: अखण्ड सौभाग्य का प्रतीक है हरतालिका तीज - अरविन्द तिवारी
Sun, Sep 17, 2023
जांजगीर चांपा - हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व होता है , महिलायें साल भर में कई तरह के व्रत रखती हैं जिसमें भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला हरितालिका तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं कें लिये प्रमुख रूप से खास महत्व रखता है। इस बार भी हरितालिका तीज दो दिन है , कहीं पर आज रविवार को मनाया जा रहा है तो कहीं पर कल सोमवार को मनाया जायेगा। इस व्रत में महिलायें दिन भर निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा उपासना करती हैं। पति की लम्बी आयु और सुख समृद्धि की कामना के लिये महिलायें व्रत और पूजा पाठ करती है और और हरितालिका व्रत की कथा सुनती हैं। इस दिन भगवान शिव , माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू , रेत या काली मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पति की लम्बी आयु और सुख समृद्धि की कामना के लिये महिलायें सोलह श्रृंगार कर व्रत और पूजा पाठ करती है और हरितालिका व्रत की कथा सुनती हैं। हरतालिका तीज का व्रत एक ओर जहाँ सुहागन महिलायें पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिये करती हैं वहीं दूसरी ओर कुंँवारी लड़कियांँ हरतालिका तीज के व्रत को सुयोग्य वर पाने के लिये भी करती हैं। यह त्यौहार करवा चौथ से भी कठिन माना जाता है क्योंकि करवा चौथ में चाँद को देखने के बाद व्रत तोड़ दिया जाता है लेकिन इस व्रत में पूरे दिन और रात निर्जला व्रत रखते हैं , रात्रि जागरण कर भजन – कीर्तन करते हैं और दूसरे दिन पूजापाठ के बाद जल पीकर व्रत तोड़ा जाता है। अगले दिन सुबह पूजा के बाद किसी सुहागिन स्त्री को श्रृंगार का सामान , वस्त्र , खाने की चीजें , फल , मिठाई आदि का दान करना शुभ माना जाता है। एक बार यह व्रत रखने के बाद जीवन पर्यन्त इस व्रत को रखना पड़ता है। इस व्रत के व्रती को सोना निषेध है , इसके लिये उसे रात्रि में भजन कीर्तन के साथ जागरण रखना पड़ता है। प्रत्येक सौभाग्यवती स्त्री इस व्रत को रखने में अपना सौभाग्य समझती है। हरतालिका तीज की उत्पत्ति व इसके नाम का महत्त्व एक पौराणिक कथा में मिलता है। हरतालिका शब्द , हरत व आलिका से मिलकर बना है , जिसका अर्थ क्रमशः अपहरण व स्त्रीमित्र (सहेली) होता है। हरतालिका तीज की कथा के अनुसार माता पार्वती जी की सहेलियांँ उनका अपहरण कर उन्हें घने जंगल में ले जाती हैं ताकि पार्वती जी की इच्छा के विरुद्ध उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से ना कर दें। मान्यता के अनुसार भगवान शिव को प्राप्त करने के लिये माता पार्वती ने सबसे पहले हरितालिका व्रत की थी। इसी दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वर दिया था। सावन के मौसम में हर जगह हरियाली दिखने से इसे हरियाली तीज का नाम दिया गया है। हरतालिका तीज पर पूजन के दौरान महिलाओं का काला , नीला और बैंगनी रंग का वस्त्र पहनना निषेध माना गया है।इसमें सुहागिन स्त्रियांँ निर्जला व्रत रखकर नये वस्त्र पहन सोलह श्रृंँगार करके देवी पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। इसके साथ ही माँ पार्वती को सुहाग का सभी सामान चढ़ाया जाता है। पूजन के लिये शिव पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है। रात में भजन कीर्तन करते हुये जागरण किया जाता है और शिव पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है। इस दिन जो गलतियों हो जाती हैं उसकी सजा अगले जन्म में भोगना पड़ती है। इसलिये इस व्रत में महिलाओं को बेहद सावधानी रखनी पड़ती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं और युवतियों को पूरी रात जागकर कीर्तन – भजन , पूजापाठ करना होता है। यदि कोई महिला व्रत के दौरान सो जाती है तो वह अगले जन्म में अजगर के रूप में जन्म लेती है। इस दिन व्रत के दौरान कोई महिलायें या युवतियांँ फल खा लेती है तो उसे अगले जन्म में वानर का जन्म मिलता है। इस दिन शक्कर का सेवन करने से वह अगले जन्म में मक्खी और जल पीने से वह अगले जन्म में मछली बनकर जन्म लेती है। जो महिलायें या युवतियांँ इस दिन व्रत नहीं रखती हैं उसे अगले जन्म में मछली का जीवन मिलता है। इसके अलावा शेरनी भी यदि इस दिन मांस-मछली का सेवन कर लेती है तो उसे भी इसका श्राप मिलता है। हरितालिका व्रत का महत्व जानते हुये भी कोई सुहागिन महिलायें या युवतियांँ इस व्रत के दौरान यदि दूध पी लेती हैं तो वह अगले जन्म में उसे सर्प योनि मिलती है।हरितालिका तीज व्रत कथाहरतालिका तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार पिता के यज्ञ में अपने पति शिव का अपमान देवी सती सह ना सकीं और उन्होंने खुद को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया। अगले जन्म में उन्होंने राजा हिमाचल के यहां जन्म लिया और पूर्व जन्म की स्मृति शेष रहने के कारण इस जन्म में भी उन्होंने भगवान शंकर को ही पति के रूप में प्राप्त करने के लिये तपस्या की। देवी पार्वती ने तो मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था। माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिये हिमालय में गंगा नदी के तट पर भूखे प्यासे रहकर कठोर तप किया था। माता पार्वती की यह स्थिति देखकर उनके पिता हिमालय बेहद दुखी हुये। एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वतीजी के विवाह का प्रस्ताव लेकर आये लेकिन जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो वे विलाप करने लगी। एक सखी के पूछने पर उन्होंने बताया कि वे भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिये कठोर तप कर रही हैं। इसके बाद अपनी सखी की सलाह पर माता पार्वती वन में चली गई और भगवान शिव की आराधना में लीन हो गई। इस दौरान भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की आराधना में मग्न होकर रात्रि जागरण किया। माता पार्वती के कठोर तप को देखकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिये और पार्वती जी की इच्छानुसार उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। कथा आती है कि तारकासुर के संहार के लिये शंकर जी ने पार्वती से विवाह किया , क्योंकि तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि शंकर जी के पुत्र (गर्भ से उत्पन्न) द्वारा ही वह मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। अंततोगत्वा कार्तिकेय के रूप में पार्वती जी ने पुत्र को जन्म दिया और तब जाकर तारकासुर से मुक्ति मिली। श्रुति स्मृति पुराणों के अनुसार हरितालिका तीज के दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। तभी से अच्छे पति की कामना और पति की दीर्घायु के लिये कुंँवारी कन्या और सौभाग्यवती स्त्रियांँ हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
: गाली गलौज से मना करने पर प्राणघातक हमला करने के दो आरोपी जेल दाखिल
Tue, Sep 12, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजांजगीर चांपा - गाली गलौज देने से मना करने पर बेल्चा - फावड़ा से प्राणघातक हमला करने वाले दो आरोपियों को अकलतरा पुलिस ने विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से इस संबंध में मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार गत माह बारह अगस्त की रात्रि में गाय (मवेशी) आरोपी के घर के सामने गोबर कर दिया था। जिस कारण आरोपियों द्वारा प्रार्थी कमलेश खांडेल एवं केतन खांडेल दोनो निवासी रहसबेड़ा अकलतरा को गाली गलौज कर रहा था। गाली गलौज देने से मना करने पर आरोपी दिनेश टण्डन व शन्नी टण्डन के द्वारा प्रार्थी को तुम मना करने वाले कौन होते हो कहकर फावडा - बेल्चा से मारपीट कर चोट पहुंचायें है। प्रार्थी की रिपोर्ट पर धारा 294 , 506 , 323 , 34 भादवि कायम कर विवेचना में लिया गया। विवेचना दौरान प्रकरण में धारा 307 भादवि जोड़ी गई है। विवेचना के दौरान आरोपी दिनेश टण्डन व शन्नी कुमार टण्डन दोनो निवासी रहसबेड़ा वार्ड नंबर 15 अकलतरा के विरुद्ध अपराध धारा सदर का सबूत पाये जाने से आरोपियों से घटना में प्रयुक्त बेल्चा - फावड़ा बरामद कर अकलतरा पुलिस ने आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। उपरोक्त कार्यवाही मे निरीक्षक सत्यकला रामटेके , सउनि अरूण कुमार सिंह , आरक्षक प्रदीप दुबे , राघवेन्द्र धृतलहरे , बृजपाल बर्मन का सराहनीय योगदान रहा।आरोपीदिनेश टण्डन उम्र 23 वर्ष एवं शन्नी कुमार टण्डन उम्र 20 वर्ष दोनो निवासी रहसबेड़ा अकलतरा थाना अकलतरा।
: जहरीली शराब पीने से तीन की मौत , आरोपी पत्नी व प्रेमी जेल दाखिल
Wed, Sep 6, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजांजगीर चांपा - शराब में जहरीली पदार्थ मिलाकर पति समेत तीन लोगो की हत्या के मामले को सुलझाने में पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है। पत्नी द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया गया था। जहर खुरानी संबंधित अपराध को गंभीरता से लेते हुयें प्रकरण में त्वरित कार्यवाही कर अकलतरा पुलिस ने पत्नी एवं प्रेमी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने इस मामले का खुलासा करते हुये बताया कि आरोपी जयंती साण्डे निवासी परसाही बाना का प्रेम संबंध ग्राम ठड़गाबहरा निवासी प्रेम सागर रत्नाकर के साथ था। जिसकी जानकारी मृतक संतकुमार साण्डे को होने से आरोपियों का आये दिन गाली गलौच , मारपीट करता था। जिस कारण से आरोपी जयंती साण्डे और प्रेमसागर दोनो मिलकर पति को जान समेत मार देगें कहकर आपस में बात करते थे। गत 04 सितंबर को सुबह आठ बजे मृतक संजय साण्डे , संत कुमार साण्डे एवं जितेन्द्र सोनकर मछली मार कर तीनो संजय कुमार साण्डे के घर आयें , फिर संजय साण्डे तथा जितेन्द्र सोनकर अपने-अपने घर चले गये। जयंती साण्डे अपने पति संत कुमार साण्डे को अपने घर में पहले से जहर मिलाकर रखें देशी शराब को अपने पति को पीने के लिये दे दिया। इसी बीच संजय साण्डे , जितेन्द्र सोनकर आ गये तो संत कुमार सांडे देशी शराब को लेकर अपने घर के पीछे गया तथा तीनो आपस में शराब को पिये। शराब को पीने के बाद तीनो पानी-पानी लाओ कहकर छटपटाने लगे। तबियत अधिक खराब होने से उपचार हेतु सीएचसी अस्पताल अकलतरा ले गये जहां डाक्टरों द्वारा संत कुमार खाण्डे एवं संजय कुमार साण्डे को मृत घोषित कर दिया तथा जितेन्द्र सोनकर को बेहतर ईलाज हेतु बिलासपुर रिफर किये थे , जहां ईलाज के दौरान जितेन्द्र सोनकर का भी मृत्यु हो गया। जिस पर थाना अकलतरा में मर्ग कायम कर जांच में लिया गया। मर्ग जांच के दौरान शवों का विधिवत पंचनामा कार्यवाही तथा डाक्टरों की टीम के द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। एफएसएल के अधिकारी के द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। मर्ग जांच के दौरान परिजनों , गवाहों के कथन , तकनिकी साक्ष्य शार्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मर्ग जांच पर आरोपी श्रीमती जयंती साण्डे एवं प्रेमसागर रत्नाकर के विरुद्ध अपराध क्रमांक 446 / 2023 धारा 302 , 328 , 304 , 34 भादवि कायम कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान मृतक संत कुमार साण्डे की पत्नी को पूछताछ करने पर बताई कि अपने पति की प्रताड़ना से तंग आकर उसको जान से मारने की नियत से अपने प्रेमी प्रेमसागर रत्नाकर के साथ मिलकर देशी शराब में जहर मिलाई थी और जहरीली शराब को अपने पति को पीने के लिये दी थी। जहरीली शराब को पीने से संतकुमार साण्डे , संजय कुमार साण्डे और जितेन्द्र सोनकर का मृत्यु हो गया। प्रकरण सदर में आरोपी श्रीमती जयंती सापडे और प्रेमसागर रत्नाकर के विरूद्ध अपराध धारा सदर का सबुत पाये जाने से अकलतरा पुलिस ने उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा जा रहा है। उपरोक्त कार्यवाही में निरीक्षक सत्यकला रामटेके , सउनि अरुण सिंह , बी० पी० खाण्डेकर , सियाराम यादव , आरक्षक प्रदीप दुबे , राघवेन्द्र घृतलहरे , विवेक सिंह एवं सायबर सेल जाजीगर का सराहनीय योगदान रहा।नाम मृतकगण -संत कुमार साण्डे (पति) उम्र 42 वर्ष , संजय कुमार साण्डे उम्र 33 वर्ष और जितेन्द्र कुमार सोनकर उम्र 35 वर्ष तीनो निवासी परसाही बाना थाना अकलतरा।गिरफ्तार आरोपीगण -श्रीमती जयंती साण्डे उम्र 44 वर्ष निवासी परसाही बाना थाना अकलतरा एवं प्रेमसागर रत्नाकर उम्र 47 वर्ष निवासी ठड़गाबहरा थाना बलौदा।