: कालियानाग पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय है नागपंचमी - अरविन्द तिवारी
Tue, Aug 2, 2022
नई दिल्ली — भारत कृषि प्रधान देश है , यहां लोकजीवन में भी लोगों का नागों से गहरा नाता है। सांप खेतों का रक्षण करता है, जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं , उनका नाश करके सांँप हमारे खेतों को हरा भरा रखता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि हिन्दू धर्म में देवी देवताओं की पूजा उपासना के लिये पर्व मनाये जाते हैं। इसी कड़ी में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है , यह पर्व आज भारत सहित अन्य देशों में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जायेगा। यह पर्व भगवान भोलेनाथ के प्रमुख श्रृंगार नागदेव की स्तुति का पर्व है , सांप भोलेनाथ के प्रिय माने जाते हैं इसलिये इस दिन भगवान शिव के साथ नागदेवता की पूजा करना अत्यंत ही फलदायी माना गया है। इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं और खासतौर से ये दिन रुद्राभिषेक के लिये विशेष माना जाता है। किवदंती के अनुसार बालकृष्ण जब यमुना किनारे अपने सखाओं के साथ गेंद खेल रहे थे तब उनकी गेंद यमुना नदी में चली गयी। जब वे उसे लाने यमुना पर उतरे तो कालियानाग ने उस पर आक्रमण कर दिया लेकिन बालकृष्ण ने उस पर विजय भी हासिल कर ली। तब भगवान से माफी मांँगते हुये लोगों को हानि ना पहुंँचाने का वचन देकर कालियानाग यमुना नदी को छोंड़कर अन्यत्र चला गया। कालियानाग पर भगवान कृष्ण की विजय को ही नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है।आज के दिन वासुकी नाग , तक्षक नाग , शेषनाग आदि की पूजा करने का विधान है। इस दिन लोग अपने घर के द्वार एवं दीवार पर नागों की आकृति बनाकर नागदेवता की दधि, दूर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चाँवल आदि से पूजन आरती कर सेंवई व मिष्ठान से उनका भोग लगाते हैं। यदि सपेरा आये तो उसके नाग की पूजा करने का भी प्रचलन है फिर सपेरे को दक्षिणा देकर विदा किया जाता है , अंत में नाग पंचमी की कथा सुनी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इससे नाग देवता की कृपा बनी रहती है और नाग देवता घर की सुरक्षा करते हैं। हिन्दू संस्कृति ने पशु-पक्षी, वृक्ष-वनस्पति सबके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया है। परन्तु नाग पंचमी जैसे दिन नाग का पूजन जब हम करते हैं, तब तो हमारी संस्कृति की विशिष्टता पराकाष्टा पर पहुंँच जाती है। प्राणीमात्र के साथ आत्मीयता साधने का हम प्रयत्न करते हैं, क्योंकि वे उपयोगी हैं। नागदेवता को भगवान शिव और विष्णु का सर्वाधिक प्रिय बताया गया है। नागदेवता देवों के देव महादेव भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाते हैं तो वहीं वह जगत के पालनहार भगवान विष्णु की शैय्या भी हैं। भगवान विष्णु नागदेवता की कुंडली से बनी सैय्या पर ही विश्राम करते हैं। इन सभी के कारण नागदेवता का धार्मिक महत्व काफी अधिक है। इसके साथ ही सबसे क्रूर ग्रहों में माने जाने वाले राहु को भी नाग का रूप माना जाता है। दुर्जन भी यदि भगवद् कार्य में जुड़ जाये तो प्रभु भी उसको स्वीकार करते हैं , इस बात का समर्थन शिव ने साँप को अपने गले में रखकर और विष्णु ने शेष-शयन करके किया है। इसके कारण नागदेवता का धार्मिक महत्व काफी अधिक है। आज के दिन अनेकों गाँवों व कस्बों में कुश्ती का आयोजन होता है जिसमें आसपास के पहलवान भाग लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में योगों के साथ साथ दोषों को भी देखा जाता है। कुंडली के दोषों में कालसर्प दोष एक बहुत ही महत्वपूर्ण दोष होता है जो कई प्रकार का होता है। जिस इंसान की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उसे पारिवारिक जीवन से लेकर व्यापार, नौकरी क्षेत्र में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नागपंचमी का दिन कालसर्प दोष के निवारण के लिये सर्वोत्तम माना गया है। इस दोष से मुक्ति के लिये ज्योतिषाचार्य नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के साथ साथ दान दक्षिणा का महत्व बताते हैं। इस दोष की शांति के लिये नागपंचमी के दिन चांदी के नाग नागिन का जोड़ा शिवजी पर चढ़ावे नदी में चांदी के नाग नागिन का जोड़ा बहावे नाग नागिन के जोड़े को मुक्त करावे इस दिन हर घर में दीवार पर कोयले से नाग देवता का चित्र बनाकर पूजा की जाती है एवं दाल बाटी लड्डू बनाकर उसका भोग लगाया जाता है साथ ही रात्रि में घर के बाहर दूध रखा जाता है एवं इस दिन नाग देवता को दूध पिलाकर उनकी पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार नागों को पाताल लोक का स्वामी माना गया है। सांपो को क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। सांप चूहों आदि से किसान के खेतों की रक्षा करते हैं। साथ ही नाग भूमि में बांबी बना कर रहते हैं इसलिये नागपंचमी के दिन भूलकर भी भूमि की खुदाई या खेतों में हल नही चलानी चाहिये। आज के दिन नागदेव का दर्शन अवश्य करना चाहिये। बांँबी (नागदेव का निवास स्थान) की पूजा करना चाहिये। नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से ही पूजा करनी चाहिये क्योंकि नागदेव को सुगंध प्रिय है।रुद्राभिषेक कराने के लाभवैसे तो सावन के पूरे महीने में किसी भी दिन रुद्राभिषेक करा सकते हैं , लेकिन इसके लिये नागपंचमी का दिन अत्यंत ही शुभ माना गया है। मान्यता है कि रुद्राभिषेक कराने से व्यक्ति की समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। ज्योतिष अनुसार मनुष्य अपनी आवश्यकता अनुसार अलग-अलग पदार्थों से रुद्राभिषेक कराके मनोवांछित फल प्राप्त कर सकता है।भगवान शिव का दूध से रुद्राभिषेक कराने से परिवार में सुख शांति आने और संतान सुख की प्राप्ति की कामना पूर्ण होने की मान्यता है। भगवान शिव का अभिषेक गाय के दूध से करना चाहिये। अगर किसी कार्य को पूरा करने में बाधायें आ रही हैं तो शिव का अभिषेक दही से करने की सलाह दी जाती है , इससे कार्यों में तेजी आने लगती है। इसके साथ ही घर या प्रॉपर्टी से जुड़े लाभ भी प्राप्त होते हैं। शिव का शहद से अभिषेक करने से समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होने की मान्यता है। इससे वाणी दोष भी खत्म होता है और व्यक्ति के स्वभाव में विनम्रता आती है। जिन जातकों को टेंशन काफी ज्यादा रहती हैं और नींद की समस्या रहती है उन्हें भगवान शिव का अभिषेक इत्र से करना चाहिये, इससे जीवन में शांति आती है। भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल से करने से मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है , ऐसे जातकों का जीवन सुख से भर जाता है। शिव का अभिषेक घी से करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। अगर कोई किसी गंभीर रोग से पीड़ित है तो उसे भगवान शिव का अभिषेक घी से करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है जो व्यक्ति शिव का अभिषेक पंचामृत से करता है उसकी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने या कर्ज से मुक्ति पाने के लिये भगवान शिव का अभिषेक गन्ने के रस से करने की सलाह दी जाती है। भगवान शिव का अभिषेक साफ जल से करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है भगवान शिव का सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करने से दुश्मनों का नाश हो जाता है और व्यक्ति के साहस में वृद्धि होती है।
: अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हर घर में तिरंगा अवश्य फहरायें - पीएम मोदी
Sun, Jul 31, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - आज की ‘मन की बात’ के बहुत खास होने का कारण है इस बार का स्वतंत्रता दिवस , जब भारत अपनी आज़ादी के पचहत्तर वर्ष पूरे करेगा। हम सभी बहुत अद्भुत और ऐतिहासिक पल के गवाह बनने जा रहे हैं। ईश्वर ने ये हमें बहुत बड़ा सौभाग्य दिया है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मासिक रेडियो वार्ता कार्यक्रम मन की बात के 91 वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत देश के इस बार के स्वतंत्रता दिवस को बेहद खास बताते हुये की। उन्होंने आज की तारीख यानि 31 जुलाई का जिक्र करते हुये कहा कि आज से ठीक 78 वर्ष पहले वर्ष 1940 में अंग्रेजों ने भारत के एक वीर सपूत को फांसी दे दी थी। देश के उस बेटे का नाम शहीद ऊधम सिंह था , जिन्होंने 13 अप्रैल 1919 को हुये जालियांवाला बाग नरसंहार के गुनाहगार को मारा था। उन्होंने शहीद उधमसिंह को श्रद्धांजलि देते हुये कहा कि आज के ही दिन हम सभी देशवासी मिलकर शहीद उधमसिंह जी की शहादत को नमन करते हैं। मैं ऐसे अन्य सभी महान क्रांतिकारियों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं , जिन्होंने देश के लिये अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आप भी सोचिये अगर हम गुलामी के दौर में पैदा हुये होते तो इस दिन की कल्पना हमारे लिये कैसी होती ? गुलामी से मुक्ति की वो तड़प , पराधीनता की बेड़ियों से आज़ादी की वो बेचैनी - कितनी बड़ी रही होगी। पीएम ने कहा कि जब हम हर सुबह इस सपने के साथ जग रहे होते कि मेरा हिंदुस्तान कब आज़ाद होगा और हो सकता है हमारे जीवन में वो भी दिन आता जब वंदेमातरम और भारत माँ की जय बोलते हुये हम आने वाली पीढ़ियों के लिये अपना जीवन समर्पित कर देते , जवानी खपा देते।प्रधानमंत्री ने कहा मुझे ये देखकर बहुत खुशी होती है कि आज़ादी का अमृत महोत्सव एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के लोग इससे जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। इस दिशा में इसी जुलाई एक बहुत ही रोचक प्रयास हुआ है , जिसका नाम है आज़ादी की रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन। इस प्रयास का लक्ष्य है कि लोग आज़ादी की लड़ाई में भारतीय रेल की भूमिका को जानें। पीएम मोदी ने कहा झारखंड के गोमो जंक्शन को अब आधिकारिक रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो के नाम से जाना जाता है। नेताजी सुभाषचन्द्र इसी स्टेशन पर कालका मेल में सवार होकर ब्रिटिश अफसरों को चकमा देने में सफल रहे थे। उन्होंने कहा कि आप सभी ने लखनऊ के पास काकोरी रेलवे स्टेशन का नाम भी जरूर सुना होगा। इस स्टेशन के साथ रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान जैसे जांबांजों का नाम जुड़ा है। देश भर के 24 राज्यों में फैले ऐसे 75 रेलवे स्टेशनों की पहचान की गई है , इन सभी स्टेशनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जा रहा है। इनमें कई तरह के कार्यक्रमों का भी आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा आज़ादी के अमृत महोत्सव में हो रहे इन सारे आयोजनों का सबसे बड़ा सन्देश यही है कि हम सभी देशवासी अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करें। तभी हम उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों का सपना पूरा कर पायेंगे और उनके सपनों का भारत बना पायेंगे। इसलिये हमारे अगले पच्चीस साल का ये अमृतकाल हर देशवासी के लिये कर्तव्यकाल की तरह है। हमारे वीर सेनानी हमें ये जिम्मेदारी देकर गये हैं और हमें इसे पूरी तरह से निभाना है। उन्होंने कहा मैं स्कूली बच्चों और शिक्षकों से अपील करता हूं कि वे सभी को नजदीक के उन रेलवे स्टेशन को दिखाने ले जायें जहां पर आजादी के संग्राम के महत्वपूर्ण हिस्सों को सही तरह से समझा जा सके। इस दौरान पीएम ने भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि खेलकूद की बात करें तो जुलाई का महीना एक्शन से भरपूर रहा है। भारतीय खिलाड़ियों ने विश्व मंच पर असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। आज हमारे युवा हर क्षेत्र में देश को गौरवान्वित कर रहे हैं। इसी महीने पीवी सिंधु ने सिंगापुर का अपना पहला खिताब जीता है। नीरज चोपड़ा ने भी अपने बेहतरीन प्रदर्शन को जारी रखते हुये वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में देश के लिये सिल्वर मैडल जीता है। चेन्नई में 44वें चैस ओलंपियाड की मेजबानी करना भी भारत के लिये बड़े ही सम्मान की बात है। गत 28 जुलाई को ही इस टूर्नामेंट का शुभारंभ हुआ है और मुझे इसके उद्घाटन समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा मुझे इस बात की भी खुशी है कि भारत फीफा अंडर-17 महिला विश्वकप की भी मेजबानी करने जा रहा है। यह टूर्नामेंट अक्तूबर के आस-पास होगा जो खेलों के प्रति देश की बेटियों का उत्साह बढ़ायेगा।
उन्होंने सभी को अगले लक्ष्यों के लिये शुभकामनायें भी दी। पीएम मोदी ने देश के अलग-अलग राज्यों में चलने वाले मेले का भी जिक्र करते हुये कहा कि हमारे देश में मेलों का भी बड़ा सांस्कृतिक महत्व रहा है , मेले जन-मन दोनों को जोड़ते हैं। मेले अपने आप में हमारे समाज जीवन की ऊर्जा का बहुत बड़ा स्त्रोत होते हैं। आपके आस-पास भी ऐसे ही कई मेले होते होंगे। आधुनिक समय में समाज की ये पुरानी कड़ियां ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने के लिये बहुत ज़रूरी हैं। हमारे युवाओं को इनसे जरुर जुड़ना चाहिये और आप जब भी ऐसे मेलों में जायें , वहां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर करें। इसी कड़ी में चंबा के मिंजर मेले का जिक्र करते हुये पीएम ने कहा कि मुझे हिमाचल प्रदेश से ‘मन की बात’ के एक श्रोता आशीष बहल का एक पत्र मिला है। उन्होंने अपने पत्र में चंबा के ‘मिंजर मेले’ का जिक्र किया है। दरअसल मिंजर मक्के के फूलों को कहते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जब मक्के में मिंजर आते हैं , तो मिंजर मेला भी मनाया जाता है। इस मेले में देश भर के पर्यटक दूर-दूर से हिस्सा लेने के लिये आते हैं। उन्होंने कहा कि संयोग से मिंजर मेला इस समय चल भी रहा है। अगर हिमाचल घूमने गये हुये हैं तो इस मेले को देखने चंबा जा सकते हैं। पीएम मोदी ने दसवीं और बारहवीं कक्षा में पास हुये छात्रों को भी बधाई देते हुये कहा कि कुछ दिन पहले ही देश भर में दसवीं और बारहवीं कक्षा के परिणाम भी घोषित हुये हैं। मैं उन सभी छात्रों को बधाई देता हूं जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम और लगन से सफलता अर्जित की है। महामारी के चलते पिछले दो साल बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं। इन परिस्थितियों में भी हमारे युवाओं ने जिस साहस और संयम का परिचय दिया , वह अत्यंत सराहनीय है। मैं सभी के सुनहरे भविष्य की कामना करता हूं। पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि 02 अगस्त से 15 अगस्त तक हम सभी अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल फोटो में तिरंगा लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दो अगस्त का हमारे तिरंगे से विशेष संबंध भी है। इसी दिन पिंगली वेंकैया की जन्म-जयंती होती है। पिंगली वेंकैया ने हमारे राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन किया था। अपने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में बात करते हुये मैं महान क्रांतिकारी मैडम कामा को भी याद करूंगा। तिरंगे को आकार देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। पीएम मोदी ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारतीय पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों के योगदान का विस्तार से जिक्र करते हुये कहा कि आयुष ने वैश्विक स्तर पर इसमें अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि दुनियां भर में आयुर्वेद एवं भारतीय औषधियों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है और यही वजह है कि आयुष के निर्यात में रिकार्ड तेजी आई है तथा इस क्षेत्र में कई नये स्टार्ट-अप भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन हुआ था। इसमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। जुलाई महीने में भारतीय आभासी हर्बेरियम को लान्च किया गया। यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे हम डिजिटल वर्ल्ड का इस्तेमाल अपनी जड़ों से जुड़ने में कर सकते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा शहद को हमारे पारंपरिक स्वास्थ्य विज्ञान में बहुत महत्व दिया गया है। आयुर्वेद ग्रंथों में तो शहद को अमृत बताया गया है। शहद ना केवल हमें स्वाद देता है बल्कि आरोग्य भी देता है। शहद उत्पादन में आज इतनी अधिक संभावनायें हैं कि पढ़ाई करने वाले युवा भी इसे अपना स्वरोजगार बना रहे हैं | युवाओं की मेहनत से ही आज देश इतना बड़ा शहद उत्पादक बन रहा है। आपको जानकार ख़ुशी होगी कि देश से शहद का निर्यात भी बढ़ गया है। पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि हमारे युवाओं के स्टार्ट-अप और उद्यमियों के बलबूते हमारी खिलौना उद्योग ने जो कर दिखाया है और जो सफलतायें हासिल की हैं , उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आज जब भारतीय खिलौनों की बात होती है तो हर तरफ वोकल फार लोकल की ही गूंज सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री ने कहा तिरंगा हमें जोड़ता है , हमें देश के लिये कुछ करने के लिये प्रेरित करता है। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 13 से 15 अगस्त तक एक विशेष अभियान 'हर घर तिरंगा' का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का हिस्सा बनकर 13 से 15 अगस्त तक आप अपने घर पर तिरंगा जरूर फहरायें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन के आखिरी में कहा कि देशवासियों , आज हमने आजादी के पचहत्तर साल पर देश की यात्रा के साथ अपनी चर्चा शुरू की। अगली बार जब हम मिलेंगे तो हमारे अगले पच्चीस साल की यात्रा भी शुरू हो चुकी होगी। इस 15 अगस्त को अपने घर और अपनों के घर पर हमारा प्यारा तिरंगा जरूर फहराया जाये , इसके लिये सभी को जुटना होगा। वहीं आपने इस बार स्वतंत्रता दिवस को कैसे मनाया और क्या कुछ खास किया ये भी मुझसे जरुर साझा कीजियेगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने अपने बातचीत में आजादी की लड़ाई , इसमें शहीद उधमसिंह के बलिदान , तमिल स्वतंत्रता सेनानी वान्चीनाथन के साथ ही कर्नाटक के अमृता भारती कन्नडार्थी समारोह का जिक्र किया। गौरतलब है कि मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित एक भारतीय रेडियो कार्यक्रम है। जिसमें वे हर महीने के आखिरी रविवार को देश की जनता को संबोधित करते हैं। इस दौरान पीएम मोदी कई मुद्दों को लेकर देशवासियों से चर्चा भी करते हैं। इसके पहले अपने मासिक 'मन की बात' के 90वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने भारत के इतिहास के काले अध्याय को याद करते हुये आपातकाल का जिक्र किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि वर्ष 1975 में आपातकाल लगाया गया था। उन्होंने उस दौर में आपातकाल का विरोध करने वालों लोगों की भी सराहना की और कहा कि आपातकाल के बाद भी लोगों ने लोकतंत्र में विश्वास नहीं खोया है।
: राष्ट्र की प्रथम नागरिक की शपथ लेकर महामहिम ने रचा इतिहास
Tue, Jul 26, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - द्रौपदी मुर्मू ने आज संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में देश के पन्द्रहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा ने उन्हें शपथ दिलाई।राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले द्रौपदी मूर्मु सुबह राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दीं। मुर्मू का राष्ट्रपति बनना कई लिहाज से ऐतिहासिक है। आजादी के पचहत्तरवें साल में देश का सर्वोच्च पद पहली बार आदिवासी समुदाय के किसी व्यक्ति को मिला है। वे आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली और शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत हैं। प्रतिभा पाटिल के बाद मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। संसद के सेंट्रल हॉल में शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम नरेंद्र मोदी , केंद्रीय मंत्रियों , कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य गणमान्य लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने ट्राई सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया , इस दौरान उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति भवन से विदाई के दौरान कोविंद को ट्राई सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया , इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने नये आवास 12 जनपथ पहुंचे।सफलता का मंत्र है सबका प्रयास , सबका कर्तव्य - राष्ट्रपतिदेश की पंद्रहवीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथग्रहण के बाद अपने संबोधन में कहा कि मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूं। आपकी आत्मीयता , आपका विश्वास और आपका सहयोग मेरे लिये इस नये दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिये मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं। आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है। राष्ट्रपति ने कहा ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के पचासवें वर्ष का पर्व मना रहा था तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और आज आजादी के पचहत्तरवें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है। उन्होंने कहा कि मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है। हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से जो अपेक्षायें की थीं , उनकी पूर्ति के लिये इस अमृतकाल में हमें तेज गति से काम करना है। इन 25 वर्षों में अमृतकाल की सिद्धि का रास्ता दो पटरियों पर आगे बढ़ेगा- सबका प्रयास और सबका कर्तव्य। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि कल यानि 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस भी है। ये दिन भारत की सेनाओं के शौर्य और संयम दोनों का ही प्रतीक है। मैं आज देश की सेनाओं को तथा देश के समस्त नागरिकों को कारगिल विजय दिवस की अग्रिम शुभकामनायें देती हूं। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी। मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूं , वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था। लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जनजातीय समाज से हूं और वार्ड कौन्सिलर से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मुझे मिला है। यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है। ये हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी , दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी , भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है। राष्ट्रपति द्रौपदी ने कहा कि राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है , ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है। मेरा निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। मेरे लिये बहुत संतोष की बात है कि जो सदियों से वंचित रहे , जो विकास के लाभ से दूर रहे , वे गरीब - पिछड़े तथा आदिवासी मुझमें अपना प्रतिबिंब देख रहे हैं। मेरे इस निर्वाचन में पुरानी लीक से हटकर नये रास्तों पर चलने वाले भारत के आज के युवाओं का साहस भी शामिल है। ऐसे प्रगतिशील भारत का नेतृत्व करते हुये आज मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ। उन्होंने कहा कि संविधान के आलोक में मैं पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगी। मेरे लिये भारत के लोकतांत्रिक-सांस्कृतिक आदर्श और सभी देशवासी हमेशा मेरी ऊर्जा के स्रोत रहेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस , नेहरू जी , सरदार पटेल , बाबा साहेब आंबेडकर , भगत सिंह , सुखदेव , राजगुरू , चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे अनगिनत स्वाधीनता सेनानियों ने हमें राष्ट्र के स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की शिक्षा दी थी। रानी लक्ष्मीबाई , रानी वेलु नचियार , रानी गाइदिन्ल्यू और रानी चेन्नम्मा जैसी अनेकों वीरांगनाओं ने राष्ट्ररक्षा और राष्ट्रनिर्माण में नारीशक्ति की भूमिका को नई ऊंचाई दी थी। उन्होंने कहा कि मैं अपने देश के युवाओं से कहना चाहती हूं कि आप ना केवल अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं बल्कि भविष्य के भारत की नींव भी रख रहे हैं। देश के राष्ट्रपति के तौर पर मेरा हमेशा आपको पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म तो उस जनजातीय परंपरा में हुआ है जिसने हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ ताल-मेल बनाकर जीवन को आगे बढ़ाया है। मैंने जंगल और जलाशयों के महत्व को अपने जीवन में महसूस किया है। हम प्रकृति से जरूरी संसाधन लेते हैं और उतनी ही श्रद्धा से प्रकृति की सेवा भी करते हैं। मैंने अपने अब तक के जीवन में जन-सेवा में ही जीवन की सार्थकता को अनुभव किया है। जगन्नाथ क्षेत्र के एक प्रख्यात कवि भीम भोई जी की कविता की एक पंक्ति है। “मो जीवन पछे नर्के पड़ी थाउ, जगत उद्धार हेउ”। अर्थात, अपने जीवन के हित-अहित से बड़ा जगत कल्याण के लिये कार्य करना होता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जगत कल्याण की भावना के साथ मैं आप सब के विश्वास पर खरा उतरने के लिये पूरी निष्ठा व लगन से काम करने के लिए सदैव तत्पर रहूंगी। उन्होंने कहा मैं चाहती हूं कि हमारी सभी बहनें व बेटियां अधिक से अधिक सशक्त हों तथा वे देश के हर क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाती रहें। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैंने ओडिशा के गांव से जीवन यात्रा शुरू की है। ये पद मेरी उपलब्धि नहीं , बल्कि देश के गरीबों की उपलब्धि है। लोकतंत्र की शक्ति से यहां पहुंची हूं , मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मेरे लिये जनता का हित सर्वोपरि है।कई देशों से मिली बधाईभारत की पन्द्रहवीं राष्ट्रपति बनने पर द्रौपदी को दुनियां भर के देशों से बधाईयां मिली हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पंद्रहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने पर द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। मोदी ने कहा कि उनका देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सम्हालना भारत के लिये ऐतिहासिक क्षण है। खासकर गरीबों , वंचितों और कमजोर वर्गों के लिये। मोदी ने ट्वीट में शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की उपलब्धियों पर जोर दिया और आगे के रास्ते को लेकर एक भविष्यवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन की ओर से भेजे गये संदेश में कहा गया है कि एक आदिवासी महिला का राष्ट्रपति जैसे पद पर पहुंचना भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उनका निर्वाचन प्रमाण है कि जन्म नहीं , व्यक्ति के प्रयास उसकी नियति तय करते हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र प्रमुख पद पर पहुंचना उनकी ऊंची शख्सियत का ही परिणाम है। उनके लिये ढेरों बधाइयां। फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मेक्रो ने कहा है मुर्मू को राष्ट्रपति बनने पर बधाई , महिलाओं को उनसे प्रेरणा मिलेगी। श्रीलंका में भी राजनीतिक दलों ने उन्हें खुले दिल से बधाइयां दीं। हाल ही में श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव हारने वाले डुलास अल्फापेरुमा ने कहा आजादी के बाद जन्म लेने वाली , जातीय और सांस्कृतिक रूप से दुनियां के सबसे अनोखे देश की राष्ट्रपति को बधाई। श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जन बालवेग्या के सजित प्रेमदास ने कहा है कि मुर्मू का उत्थान सभी लोकतांत्रिक देशों को अपने लोगों के लिये बेहतर प्रयास करने के लिये प्रेरित करेगा। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने कहा है कि नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र की राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर मैं मुर्मू को बधाई देता हूं। उम्मीद है कि दोनों देशों के परंपरागत संबंध आने वाले दिनों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। वहींं राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर द्रोपदी मुर्मू को पाकिस्तान के मीडिया की भी सराहना मिली है।
गौरतलब है कि द्रौपदी मूर्मु का जन्म ओडिशा के मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में 20 जून 1958 को हुआ था। द्रौपदी संथाल आदिवासी जातीय समूह से संबंध रखती हैं। उनके पिता का नाम बिरांची नारायण टुडू एक किसान थे। द्रौपदी के दो भाई हैं द्रौपदी का बचपन बेहद अभावों और गरीबी में बीता था। लेकिन अपनी स्थिति को उन्होंने अपनी मेहनत के आड़े नहीं आने दिया। मुर्मू की स्कूली पढ़ाई गांव में हुई। साल 1969 से 1973 तक वह आदिवासी आवासीय विद्यालय में पढ़ीं। इसके बाद स्नातक करने के लिये उन्होंने भुवनेश्वर के रामा देवी वुमंस कॉलेज में दाखिला ले लिया। मुर्मू अपने गांव की पहली लड़की थीं, जो स्नातक की पढ़ाई करने के बाद भुवनेश्वर तक पहुंची और बेटी को पढ़ाने के लिये वे शिक्षिका भी बनीं।द्रौपदी की शादी श्यामाचरण मुर्मू से हुई , उनसे दो बेटे और दो बेटी हुई।वर्ष 2014 में दिल का दौरा पड़ने से द्रौपदी के पति श्यामाचरण मुर्मू की भी मौत हो गई , वे बैंक में काम करते थे। वर्ष 20215 में द्रौपदी झारखंड की राज्यपाल बना दी गईं , जहां वे आज भी अपने कामों की वजह से जानी जाती हैं। अब द्रौपदी के परिवार में केवल बेटी इतिश्री मुर्मू हैं जो बैंक में नौकरी करती हैं।