: भारतीय उद्योग व्यापार मंड़ल के 41 वें राष्ट्रीय व्यापारी दिवस पर सम्मिलित हुए कोरबा से छ.ग. प्रदेशाध्यक्ष अशोक मोदी
Sat, Aug 13, 2022
भारत की आजादी के 75 वें अमृत महोत्सव के अवसर पर भारतीय उद्योग व्यापार मंड़ल का 41 वॉ अधिवेशन दिल्ली के कांस्टीटयूशन क्लब में दिनॉक 9 अगस्त 2022 को सम्पन्न हुआ। इस अधिवेशन में छ.ग., दिल्ली, उ.प्र., म.प्र. सहित 26 राज्यों के करीब 2000 व्यापारीगण उपस्थित हुए।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद भानुप्रताप सिंह, अश्विनी सिंह एवं छ.ग. से दुर्ग के सांसद विजय बघेल जी रहे। उक्त कार्यक्रम में कोरबा से छ.ग. भारतीय उद्योग व्यापार मंड़ल के प्रदेशाध्यक्ष श्री अशोक मोदी जी, दुर्ग से वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री सुधीर बंसल, राऊरकेला से श्री उत्कर्ष झुनझुनवाला, भिलाई ये दिनेश जैन एवं हेमचंद जोशी, रायपुर से श्री बलिया जी एवं श्री अन्नुचंद्र जी की गरिमामय उपस्थिति रही।
इस अधिवेशन में जी.एस.टी. कृषि कानून, खाद्य सुरक्षा मानक कानून, ऑन लाईन ट्रेडिंग, खुदरा व्यापार नीति, राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड/ आयोग, धारा 411-414 के अंतर्गत ज्वेलर्स व्यापारियों का पुलिस द्वारा उत्पीडन इत्यादि ज्वलंत मुद्दों पर गहमागही रही ।
छ.ग. भारतीय उद्योग व्यापार मंड़ल के प्रदेशाध्यक्ष श्री अशोक मोदी जी ने उपस्थित अतिथियों एवं व्यापारियों के समक्ष जी.एस.टी.पर अपने विचार रखते हुए बताया कि उक्त जी.एस.टी. में अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है एवं जब से यह लागू हुआ है इसमें अनेको खामियॉ रही है एवं अनेको बार इसमें संशोधन हो चुके है जिससे व्यापारी वर्ग परेशान है एवं वे अपना पूरा ध्यान व्यापार में नही दे पा रहे है उनका पूरा समय जी. एस. टी. की औपचारिकताओं को पूर्ण करने में ही निकल जा रहा है तो एैसे में व्यापारी अपना व्यापार कब करेगा।
सरकार को तो व्यापारियों से रिकार्ड राजस्व प्राप्त हो रहा है किन्तु व्यापारी जी.एस.टी. के इन नियमों का पालन करते हुए व्यथित है, अब तो सरकार ने अपना राजस्व बढ़ाने के लिये गेहॅू, आटा, चावल, दाल, दही इत्यादि खाद्य पदार्थों में भी जी.एस. टी. लगाकर छोटे व्यापारियों की भी कमर तोड दी है तथा आम जनता के जेब का भी बोझ भी बढ़ा दिया है।
श्री अशोक मोदी जी ने अपने उद्बोधन में आगे बताया कि व्यापारियों ने भा.ज.पा. को इस लिये चुना है कि व्यापारियों को इस सरकार से अपेक्षा थी कि वे उनकी समस्यााओं को कम करेगी तथा जी.एस.टी. जैसे एक कर प्रणाली को देश में लागू कर व्यापारियों को पूर्व में पटाये जाने वाले 16 प्रकार के टेक्सों से उन्हे राहत दिलायेगी किन्तु भा.ज.पा. सरकार ने इसे लागू कर व्यापारियों की समस्याओें को कम करने के बजाय बढ़ा दिया है, यदि सरकार समय रहते अभी भी इस टेक्स का सरलीकरण करती है तो यह व्यापारियों के साथ साथ उनकी पार्टी भा.ज.पा. के लिये भी अच्छा रहेगा।
: सदन के लिये ये बहुत ही भावुक क्षण - पीएम मोदी
Sat, Aug 13, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - हम सब यहां राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति एम० वेंकैया नायडू को उनके कार्यकाल के समापन पर धन्यवाद और विदाई देने के लिये मौजूद हैं। यह इस सदन के लिये बहुत ही भावुक क्षण है। सदन के कई ऐतिहासिक क्षण आपकी गरिमामयी उपस्थिति से जुड़े हैं। आप अनेकों बार कहते रहे कि मैं राजनीति से रिटायर हुआ हूं लेकिन सार्वजनिक जीवन से नहीं थका हूं। आपने हर भूमिकाओं में हमेशा युवाओं के लिये काम किया और युवाओं का मार्गदर्शन किया , सदन में भी युवा सांसदों को आगे बढ़ाया और प्रोत्साहित किया। अगर हमारे पास देश के लिये भावनाये हों , बात कहने की कला हो , भाषा की विविधता में आस्था हो तो भाषा , क्षेत्र हमारे लिये कभी दीवार नहीं बनती है , ये आपने ( वेंकैया नायडू) ने सिद्ध किया है। इस सदन से नेतृत्व करने की आपकी जिम्मेदारी भले ही समाप्त होने जा रही है। लेकिन आपके अनुभवों का लाभ भविष्य में देश को और हम जैसे अनेक सार्वजनिक जीवन के कार्यकर्त्ताओं को भी मिलता रहेगा।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की विदाई के मौके पर विदाई भाषण पर कही। पीएम मोदी ने कहा कि उपराष्ट्रपति और सदन के सभापति के रूप में आपकी गरिमा और निष्ठा को मैंने आपको अलग अलग जिम्मेदारियों में बड़ी लगन से काम करते हुये देखा है। मुझे भी उन कुछ भूमिकाओं में आपके साथ काम करने का सौभाग्य मिला। एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में आपकी वैचारिक प्रतिबद्धता हो , एक विधायक के रूप में आपका काम हो , एक सांसद के रूप में सदन में आपकी गतिविधि हो , पार्टी प्रमुख के रूप में आपका नेतृत्व , कैबिनेट में आपकी कड़ी मेहनत या उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में आपका काम , मैंने आपको अपनी सभी भूमिकाओं में निष्ठापूर्वक काम करते देखा है। मैं आपके मानकों में लोकतंत्र की परिपक्वता को देखता हूं। आपने संवाद , संपर्क और समन्वय के जरिये ना सिर्फ सदन को संचालित किया , बल्कि इसे प्रोडक्टिव भी बनाया। जब भी सदन में टकराव की स्थिति होती थी तो आपने उस समय निर्णायक भूमिका निभाई। आपने कभी किसी काम को बोझ नहीं माना , हर काम में एक नई जान फूंकने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि आपका ये जज्बा और लगन हम लोगों ने निरंतर देखी है। मैं प्रत्येक माननीय सांसद और देश के हर युवा से कहना चाहूंगा कि वो समाज , देश और लोकतंत्र के बारे में आपसे बहुत कुछ सीख सकते हैं। पीएम मोदी ने एक श्लोक का उदाहरण देते हुवे कहा - न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा: , वृद्धा न ते ये न वदन्ति धर्मम् । अर्थात जिस सभा में अनुभवी लोग होते हैं , वही सभा होती है और अनुभवी लोग वहीं हैं, जो धर्म , कर्तव्य की सीख दें। किसी भी सदस्य ने आपके किसी भी शब्द को कभी अन्यथा नहीं लिया। आपने हमेशा इस बात पर बल दिया कि संसद में व्यवधान एक सीमा के बाद , सदन की अवमानना के समान होता है। आपके मार्गदर्शन में राज्यसभा ने अपने मानकों को पूरी गुणवत्ता से पूरा किया है। आप माननीय सदस्यों को निर्देश भी देते थे , उन्हें अपने अनुभवों का लाभ भी देते थे और अनुशासन को ध्यान में रखते हुये प्यार से डांटते भी थे। पीएम ने कहा आप कहते हैं कि मातृभाषा आंखों की रोशनी की तरह होती है और दूसरी भाषा चश्मे की तरह होती है। ऐसी भावना हृदय की गहराई से ही बाहर आती है। आपकी मौजूदगी में सदन की कार्यवाही के दौरान हर भारतीय भाषा को विशिष्ट अहमियत दी गई है। आपने सदन में सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ने के लिये काम किया। सदन में हमारी सभी 22 शेड्यूल भाषाओं में कोई भी सदस्य बोल सकता है , उसका इंतजाम आपने किया। आपकी ये प्रतिभा और निष्ठा आगे भी सदन के लिये एक गाइड के रूप में हमेशा काम करेगी। कैसे संसदीय और शिष्ट तरीके से भाषा की मर्यादा में कोई भी अपनी बात प्रभावी ढंग से कह सकता है। इसके लिये आप प्रेरणा पुंज बने रहेंगे। आपके कार्य , आपके अनुभव आगे सभी सदस्यों को जरूर प्रेरणा देंगे। आपने विशिष्ट तरीके से आपने सदन चलाने के लिये ऐसे मानदंड स्थापित किये हैं , जो आगे इस पद पर आसीन होने वालों को प्रेरित करते रहेंगे। पीएम मोदी ने कहा आजादी के अमृत महोत्सव में आज जब देश अपने अगले 25 वर्षों की नई यात्रा शुरू कर रहा है। तब देश का नेतृत्व भी एक तरह से एक नये युग के हाथों में हैं। हम इस बार ऐसा स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं जब देश के राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति , अध्यक्ष और प्रधानमंत्री वे सभी लोग हैं जो स्वतंत्र भारत में पैदा हुये और ये सभी बहुत ही सामान्य पृष्ठभूमि से हैं। मुझे लगता है कि इसका प्रतीकात्मक महत्व है , ये देश में नये युग का प्रतीक है। पीएम मोदी ने उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के विदाई समारोह में उनकी किताबों का जिक्र भी करते हुये कहा कि आपकी किताबों में आपकी वो शब्द प्रतिभा झलकती है , जिसके लिये आप जाने जाते हैं। आपकी किताबें युवाओं को प्रेरणा देती रहेंगी। राज्यसभा में पीएम नरेन्द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति की तारीफ करते हुए कहा कि आपके वन-लाइनर्स विट-लाइनर्स हैं। वे विन-लाइनर भी हैं। इसका मतलब है कि उन पंक्तियों के बाद और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। आपका हर शब्द सुना जाता है, पसंद किया जाता है और सम्मानित किया जाता है और कभी भी काउंटर नहीं किया जाता है।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति एम. वेंकैया नायडू को विदाई देते हुये कहा आपने सभी प्रमुख राज्यों में उच्च सदनों के लिये राष्ट्रीय नीति की वकालत की थी। आपने महिला आरक्षण विधेयक और अन्य मुद्दों पर आम सहमति की भी बात की। मुझे विश्वास है कि आप जो अधूरा छोड़ रहे हैं , उसे सरकार पूरा करेगी। खड़गे ने विदाई भाषण में उनके साथ अपने रिश्तों को याद किया। उनके साथ मिलकर बनाये गये महत्वपूर्ण कानूनों की चर्चा की। फिर आखिरी में एक शायरी के साथ कहा - सदाओं को अल्फाज मिलने ना पायें , ना बादल घिरेंगे ना बरसात होगी। मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी , किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी ।। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सभी सांसदों को संबोधित करते हुये कहा मुझे आपको यह बताते हुये खुशी हो रही है कि भारतीय दल ने कॉमनवेल्थ गेम में अब तक का शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने अब तक 55 पदक के साथ इतिहास रचते हुये 18 स्वर्ण , 15 रजत और 22 कांस्य पदक जीते हैं। उन्होंने कहा मैं इस सदन की ओर से सभी पदक विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं अन्य सभी एथलीटों को आगामी प्रतियोगिताओं के लिये भी शुभकामनायें देता हूं। हमें विश्वास है कि हमारे एथलीटों की सफलता देश के युवा और युवा एथलीटों को प्रोत्साहित और प्रेरित करेगी।
गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र के सोलहवें दिन उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को संसद में विदाई दी गई। इनका कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है। चूंकि मुहर्रम और रक्षाबंधन के कारण मंगलवार और गुरूवार को सदन की कोई बैठकें नहीं होंगी , इसलिये आज ही विदाई दी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पक्ष व विपक्ष के सभी नेता मौजूद रहे। जिसमें राज्यसभा के सभी सदस्यो ने उन्हें विदाई दी , वहीं पीएम मोदी ने नायडू के कार्यों की सराहना कर उनके अच्छे भविष्य की कामना की। इस दौरान सदन में सभी भावुक नजर आये।
: हम पर उच्च सदन की बड़ी जिम्मेदारी - वेंकैया नायडू
Sat, Aug 13, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - हम पर उच्च सदन की बड़ी जिम्मेदारी हैं। पूरी दुनियां देख रही है कि भारत आगे बढ़ रहा है। मैं राज्यसभा सांसदों से शालीनता , गरिमा और मर्यादा बनाये रखने की अपील करता हूं ताकि सदन की छवि और सम्मान बना रहे। मैं सभी दलों से लोकतंत्र का सम्मान करने को कहूंगा।
उक्त बातें वेंकैया नायडू ने बतौर राज्यसभा के सभापति के अपने अंतिम भाषण में कही। अपने संबोधन में उन्होंने उपराष्ट्रपति के रूप में किये गये कामों को याद किया। वहीं उन्होंने अपने कार्यकाल के पहले दिन के भावुक कर देने वाले पलों को भी साझा किया। उन्होंने बताया जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे बताया कि मुझे उपराष्ट्रपति पद के लिये चुना जा रहा है , मेरे आंसू बहने लगे। मैंने पार्टी से इसके लिये नहीं कहा था। पार्टी ने जनादेश दिया था , मैंने इसके लिये बाध्य होकर पार्टी से इस्तीफा दिया। आंसू इसलिये आ रहे थे क्योंकि मुझे पार्टी छोड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि मैंने सदन को बनाये रखने की पूरी कोशिश की। मैंने सभी पक्षों - दक्षिण , उत्तर , पूर्व , पश्चिम , उत्तर-पूर्व को समायोजित करने और अवसर देने का प्रयास किया। आप में से प्रत्येक को समय दिया गया है। इसी बीच वेंकैया नायडू ने कहा कि हम दुश्मन नहीं हैं , हम प्रतिद्वंद्वी हैं। हमें प्रतिस्पर्धा में दूसरों को पछाड़ने के लिये कड़ी मेहनत करनी चाहिये लेकिन दूसरों को नीचा नहीं दिखाना चाहिये। मेरी इच्छा है कि संसद अच्छी तरह से काम करे। मैं आभारी हूं , आपके प्यार और स्नेह से प्रभावित हूं। इस बीच टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने जब स्पीच दी तो वेंकैया भावुक हो गये और अपने आंसू पोंछने लगे। इस दौरान सदन में मौजूद सभी सांसद मायूस भी थे। बता दें कि टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने वेंकैया नायडू के बचपन की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि जब नायडू महज एक साल के थे , तब उनकी मां की मौत हो गई थी। डेरेक ने कहा कि गांव में एक परिवार था , जिसके पास आठ बैल थे। एक दिन इनमें से एक भड़क गया और महिला के पेट में सींग से हमला कर दिया। उसकी गोद में एक साल का बच्चा था। उसे वहीं छोड़कर महिला को अस्पताल ले जाया गया , पर उसकी मौत हो गई। वो बच्चा वेंकैया नायडू थे। टीएमसी सांसद की बातें सुनकर राज्यसभा में मौजूद सभी सदस्य कुछ समय के लिये मौन हो गये।
गौरतलब है कि 01 जुलाई 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले के छवतपलम में जन्मे वेंकैया नायडू की पहचान हमेशा एक ‘आंदोलनकारी’ के रूप में रही है। वे 1972 में ‘जय आंध्र आंदोलन’ के दौरान पहली बार सुर्खियों में आये। वर्ष 1974 में आंध्रप्रदेश में जयप्रकाश नारायण छात्र संघर्ष समिति की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के संयोजक रहे। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित होकर आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में हिस्सा लिया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आपातकाल के बाद वे वर्ष 1977 से वर्ष 1980 तक जनता पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष रहे। नायडू भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहने के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री रहे। उन्होंने मोदी सरकार में शहरी विकास मंत्रालय के अलावा संसदीय कार्य मंत्री और सूचना प्रसारण मंत्रालय का भी कामकाज सम्हाला। वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति बनाया। पांच साल उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा करने के बाद नायडू को आज राज्यसभा में विदाई दी गई। बताते चलें कि एम० वेंकैया नायडू का 10 अगस्त को कार्यकाल समाप्त हो रहा है और 11 अगस्त को नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पद की शपथ लेंगे।