: नारायण गुरुजी ने धर्म को किया शोधित - पीएम मोदी
Thu, Apr 28, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - तीर्थदानम् की 90 सालों की यात्रा और ब्रह्म विद्यालयम् की गोल्डेन जुबली ये केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है। ये भारत के उस विचार की भी अमर यात्रा है , जो अलग-अलग कालखंड में अलग-अलग माध्यमों के जरिये आगे बढ़ता रहता है। वाराणसी में शिव की नगरी हो या वरकला में शिवगिरी , भारत की ऊर्जा का हर केंद्र , हम सभी भारतीयों के जीवन में विशेष स्थान रखता है। ये स्थान केवल तीर्थ भर नहीं हैं , ये आस्था के केंद्र भर नहीं हैं बल्कि ये ‘एक भारत , श्रेष्ठ भारत’ की भावना के जाग्रत प्रतिष्ठान हैं।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शिवगिरी तीर्थ यात्रा की 90वीं वर्षगांठ और ब्रह्म विद्यालय की स्वर्ण जयंती के वर्ष भर चलने वाले संयुक्त समारोह के उद्घाटन समारोह में उपस्थित लोगों को बीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुये कही। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुआ , इस दौरान उन्होंने साल भर चलने वाले संयुक्त समारोहों का लोगो भी लान्च किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये पीएम मोदी ने कहा तीर्थदानम् और ब्रह्म विद्यालयम् की स्वर्णिम यात्रा में इस आयोजन में लाखों करोड़ों अनुयायियों की अनंत आस्था और अथक परिश्रम शामिल है , मैं सभी अनुयायियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनायें देता हूं। पीएम ने आगे कहा दुनियां के कई देश , कई सभ्यतायें जब अपने धर्म से भटकीं , तो वहां आध्यात्म की जगह भौतिकतावाद ने ले ली। लेकिन भारत के ऋषियों , संतों , गुरुओं ने हमेशा विचारों और व्यवहारों का शोधन किया , संवर्धन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने आध्यात्म की बल पर जोर देकर नारायण गुरुजी को याद करते हुये कहा कि नारायण गुरुजी ने धर्म को शोधित किया , परिमार्जित किया , समयानुकूल परिवर्तन किया। उन्होंने रूढ़ियों और बुराईयों के खिलाफ अभियान चलाया और भारत को उसके यथार्थ से परिचित कराया। नारायण गुरुजी ने जातिवाद के नाम पर चल रहे , भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी। नारायण गुरुजी के योगदान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नारायण गुरुजी ने जातिवाद के नाम पर चल रहे, भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी. जैसे ही हम किसी को समझना शुरू कर देते हैं, सामने वाला व्यक्ति भी हमें समझना शुरू कर देता है. नारायण गुरु जी ने भी इसी मर्यादा का हमेशा पालन किया. वो दूसरों की भावनाओं को समझते थे फिर अपनी बात समझाते थे। प्रधानमंत्री ने केदारनाथ हादसे का जिक्र करते हुये कहा मैं नहीं जानता हूं कि आप लोगों के साथ मेरा नाता किस प्रकार है, लेकिन कभी-कभी मैं अनुभव करता हूं जिसे मैं भूल नहीं सकता हूं। जब केदारनाथ में बहुत बड़ा हादसा हुआ , यात्री जीवन व मृत्यु के बीच जूझ रहे थे। उत्तराखंड में और केंद्र में तब कांग्रेस की सरकार थी और मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था। उस समय शिवगिरी मठ से मुझे फोन कॉल आया कि हमारे संत वहां फंस गये हैं , उनका पता नहीं लग रहा है और ये काम आपको करना है। बड़ी-बड़ी सरकारें होने के बाद भी शिवगिरि मठ ने ये काम मुझे दिया। मुझे उसे सेवा कार्य का मौका मिला और सभी संतों को मैं सही सलामत वापस ला पाया। मैं आज भी सोच नहीं पाता हूं कि इतनी बड़ी-बड़ी सरकार होने के बावजूद मठ को इस काम के लिये मुझे आदेश देना पड़ा। पीएम ने कहा कि हम सभी की एक ही जाति है - भारतीयता और हम सभी का एक ही धर्म है - सेवा धर्म , अपने कर्तव्यों का पालन। हमें ये भी याद रखना चाहिये कि हमारा स्वतंत्रता संग्राम केवल विरोध प्रदर्शन और राजनैतिक रणनीतियों तक ही सीमित नहीं था। ये गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने की लड़ाई तो थी ही, लेकिन साथ ही एक आजाद देश के रूप में हम होंगे , कैसे होंगे ? इसका विचार भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के विभिन्न देशों में उपजे हालात की ओर इशारा करते हुये मंगलवार को कहा कि आज विश्व के सामने अनेक साझे संकट और चुनौतियां हैं और मानवता के समक्ष खड़े प्रश्नों का समाधान भारत के अनुभवों और उसके सांस्कृतिक सामर्थ्य से ही निकल सकता है। पीएम मोदी ने कहा - आज हम जो भारत देख रहे हैं और आजादी के 75 सालों की जिस यात्रा को हमने देखा है , यह उन्हीं महापुरुषों के चिंतन और मंथन का परिणाम है। आजादी के हमारे मनीषियों ने जो मार्ग दिखाया था आज भारत उन लक्ष्यों के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि आज विश्व के सामने अनेक साझी चुनौतियां हैं और साझे संकट भी हैं तथा कोरोना महामारी के समय दुनियां ने इसकी एक झलक भी देखी है। उन्होंने कहा कि मानवता के सामने खड़े भविष्य के प्रश्नों का उत्तर भारत के अनुभवों और भारत के सांस्कृतिक सार्म्थय से ही निकल सकता है।'' उन्होंने संतों और आध्यात्मिक गुरुओं से महान परंपरा को आगे बढ़ाने का आग्रह करते हुये कहा कि वे इसमें ‘‘बहुत बड़ी भूमिका'' निभा सकते हैं। भविष्य के दो बड़े उत्सवों का जिक्र करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से 25 साल बाद देश अपनी आजादी के 100 साल मनायेगा और 10 साल बाद हम तीर्थदानम् के 100 सालों की यात्रा का भी उत्सव मनायेंगे। इन 100 सालों की यात्रा में हमारी उपलब्धियां वैश्विक होनी चाहिये और इसके लिये हमारा विजन भी वैश्विक होना चाहिये।
गौरतलब है कि शिवगिरि केरल में स्थित एक तीर्थस्थान है। शिवगिरी में ही श्री नारायण गुरु को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी , यहीं उन्हें मोक्ष मिला। यहां उनकी समाधि भी बनायी गई है। शिवगिरि तीर्थयात्रा और ब्रह्म विद्यालय दोनों महान समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के संरक्षण और मार्गदर्शन के साथ शुरू हुये थे। शिवगिरी तीर्थ यात्रा हर साल तीन दिनों के लिये 30 दिसंबर से 01 जनवरी तक तिरुवनंतपुरम के शिवगिरी में आयोजित की जाती है। यह तीर्थयात्रा शिक्षा , स्वच्छता , धर्मपरायणता , हस्तशिल्प , व्यापार और वाणिज्य , कृषि , विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा संगठित प्रयास जैसे आठ विषयों पर केंद्रित है। वर्ष 1933 में कुछ भक्तों द्वारा यह तीर्थयात्रा शुरू की गई थी लेकिन दक्षिण भारत में अब यह प्रमुख आयोजनों में से एक बन गई है। अब हर साल दुनियां भर से लाखों भक्त जाति , पंथ , धर्म और भाषा से ऊपर उठकर तीर्थयात्रा में भाग लेने के लिये शिवगिरी आते हैं।
: भक्ति , शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं हनुमान जी - अरविन्द तिवारी
Sun, Apr 17, 2022
नई दिल्ली - हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार श्रीराम भक्त संकटमोचन हनुमान का प्राकट्य चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न के योग में हुआ था। इस बार आज देश भर में हनुमत प्राकट्योत्सव रवि योग के साथ हस्त एवं चित्रा नक्षत्र में बड़े धूमधाम से मनाया जायेगा। कुछ धार्मिक पंचांगों के अनुसार हनुमान का जन्मदिन अश्विन महीने के अंधेरे पखवाड़े में चौदहवें दिन (चतुर्दशी) को पड़ता है। हनुमान जन्मोत्सव विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तिथियों को मनायी जाती है। तमिलनाडु और केरल में यह माना जाता है कि हनुमान का जन्म मार्गाज़ी अमावस्या (अमावस्या के दिन) में हुआ था और यह दिन दिसंबर माह या जनवरी में आता है। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में यह कृष्ण पक्ष में वैशाख महीने के दसवें दिन मनाया जाता है। कर्नाटक में यह शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है और ओड़िशा में, यह बैसाख महीने के पहले दिन (अप्रैल में ) मनाया जाता है। हनुमत प्राकट्योत्सव के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि भगवान विष्णु को रामावतार के समय सहयोग करने के लिये रूद्रावतार हनुमान जी प्रकट हुये थे। सीता खोज , रावण युद्ध , लंका विजय में हनुमान जी ने अपने प्रभु श्रीराम की पूरी मदद की , उनके जन्म का उद्देश्य ही राम भक्ति था। हनुमान जी सभी लोकों में सबसे शक्तिशाली हैं और उन्हें शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। वे रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं जो भगवान राम के समर्पित शिष्य बने। रामायण में हनुमान की शक्ति और वीरता के बारे में कई संदर्भ मौजूद हैं। हनुमान के बिना , भगवान राम रावण के खिलाफ अपनी लड़ाई में सफल नहीं होते और सीता को उनकी कैद से नहीं निकाल पाते। इसलिये लोग हनुमान को भक्ति, शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक के रूप में पूजते हैं और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिये जादुई शक्तियां रखते हैं। हनुमान जी को भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्र अवतार माना जाता है और उन्हें शक्ति , ज्ञान , वीरता , बुद्धिमत्ता और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि वे जीवन भर ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला अमर हैं और सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभावों या प्रलोभनों को रोकने की शक्ति रखते हैं। जिसने अपना जीवन भगवान राम और सीता के लिये समर्पित कर दिया। उसने बिना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी ताकत या वीरता नहीं दिखायी। हनुमान जी में बुराई के खिलाफ जीत हासिल करने और सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता है।आज के दिन कई लोग उपवास भी रखते हैं। कहते हैं कि इस दिन बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा करने वालों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हनुमान की उपासना के लिये यह दिन बहुत ही उत्तम माना गया है। इस दिन हनुमान मंदिरों में भक्तों का भारी जमावड़ा लगता है। लोग विधि विधान से प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। कहा जाता है आज के दिन विधि अनुसार हनुमान जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान राम की पूजा-अर्चना करने से भी हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। हनुमान प्राकट्योत्सव पर भगवान राम की पूजा किये बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी गई है। इस दिन चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर हनुमान जी की मूर्ति या फोटो को दक्षिण मुंह करके स्थापित कर स्वयं लाल आसन पर बैठकर और लाल वस्त्र धारण कर षोडशोपचार पूजन करना चाहिये। चमेली तेल में घोलकर नारंगी सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाने के बाद लाल फूल से पुष्पांजलि देनी चाहिये। हनुमान जी को 11 पीपल के पत्तों पर नारंगी और सिंदूर से राम - राम लिखकर चढ़ाना चाहिये। हनुमान चालीसा और रामचरित मानस के सुंदरकांड का पाठ करने और लड्डू या बूंदी के प्रसाद का भोग लगानी चाहिये। दीपक से 09 बार घुमाकर आरती करें और 'ॐ मंगलमूर्ति हनुमते नमः या ' श्री राम भक्ताय हनुमते नमः:' मंत्र का जाप करनी चाहिये। वहीं संतान प्राप्ति के लिये भी हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों की मानें तो इस दिन बजरंगबली की पूजा के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देने व पूजन करने से नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है और संतान संबंधी सभी समस्याओं का निवारण होता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय कर आप ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को दूर कर सकते हैं। इतना ही नहीं शिक्षा, व्यापार व नौकरी के क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिये भी हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि अगर शनि को शांत करना है तो भगवान श्री हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहिये। ऐसा इसलिये कहा गया है कि जब हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया है कि उनकी भक्ति करने वालों की राशि पर आकर भी वे कभी उन्हें पीड़ा नहीं देंगे। ऐसी मान्यता है की हनुमान जयंती के दिन जो भी व्यक्ति हनुमानजी की भक्ति और दर्शन करता है, उसके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।हनुमत प्राकट्योत्सवपौराणिक कथा के अनुसार अंजना एक अप्सरा थीं, हालाँकि उन्होंने श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और यह श्राप उनपर तभी हट सकता था जब वे एक संतान को जन्म देतीं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री हनुमान जी के पिताथे। वे सुमेरू के राजा थे और केसरी बृहस्पति के पुत्र थे। अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप उन्होंने संतान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया।अयोध्या नरेश राजा दशरथ जी ने जब पुत्रेष्टि हवन कराया था, तब उन्होंने प्रसाद स्वरूप खीर अपनी तीनों रानियों को खिलाया था। उस खीर का एक अंश एक कौआ लेकर उड़ गया और वहां पर पहुंचा , जहां माता अंजना शिव तपस्या में लीन थीं। मां अंजना को जब वह खीर प्राप्त हुई तो उन्होंने उसे शिवजी के प्रसाद स्वरुप ग्रहण कर लिया। इस घटना में भगवान शिव और पवन देव का योगदान था। उस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद भगवान शिव के ग्यारहवें रूद्रावतार हनुमान जी का प्राकट्य हुआ। माता अंजना के कारण हनुमान जी को आंजनेय , पिता वानरराज केसरी के कारण केसरीनंदन और पवन देव के सहयोग के कारण पवनपुत्र एवं संकटमोचन , सीता शौक निवासन , लक्ष्मण प्राण दाता आदि नामों से भी जाना जाता है। श्री हनुमान जी को शक्ति व ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को भूत-प्रेत से छुटकारा चाहिये तो वह भगवान श्री हनुामन की पूजा आराधना करता है।
: हनुमान जी एक भारत , श्रेष्ठ भारत के अहम सूत्र - पीएम मोदी
Sun, Apr 17, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - हनुमान प्राकट्योत्सव के इस पावन अवसर पर आज मोरबी में हनुमान जी की इस भव्य मूर्ति का लोकार्पण हुआ है। ये देश और दुनियां भर के रामक्तों और हनुमान भक्तों के लिये बहुत सुखदायी है। ईश्वर की कृपा के बिना संतों के दर्शन दुर्लभ होते हैं।हनुमान जी अपनी भक्ति और अपने सेवाभाव से सबको जोड़ते हैं , हर कोई हनुमान जी से प्रेरणा पाता है। हनुमान वो शक्ति और सम्बल हैं जिन्होंने समस्त वनवासी प्रजातियों और वन बंधुओं को मान और सम्मान का अधिकार दिलाया। इसलिये एक भारत , श्रेष्ठ भारत के भी हनुमान जी एक अहम सूत्र हैं।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये गुजरात के मोरबी में बापू केशवानंद के आश्रम में दस करोड़ रूपये की लागत से निर्मित भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुये कही। देशवासियों को बधाई देते हुये पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत की। इस मौक पर पीएम मोदी ने सभी को हनुमान प्राकट्योत्सव की बधाई एवं शुभकामनायें देते हुये कहा कि पवनपुत्र की कृपा हर किसी पर बनीं रहे। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे बताया गया है कि हनुमान जी की इस तहर की 108 फीट ऊंची प्रतिमा देश के अलग-अलग कोने में स्थापित की जा रही है। हम पिछले कई वर्षों से शिमला में हनुमान जी की प्रतिमा देख रहे हैं , आज मोरबी में दूसरी प्रतिमा स्थापित हुई है। दो अन्य मूर्तियों को दक्षिण में रामेश्वरम और पश्चिम बंगाल में स्थापित करने का कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में एकता पर जोर देते हुये कहा कि रामकथा का आयोजन भी देश के अलग-अलग हिस्सों में किया जाता है। भाषा-बोली जो भी हो लेकिन रामकथा की भावना सभी को जोड़ती है , प्रभु भक्ति के साथ एकाकार करती है। यही तो भारतीय आस्था की , हमारे आध्यात्म की , हमारी संस्कृति , हमारी परंपरा की ताकत है। इसने गुलामी के मुश्किल कालखंड में भी अलग अलग हिस्सों और अलग अलग वर्गों को जोड़ा , आजादी के राष्ट्रीय संकल्प के लिये एकजुट प्रयासों को सशक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि हजारों वर्षों से बदलती स्थितियों के बावजूद भारत के अटल और अडिग रहने में हमारी सभ्यता और संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है। हमारी आस्था और संस्कृति की धारा सद्भाव , समावेश , समभाव की है। उन्होंने कहा सबका साथ , सबका प्रयास का उत्तम प्रमाण प्रभु राम की जीवन लीला भी है। जिनके हनुमान जी अहम सूत्र रहे हैं। सबका प्रयास की इसी भावना से आजादी के अमृतकाल को हमें उज्जवल करना है , राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिये जुटना है। इसलिये जब बुराई पर अच्छाई को स्थापित करने की बात आयी तो प्रभु राम ने सक्षम होते हुये भी सबका साथ लेने का , सबको जोड़ने का , समाज के हर तबके के लोगों को जोड़ने का और सबको जोड़कर उन्होंने इस काम को संपन्न किया - यही तो है सबका साथ-सबका प्रयास।
गौरतलब है कि हनुमानजी चार धाम परियोजना की शुरूआत वर्ष 2008 में हुई थी। हनुमानजी चार धाम परियोजना की पहली मूर्ति वर्ष 2010 में शिमला में निर्मित हुई थी। मोरबी में दस करोड़ की लागत से स्थापित यह दूसरे नंबर की मूर्ति है , इसका निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। मोरबी के बेला गांव के पास खोखराधाम में हनुमान जी की प्रतिमा के अनावरण के साथ भव्य रामकथा का आयोजन किया गया है। यह रामकथा महामंडलेश्वर कनकेश्वरी देवी के मुखारविंद से होगी। कथा के पहले दिन बेला गांव से हाथियों , घोड़ों की बग्घी और बारात लेकर जुलूस निकाला गया। इस रामकथा में शामिल होने के लिये देश भर से साधू - संत खोखराधाम पहुंच चुके हैं।