: देश के नये मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस यूयू ललित
Sun, Aug 28, 2022
नई दिल्ली - न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित (यूयू ललित) ने आज भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश की शपथ दिलाई। जस्टिस ललित ने शपथ ग्रहण के बाद अपने पिता जस्टिस उमेश रंगनाथ ललित समेत अन्य बड़े बूजुर्गों के पैर छूकर उनके आशीर्वाद लिये। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ , कानून मंत्री किरण रिजिजू के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और न्यायमूर्ति ललित से पहले प्रधान न्यायाशीध के रूप में सेवायें देने वाले न्यायमूर्ति एन०वी०रमणा सहित सुप्रीम कोर्ट के कई जज मौजूद रहे। बताते चलें कि सीजेआई एनवी रमना 26 अगस्त को सेवानिवृत्त हुये थे , जिसके बाद जस्टिस उदय रमेश को भारत का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि भारत के नये प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित का जन्म 09 नवंबर 1957 को महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ था। वे जून 1983 में महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकित हुये थे। इसके बाद जनवरी 1986 में उन्होंने दिल्ली आने से पहले दिसंबर 1985 तक बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की थी। उल्लेखनीय है कि चार पीढ़ियों से यूयू ललित का परिवार न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जस्टिस ललित के दादा रंगनाथ ललित आजादी से पहले सोलापुर में एक वकील थे। जस्टिस यूयू ललित के 90 वर्षीय पिता उमेश रंगनाथ ललित भी एक पेशेवर वकील रह चुके हैं। बाद में उन्होंने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। वहीं सीजेआई ललित की पत्नी अमिता उदय ललित का पेशेवर जीवन वकालत से अलग है। वे एक टीचर हैं जो नोएडा में दशकों से स्कूल चला रही हैं। जस्टिस ललित और अमिता के दो बेटे हैं। बड़े बेटे श्रेयस और उनकी पत्नी रवीना दोनों ही वकील हैं। छोटा बेटा हर्षद अपनी पत्नी राधिका के साथ अमेरिका में रहता है। क्रिमिनल लॉ में एक्सपर्ट चीफ जस्टिस ललित टू जी मामलों में सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक के रूप में काम करने केपांच अलावा लगातार दो कार्यकाल तक वे सुप्रीम कोर्ट की कानूनी सेवा समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। दस जनवरी 2019 को न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने खुद को अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पांच जजों की बेंच से अलग कर सुर्खी बटोरी थी। ऐसा करने के पीछे उन्होंने तर्क दिया था कि करीब बीस साल पहले वे अयोध्या विवाद से जुड़े एक आपराधिक मामले में यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के वकील रह चुके थे। इन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाये हैं। इनमें सबसे ज्यादा अहम तीन तलाक , केरल में पद्मनाभस्वामी मंदिर पर त्रावणकोर शाही परिवार का दावा और पॉक्सो से जुड़े कानून पर उन्होंने फैसले लिये। जस्टिस ललित भारत के इतिहास में ऐसे दूसरे चीफ जस्टिस हैं जो सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से पहले किसी हाईकोर्ट में जज नहीं रहे , बल्कि वे सीधे वकील से इस पद पर पहुंचे हैं। इनसे पहले 1971 में देश के 13वें मुख्य न्यायाधीश एस एम सीकरी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इनका का कार्यकाल तीन महीने से भी कम का होगा और वे आठ नवंबर को अपने पद से रिटायर होंगे।
: सूचना प्रसारण मंत्री ने किया आजादी क्वेस्ट मोबाइल गेम लॉन्च
Sun, Aug 28, 2022
नई दिल्ली - आजादी क्वेस्ट मोबाइल गेम स्वतंत्रता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों और गुमनाम नायकों के योगदान को स्वीकार करने के लिये सरकार द्वारा किये गये प्रयासों की एक श्रृंखला में एक है। इस गेम को आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानियों को लोगों के सामने लाने के लिये पेश किया गया है। इस आनलाइन लर्निंग मोबाइल गेम्स सीरीज को जिंगा इंडिया के सहयोग से डेवलप किया गया है। ये गेम ऑनलाइन गेमर्स के विशाल बाजार में प्रवेश करने और गेम के माध्यम से उन्हें शिक्षित करने की एक कोशिश है।
उक्त बातें केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आजादी क्वेस्ट मोबाइल गेम को लॉन्च करते हुये कही। उन्होंने कहा कि आज गेम की दुनियां मे भी हमारा देश लगातार तरक्की कर रहा है और वर्ष 2023 तक ये उम्मीद है कि देश मे 45 करोड़ गेमर्स हो जायेंगे। केन्द्रीय मंत्री ने कहा आजादी क्वेस्ट ऑनलाइन गेम्स स्वतंत्रता संग्राम पर प्रामाणिक और सुलभ जानकारी का खजाना हैं। इस मोबाइल ऐप का उद्देश्य ऑनलाइन गेम के जरिये देश के उन नायकों के बारे में बताना है जिन्होंने देश की आजादी विकास में सहयोग दिया। ये गेम भारत के लोगों के लिये अंग्रेजी और हिंदी में एंड्रॉइड और आईओएस डिवाइस के लिये उपलब्ध हैं और सितंबर 2022 से दुनियां भर में उपलब्ध होंगे। आज़ादी क्वेस्ट सीरीज़ भारत के स्वतंत्रता संग्राम और देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों की लीजेंड का ज्ञान प्रदान करेगी , जिससे खिलाड़ियों में गर्व की भावना और कर्तव्य की भावना पैदा होगी और औपनिवेशिक मानसिकता की भावना को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जायेगी। इसके साथ ही जीतने वालों को सर्टिफिकेट देने के साथ ही उन्हें रेडियो पर भी बुलाया जायेगा। उन्होंने कहा भारत सरकार की विभिन्न शाखाओं ने देश के कोने-कोने से गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी इकठ्ठी की है। आजादी क्वेस्ट गेम इस ज्ञान की सीख को आकर्षक और संवादात्मक बनाने की एक कोशिश है। सभी आयु वर्ग के लोगों को इस गेम से जोड़ा जायेगा और उम्मीद है कि जल्दी ही इस गेम को घर-घर में पसंद किया जाने लगेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के आह्वान पर देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और इस बार स्वतंत्रता दिवस ओर उन्होंने इतने तिरंगे देखे जितना बचपन से बड़े होने तक कभी नही देखा था। उन्होंने कहा कि जिस तरह घर-घर तिरंगा अभियान सफल हुआ है , उसी तरह इस गेम को खेल कर औऱ शेयर कर सफल बनायें। क्योंकि इतिहास के इन हीरो की जानकारी स्कूली किताबों में बहुत सीमित रखी गई है , अब मौका है इन आज़ादी के नायकों को विस्तार से जानने का। इस इस ऑनलाइन गेम को जिंगा नाम की ऑनलाइन गेमिंग कंपनी के साथ मिलकर सरकार ने तैयार किया है। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा और जिंगा इंडिया के कंट्री हेड किशोर किचली भी उपस्थित थे। बताते चलें आजादी क्वेस्ट के पहले दो गेम भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानी बताते हैं , जिसमें प्रमुख मिल के पत्थर और नायकों को उजागर करने की कोशिश की गई है। खेल सामग्री सरल लेकिन व्यापक है। खेल को विशेष रूप से प्रकाशन विभाग द्वारा तैयार किया गया है और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद के विशेषज्ञों द्वारा इसकी जांच की गई है।
: सत्य वचन की मर्यादा का पर्व है बहुला चौथ - अरविन्द तिवारी
Wed, Aug 17, 2022
नई दिल्ली - भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है। इस व्रत का बेहद खास धार्मिक महत्व है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि इस तिथि में विवाहित महिलायें अपने पुत्रों की रक्षा के लिये इस व्रत को रखती हैं। वस्तुत: यह गौ पूजा और सत्य वचन की मर्यादा का पर्व है। माता की भांँति अपना दूध पिलाकर गौ माता मनुष्य की रक्षा करती है, उसी कृतज्ञता के भाव से इस व्रत को सभी करते हैं। ये तिथि गणेशजी के पूजन के साथ-साथ श्री कृष्ण और गायों के पूजन के लिये भी महत्वपूर्ण मानी गई है। साथ ही इस दिन सुख-समृद्धि के लिये संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी किया जाता है , जिसमें भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। यानि इस एक ही तिथि पर दो देवताओं के लिये व्रत व पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान के सारे कष्ट अपने आप ही शीघ्र खत्म हो जाते हैं। यह व्रत नि:संतान को संतान तधा संतान को मान सम्मान एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाला माना जाता है , मन की इच्छायें पूर्ण होती हैं , शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है , धन-धान्य में वृद्धि होती है। बहुला चौथ की पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन स्त्रियां अपने बच्चों की खुशहाली और लंबी उम्र के लिये कुम्हारों द्वारा मिट्टी से भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय-श्रीगणेश , गाय तथा सिंह की प्रतिमा बनवाती हैं. इसके बाद मंत्रोच्चारण तथा विधि-विधान के साथ इस प्रतिमा को स्थापित करके उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा में भगवान को भोग लगाने के लिये कई तरह के पकवान बनाये जाते हैं जिसे बाद में गाय और बछड़े को खिलाया जाता है। व्रत रखने वाली स्त्री इस दिन बहुला कथा का श्रवण , पाठ भी करती हैं। इस व्रत को रखने और सुनने से अपार धन व सभी तरह के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है , घर परिवार में सुख शांति आती है , साथ ही यह व्रत जन्म मरण के चक्र से मुक्ति भी दिलाता है। इस व्रत में गाय और बछड़े के पूजन का बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन गाय के दूध या उससे बनी कोई चीज उपभोग नही करते हैं। इस गाय के दूध पर उसके बछडे के अधिकार समझना चाहिये। आज दिन भर व्रत रखकर संध्या के समय बछड़े सहित गाय माता की पूजा करनी चाहिये। इस दिन गेंहूँ और चाँवल का भोज्य वर्जित माना गया है।बहुला चौथ कथाबहुला चौथ व्रत कथा के अनुसार किसी ब्राह्मण के घर में बहुला नामक एक गाय थी। बहुला गाय का एक बछड़ा था. बहुला को संध्या समय में घर वापिस आने में देर हो जाती तो उसका बछड़ा व्याकुल हो उठता था। एक दिन बहुला घास चरते हुये अपने झुंड से बिछड़ गई और जंगल में काफ़ी दूर निकल गयी , तभी भगवान श्रीकृष्ण को माया सूझी। जंगल में जब गाय अपने घर लौटने का रास्ता खोज रही थी कि भगवान अचानक उसके सामने एक खूंखार सिंह के रूप में पहुँचे , सिंह ने बहुला पर झपट्टा मारा। तब बहुला उससे विनती करने लगी कि उसका छोटा-सा बछड़ा सुबह से उसकी राह देख रहा है , वह भूखा है और दूध मिलने की प्रतीक्षा कर रहा है , आप कृपया कर मुझे जाने दें। मैं उसे दूध पिलाकर वापिस आ जाऊँगी, तब आप मुझे खाकर अपनी भूख को शांत कर लेना। सिंह को बहुला पर विश्वास नहीं था कि वह वापिस आयेगी , तब बहुला ने सत्य और धर्म की शपथ ली और सिंहराज को विश्वास दिलाया कि वह वापिस जरूर आयेगी तब सिंह ने बहुला को उसके बछड़े के पास वापिस जाने दिया। बहुला शीघ्रता से घर पहुँची , अपने बछडे़ को शीघ्रता से दूध पिलाया और उसके बाद अपना वचन पूरा करने के लिये सिंहराज के समक्ष जाकर खडी़ हो गयी। सिंह के रुप में भगवान कृष्ण को उसे अपने सामने देखकर बहुत हैरानी हुई। उसे देखकर सिंह का रूप धरे श्रीकृष्ण भगवान प्रकट हो गये और बोले यह तेरी परीक्षा थी। तू अपने सत्य धर्म पर दृढ़ रही, अत: इस प्रभाव से घर-घर में तेरा पूजन होगा और तू गौ माता के नाम से पुकारी जायेगी। बहुला अपने घर लौट आयी और अपने बछड़े के साथ आनंद से रहने लगी। यह व्रत हमें अपने सत्य धर्म की रक्षा की संदेश देती है।