: मिलकर निकालेंगे चुनौतियों का हल - सीडीएस अनिल चौहान
Fri, Sep 30, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - नेशनल वार मेमोरियल में बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि देने और तीनों सेनाओं के संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर के बाद देश के नवनियुक्त और दूसरे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस - चीफ आफ डिफेंस स्टाफ) लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड अनिल चौहान (61 वर्षीय) ने आज पदभार सम्हाल लिया है। वे जनरल बिपिन रावत की जगह देश के दूसरे सीडीएस बने हैं। तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन के नौ महीने से ज्यादा समय बाद लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने वरिष्ठतम सैन्य कमांडर का दायित्व ग्रहण किया है। केन्द्र सरकार ने बुधवार को उन्हें नया सीडीएस मनोनीत किया था। वे रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के तौर पर भी काम करेंगे। पदभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने अपने पिता सुरेन्द्र सिंह चौहान के साथ दिल्ली स्थित वॉर मेमोरियल और अमर जवान ज्योति पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया। उन्हें रायसीना हिल्स में साउथ ब्लॉक के लॉन पर तीनों सशस्त्र सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडेय, वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और नौसेना के उप प्रमुख वाईस एडमिरल एस. एन. घोरमाडे सहित नये सीडीएस चौहान की पत्नी अनुपमा भी उनके साथ थीं। लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड चौहान देश के पहले तीन सितारा सैन्य अधिकारी (ले. जनरल) हैं, जिन्हें चार सितारा यानि जनरल बनाकर इतने अहम पद पर नियुक्त किया गया है। नये चीफ आफ डिफेंस स्टाफ बतौर अनिल चौहान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उनके सामने सशस्त्र सेनाओं के तीनों अंगों के बीच समन्वय और महत्वाकांक्षी ‘थियेटर’ कमान के निर्माण का लक्ष्य है ताकि देश की सेनाओं को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिये तैयार किया जा सके। जनरल चौहान को चीन मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है और शीर्ष पद पर उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच सीमा को लेकर विवाद बना हुआ है। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में सीडीएस जनरल चौहान ने कहा - भारतीय सशस्त्र बलों में सर्वोच्च रैंक की जिम्मेदारी संभालने पर गर्व है। मैं चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में तीनों सेना की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करूंगा। हम सभी हमारे सामने सुरक्षा संबंधी जो भी चुनौतियां और मुश्किलें हैं उसको साझा रूप से दूर करने की कोशिश करेंगे।
गौरतलब है कि देश के नये सीडीएस अनिल चौहान का जन्म 18 मई 1961 को हुआ था। वे मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रहने वाले हैं। पहली बार वे वर्ष 1981 में भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल्स में भर्ती हुये थे। वे नेशनल डिफेंस अकेडमी खडकवासला और इंडियन मिलिट्री अकेडमी देहरादून के पूर्व छात्र रह चुके हैं। लगभग 40 वर्षों से अधिक के अपने करियर में लेफ्टिनेंट जनरल (रि) अनिल चौहान ने कई कमांड, स्टाफ और सहायक नियुक्तियां की हैं। जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों में उन्हें व्यापक अनुभव है। गोरखा राइफल से सेना में उनकी एंट्री हुई थी। जनरल चौहान 2019 में बालाकोट हमले के दौरान सेना के सैन्य परिचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) थे। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले के जवाब में भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट पर हवाई हमले किये थे और जैश ए मोहम्मद के प्रशिक्षण केंद्रों को बर्बाद कर दिया था। चालीस साल के शानदार केरियर के बाद 31 मई 2021 को सेना की पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान रिटायर हो गये थे। इसके बाद वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के अधीन सैन्य सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे। सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रणनीतिक मामलों में योगदान देना जारी रखा। उन्हें राष्ट्र की सेवा के लिये समय-समय पर परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।
: प्रेम और वात्सल्य की प्रतीक है स्कन्दमाता – अरविन्द तिवारी
Fri, Sep 30, 2022
नई दिल्ली - या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थात - हे माँ ! सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अम्बे आपको मेरा बार – बार प्रणाम है।नवरात्रि के पांँचवे दिन आज माँ दुर्गा के पांँचवे स्वरुप स्कन्दमाता की पूजा-आराधना- उपासना की जाती है। स्कन्दमाता की पूजा करने से साधन , ध्यान और उपासना में सफलता प्राप्त होती है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी है। स्कन्दमाता सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। इसलिये स्कंदमाता की उपासना करने वाले साधक सदा तेजस्वी और निरोगी रहते हैं। इनकी कृपा से बुद्धि का विकास , ज्ञान का आशीर्वाद और समस्त व्याधियों का अंत हो जाता है। आज के दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। माना जाता है कि मांँ स्कन्दमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छायें पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिये मोक्ष का द्वार स्वमेव सुलभ हो जाता है। स्कन्दमाता की उपासना से बालरूप स्कन्द भगवान की उपासना भी स्वयमेव हो जाती है। यह विशेषता केवल इन्हीं को प्राप्त है , अत: साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिये। आज माँ को चम्पा के पुष्प के साथ साथ श्रृंगार में हरे रंग की चूड़ियाँ अर्पित करें। बता दें कालिदास द्वारा रचित रघुवंश महाकाव्यम् और मेघदूत रचनायें स्कन्दमाता की कृपा से ही स़ंभव हुई है।स्कन्दमाता नाम क्यों पड़ा ?स्कन्दमाता ममता की मूर्ति प्रेम और वात्सल्य की प्रतीक साक्षात दुर्गा का स्वरूप मानी जाती हैं। पार्वती और शिव के पुत्र है स्कन्द(कार्तिकेय) जो प्रसिद्ध देव असुर संग्राम मे सेनापति बने थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इन्हें कुमार और शक्ति कहा गया है। माता पार्वती ने जब कार्तिकेय को जन्म दिया तब से वह स्कन्दमाता हो गयी। यह भी मान्यता है कि मां दुर्गा ने बाणासुर के वध के लिये अपने तेज से छह मुख वाले सनतकुमार को जन्म दिया , जिनको स्कन्द भी कहते हैं। इन्ही स्कन्द यानि कार्तिकेय की माता होने के कारण ही इन्हे माँ के पाँचवाँ स्वरूप स्कन्दमाता कहा गया है। यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिये इनके चारों ओर सूर्य सदृश अलौकिक तेजोमय मंडल सा दिखाई देता है।नि:संतानों को देती हैं संतानऐसी मान्यता है कि जिन लोगों को संतान की चाहत होती है उन्हें सच्चे मन से स्कन्दमाता की आराधना करनी चाहिये। कहते हैं कि उनकी उपासना करने से नि:संतानों को भी शीघ्र ही संतान की प्राप्ति होती है। जिन व्यक्तियों को संतानाभाव हो वे माता के सामने दीप प्रज्वलित कर के षोडशोपचार पूजन-अर्चन तथा अत्यंत सरल मंत्र ‘।।ॐ स्कन्दमात्रै नम:।।’ का जाप कर लाभ उठा सकते हैं। शेर पर सवार स्कन्द माता का वाहन मयूर भी है। इनकी पूजा केसर युक्त चंदन व सफेद वस्त्र से करते हैं। विभिन्न आभूषणों के अलंकार चढ़ाने से मां प्रसन्न होती हैं और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिये।एकाग्रता की देती है सीखस्कन्दमाता हमें सिखाती है कि जीवन स्वयं ही अच्छे-बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम है व हम स्वयं अपने सेनापति हैं। हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती रहे इसलिये मां स्कन्दमाता की पूजा-आराधना करनी चाहिये। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिये जिससे कि ध्यान , चित्त् और वृत्ति एकाग्र हो सके। यह शक्ति परम शांति व सुख का अनुभव कराती है। कहते हैं कि स्कन्दमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस वजह से इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। मन को एकाग्र रखकर और शुद्ध रखकर स्कंदमाता की आराधना करने वाले भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती हैं। विधि विधान से पूजा कर स्कन्दमाता को प्रसन्न करने से शत्रु आपको पराजित नहीं कर पाते हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति जीवन – मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।स्कंदमाता की कथाप्राचीन कथा के अनुसार तारकासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिये कठोर तपस्या कर रहा था। उस कठोर तप से ब्रह्मा जी प्रसन्न होकर उनके सामने आये। ब्रह्मा जी से वरदान मांगते हुये तारकासुर ने अमर करने के लिये कहा। तब ब्रह्मा जी ने उसे समझाया कि इस धरती पर जिसने भी जन्म लिया है उसे मरना ही है। निराश होकर उसने ब्रह्मा जी कहा कि प्रभु ऐसा कर दें कि भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही उसकी मृत्यु हो। तारकासुर की ऐसी धारणा थी कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे , इसलिये उसकी कभी मृत्यु नहीं होगी। फिर उसने लोगों पर हिंसा करनी शुरू कर दी। तारकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और तारकासुर से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। तब शिव ने पार्वती से विवाह किया और कार्तिकेय के पिता बनें। तब मांँ पार्वती ने अपने पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय का दूसरा नाम) को युद्ध के लिये प्रशिक्षित करने हेतु स्कन्द माता का रूप लिया और उन्होंने भगवान स्कन्द को युद्ध के लिये प्रशिक्षित किया था। स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षिण लेने के पश्चात् भगवान स्कन्द ने तारकासुर का वध किया।स्कंदमाता का स्वरुपस्कन्दमाता (चतुर्भूज) चार भुजाओं वाली हैं। ये अपने दो हाथों मे कमल पुष्प धारण की हुई हैं।और अपने तीसरे हाथ मे कुमार स्कन्द (कार्तिकेय) को सहारा देकर बैठायी हैं। इनका चौथा हाँथ भक्तों के कल्याण के लिये है अर्थात वरमुद्रा में है। माँ अपने इस स्वरुप मे पूर्णत: ममतामयी हैं। देवी स्कंदमाता ही पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती हैं।इन्हे शिव की पत्नी होने के कारण मातेश्वरी कहा गया तथा इनके गौर वर्ण के कारण इन्हे देवी गौरी कहा गया है। माँ का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल पर विराजमान रहती हैं इसलिये इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। स्कन्दमाता का वाहन सिंह है।स्कंदमाता सदैव ही अपने भक्तो के लिये कल्याणकारी हैं। इनकी उपासना से भक्त की समस्त इच्छायें पूर्ण हो जाती है।
: पीएम मोदी आज से दो दिवसीय गुजरात दौरे पर , देंगे करोड़ों की सौगात
Fri, Sep 30, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - पीएम मोदी आज से अपने गृहराज्य गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे गुजरात के सूरत , भावनगर , अहमदाबाद और अंबाजी में 29000 करोड़ रूपये से भी अधिक के विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं में अहमदाबाद मेट्रो परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन और गांधीनगर-मुंबई सेंट्रल वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाना भी शामिल है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में बताया कि इस दौरान वे आज अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 36वें राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन भी करेंगे। पीएमओ के मुताबिक प्रधानमंत्री आज सूरत में 3,400 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें जल आपूर्ति, निकासी, ड्रीम सिटी, जैव विविधता पार्क और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा से जुड़ी विकास परियोजनायें शामिल हैं। वे सूरत में प्रधानमंत्री सड़क परियोजना के पहले चरण के कार्यों और डायमंड रिसर्च एंड मर्केंटाइल (ड्रीम) सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन करेंगे।इस अवसर पर प्रधानमंत्री परियोजना के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखेंगे। वे सूरत में बन रहे बायोडायवर्सिटी पार्क की आधारशिला रखेंगे और यहां के विज्ञान केंद्र में खोज संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री भावनगर का दौरा करेंगे , जहां वह 5,200 करोड़ रुपये की विभिन्न विकासात्मक पहलों व परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।प्रधानमंत्री यहां विश्व के पहले सीएनजी टर्मिनल और ब्राउनफील्ड बंदरगाह की आधारशिला रखेंगे। बुनियादी सुविधाओं से लैस इस बंदरगाह को 4,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जायेगा। सीएनजी टर्मिनल के अलावा यह बंदरगाह इस क्षेत्र में विभिन्न आगामी परियोजनाओं की भविष्य की जरूरतों और मांगों को भी पूरा करेगा। बंदरगाह में मौजूदा सड़क मार्ग और रेलवे नेटवर्क से सीधे डोर-स्टेप कनेक्टिविटी के साथ अत्याधुनिक कंटेनर टर्मिनल, बहुउद्देशीय टर्मिनल और लिक्विड टर्मिनल होगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री भावनगर क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे , कुल 100 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र 20 एकड़ भूभाग में फैला है।पीएमओ ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन करने के बाद खिलाड़ियों को संबोधित भी करेंगे. इस कार्यक्रम के दौरान वह विश्व स्तरीय स्वर्णिम गुजरात खेल विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगे।प्रधानमंत्री अहमदाबाद में एक कार्यक्रम में अहमदाबाद मेट्रो परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन और गांधीनगर व मुम्बई के बीच वंदे भारत ट्रेन के नये संस्करण को हरी झंडी दिखाने सहित रेल संबंधी कुछ अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। अहमदाबाद मेट्रो परियोजना के पहले चरण को पूरा करने में 12,900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आयी है। पीएमओ ने कहा कि प्रधानमंत्री अंबाजी में 7,200 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें पीएम-आवास योजना के तहत 45,000 मकानों और तरंगा पहाड़ी-अंबाजी-आबू रोड के बीच रेलवे की नयी बड़ी लाइन बिछाने की आधारशिला रखा जाना शामिल है।प्रधानमंत्री पालनपुर-न्यू मेहसाणा रेल खंड के बीच 62 किलोमीटर लंबे पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में नवरात्रि महोत्सव में शामिल होंगे , अंबाजी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे तथा गब्बर तीर्थ में महाआरती में शामिल होंगे।