: न्यूटन से विदुर तक : लखीमपुर खीरी पैटर्न और क्रोनोलॉजी (आलेख : बादल सरोज)
Fri, Oct 8, 2021
गांधी के जन्म दिवस के ठीक अगले दिन लखीमपुर खीरी में विरोध प्रदर्शन करके वापस लौट रहे किसानों को गाड़ियों से रौंदने का, निर्ममता के फ़िल्मी दृश्यों को भी पीछे छोड़ देने का, जो कांड घटा है, वह एक लम्पट अपराधी से अमित शाह का दो नंबर बने गृहराज्य मंत्री के बिगड़ैल बेटे का कारनामा नहीं है। यह मोदी के न्यू इंडिया का अगला एपिसोड है। नाट्यशास्त्र की भाषा में वाचिक से आंगिक हो जाने वाला एपिसोड। रक्षक और खलनायक के एकरूप होकर एक ताल में मसान भैरवी गाने वाला एपिसोड। यह यूपी पुलिस, जिसको कभी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला ने "गुंडों का संगठित गिरोह" कहा था और हर वक़्त सप्तम स्वर में चिंघाड़ने वाले रविशंकर प्रसाद ने "मोदी की सेना" करार दिया था, उसका और संघ-भाजपा का एक दूसरे में गड्डमड्ड हो जाना है। निर्द्वन्द्व और निरंकुश तानाशाही इसका अंतिम लक्ष्य है।
जिन किसानों को तेज रफ़्तार से गाड़ियों से रौंदा गया, वे प्रदर्शन करने नहीं जा रहे थे -- प्रदर्शन करके लौटकर वापस आ रहे थे। यूपी के डिप्टी सीएम एक स्थानीय कुश्ती के मुकाबले को देखने जिस हेलीकॉप्टर से उतरने वाले थे, वह किसानों के प्रतिरोध को देखकर वापस लौट चुका था। मंत्री पुत्र की अगुआई में आयी गाड़ियों ने उन्हें पीछे से कुचल कर मारा है। इस बर्बरता की पटकथा कुछ दिन पहले खुद मोदी के गृह राज्य मंत्री टेनी मिश्रा बोलकर सुना गए थे। एक छोटी-सी किसान बैठक में ठेठ गुंडों की भाषा में बोलते हुए उन्होंने इसका आव्हान किया था और स्वयं की फेसबुक आईडी पर उसका वीडियो भी डाला था। आंदोलनकारी किसानों को धमकाते हुए कहा था कि "हम इन सबको सुधार देंगे, दो मिनट लगेगा केवल..."। इसके बाद अपनी हिस्ट्रीशीट का हवाला देते हुए मंत्री ने अपना अतीत याद दिलाया और कहा कि "मैं केवल मंत्री नहीं हूं या केवल सांसद या विधायक नहीं हूं। जो लोग हैं, विधायक या मंत्री बनने से पहले मेरे बारे में जानते होंगे कि मैं किसी चुनौती से भागता नहीं हूं...'"। यह अकेले इस मंत्री का एलान नहीं था। ठीक यही बात, बल्कि इससे आगे की बात हरियाणा के संघ स्वयंसेवक भाजपा मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर अपने "कार्यकर्ताओं" से कह रहे थे कि आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ "उठा लो डंडे। ठीक है। मुकद्दमे लगे, तो वो भी देख लेंगे। और दूसरी बात यह है कि जब डंडे उठाएंगे, तो जमानत की परवाह मत करना, महीना, दो महीना, छह महीना अंदर रह आओगे, तो बड़े लीडर अपने आप बन जाओगे। चिंता मत करो। इतिहास में ऐसे ही नाम लिखा जाता है।’" इसके लिए बाकायदा 500-700 या हजार किसानों का दस्ता तैयार करके जगह-जगह टूट पड़ने का आव्हान करते हुए वे धृतराष्ट्र के छोटे भाई विदुर की नीति "कृते प्रतिकृतिं कुर्याद्विंसिते प्रतिहिंसितम/ तत्र दोषं न पश्यामि शठे शाठ्यं समाचरेत्॥" का पाठ ही नहीं पढ़ा रहे थे - संस्कृत की हिंदी करके जैसे को तैसा करने की दीक्षा भी दे रहे थे। यह बात एक निर्वाचित सरकार का वह मुख्यमंत्री बोल रहा था, जिसके पास पहले से ही सीधे सर तोड़ने का हुकुम देना वाले एसडीएम और उसे लागू करने वाली पुलिस का भरा-पूरा अमला है।न टेनी मिश्रा को हिस्टीरिया का दौरा पड़ा था, न खट्टर सन्निपात में थे। यह इनकी नहीं, इन दोनों ने प्रधानमंत्री मोदी के "मन की बात" की थी। इसका शुभारम्भ वे ओपन मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कृषि कानूनों का विरोध करने वाले आंदोलन को "बौद्धिक बेईमानी और राजनीतिक धोखाधड़ी" बताकर कर चुके थे। यह एक पैटर्न, एक क्रोनोलॉजी का हिस्सा है - जिसे ठीक इसी वक़्त सुनवाई के लिए स्वीकार की गयी याचिकाओं के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग -- एक जस्टिस खनविलकर और दूसरी जस्टिस एस के कौल -- की खंडपीठों की सन्दर्भ से कटी टिप्पणियों के साथ पढ़ा जाना चाहिये। जिस कथित किसान महापंचायत नाम के याचिकाकर्ता का वर्तमान किसान आंदोलन से दूर-दूर तक संबंध नहीं है, उसे सुनते हुए "या तो कोर्ट आओ या आंदोलन करो" की अयाचित टिप्पणी और जिस रास्ते को दुनिया जानती है कि मोदी-शाह की पुलिस ने रोका हुआ है, उससे होने वाली कथित परेशानी से दिल्ली की सांस घुट जाने जैसी अतिशयोक्तिपूर्ण टिप्पणी इस क्रोनोलॉजी को चाहे-अनचाहे आगे बढ़ाती है। सुप्रीम कोर्ट का यह दावा कि "सरकार ने तीनों किसान अधिनियमों पर पहले ही रोक लगा दी है, कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि ये अधिनियम उसके अंतिम फैसले तक निलंबित रहेंगे, इसलिए आंदोलन क्यों हो रहा है?" तो सरासर निराधार है। अब तो यह स्थापित और प्रमाणित तथ्य है कि अडानी के गोदामों में हजारों लाखों टन सरसों और उसका तेल जमा है, जिसके चलते कायम की गयी मोनोपोली की कीमत तेल की बड़ी-चढ़ी कीमतों से देश की जनता चुका रही है। यही नहीं, पूरे देश में, कृषि कानूनों के अध्यादेश के लिखे जाने से पहले ही तनकर खड़े हो गए अडानी के साइलो हजारों टन अनाज से भरे पड़े हैं। अगर नए वाले कृषि क़ानून और आवश्यक वस्तु क़ानून लागू नहीं हुए, तो अडानी किस क़ानून के तहत खरीद कर रहे हैं और असीमित भण्डार भर रहे हैं? (कल सीजेआई रामन्ना की खंडपीठ ने दो वकीलों की जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू कर उत्तरप्रदेश सरकार से जवाब माँगा है, जो इन दो खंडपीठों से अलग और स्वागतयोग्य हस्तक्षेप है।)महाभारत की विदुर नीति के "शठे शाठ्यम समाचरेत:" को गीतोपदेश की तरह सुनाया जाना गुजरात के दंगों के वक़्त उच्चारित किये न्यूटन के क्रिया-प्रतिक्रिया सिद्धांत के प्रलाप से आगे की बात है। यह सिर्फ फासिस्टी तूफानी दस्तों को अभयदान देकर छुट्टा छोड़ने तक सीमित नहीं है। लखीमपुर खीरी में जो, जिस तरह से किया गया है, उसका एक और उद्देश्य है -- किसानों को उकसाना। उन्हें इतना जलील करना कि वे अपना आपा खो बैठें और उसके बाद दस महीने से जबर्दस्त शांतिपूर्ण तरीके से जारी इस किसान आंदोलन को पहले बदनाम करने, फिर कुचलने का कोई "राइख़्स्टाग पल" रचा जा सके। मगर किसान सजग हैं - अपने धीरज का सबूत वे लखीमपुर में भी दे चुके हैं। जहां गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी किसान नेता भीड़ को संयमित करने में जुटे थे।मोदी सरकार द्वारा खड़ा किया जा रहा यह लाक्षागृह 27 सितम्बर के भारत बंद की शानदार सफलता से उपजी खीज का नतीजा है। किसानों के साथ मजदूरों, महिलाओं, छात्र और युवाओं के शामिल होने से देश की जनता की एकता में आये गुणात्मक निखार से सत्तासीनों के चेहरे कुम्हलाये हुए हैं। अगर वे डर रहे हैं, तो ठीक डर रहे हैं - जरूरत इस एकता को और व्यापक और नतीजापरक बनाने की है। मिशन यूपी और मिशन उत्तराखंड को उसकी तार्किक परिणीति तक पहुंचाने की है। आगे बढ़ने और उसके लिए अड़ने की है - जिसे लखीमपुर खीरी के साथ खड़े हुए देश के किसानों ने 4 अक्टूबर की देशव्यापी कार्यवाहियों में उतरकर और योगी सरकार को मोदी के गृहमंत्री और उसके बेटे के खिलाफ हत्या करने और उसके लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने तथा मृतकों को मुआवजा देने के लिए मजबूर करके साबित किया है।*(लेखक पाक्षिक 'लोकजतन' के सम्पादक और अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव हैं। संपर्क : 094250-06716)*
: ज्ञान - वैराग्य और तपस्या की देवी है मां ब्रह्मचारिणी - अरविन्द तिवारी
Fri, Oct 8, 2021
नई दिल्ली - नवरात्री में नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा होती है। हर दिन माँ के अलग अलग मंत्रों का उच्चारण करने और अलग अलग भोग लगाने से माँ प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद देती हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि नवरात्रि के दूसरे दिन आज मांँ दुर्गा की नौ शक्तियों के दूसरे स्वरूप मांँ ब्रह्मचारिणी के दर्शन पूजन का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ‘चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। माँ ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ – ब्रह्म मतलब तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली देवी होता है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान , तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है। ब्रह्मचारिणी रूप की आराधना से उम्र लम्बी होती है। मान्यता है कि इन देवी की आराधना से विवाह में आने वाली हर बाधा दूर हो जाती है। माँ दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनका स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य , दिव्य रूप में होता है , इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बायें हाथ में कमंडल लिये श्वेत वस्त्र में देवी विराजमान होती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी पूजा , तप , शक्ति , त्याग , सदाचार , संयम और वैराग्य में वृद्धि करती है और शत्रुओं का नाश करती है। ये अक्षय माला और कमंडलधारिणी , शास्त्रों के ज्ञान और निगमागम तंत्र-मंत्र आदि से संयुक्त है। अपने भक्तों को वे अपनी सर्वज्ञ सम्पन्न विद्या देकर विजयी बनाती हैं। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनकी शादी तय हो गई है लेकिन अभी भी शादी नहीं हुई है। उन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र , पात्र आदि भेंट किये जाते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मांँ को शक्कर और पंचामृत का भोग लगाने से लंबी आयु का वरदान मिलता है। नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा में हरे रंग का कपड़ा पहनना शुभ माना जाता है और इस दिन लम्बी उम्र की कामना के लिये शक्कर का भोग लगाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दही का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा चीनी , सफेद मिठाई और मिश्री का भी भोग लगाया जा सकता है। माता ब्रह्मचारिणी हमें यह संदेश देती हैं कि जीवन में बिना तपस्या अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। बिना श्रम के सफलता प्राप्त करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। अत: ब्रह्मशक्ति अर्थात समझने व तप करने की शक्ति हेतु इस दिन शक्ति का स्मरण करें। योग-शास्त्र में यह शक्ति स्वाधिष्ठान में स्थित होती है। अत: समस्त ध्यान स्वाधिष्ठान में करने से यह शक्ति बलवान होती है एवं सर्वत्र सिद्धि व विजय प्राप्त होती है। आज के दिन माँ के “या देवी सर्वभूतेषु मांँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ इसके अलावा ब्रह्मचारिणी: ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।” मंत्र का जप किया जाता है।ब्रह्मचारिणी कथापौराणिक कथा के अनुसार पूर्वजन्म में मांँ ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था। भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिये बहुत कठिन तपस्या की , इसीलिये इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। मांँ ब्रह्मचारिणी ने एक हजार वर्ष तक फल-फूल खाकर बिताये और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर जीवन निर्वाह किया। इसके बाद मांँ ने कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप को सहन करती रहीं , टूटे हुये बिल्व पत्र खाकर भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इससे भी जब भोलेनाथ प्रसन्न नहीं हुये तो उन्होने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया और कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं , पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। मांँ ब्रह्मचारणी कठिन तपस्या के कारण बहुत कमजोर हो हो गई। इस तपस्या को देख सभी देवता , ऋषि , सिद्धगण , मुनि सभी ने सरहाना की और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया। मांँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिये।
: देश की सुरक्षा में उत्तराखंड की विशेष भूमिका है - पीएम मोदी
Thu, Oct 7, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टऋषिकेश - आज मैं देवभूमि उत्तराखंड से देश के अनेको राज्यों को 35 ऑक्सीजन प्लांट का उपहार देने में गौरान्वित महसूस कर रहा हूं। उत्तराखंड की देवधरा ने मेरे जैसे अनेकों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है। उत्तराखंड की भूमि मेरे कर्म और मर्म की भूमि है। जिस धरती ने मुझे स्नेह दिया है यहां आना मेरा सौभाग्य है , यहां आकर एक नई ऊर्जा मिलती है। जिस क्षेत्र ने योग और आयुर्वेद की शक्ति से जीवन को आरोग्य बनाने का समाधान दिया है , आज वहीं से देश भर के अनेकों ऑक्सीजन प्लांट का शुभारंभ हुआ है। इनके लोकार्पण से दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में भी वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की सुविधा पहुंची है।
उक्त बातें आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड से निर्मित ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आक्सीजन प्लांट के लोकार्पण सहित वर्चुअल माध्यम से देश भर के मेडिकल कालेजों , अस्पतालों में स्थापित 35 आक्सीजन प्लांट का लोकार्पण करने के पश्चात उपस्थित जनसभा को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने यहां से पीएम केयर्स फंड से स्थापित किये गये पीएसए आक्सीजन प्लांट का रिमोर्ट दबाकर लोकार्पण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से उनका गहरा नाता है। इस देवभूमि ने उनके जीवन की धारा को बदलने का काम किया। इस भूमि से मेरा मर्म , कर्म , सत्व व तत्व का नाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड का गठन हुआ था , इसके कुछ माह बाद ही देवभूमि तथा बाबा केदारनाथ के आशीर्वाद से उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का मौका मिला। आज सेवा के इस सफर का 21वें वर्ष में प्रवेश हो गया है। इस मौके पर वह देवभूमि में है इससे बड़ा सौभाग्य कुछ नहीं हो सकता। पीएम मोदी ने भारत माता की जय के साथ अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने मंत्री धनसिंह रावत को जन्मदिवस की बधाई भी दी। पीएम ने आगे कहा कि देवभूमि विश्व के लोगों को आकर्षित करती रही है। इसे मां गंगा का आशीर्वाद मिल रहा है। आज से ही नवरात्र भी शुरू हो रहे हैं और आज के दिन के मेरा यहां आकर हिमालय की धरती को प्रणाम करना धन्य भाग्य है। उन्होंने कहा एक विश्वस्तरीय जांच लैब से शुरुआत करने के साथ आज हमारे पास तीन हजार विश्वस्तरीय जांच लैब हैं। कभी मास्क और दवाओं के आयात के लिये हम दूसरे देशों पर निर्भर थे , लेकिन आज भारत मास्क और दवायें निर्यात कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने कोविन प्लेटफॉर्म बनाकर पूरी दुनियां को रास्ता दिखाया है कि इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण कैसे होता है ? पहले छह एम्स थे , आज देश में 22 एम्स हैं। सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज बनाया जाये। उत्तराखंड में भी पिथौरागढ़ , हरिद्वार , रुद्रपुर में मेडिकल कॉलेज बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन के निर्माण के साथ उसका ट्रांसपोर्टेशन भी मुश्किल होता है। पूर्वी भारत में सबसे अधिक ऑक्सीजन निर्माण होता है। लेकिन दूसरी लहर के दौरान उत्तर और पश्चिम भारत में ऑक्सीजन की सबसे अधिक जरूरत थी। आज देश के हर जिले के पास अपना पीएसए ऑक्सीजन प्लांट है। राज्य सरकार और केंद्र के प्रयासों से भारत में पीएम केयर्स के तहत चार हजार नये ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित होंगे। हमारा देश और यहां के अस्पताल अब काफी सक्षम हो गये हैं। उन्होंने कहा कि मैं केदारनाथ धाम पुनर्निमार्ण कार्य का जायजा लेता रहता हूं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से उत्तराखंड को लाभ मिलेगा। देहरादून हवाई अड्डे की क्षमता को बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री धामी के ऊर्जावान नेतृत्व में हेलीपॉड योजना को बढ़ावा मिल रहा है। वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन शुरू होने से पहले उत्तराखंड के सिर्फ 01 लाख 30 हजार घरों में ही नल से जल पहुंचता था , आज उत्तराखंड के 07 लाख 10 हजार से ज्यादा घरों में नल से जल पहुंचने लगा है। यानि सिर्फ दो वर्ष के भीतर राज्य के करीब-करीब छह लाख घरों को पानी का कनेक्शन मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में हवाई सेवाओं के लिये ढांचागत व्यवस्थायें तैयार की जा रहीं हैं। उन्होंन कहा कि देश की सुरक्षा में उत्तराखंड की विशेष भूमिका है। सरकार की सभी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड के लोगों को भी होगा। चारधाम को जोड़ने वाली ऑल वेदर रोड पर तेजी से काम चल रहा है। चार धाम परियोजना देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये बहुत बड़ी सुविधा तो बन ही रही है , साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को भी आपस में जोड़ रही है। पीएम ने कहा कि उत्तराखंड की टीम अच्छा काम कर रही है , केंद्र की सरकार भी प्रदेश सरकार की पूरी मदद कर रही है। उत्तराखंड अगले तीन चार सालों में गठन के 25 वर्ष पूरे करने जा रहा है , भाजपा सरकार का डबल इंजन प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जायेगा। अपना संबोधन समाप्त करने के बाद पीएम मोदी ने सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट (सेनि) जनरल गुरमीत सिंह , केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया , रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट , विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल , उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री धनसिंह रावत , पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत , तीरथ सिंह रावत , विजय बहुगुणा , भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक , देहरादून महापौर सुनील उनियाल गामा , ऋषिकेश महापौर अनीता ममगाईं , एम्स के निदेशक प्रोफेसर अरविंद राजवंशी , डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि पीएम मोदी आज उत्तराखण्ड दौरे पर ऋषिकेश पहुंचे।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शॉल भेंट कर उत्तराखंड आने पर उनका स्वागत किया। सीएम धामी के संबोधन के बाद पीएम मोदी ने ऋषिकेश एम्स के ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण किया। पीएम मोदी का यह दौरा पूरी तरह से ऑफिशियल है लेकिन विपक्षी दलों की ओर से इस दौरे को उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान डोईवाला में संयुक्त किसान मोर्चा ने लखीमपुर हिंसा को लेकर जुलूस निकाला। उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तराखंड आगमन का विरोध किया। इस दौरान काली पगड़ी , टोपी और पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया गया।