: केन्द्रीय गृहमंत्री का छग दौरा , विभिन्न कार्यक्रमों में होंगे शामिल
Sun, Aug 28, 2022
रायपुर - भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के शक्ति प्रदर्शन के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 27 अगस्त को एकदिवसीय दौरे पर रायपुर आ रहे हैं। यहां साइंस कालेज के दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में भाजपा की ओर से आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित किताब पर चर्चा करेंगे। अमित शाह के प्रवास के दौरान यहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रांतीय कार्यालय का भी उद्घाटन होना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज अमित शाह के दौरे का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके मुताबिक शाह कुल पांच घंटे पंद्रह मिनट तक रायपुर में रहने वाले हैं। इसके मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दोपहर बाद दो बजकर पांच मिनट पर रायपुर पहुंचेंगे। छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान वे पांच घंटे रायपुर में रहेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। बता दें छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह दूसरा मौका है , जब अमित शाह भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे।छत्तीसगढ़ दौरे के लिये जारी शेड्यूल के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दोपहर दो बजकर पांच मिनट में रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे , यहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा स्वागत किये जाने के बाद एनआईए भवन के लिये रवाना होंगे। वे ढाई बजे से लेकर साढ़े तीन बजे तक नवा रायपुर के सेक्टर-24 में बने एनआईए के प्रदेश मुख्यालय भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। वहां से अमित शाह शाम चार बजे साइंस कॉलेज के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंचेंगे। वहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित किताब मोदी एट द रेड 20 पर बौद्धिक वर्ग से संवाद करने वाले हैं। इस संवाद के बाद केंद्रीय गृहमंत्री शाम साढ़े पांच बजे भाजपा के प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर जायेंगे। वे बीजेपी मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में भाजपा नेताओं की बैठक लेंगे। इसमें प्रदेश पदाधिकारियों के अलावा उन चुनिंदा पदाधिकारियों को शामिल किया जायेगा , जिनकी वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका होगी। भाजपा मुख्यालय में मुलाकात और चर्चा के बाद गृहमंत्री शाह शाम सात बजकर बीस मिनट पर रायपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिये रवाना हो जायेंगे।
: संतान के दीर्घायु की कामना का पर्व है हलषष्ठी - अरविन्द तिवारी
Wed, Aug 17, 2022
रायपुर - भारतीय संस्कृति में यूँ तो सभी पर्वों का अपना अलग-अलग महत्व है इन्ही पर्वों में से एक हलषष्ठी पर्व है। जिसमे संतान की सुख-समृद्धि व दीर्घायु होने की मनोकामना के लिये हलषष्ठी (खमरछठ) का पर्व विभिन्न मंदिरों एवं घरों में महिलाओं द्वारा सामूहिक रुप से पूजा-अर्चना कर मनाया जायेगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पुत्र के दीर्घायु होने की कामना को लेकर माताओं द्वारा मनाया जाने वाला छत्तीसगढ़ का पावन पर्व खमरछठ व्रत भादो माह की षष्ठी तिथि यानि आज मनाया जायेगा। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई श्रीबलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन शेषनाग के अवतार श्री बलराम जी का जन्म हुआ था।बलरामजी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है इसलिये उन्हें हलधर भी कहा जाता है एवं उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा है। हलषष्ठी के दिन माताओं को महुआ की दातुन और महुआ खाने का विधान है। इस दिन खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों की भी पूजा की जाती है। यह व्रत मातायें अपनी संतान की प्राप्ति और उनकी दीर्घायु एवं सुख - समृद्धि की कामना के लिये रखती हैं। हलषष्ठी में उपवास रहकर मिट्टी से निर्मित भगवान शंकर, पार्वती, गणेश, कांर्तिकेय, नंदी , बांटी, भौंरा, एवं शगरी बनाकर पूजा-अर्चना किया गया जाता है एवं कनेर, धतूरा, मंदार, बेलपत्ती, सफेद फूल आदि विशेषरुप से भगवान को चढ़ाया जाता है। आज के दिन पूजन पश्चात महिलायें प्रसाद के रुप में पसहर चांवल, भैसी का दूध, दही, घी, मुनगे का भाजी सहित छह प्रकार की भाजी एवं बिना हल जोते मिर्च का फलाहार किया जाता है। इस व्रत में महिलाओं हल द्वारा उत्पन्न खाद्य फसल से परहेज करती है। इस दिन महिलायें अपनी संतान की दीर्घायु के लिये पुत्र के बायें कंधे एवं पुत्री के दायें कंधे में छह -छह बार नये कपड़े के कतरन को शगरी में डुबाकर चिन्ह लगाती हैं जिससे उनकी संतान को भगवान का आर्शीवाद प्राप्त होता है।हलषष्ठी व्रत कथावैसे तो इस व्रत की छह कथाये हैं। इनमें सबसे प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी , उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जायेगा। यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिये चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया। वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हलषष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया। उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था , उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया। कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है। वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध ना बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट ना किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा ना होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिये। ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची , जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया। बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है। तभी उसने स्वार्थ के लिये झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ ना बोलने का प्रण कर लिया।
: नेता प्रतिपक्ष की कमान सम्हालेंगे नारायण चंदेल
Wed, Aug 17, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में प्रदेशाध्यक्ष को बदलने के बाद आखिरकार अपना नेता प्रतिपक्ष भी बदल दिया है। जांजगीर चांपा के विधायक नारायण चंदेल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। आज राजधानी में हुई विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर पार्टी ने मुहर लगा दिया। भाजपा कार्यालय में विधायक दल की बैठक में यह फैसला लिया गया और बीजेपी प्रदेश प्रभारी डी.पुरंदेश्वरी ने विधायक दल की मीटिंग में बंद लिफाफे से नेता प्रतिपक्ष का नाम निकाला। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की जगह अब बीजेपी ने नये नेता प्रतिपक्ष के रूप में नारायण चंदेल को चुना है। माना जा रहा है भाजपा में यह सर्जरी मिशन-2023 के चुनावों के मद्देनजर की जा रही है। बताया जा रहा है कि नारायण चंदेल का नाम राष्ट्रीय संगठन के नेताओं के साथ चर्चा के बाद फाइनल किया गया है। भाजपा की इसे जातिगत समीकरण सेट करने की कोशिश माना जा रहा है। भाजपा ने बिलासपुर सांसद अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के बाद नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष बनाकर ओबीसी चेहरे पर दांव खेला है। अब देखना लाजिमी है कि आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी नीचे स्तर तक के संगठन में किस तरह से फेरबदल करते हुये कार्यकर्ताओं में उर्जा डालने का काम करती है। विधायक दल की बैठक में छत्तीसगढ़ की प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी , सहप्रभारी नितिन नवीन , प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव , पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल सहित कई नेता शामिल थे। वहीं नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में विधायक नारायण चंदेल , अजय चंद्राकर, बृजमोहन अग्रवाल और शिवरतन शर्मा थे। बताते चलें भाजपा में हमेंशा यह भी देखा जाता है कि पार्टी में अचानक से कोई चौंकाने वाला नाम सामने आ जाता है जैसे हाल ही में अरुण साव को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया।बदलाव सतत प्रक्रिया है - चंदेलनेता प्रतिपक्ष के बदलाव के सवाल पर चंदेल ने कहा कि बदलाव सतत प्रक्रिया है। विधायक दल की बैठक में सर्व सम्मति से मुझे यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। सभी विधायक साथियों का मैं आभार व्यक्त करता हूं। वहीं नये नेता प्रतिपक्ष चंदेल ने कहा कि चुनौती के समय मुझे विधायक दल का नेता चुना गया है। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस की सरकार उखाड़कर फेंकना और आने वाले चुनाव में शान से कमल खिलाना यह हमारी प्राथमिकता है , हम सब टीम के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की दशा और दिशा ठीक नहीं है। झूठे वादे कर जनता का जनादेश कांग्रेस ने पाया है , सरकार के ख़िलाफ़ जनाक्रोश है। सदन में हम संख्या में सिर्फ़ चौदह हैं , लेकिन सरकार को घुटने टेकने पर हमने मजबूर कर दिया। वहीं धरमलाल कौशिक ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार है जिन्होंने मुझे नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम करने का मौक़ा दिया। आगे भी जो ज़िम्मेदारी मिलेगी उसे निभाऊंगा। उन्होंने कहा कि आज नारायण चंदेल के नाम का प्रस्ताव मैंने बैठक में रखा और पुन्नूलाल मोहले ने समर्थन किया। विधानसभा में हमने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा है , एकजुटता के साथ हमने काम किया है।जिला संयोजक खम्हन तिवारी ने दी बधाईनारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने पर पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह एवं जोश का माहौल देखने को मिल रहा है। भाजपा जिला के तरफ से सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं जिला कार्यकारिणी सदस्य खम्हन प्रसाद तिवारी ने नारायण चंदेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की है। तिवारी ने कहा है कि चंदेल के मंशानुरूप हमारी पार्टी के सभी कार्यकर्ता छत्तीसगढ़ से कांग्रेस को उखाड़ फेंकने में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देंगे।नारायण चंदेल संक्षिप्त परिचयनारायण चंदेल जन्म 19 अप्रैल 1965 एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी , छत्तीसगढ़ राज्य के महासचिव हैं। वे जांजगीर-चांपा का प्रतिनिधित्व करने वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य भी हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। चंदेल पहली बार वर्ष 1998 में मध्यप्रदेश विधानसभा के लिये चुने गये थे। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद उन्होंने वर्ष 2003 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव उसी निर्वाचन क्षेत्र से लड़ा , लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन से 7710 मतों के अंतर से हार गये थे।फिर से उन्होंने वर्ष 2008 का विधानसभा चुनाव जीता और छत्तीसगढ़ विधानसभा में उपाध्यक्ष बने। इसके बाद वर्ष 2018 में चंदेल फिर से कांग्रेस पार्टी के मोती लाल देवांगन को 4188 मतों के अंतर से हराकर विधानसभा के लिये चुने गये। अब वे छत्तीसगढ़ में बीजेपी विधायक दल के नेता के रूप में काम करेंगे।