: लोगों को जगाने के लिये महिलाओं का जागृत होना जरूरी - रतन लाल डांगी
Thu, Mar 9, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - देश में यदि महिलाओं को गरिमापूर्ण स्थान समाज में दिया है , तो वो मात्र देश का संविधान ही है। देश का संविधान ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसमे महिला एवं पुरुष में किसी प्रकार का भेद नहीं किया गया है। हमारे देश का जितना नुकसान लैंगिक भेदभाव ने किया है , शायद ही किसी और कारण ने किया हो। जिस दिन हमारे देश की हर महिला शक्ति भारत के संविधान को सुबह-शाम पढ़ना शुरू कर देगी , उस दिन से उसे सभी प्रकार के शोषण से मुक्ति का रास्ता मिल जायेगा एवं उसे आगे बढ़ने और देश के निर्माण की भागीदारी से कोई नहीं रोक पायेगा।
उक्त बातें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी के निदेशक रतन लाल डांगी ने आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पं० रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में विधि संकाय के छात्रों को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समस्त महिला शक्ति को बधाई एवं प्रणाम निवेदित करते हुये कहा कि
हर व्यक्ति को अपने आपसे ये सवाल जरूर पूछना चाहिये किआखिर महिला दिवस मनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी ? क्या महिला के बिना इस मानव जाति का अस्तित्व संभव है ? जिस महिला शक्ति के बिना मानव जाति की कल्पना नहीं की जा सकती वह महिला शक्ति सदियों से अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही है और हर युग में उसके साथ छल ही हुआ है , छल भी उसके अपनों ने ही किया है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक काल तक महिलाओं की स्थिति में उतार-चढ़ाव रहा है। वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति काफी हद तक ठीक थी लेकिन उत्तर वैदिक काल से ही उनकी समाज में स्थिति उत्तरोत्तर खराब ही होती गई , स्त्री को शूद्र की कैटेगरी में रखा गया। उनको भी शूद्रों की तरह ना तो शिक्षा का अधिकार था और ना हीं सामाजिक व्यवस्था में सम्मान। उनके साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया जाता था। मनुस्मृति में महिलाओं के लिये बहुत निम्न किस्म की शब्दावली का प्रयोग किया गया है एवं स्त्री को पुरुष की दासी के रूप में स्थापित किया गया है। आईपीएस डांगी ने कहा लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक , सामाजिक , आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है , जो देश को पीछे की ओर ढ़केलता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुये संविधान निर्माताओं ने विशेषकर डॉ० भीमराव अंबेडकर ने लैंगिग भेदभाव को संविधान में कहीं पर भी स्थान नहीं दिया है। उनका कहना भी था कि "मैं किसी समुदाय की प्रगति उस समुदाय की महिलाओं की प्रगति के आधार पर मापता हूं।” इसीलिये संविधान में लिंग भेद का कोई स्थान नहीं है। यानि महिलाओं को भी वो सब अधिकार दिये है जो पुरुषों को दिये। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का ही कमाल है की आज हर क्षेत्र में महिला शक्ति ने अपना लोहा मनवाया है। उनका कहना है कि महिलायें चाहे वो देश की राष्ट्रपति हो , प्रधानमंत्री , राज्यपाल , मुख्यमंत्री , मंत्री , न्यायाधीश , आईएएस , आईपीएस , वैज्ञानिक , डॉक्टर , अंतरिक्ष , सेना ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा है जहां महिलाओं ने संविधान द्वारा दिये अधिकारों से प्राप्त अवसर मिलने से यह साबित कर दिया कि कोई भी व्यक्ति किसी से कम नहीं होता है , वो सब कर सकता है यदि उसे अवसर दिया जाये। कहा भी गया है की यदि किसी देश को विकसित करना है तो लोगों को जगाना होगा और “लोगों को जगाने के लिये , महिलाओं का जागृत होना जरुरी है। एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है तो परिवार आगे बढ़ता है , गाँव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है।“ भारत में , महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को क्षति पहुंचाने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है जैसे दहेज प्रथा , अशिक्षा , यौन हिंसा , असमानता , भ्रूण हत्या , महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा , बलात्कार , वैश्यावृत्ति , मानव तस्करी और भी ऐसे ही दूसरे विषय। इस तरह की बुराईयों को मिटाने के लिये एवं भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिये महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली उपाय है। लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से ही पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। महिला सशक्तिकरण के उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इसे हर एक परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारित करना होगा। केवल शिक्षित व्यक्ति ही अपने अधिकारों को जान सकता है इसलिये यह जरूरी है की हर बेटी को पढ़ने का मौका समाज को देना होगा। मजबूत समाज एवं राष्ट्र के लिये ये जरुरी है कि महिलायें शारीरिक , मानसिक और सामाजिक रुप से मजबूत हो। चूंकि एक बेहतर शिक्षा की शुरुआत बचपन से घर पर हो सकती है , महिलाओं के उत्थान के लिये एक स्वस्थ परिवार की जरुरत है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक है। आज भी कई पिछड़े क्षेत्रों में माता-पिता की अशिक्षा , असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह हो जाता है और बच्चे भी जिससे महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास प्रभावित होता है। महिलाओं को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार , लैंगिक भेदभाव , सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिये सरकार कई सारे कदम भी उठा रही है। फिर भी अभी बहुत किया जाना अपेक्षित है l
: भेदभाव को मिटाने वाला पर्व है होली - अरविन्द तिवारी
Tue, Mar 7, 2023
रायपुर - होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला हिंदू धर्म के मुख्य त्यौहारों में से एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है जिसे हर धर्म में मनाया जाता है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है जो आज विश्व भर में उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाने लगा है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के अगली सुबह यानि कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली मनायी जाती है जबकि पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। इस पर्व को देश भर में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली को कई जगह धुलेंदी भी कहा जाता है। मथुरा-वृंदावन और ब्रज में जिस तरह से होली मनाई जाती है वो देश भर में नामी है। होली में लोग घरों में तरह तरह के पकवान बनाते हैं। होली वाले दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाकर होली की शुभकामनायें देते हैं। रंग और प्रेम का त्यौहार होली पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर एक दूसरे को अबीर- गुलाल लगाते हुये बधाई का दिन है। होली खेलने के बाद दोपहर में लजीज व्यंजनों का आनंद लिया जाता है। देश के अलावा विदेशों में भी नई उमंग और खुशियों के साथ मनाया जाने वाला होली का यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। होली भेदभाव को मिटाने वाला पर्व है। भारत में अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न तरीके से होली का पर्व मनाया जाता है। चूंकि यह प्रसंग राधा-कृष्ण से जुड़ा हुआ माना जाता है इसलिये मथुरा – वृंदावन और बरसाने में इस पर्व की शोभा देखने लायक होती है। यहां पर होली काफी दिन पहले ही शुरू हो जाती है। जिसमें अलग-अलग तरीकों से होली मनायी जाती है। कहीं लट्ठमार होली तो कहीं फूलों से भी होली खेली जाती है। इसके अलावा हमारे देश में विविध ढंग से होली मनायी और खेली जाती है। जैसे कि कुमाऊं की बैठकी होली , बंगाल की दोल-जात्रा , महाराष्ट्र की रंगपंचमी , गोवा का शिमगो , हरियाणा के धुलंडी में भाभियों द्वारा देवरों की फजीहत , पंजाब का होला-मोहल्ला , तमिलनाडु का कमन पोडिगई , मणिपुर का याओसांग , एमपी मालवा के आदिवासियों का भगोरिया आदि। लेकिन ब्रजभूमि की होली; विशेषकर बरसाने की लट्ठमार होली तो पूरी दुनियां में प्रसिद्ध है।होली की शुरुआतमाना जाता है कि अबीर और गुलाल से होली खेलने का रिवाज बहुत पुराना है। पौराणिक कथाओं अनुसार रंग-गुलाल की यह परंपरा राधा और कृष्ण से शुरु हुई थी। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण बाल उम्र में माता यशोदा से अपने सांवले रंग की शिकायत किया करते थे। वे कहते थे कि मां राधा इतनी सुंदर और गोरी है और मैं इतना काला क्यों हूं ? माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिये सुझाव दिया कि वह राधा को जिस रंग में देखना चाहते हैं उसी रंग से राधा को रंग दें। भगवान श्रीकृष्ण को अपनी माता का ये सुझाव पसंद आया। स्वभाव से चंचल और नटखट श्रीकृष्ण ने राधा को कई रंगों से रंग दिया और श्री अपने मित्रों के साथ उन्होंने गोपियों को भी जमकर रंग लगाया। माना जाता है कि इसी दिन से होली पर रंग खेलने की परंपरा शुरु हो गई।पौराणिक कथापौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप स्वयं को परमशक्तिशाली मानता था। इसी वजह से उसने अपनी प्रजा को आदेश दिया था कि वे किसी भगवान की पूजा नहीं करेंगे , वही उनका भगवान है । लेकिन हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद नारायण का परम भक्त था। वह हर समय श्रीहरि का नाम जपता रहता था। अपने बेटे को भगवान की भक्ति में लीन देखकर हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल हो जाता था। उसने कई बार बेटे को प्रभु की भक्ति से हटाने के प्रयास किया , लेकिन प्रह्लाद तो हर पल श्रीहरि में ही लीन रहता था। कई प्रकार से प्रहलाद को मारने की योजनाओं में असफल होने पर हिरण्यकश्यप ने हारकर अपनी बहन होलिका से मदद मांगी और होलिका से प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठने को कहा जिससे प्रह्लाद उसमें जलकर भस्म हो जाये। दरअसल हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को एक वरदान प्राप्त था जिसकी वजह से अग्नि उसे छू भी नहीं सकती थी। होलिका अग्नि में प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ गई , लेकिन प्रह्लाद की भक्ति की विजय हुई और उस अग्नि में होलिका ही जलकर भस्म हो गई और हरि भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका ना हुआ। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक इसी कहानी को कहा जाता आ रहा है और होली के समय इसे याद किया जाता है।
: ये बजट छग के भरोसे का बजट होगा - सीएम बघेल
Mon, Mar 6, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज सोमवार को छत्तीसगढ़ सरकार का वर्ष 2023 का बजट पेश करेंगे। बजट की पूर्व संध्या पर उन्होंने प्रदेश की जनता को संदेश देते हुये विश्वास दिलाया है कि यह भरोसे का बजट होगा। उन्होंने कहा है कि यह उस भरोसे का बजट है जिसने छत्तीसगढ़ को नवा छत्तीसगढ़ बनने का संबल दिया है। यह वही भरोसा है जो आपने हमारे घोषणा पत्र पर , हमारी कार्यशैली पर और हमारी सरकार की जनकल्याणकारी सोच पर जताया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमने सरकार बनते ही महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के संकल्प और न्याय की नीति को आकार देना शुरू कर दिया था। इस दौरान बीते वर्षों में आई चुनौतियों से सभी परिचित हैं। चाहे वह कोरोना जैसी वैश्विक आपदा की चुनौती हो या अन्य चुनौतियां जिन्हें आप सब समझते हैं। लेकिन यह कहते हुये गर्व होता है कि इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुये हम बाहर निकले हैं और इस समय हम सबसे अच्छे आर्थिक प्रबंधन वाले प्रदेशों में से एक हैं। उन्होंने कहा यह आपके ही भरोसे का परिणाम है कि देश भर में मंदी होने के बाद भी छत्तीसगढ़ के बाजारों में रौनक हैं और सबसे कम बेरोजगारी दर छत्तीसगढ़ में है। देश भर में छत्तीसगढ़ ने धान खरीदी में भी रिकॉर्ड तोड़ा है। प्रदेश में सुदूर अंचलों के आदिवासियों तक नई योजनायें पहुंची हैं। साथ ही स्वास्थ्य , शिक्षा का छत्तीसगढ़ मॉडल देश भर की सरकारें अपना रही हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने आगे कहा कि पहले छत्तीसगढ़ को लोग सिर्फ नक्सली हिंसा की घटनाओं के लिये याद करते थे। पर्यटकों के दिमाग में छत्तीसगढ़ को लेकर प्रश्न चिन्ह आते थे। अचानक से इतना कुछ बदल गया है कि देश के लोग अब छत्तीसगढ़ आने को उत्सुक हैं। आप देख रहे होंगे कि प्रदेश में लगातार बॉलीवुड कलाकार फिल्म और वेब सीरिज की शूटिंग के लिये आ रहे हैं , पर्यटकों की संख्या में शानदार वृद्धि हुई है। यह सब जनभागीदारी से संभव हो सका है। हमारा राज्य अब देश को रास्ता दिखा रहा है , लोगों का नजरिया बदला है और आज समय बदल गया है। छत्तीसगढ़ में रोड सेफ्टी जैसे दो बड़े सीजन क्रिकेट मैच हो चुके हैं , पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मैच ने हम सबका गौरव बढ़ाया है। सेलेब्रिटी क्रिकेट लीग भी अभी हाल में ही सम्पन्न हुआ है। विधानसभा में सोमवार को जो छत्तीसगढ़ के ‘भरोसे’ का बजट प्रस्तुत होगा , वह हमारे प्रदेश के सपनों को एक नई हकीकत देने वाला बजट होगा जो आसमान की नहीं जमीन की बात करेगा। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मैं आप सबको भरोसा बनाये रखने के लिये धन्यवाद देता हूं। साथ ही यह जिम्मेदारी भी आप सबके कंधों पर रखना चाहूंगा कि छत्तीसगढ़ को ‘नकारात्मकता’ से भर देने वालों को पहचानिये और नवा छत्तीसगढ़ की इस यात्रा को सब लोग मिलकर रफ्तार दीजिये।