: छह नकबजन और दो ज्वेलर्स सहित आठ आरोपी जेल दाखिल
Sun, Feb 26, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजांजगीर चांपा - शहर के आउटर कालोनी एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के सूने मकान को निशाना बनाकर चोरी की घटना को अंजाम देने वाले शातिर नकबजनो के अंतर्जिला गैंग को गिरफ्तार करने में जांजगीर चांपा पुलिस ने सफलता हासिल की है। गिरोह द्वारा जांजगीर चांपा जिले में 24 , सक्ती में 03 , रायगढ़ में 01 , बिलासपुर में 02 सहित कुल 30 नकबजनी घटनाओं को अंजाम दिया गया है। कुछ चोरी के प्रकरणों में शादी और सगाई के लिये रखे ज्वेलरी की भी चोरी की गई। ज्वेलर्स को कम कीमत पर आभूषण देते थे तथा रकम को फोन पे के माध्यम से प्राप्त करते थे।
आरोपियों ने चोरी के आभूषण को अपने घरों के महिलाओं को पहनने दिये थे। पुलिस ने कुल 2430180 लाख रूपये की मशरूका जप्त करते हुये गिरोह के 06 नकबजन और 02 ज्वेलर्स सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया , जहां से सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस मामले के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुये जिले के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने अरविन्द तिवारी को बताया कि जिले में सूने मकानों मे माह दिसंबर 2022 से लगातार दिन के समय सुबह सात बजे से सायं सात बजे तक चोरी की घटनायें हो रही थी। जिसके संबंध में विशेष टीम का गठन किया गया था। जिसके द्वारा लगातार पतासाजी की जा रही थी , साथ ही साईबर सेल की तकनीकी टीम को भी लगाया गया था। मुखबिर से सूचना मिली कि पिसौद शराब भठ्ठी के पास कुछ व्यक्ति बैग में संदिग्ध सामान रखे है तथा शराब के नशे में चोरी करने की बात कह रहे हैं। मुखबिर कि सूचना पर थाना जांजगीर एवं विशेष टीम के द्वारा घेराबंदी कर उक्त व्यक्तियों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ किया गया। जिसमें विनोद , वासुदेव , सुनील मरावी , भूपेन्द्र सिंह राठौर , संतोष , वेदप्रकाश , वासुदेव एवं गंझु सिंह मिले जो अपने पास बैग में कांस के थाली एवं बर्तन रखे थे और पूछताछ करने पर उक्त व्यक्तियों द्वारा उसे सूने मकान से चोरी करना बताया। जिसे मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछताछ करने पर जिला जांजगीर चांपा , बिलासपुर , सक्ती के अलग-अलग थाना क्षेत्र से मोटर सायकिल में घुम-घुमकर सुने मकान का ताला तोड़कर विनोद वासुदेव तथा संतोष को चोरी करने को घुसना एवं अन्य को बाहर रखवाली करना बताये। इनकी निशानदेही पर सोने चांदी के जेवरात तथा नकदी रकम बरामद किया गया। साथ ही आरोपीगणों द्वारा बताया गया कि इनके द्वारा चोरी किये सोने चांदी के जेवरात को प्रगति नगर दर्री के वास्तव प्रसाद सोनी एवं काशीनगर बुधवारी सीएसईबी जिला कोरबा के हरीश सोनी के पास बिक्री करना बताने पर पेश करने पर सोने चांदी का जेवर बरामद किया गया। पुलिस ने आखिरकार शातिर नकबजनों के अंतर्जिला गैंग के छह नकबजन और दो ज्वेलर्स सहित आठ आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया , जहां से सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।टीम में शामिल अधिकारी कर्मचारी -शैलेन्द्र पाण्डेय उप पुलिस अधीक्षक एवं चन्द्रशेखर परमा उप पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। जिसमें निरीक्षक लखेश केंवट , उनि पुष्पराज साहू , गजालाल चंद्राकर , अवनीश श्रीवास , सउनि दिलीप सिंह , मुकेश पाण्डेय , रामप्रसाद बघेल , प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा , राजकुमार चंद्रा , आरक्षक विरेन्द्र टंडन , शहबाज खान , अर्जुन यादव , चिरंजीव कमलेश , विवेक सिंह , श्रीकांत सिंह , मनीष राजपूत , संतोष रात्रे , जय उरांव , नरेंद्र वैष्णव एवं महेश राज का विशेष योगदान रहा।आरोपियों के नाम -विनोद कुमार वासुदेव उम्र 30 वर्ष निवासी गाड़ापाली थाना उरगा जिला कोरबा स्थाई पता ग्राम डमरू जिला बलौदा-बाजार , वेद प्रकाश वासुदेव उर्फ गोलु उम्र 22 वर्ष निवासी गाड़ापाली थाना उरगा जिला कोरबा ,
संतोष कुमार उर्फ लुटन उम्र 45 वर्ष निवासी कोसाबाड़ी वार्ड नंबर 33 चौकी रामपुर जिला कोरबा , गंझु सिंह उम्र 27 वर्ष हाल मुकाम कोसाबाड़ी संतोष के मकान स्थाई पता नकना थाना अंबिकापुर जिला अंबिकापुर , भूपेन्द्र सिंह राठौर उम्र 38 वर्ष निवासी रामपुर आईटीआई के पास चौकी रामपुर जिला कोरबा , सुनील कुमार मरावी उम्र 36 वर्ष निवासी शंकर नगर चौकी रामपुर जिला कोरबा , हरीश कुमार सोनी उम्र 38 वर्ष निवासी बुधवारी सीएसईबी जिला कोरबा और वास्तव प्रसाद सोनी उम्र 49 वर्ष निवासी राजीव नगर थाना दर्री जिला कोरबा।जप्त मशरूका का विवरण -सोना आभूषण 185 ग्राम कीमती 1026750 रूपये , चांदी आभूषण 05 किलो 936 ग्राम कीमती 380000 रूपये , मोटर सायकल 03 नग जिसमे 01 सीबीजेड , 02 होण्डा साईन कीमती 450000 रूपये , कांस का बर्तन थाली 06 नग , लोटा 04 नग कीमती 20 हजार रूपये , नकदी रकम 413430 लाख रूपये।मोबाईल फोन 06 नग कीमती 140000 रूपये , ताला तोड़ने में प्रयुक्त पेचकस एवं लकड़ी का मुठ लगा सुम्मा।
: बिना स्वार्थ का समर्पण ही असली मित्रता - विश्राम पांडेय
Thu, Feb 16, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजांजगीर चांपा - सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाईयों का सामना करने की सीख देता है। सुदामा ने भगवान के पास होते हुये अपने लिये कुछ भी नहीं मांगा। अर्थात नि:स्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा मित्र वही है , जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताये ही सहायता कर दे। परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है , तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है , मित्रता खत्म हो जाती है। अपने मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का सच्चा धर्म है।
उक्त बातें मां शंवरीन दाई की पावन धरा अमोरा महंत) में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत के षष्ठम दिवस कथावाचक पं० विश्राम प्रसाद पाण्डेय ने भक्तों को सुदामा चरित्र कथा का रसपान कराते हुये कही। इस प्रसंग में आचार्यश्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन , सुदामा की दीनहीन दशा , कृष्ण द्वारा अपने बालसखा (बचपन का दोस्त) की बिना एक शब्द बोले सहायता करना आदि प्रसंगों का बड़े ही सुंदर ढंग वर्णन किया। उन्होंने सुदामा चरित्र की कथा पर प्रकाश डालते हुये कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वे जीवन में जितने गरीब नजर आये , उतने ही वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा दोनों बालसखा है। दोनों बचपन में एक साथ खेले-कूदे , गुरुकुल में भी साथ पढे। लेकिन बड़े होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बने। लेकिन सुदामा बड़ी गरीबी में अपना जीवन बिता रहे थे। सुदामा की पत्नी जानती थी कि द्वारिकाधीश श्री कृष्ण सुदामा के बहुत अच्छे मित्र हैं। इसीलिये सुदामा की पत्नी ने अपनी गरीबी से छुटकारा पाने के लिये सुदामा को भगवान श्रीकृष्ण के पास सहायता मांगने भेजा । हालाँकि सुदामा श्री कृष्ण से मदद लेना नहीं चाहते थे। सुदामा मीलों पैदल चलकर द्वारिका नगरी पहुंचते हैं। उनकी दयनीय स्थिति देखकर द्वारपाल उन्हें महल के दरवाजे पर ही रोक देता है। लेकिन सुदामा के यह बताने पर कि उनका नाम सुदामा है और वो कृष्णा से मिलना चाहते हैं। तब द्वारपाल महल के अंदर जाकर कृष्ण को सुदामा के बारे में बताता हैं। श्रीकृष्ण दौड़े -दौड़े चले आते हैं और अपने परम मित्र को महल के अंदर ले जाकर उनका खूब आदर सत्कार करते हैं। श्रीकृष्ण सुदामा के पैरों में चुभे हुये कांटों को निकालने वक्त इतने भावुक हो जाते हैं कि वो सुदामा के पैरों को अपने आंसुओं से धो देते हैं। आदर सत्कार करने के बाद कृष्ण सुदामा से उसके बगल में छुपायी हुई पोटली के बारे में पूछते हैं। और मुस्कुराते हुये सुदामा से कहते हैं कि बचपन में भी जब गुरु माता ने उन्हें चने खाने को दिये थे तो वो सारे चने अकेले ही खा गये थे। और आज भी भाभी (सुदामा की पत्नी ) ने उनके लिये जो उपहार भेजा हैं , वे भी उन्हें नहीं दे रहे हैं।खूब आदर सत्कार करने के बाद सुदामा को द्वारिका से विदा कर देते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया और दुनियां के सामने यह संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। राजा हो या रंक मित्रता में सभी समान हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। मनुष्य को जीवन में श्रीकृष्ण की तरह मित्रता निभानी चाहिये। इधर जब सुदामा अपने गांव पहुंचता हैं तो उन्हें झोपड़ी की जगह आलीशान व भव्य महल दिखाई देता है और महल के द्वार पर सारी सुख सुविधायें नजर आती है। सच्चाई का एहसास होने वो दयासागर , करणानिधान भगवान श्रीकृष्ण के प्रति नतमस्तक होकर उनकी महिमा गाने लगते हैं। इसके पहले आचार्यश्री ने असुर नरकासुर वध लीला और भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाह की कथा का रसपान कराते हुये कहा कि असुर नरकासुर के चलते भगवान श्रीकृष्ण को हजारों नारियों संग विवाह करना पड़ा था। सनातन धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियां क्रमश: रुक्मणि , जाम्बवन्ती , सत्यभामा , कालिन्दी , मित्रबिन्दा , सत्या , भद्रा और लक्ष्मणा थी। इसके अलावा उन्होंने 16000 से भी अधिक कन्याओं संग केवल विवाह किया था , ये सभी द्वारिका में भगवान की भक्ति कर जीवन यापन करती थीं। इसके लिये आज भी धार्मिक प्रसंगों में भगवान श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियों की कथा सुनाई जाती है। आचार्यश्री ने संक्षिप्त में कथा महात्म्य का वर्णन करते हुये कहा कि श्रीमद्भागवत कथा को अमर कथा माना गया है , यह कथा हमें मुक्ति का मार्ग दिखलाती हैं। जो जीव श्रद्धा और विश्वास के साथ मात्र एक बार इस कथा को श्रवण कर लेता है उनका जीवन सुखमय हो जाता है और वह सदैव के लिये मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है और उसे सांसारिक बंधनों के चक्कर मे आना नही पड़ता। इस कलिकाल में मोक्ष दिलाने वाला श्रीमद्भागवत महापुराण कथा से कोई अन्य श्रेष्ठ मार्ग नही है। वहीं इस कथा के आयोजक लालाराम साहू ने बताया कि प्रतिदिन गांव सहित आसपास के लोग झांकियों के साथ कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं। कथा के अंतिम दिवस शुक्रवार को आचार्यश्री द्वारा दत्तात्रेय चरित्र , परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई जायेगी। और आज ही चढ़ोत्री के साथ कथा को विश्राम दी जायेगी।
: सुनियोजित तरीके से किये गये अंधेकत्ल के दो आरोपी जेल दाखिल
Wed, Feb 15, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टजांजगीर चांपा - गत दिवस घर में हुई युवती के अंधेकत्ल का चौबीस घंटे में ही पर्दाफाश करने में जांजगीर पुलिस को सफलता मिली है। इस हत्याकांड को दो आरोपियों द्वारा सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। आरोपी का मृतिका से पिछले छह वर्षों से जान पहचान था। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने के लिये रायगढ़ में बाल कटा लिया था। हत्या के बाद लूट किये गये सभी मोबाइल , आभूषण और स्कूटी को भी आरोपियों से जब्त किया गया।
इस अंधेकत्ल का खुलासा करते हुये पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया गत 13 फरवरी को पुलिस को यादव चौक के पास अपने घर में एक युवती की अज्ञात कारणों से मृत अवस्था में बेड में शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर तत्काल थाना प्रभारी जांजगीर स्टाफ के साथ घटनास्थल पहुंच कर मामले की तस्दीक के बाद थाना जांजगीर में मर्ग क्रमांक 22/23 धारा 174 जा.फौ. का कायम कर जांच में लिया गया। मर्ग जांच के दौरान एफएसएल के वैज्ञानिक अधिकारी , फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ तथा डॉग स्काट की मदद लेकर घटनास्थल व मृतिका के शव का निरीक्षण किया गया। शव का विधिवत पंचनामा कार्यवाही किया गया , मृतिका युवती के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। डॉक्टर के द्वारा शार्ट पी०एम० रिपोर्ट में मृतिका की मौत की प्रकृति हत्यात्मक प्रतीत होना लेखबद्ध किया गया। संपूर्ण मर्ग जांच में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का घटित होना पाये जाने से थाना जांजगीर में अपराध क्रमांक 143/2023 धारा 302 , 397, भादवि कायम कर विवेचना में लिया गया। पुलिस अधीक्षक महोदय श्री विजय अग्रवाल (भापुसे) के निर्देश में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी(रापुसे) के मार्गदर्शन पर सायबर टीम के माध्यम से तकनीकी जानकारी जुटाई गई। संदेहियों के पतासाजी हेतु अलग-अलग टीम गठित कर विभिन्न स्थानो पर भेजा गया तथा मुखबिर भी लगाया गया।प्रकरण में संदेही रोहन पाण्डु तथा राजेन्द्र सूर्या को पुलिस हिरासत में लेकर पुछताछ किया गया। पुछताछ के दौरान संदेहियों द्वारा अलग-अलग कहानी बताकर लगातार पुलिस को गुमराह किया जाता रहा। परन्तु तकनीकी विशलेषण तथा गोपनीय विश्वस्थ सूत्रो से प्राप्त जानकारी के आधार पर मनावैज्ञानिक तरिके से पूछताछ करने पर आरोपी रोहन पाण्डु तथा राजेन्द्र सूर्या ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी रोहन पाण्डु मृतिका युवती को पिछले छह वर्षो से जानता है और उनका घर आना जाना करता है। मृतिका युवती के द्वारा अन्य व्यक्ति से मोबाईल पर देर रात तक बातचीत करने की वजह से रोहन पाण्डु मृतिका को मना करता था। मृतिका युवती के मोबाईल पर घटना दिनांक से तीन चार दिन पूर्व आरोपी रोहन पाण्डु किसी व्यक्ति का चैट भी देखा था जिस वजह से वाद विवाद किया था। आरोपी रोहन पाण्डु के द्वारा अपने मित्र राजेन्द्र के साथ मिलकर मृतिका युवती को सबक सिखाने की योजना बनाई गई थी। योजना के तहत दिनांक घटना को आरोपी रोहन व राजेन्द्र जांजगीर आये थे जहां आरोपी रोहन पाण्डु मृतिका युवती के घर जाकर एक होटल से खाना लाकर घर मेंं खाना खाये। मृतिका युवती के भाई के खाना में आरोपी रोहन के द्वारा नींद की गोली मिला दी गई थी , जिससे मृतिका का भाई बेहोशी की हालत में सो गया। आरोपी मृतिका के पास आकर पुनः किसी अन्य व्यक्ति से मोबाईल में बात करने पर वाद विवाद कर अपने साथी आरोपी राजेन्द्र सूर्या के साथ मिलकर युवती की गला दबाकर हत्या कर दिया। आरोपियों के द्वारा मृतिका के घर से सोने चांदी के जेवरात , 03 नग मोबाईल एवं स्कूटी लूटकर दोनों फरार हो गये थे। आरोपी रोहन पाण्डु फरार होने के पश्चात अपने पहचान (हुलिया) छिपाने के लिये रायगढ़ में जाकर अपना बाल भी कटवा लिया। आरोपियों के कब्जे से लूट की सम्पति सोने चांदी के जेवरात , मोबाईल एवं स्कुटी को बरामद कर लिया गया है। इस अंधेकत्ल को सुलझाने के लिये विशेष टीम का गठन किया गया था। जिसमें उप पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर परमा , उप पुलिस अधीक्षक तोबियस खाखा , निरीक्षक मनीष परिहार , निरीक्षक लखेश केंवट , निरीक्षक कामिल हक , उप निरीक्षक सुरेश ध्रुव , उप निरीक्षक गोपाल सतपथी , सउनि दिलीप सिंह , मुकेश पाण्डेय , प्रधान आरक्षक बलबीर सिंह , राजकुमार चंद्रा , जितेन्द्र सिंह परिहार , आरक्षक मनीष राजपुत , विरेन्द्र टंडन , विवेक सिंह एवं थाना जांजगीर और चौकी नैला स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।आरोपियों का नाम पता - रोहन पाण्डु उम्र 23 वर्ष निवासी भदौरा थाना मस्तुरी जिला बिलासपुर हा०मु० महामाया चौक कोनी रोड़ बिलासपुर और राजेन्द्र सूर्या उम्र 22 वर्ष निवासी भदौरा थाना मस्तुरी जिला बिलासपुर।बरामद सम्पत्ति - आरोपी रोहन पाण्डु के कब्जे से 03 नग मोबाईल , सोने की अंगुठी , सोने का लॉकेट , सोने का ब्रेसलेट , चांदी का सिक्का , स्मार्ट वार्च (घण्ड़ी) , चांदी एवं मोती ब्रेसलेट , कान का फुल्ली , स्कूटी क्रमांक सीजी 11 ए०वाई 6892 और दूसरे आरोपी राजेन्द्र सूर्या के कब्जे से - सोने का चेन , सोने का अंगुठी , चांदी का पायल , चांदी का सिक्का , एक मोबाईल एवं घटना में प्रयुक्त मोटर सायकल।