: सविता पूनिया को मिली भारतीय हॉकी टीम की कमान
Sun, Nov 21, 2021
नई दिल्ली - एशियाई हाकी महासंघ ने महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2021 आयोजित करने की घोषणा कर दी है। बताते चलें दक्षिण कोरिया तीन खिताबों के साथ महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में गत चैंपियन और सबसे सफल देश है। उन्होंने वर्ष 2018 में पिछले संस्करण के फाइनल में भारत को हराया था। वहीं भारतीय महिला हाकी टीम ने वर्ष 2016 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जीती और दो मौकों (वर्ष 2013 व वर्ष 2018) में दूसरे स्थान पर रही। महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी आमतौर पर एशिया की पांच सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय हाकी टीमों के बीच खेली जाती है , लेकिन वर्ष 2021 में इसे छह टीमों तक बढ़ा दिया गया है। वर्ल्ड नंबर आठ भारत टूर्नामेंट में शीर्ष क्रम की टीम है , वहीं रैंकिंग में चीन दसवें और कोरिया ग्यारहवें स्थान पर है। प्रतियोगिता आम तौर पर एक राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेली जाती है , जहां प्रत्येक टीम अन्य सभी टीमों के खिलाफ एक-एक बार मुक़ाबला खेलती है। इस चरण के बाद शीर्ष दो टीमें खिताबी जंग लड़ती हैं। दो सालों में एक बार होने वाले इस टूर्नामेंट का इस बार छठा संस्करण आयोजित होगा , जो कोरोना महामारी के कारण पहले ही तीन बार स्थगित किया जा चुका है। इससे पहले ये 24 से 31 अक्टूबर तक आयोजित किया जाना था। दक्षिण कोरिया के डोंगाई में 05 से 12 दिसंबर तक होने वाली महिला हॉकी एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिये भारतीय टीम की कमान गोलकीपर सविता पूनिया को सौंपी गई है , वहीं डिफेंडर दीप ग्रेस इक्का 18 सदस्यीय टीम की उपकप्तान होंगी। इस टूर्नामेंट में आठ दिन में कुल अठारह मुकाबले होंगे , जिसमें भारत , चीन , कोरिया , जापान , थाईलैंड और मलयेशिया छह टीमें खिताब के लिये चुनौती पेश करेंगी। महिला एशियन चैंपियन ट्राफी-2021 के लिये चयनित भारतीय हाकी टीम की चयनित 18 हाकी खिलाड़ियों में आठ बेटियां हरियाणा की हैं। इनमें कप्तान सहित तीन बेटियां हिसार से और एक हिसार टीम का पूर्व में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं यानि हिसार से संबंध रखने वाली चार बेटियां अब भारतीय हाकी टीम में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। टीम में नमिता टोप्पो और लिलिमा मिंज भी शामिल हैं। फॉरवर्ड पंक्ति की कमान दो बार की ओलंपियन वंदना कटारिया और नवनीत कौर संभालेंगी। उनके साथ राजविंदर कौर, मरियाना कुजुर और सोनिका हैं। मिडफील्ड में सुशीला चानू, पुखरांबम, निशा, मोनिका, नेहा और ज्योति हैं। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत पांच दिसंबर को थाईलैंड के खिलाफ करेगी। नियमित कप्तान रानी रामपाल को आराम दिया गया है। टोक्यो ओलंपिक में खेलने वाली फॉरवर्ड लालरेम्सियामी व शर्मिला देवी और मिडफील्डर सलीमा टेटे भी टीम में नहीं हैं। ये तीनों जूनियर टीम का हिस्सा हैं जो पांच दिसंबर से दक्षिण अफ्रीका में एफआईएच विश्व कप खेलेंगी। नवजोत कौर और सुमन देवी वैकल्पिक खिलाड़ी होंगी। टीम में से किसी के चोटिल होने या कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें मौका मिलेगा। टीम मुख्य कोच यानेके शॉपमैन ने कहा, 'कुछ खिलाड़ियों के चोटिल होने और सीनियरों के जूनियर टीम से जुड़ने के बावजूद हमने अच्छी टीम चुनी है।' यह शॉपमैन का बतौर कोच पहला टूर्नामेंट होगा जो शोर्ड मारिन के कार्यकाल में टीम की विश्लेषण कोच रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि टोक्यो ओलंपिक के बाद काफी अपेक्षाएं हैं लेकिन हम नये सिरे से शुरू करेंगे। मुझे यकीन है कि अपनी क्षमता के अनुरूप खेलने पर हम लगातार अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब होंगे। ओलंपिक के बाद से भारतीय टीम का यह पहला टूर्नामेंट होगा। भारत को पहले ही दिन अभियान की शुरुआत करनी है।भारत को पांच दिसंबर को थाईलैंड से और अगले दिन छह दिसंबर मलेशिया से खेलना है। इसके बाद आठ दिसंबर को गत चैम्पियन कोरिया का और फिर नौ दिसंबर चीन तथा ग्यारह दिसंबर जापान का सामना करना है। फाइनल 12 दिसंबर को पूल की शीर्ष दो टीमों के बीच खेला जायेगा।टीम इस प्रकार है -गोलकीपर - सविता (कप्तान) , रजनी ई। डिफेंडर - दीप ग्रेस इक्का , उदिता , निक्की प्रधान , गुरजीत कौर।
मिडफील्डर - निशा , सुशीला चानू पुखराम्बम , नमिता टोप्पो , मोनिका , नेहा , ज्योति , लिलिमा मिंज। फॉरवर्ड - नवनीत कौर , वंदना कटारिया , राजविंदर कौर , मरियाना कुजुर , सोनिका।
: बीमारी और दुश्मन को कम नहीं आंकना चाहिये - पीएम मोदी
Thu, Nov 4, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - आज तक जितनी भी प्रगति हमने की वह सब आपकी मेहनत से हुई है , लोगों ने दूरदराज के इलाकों में पैदल चलकर वैक्सीन पहुंचायी है। बीमारी और दुश्मन को कम नहीं आंकना चाहिये। अगर एक अरब टीकों का आंकड़ा छूने के बाद हम थोड़े भी ढीले पड़ गये तो आने वाले समय में और भी बड़ा संकट आ सकता है , हमें थोड़ा भी ढीलापन नहीं आने देना है। ये समय ढीला पड़ने का नहीं बल्कि घर - घर पहुंचकर लोगों को टीका लगाने का है। जहां भी कमी है हमें उन्हें जल्दी दूर करना है , हमें हर गांव हर कस्बे पर फोकस करना होगा। अभी तक आप सभी ने लोगों को वेक्सीनेशन सेंटर तक पहुंचाने और वहां सुरक्षित टीकाकरण के लिये प्रबंध किये। अब हर घर टीका , घर - घर टीका इस जज्बे के साथ आपको हर घर पहुंचना है , अब हम घर - घर में जाकर सभी को टीका लगायेंगे। हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना होगा. धर्मगुरुओं को भी टीकाकरण के इस अभियान में जोड़ना होगा।
उक्त बातें आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिटेन यात्रा से स्वदेश लौटते ही बीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कम कोविड -19 टीकाकरण होने वाले जिलों के अधिकारियों से चर्चा की। इस दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने टीकाकरण अभियान को तेज करने के उद्देश्य से "हर घर दस्तक" कार्यक्रम की भी शुरुआत की। इस बैठक में वैसे तमाम जिला के अधिकारी शामिल हुये , जहां कोरोना टीके के पहले डोज की कवरेज पचास फीसदी से कम और दूसरे डोज की इससे भी कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैक्सीनेशन की कम गति वाले जिलों के जिलाधिकारियों से कहा कि अपने जिलों में एक-एक गांव , एक-एक कस्बे के लिये अगर अलग-अलग रणनीति बनानी हो तो वो भी बनाईये। उन्होंने इसके लिये जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भी सुझाव दिया। पीएम ने कहा कि अच्छे-अच्छे देशों में कोरोनावायरस की खबरें फिर सामने आ रही हैं, इसलिये वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगाना बहुत जरूरी है। आपके राज्यों में जिन लोगों ने दूसरा डोज नहीं लगाया है उनसे प्राथमिकता के साथ हमें संपर्क करना होगा उन्हें दूसरा डोज लगाना होगा। उन्होंने कहा कि 100 साल की इस सबसे बड़ी महामारी में देश ने अनेक चुनौतियों का सामना किया है।अब आपको अपने जिलों में वैक्सीनेशन बढ़ाने के लिए नये इनोवेटिव तरीकों पर और ज्यादा काम करना होगा। पीएम ने आगे कहा कि लोगो में एक चुनौती अफवाह और भ्रम की स्थिति भी है , इसका एक बड़ा समाधान यह है कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जाये। इसमें स्थानीय धर्मगुरूओं की भी मदद ली जा सकती है। वैक्सीन पर धर्मगुरूओं के संदेश को भी हमें जनता तक पहुंचाने पर विशेष जोर देना होगा। पीएम मोदी ने कहा मैं मुख्यमंत्रियों का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने वैक्सीनेशन की बैठक में हिस्सा लिया , उम्मीद है कि उनके मार्गदर्शन में अब टीकाकरण आगे बढ़ेगा। बैठक में प्रधानमंत्री आज झारखंड , मणिपुर , नागालैंड , अरुणाचल प्रदेश ,महाराष्ट्र , मेघालय , छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के कम कोरोना टीकाकरण कवरेज वाले 11 राज्यों के सीएम से रूबरू हुये।
: केन्द्र ने आरबीआई गवर्नर को दिया तीन साल का सेवा विस्तार
Fri, Oct 29, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली -- केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुये भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के कार्यकाल में तीन साल का विस्तार कर दिया है। कैबिनेट के नियुक्ति समिति के निर्णयानुसार अब शक्तिकांत दास अगले तीन साल के लिये आरबीआई के गवर्नर के पद पर बने रहेंगे।शक्तिकांत दास को उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद 11 दिसंबर 2018 को तीन साल की अवधि के लिये भारतीय रिजर्व बैंक का नया गवर्नर नियुक्त किया गया था , इससे पहले वे वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव थे। उर्जित पटेल वर्ष 2016 में आरबीआई के 24 वें गवर्नर नियुक्त हुये थे , लेकिन अपने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही निजी कारणों का हवाला देते हुये अचानक उन्होंने आरबीआई गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था।
गौरतलब है कि 26 फरवरी 1957 को जन्मे शक्तिकांत दास इतिहास विषय में एम.ए पासआउट हैं और तमिलनाडु कैडर के 1980 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स में जॉइंट सेक्रेटरी बजट , तमिलनाडु सरकार के राजस्व विभाग में कमिश्नर और स्पेशल कमिश्नर , तमिलनाडु के इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट में सेक्रेटरी और अन्य विभिन्न पदों पर रह चुके हैं।नवंबर 2016 में नोटबंदी की घोषणा के समय शक्तिकांत दास आर्थिक मामलों के सचिव थे। दास ने नोटबंदी के झटके के दौरान सरकार का बचाव किया। वित्त मंत्रालय में वे पहली बार वर्ष 2008 में संयुक्त सचिव बने जब पी० चिदंबरम वित्तमंत्री थे। फिर शक्तिकांत दास को दिसंबर 2013 में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव बनाया गया , लेकिन मई 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें वापस वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव बना दिया गया। दास ने जीएसटी को लागू करने में भी अहम भूमिका निभायी है। वे लगभग चार दशक से सरकार के साथ मिलकर काम करने के साथ-साथ अब तक आठ केंद्रीय बजट को बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 17 मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी का नेतृत्व भी किया है। दास ने कोविड-19 महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उनके नेतृत्व में, केंद्रीय बैंक ने अभूतपूर्व संकट के दौरान वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये 100 से अधिक उपायों की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल इसी साल 10 दिसंबर को खत्म होने वाला था , लेकिन अब कैबिनेट नियुक्ति समिति ने उनके अगले तीन साल की अवधि के लिये आरबीआई के गवर्नर बने रहने पर मुहर लगा दी है। शक्तिकांत दास 10 दिसंबर को 26वें गवर्नर के रूप में नियुक्त होंगे। वर्ष 2014 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद वे सेवा विस्तार पाने वाले रिजर्व बैंक के पहले गवर्नर हैं। रघुराम राजन को वर्ष 2016 में सेवा विस्तार नहीं दिया गया था , जबकि उर्जित पटेल ने अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया था।
उल्लेखनीय है कि पिछले तीन दशक में सिर्फ रघुराम राजन और उर्जित पटेल ऐसे आरबीआई गवर्नर रहे जिन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिला। इसमें से रघुराम राजन ने अपना पहला कार्यकाल पूरा किया था लेकिन उर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारणों से अपना पहला कार्यकाल पूरा किये बिना ही इस्तीफा दे दिया था। पिछले तीन दशक की बात करें तो सी० रंगराजन वर्ष 1992 से1997 तक , बिमल जालान वर्ष 1997-2003 तक , वाईवी रेड्डी वर्ष 2003 से 2008 तक , डी सुब्बाराव वर्ष 2008 से 2013 तक , रघुराम राजन वर्ष 2013 से 2016 तक और उर्जित पटेल वर्ष 2016 से 2018 तक यह पद सम्हाला जबकि पटेल के बाद शक्तिकांत दास दिसंबर 2018 से गवर्नर हैं।