, विश्राम और भोजन करने गोपनीय से गोपनीय बीमारियांँ और चिंतायें दूर हो जाती हैं। आंँवले के फल को दान देने से मानसिक चिंतायें दूर होती हैं। आंवले का चूर्ण खाने से वृद्धावास्था का प्रकोप नहीं होता है। कार्तिक मास में आंँवले को भोजन में शामिल करें अथवा आंँवले के रस में तुलसी मिलाकर सेवन करें। कार्तिक में आंँवले का पौधा लगाने से संतान और धन की कामनायें पूर्ण होती हैं , आंँवले के फल को सामने रखकर कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है। अगर कर्ज से परेशान हों तो घर में आंँवले का पौधा लगाकर इसमें रोज सुबह पानी डालें।
: पीएम मोदी आज करेंगे 5G मोबाइल सर्विस लॉन्च
Sun, Oct 2, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 5जी सेवाओं की शुरुआत करेंगे। हाई स्पीड मोबाइल इंटरनेट सुविधा के शुभारंभ के दौरान पीएम दिल्ली के द्वारका सेक्टर 25 में मेट्रो के आगामी स्टेशन की भूमिगत सुरंग से 5जी सेवाओं के कामकाज का प्रदर्शन भी देखेंगे। पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री आज 01 से 04 अक्टूबर तक दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाले इंडियन मोबाइल कांग्रेस के छठे संस्करण का भी उद्घाटन करेंगे , जिसका विषय 'न्यू डिजिटल यूनिवर्स' है। दूरसंचार विभाग और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया मिलकर आईएमसी के छठे संस्करण का अनावरण करेंगे। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कुछ दिन पहले बयान जारी किया था कि देश में 5G को धीरे-धीरे अलग-अलग फेज में लॉन्च किया जायेगा। पहले फेज के लिये अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गांधीनगर, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे जैसे 13 शहरों में फिलहाल 5जी शुरू करने की योजना है। इसके बाद दो साल में पूरे देश में 5G कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार किया जायेगा। आईटी मंत्री ने कहा हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इसकी कीमत कम रहे। दूरसंचार उद्योग 5जी सेवाओं के विस्तार के लिये शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पहले फेज के बाद छोटे शहरों को भी इस सेवा से जोड़ा जायेगा। बताया जा रहा है कि इस लॉन्चिंग के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, भारती एयरटेल के प्रमुख सुनील भारती मित्तल और वोडाफोन इंडिया के कुमार मंगलम बिरला भी मौजूद रहेंगे।