: हमारे देश में बहुपक्षीय लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था आवश्यक -- अमित शाह
Wed, Oct 27, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली -- गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन स्तर को उठाना , देश को सुरक्षित - समृद्ध - संस्कारित व शिक्षित बनाना और देश के गौरव को दुनियां में ऊपर तक ले जाने जैसे काम इकट्ठे होते हैं तब एक सफल शासन बनता है। इन सबको को जो इकट्ठा करता है , वही सफल शासक बनता है। नरेंद्र मोदी अपने आप को भले ही विनम्रता पूर्वक प्रधान सेवक कहें , लेकिन मैं कह सकता हूं कि सफल से सफल प्रधानमंत्री आजादी के बाद अगर कोई है तो वह नरेंद्र मोदी है। उनके नेतृत्व में ना सिर्फ देश के पासपोर्ट का मान बढ़ा है बल्कि सीमायें भी सुरक्षित हुई हैं और समग्र विकास भी सुनिश्चित हुआ है।
उक्त बातें गृहमंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी की ओर से "प्रदत्तकारी लोकतंत्र : सरकार के मुखिया के रूप में नरेन्द्र मोदी के दो दशकों की समीक्षा" विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुये कही। गरीब से गरीब व्यक्ति को आर्थिक सुधार के केंद्र में रखने का हवाला देते हुये गृहमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने विकास दर को मानवीयता के साथ जोड़ा। उनका मानना है कि विकास दर बढ़नी चाहिये लेकिन साथ ही इसका लाभ गरीब और जरूरतमंदों को भी मिलना चाहिये। शाह ने आगे कहा कि उनके (मोदी) सुधार गरीबों की आवश्यकता पर आधारित हैं। समग्र विकास का मतलब है देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना। उरी और पुलवामा में हुये सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से दुनियां भर के अंदर संदेश गया कि अब भारत की सीमाओं के साथ छेड़खानी नहीं हो सकती। शाह ने कहा कि देश की रक्षा नीति में बदलाव उस दिन हुआ जब देश की रक्षा नीति को स्पष्टता के साथ विदेश नीति से अलग कर दिया गया। गृहमंत्री शाह ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुये कहा कि वर्ष 2014 आते-आते देश में रामराज की परिकल्पना ध्वस्त हो चुकी थी और जनता के मन में आशंका थी कि कहीं बहुपक्षीय लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था विफल तो नहीं हो गई।लेकिन देश की जनता ने धैर्य से फैसला देते हुये नरेन्द्र मोदी को पूर्ण बहुमत के साथ देश का शासन सौंपा। तब लोगों के अंदर आक्रोश आशा में परिवर्तित होता दिखने लगा। गृहमंत्री ने कहा भारत की आज़ादी के 75 वर्ष हो गये हैं , जब हम आजाद हुये और हमारे देश की संविधान सभा बनी तो सभा ने मल्टी पार्टी डेमोक्रेटिक सिस्टम को स्वीकार किया जो उचित फैसला था। उन्होंने कहा कि इतने बड़े देश में मल्टी पार्टी डेमोक्रेटिक सिस्टम होना चाहिये , हर पार्टी की एक आईडियोलॉजी होनी चाहिये। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने कई सारे बदलाव लाने का प्रयास किया। बहुत सारे कार्य उन्होंने गुजरात में किये। रिफॉर्म्स , पारदर्शिता पर उन्होंने काम किये। उन्होंने वहां सर्व स्पर्शी और सर्व समावेशक विकास की शुरुआत की। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत का मान बढ़ाने के लिये प्रधानमंत्री का आभार जताते हुये शाह ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद विश्व पटल पर उन्होंने ‘भारत की संस्कृति का देवदूत’ बनकर योग और आर्युवेद को दुनियां भर में पहुंचाने का काम किया है। गृहमंत्री ने कहा मैं मानता हूं कि आजादी के बाद भारत की संस्कृति का ध्वज वाहक बनकर प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में भाषण दिया। पीएम मोदी के सात साल के अब तक के कार्यकाल में हर क्षेत्र के अंदर परिवर्तन हुआ है और सुधार किया गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं पहली बार संघ की शाखा में 12 मार्च 1980 को गया था , तब से लेकर मैं अनुच्छेद 370 और 35ए हटायेंगे -हटायेंगे सुनता था। वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी को अपार जनसमर्थन मिला और 05 अगस्त 2019 को कश्मीर से हमेशा के लिये अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त किया गया।
गौरतलब है कि मोदी के शासनाध्यक्ष के तौर पर 20 साल पूरे होने पर रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी नामक नेतृत्व विकास अकादमी 27 से 29 अक्टूबर तक इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजित है , जिसका केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उद्घाटन किया और उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। सम्मेलन के अन्य प्रमुख वक्ताओं में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और धर्मेद्र प्रधान , भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी हैं। वहीं 29 अक्टूबर को होने वाले सम्मेलन के समापन सत्र में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा मुख्य अतिथि होंगे।
: सुपरस्टार रजनीकांत दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित
Mon, Oct 25, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - भारतीय फिल्म उद्योग ने विभिन्न भाषाओं में अपनी स्वयं की एक पहचान बनायी है। मेरा मानना है कि सिनेमा की अपनी खुद की भाषा है जो सांस्कृतिक एवं क्षेत्रीय सीमाओं से पार जाती है। हम भारतीय फिल्म उद्योग की सफलता का जश्न मनाते हैं क्योंकि यह हमें मनोरंजन , प्रबोधन और प्रोत्साहन देता है।
उक्त बातें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने आज दिल्ली के विज्ञान भवन में 67 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने फिल्म निर्माताओं और अभिनेताओं से अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल लोगों व समाज की भलाई के लिये करने का अनुरोध करते हुये कहा कि सिनेमा को सकारात्मकता और खुशियां लानी चाहिये।उपराष्ट्रपति ने कहा कि सकारत्मकता समय की आवश्यकता है। बाधक नहीं बनें बल्कि रचनात्मक बनें। वहीं केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने महामारी के बीच लोगों का मनोरंजन करते रहने के लेकर भारतीय फिल्म उद्योग की सराहना की। उन्होंने कहा कि फिल्म लोगों को प्रभावित करने में एक अहम भूमिका निभाती है , इस कारण फिल्म उद्योग के लिये यह जरूरी है कि वह लोगों को प्रेरित करने वाली सामग्री तैयार करे। उन्होंने आगे कहा कि हमारे फिल्म उद्योग को एक सॉफ्ट पावर माना जाता है और इसने ब्रांड इंडिया बनाने में एक बड़ी भूमिका निभायी है। यह फिल्म निर्माताओं पर निर्भर करता है कि वे देश को किस रूप में दिखाना चाहते हैं। इस समारोह में सभी विजेता शामिल हुये , जिन्हें उपराष्ट्रपति ने स्वर्ण कमल एवं रजत कमल , शाल और ईनाम की राशि देकर सम्मानित किया। सुपरस्टार रजनीकांत को 51वें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान विज्ञान भवन में मौजूद सभी लोगों ने उनके लिये खड़े होकर तालियां बजायी। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म छिछोरे को बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड मिला। एक्टर धनुष , मनोज वाजपेयी को बेस्ट एक्टर, कंगना रनौत को बेस्ट एक्ट्रेस और विजय सेतुपति को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड दिया गया। बता दें कि कंगना रनौत को चौथी बार नैशनल अवॉर्ड मिला है।
रजनीकांत को सर्वोच्च सम्मान - इसी वर्ष 22 मार्च को फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं के नामों की घोषणा की गई थी। उपराष्ट्रपति ने रजनीकांत को सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया , पिछली बार यह पुरस्कार अमिताभ बच्चन को मिल था। सबसे पहला दादा साहेब फाल्के पुरस्कार वर्ष 1969 में अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था। इसी तरह बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म छिछोरे को मिला। अवॉर्ड लेते वक्त फिल्म के डायरेक्टर नीतेश तिवारी और प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला ने सुशांत को याद करते हुये अवॉर्ड डेडीकेट किया। बता दें कि सुशांत राजपूत का पिछले साल 14 जून को निधन हो गया था। इसी कड़ी में साउथ सुपरस्टार मोहनलाल की मलयालम फिल्म 'मरक्कर: द लायन ऑफ अरेबियन सी' को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड दिया गया। धनुष की फिल्म असुरन को बेस्ट तमिल फिल्म का पुरस्कार मिला। इसी तरह से बेस्ट चिल्ड्रेन फिल्म का अवॉर्ड हिंदी फिल्म कस्तूरी को मिला। हिंदी फिल्म कस्टडी को बेस्ट शॉर्ट फिक्शन फिल्म का पुरस्कार और फिल्म राधा को बेस्ट एनीमेशन फिल्म का अवॉर्ड मिला। पिछले साल ऑस्कर के लिये भेजी गई मलयालम फिल्म जल्लीकट्टू को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी अवॉर्ड मिला। इसी कड़ी में फिल्म भोंसले में जबरदस्त अभिनय के लिये अभिनेता मनोज बाजपेयी और असुरन के लिये अभिनेता धनुष को उपराष्ट्रपति ने बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया। इसी तरह अभिनेत्री कंगना रनौत को फिल्म मणिकर्णिका क्वीन आफ झांसी और फिल्म पंगा के लिये बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। फिल्म 'बहत्तर हूरें' के लिए संजय पूरन सिंह को बेस्ट डायरेक्शन का अवॉर्ड मिला। इसी कड़ी में फिल्म द ताशंकत फाइल्स के लिये अभिनेत्री पल्लवी जोशी को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड दिया गया। वहीं साउथ सुपरस्टार विजय सेतुपति को फिल्म सुपर डीलक्स के लिये बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला। मराठी फिल्म बरदो के लिये गायिका सवानी रविंद्र को बेस्ट प्लेबैक सिंगर फीमेल का अवॉर्ड मिला। फिल्म केसरी के गीत तीरी मिट्टी के लिये सिंगर बी प्राक को बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला।
: स्त्री शक्ति का प्रतीक पर्व है करवा चौथ -अरविंद तिवारी
Sun, Oct 24, 2021
नई दिल्ली - करवा चौथ हर वर्ग, आयु , जाति के हिन्दू सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है जिसे कर्क चतुर्थी भी कहते है। इस दिन सुहागिन महिलायें अपने पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन सुखमय होने की कामना पूर्ति के लिये निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ आज 24 अक्टूबर रविवार को पड़ रही है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि व्रत रखने का अर्थ ही है संकल्प लेना। वह संकल्प चाहे पति की रक्षा का हो , परिवार के कष्टों को दूर करने का या कोई और। यह संकल्प वही ले सकता है जिसकी इच्छा शक्ति मजबूत हो। यह पर्व संकेत देता है कि स्त्री अबला नहीं , बल्कि सबला है और वह भी अपने परिवार को बुरे वक्त से उबार सकती है। करवा चौथ की प्रचलित कथाओं में स्त्रियां सशक्त भूमिका में नजर आती है , इस देश में सावित्री जैसे उदाहरण हैं , जिसने अपने पति सत्यवान को अपने सशक्त मनोबल से यमराज से छीन लिया था। उन्होंने आगे बताया कि पांच साल बाद फिर इस करवा चौथ पर शुभ योग बन रहा है। करवा चौथ पर इस बार रोहिणी नक्षत्र में पूजन होगा , धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र में व्रत रखना बेहद शुभ होता है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में चंद्रमा दर्शन मनवांछित फल प्रदान करता है। वहीं रविवार का दिन होने की वजह से सूर्यदेव का भी व्रती महिलाओं को आशीर्वाद प्राप्त होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पांच साल बाद करवा चौथ रविवार को पड़ रही है। इसके पहले 08 अक्टूबर 2017 को रविवार के दिन ये व्रत रखा गया था। यह व्रत पति पत्नी में भावनात्मक लगाव और विश्वास को बढ़ाता है। इस व्रत को पहली बार करवा चौथ यानि नवविवाहिता महिलाओं के लिये बहुत अच्छा फलदायी बताया जा रहा है।करवा चौथ का पर्व महिलाओं के लिये सुखद अहसास है जिनका उन्हें साल भर इंतजार रहता है। ये व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है , इसलिये चांद निकलने का व्रत रखने वाली सभी महिलाओं की नजर आसमान की ओर रहती है , सबको चांद का बेसब्री से इंतजार रहता है। चांद दिखने का समय हर जगह के लिये अलग-अलग होता है। कहीं कुछ समय पहले चांद दिखाई देने लगता है , तो कहीं पर थोड़ा इंतजार भी कराता है। इस व्रत में कहीं सरगी खाने का रिवाज है तो कहीं नही भी है। करवा चौथ के दिन पति की लंबी उम्र के लिये सुहागिनों को प्रार्थना के साथ निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिये – ‘ऊॅ नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।।
किवदंती के अनुसार महाभारत काल से यह व्रत किया जा रहा है , भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने अर्जुन के लिये इस व्रत को किया था। आज के दिन सभी सुहागिन स्त्रियाँ सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लम्बी उम्र, स्वास्थ्य , सौभाग्य एवं सुखद दांपत्य की कामना के लिये यह व्रत रखती हैं जो बहुत ही कठिन होता है। इस व्रत में कुछ नियम है जिनका कड़ाई से पालन किया जाता है। इस व्रत अवधि में जल भी ग्रहण नही किया जाता अर्थात निर्जला रखा जाता है। यह व्रत सूर्योदय से पहले और चाँद निकलने तक रखा जाता है। रात्रि में चाँद और पति का दीदार के लिये सुहागिन स्त्रियाँ चाँद के उदय होने का इंतजार करती हैं। मान्यता है कि चांद दर्शन के बाद ही व्रत पूरा होता है , उसके बाद ही महिलायें व्रत का समापन करती हैं। यह भी कहा जाता है कि बिना चांद दर्शन के व्रत का पूरा-पूरा फल नहीं मिलता है। चाँद निकलने पर शिव परिवार की पूजन करती हैं। फिर छलनी में घी का दीपक रखकर चंद्रमा को अर्घ्यं देकर , छलनी में से चंद्रमा के साथ अपने चाँद यानि पति का चेहरा देखती हैं। फिर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं और पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। करवा चौथ के व्रत में माता पार्वती समेत शिव परिवार की पूजा की जाती है। इस दिन खास तौर पर गणेश जी का पूजन होता है और उन्हें ही साक्षी मानकर व्रत शुरु किया जाता है। गणेश जी को चतुर्थी का अधिपति देव माना गया है। पूजा करते और कथा सुनते समय सींक रखने की परंपरा है जो करवा माता की उस शक्ति का प्रतीक है जिसके बल पर उन्होंने यमराज के सहयोगी भगवान चित्रगुप्त के खाते के पन्नों को उड़ा दिया था। पूजन के पश्चात अर्घ्य दिये जाने का विधान है। करवा यानि मिट्टी का एक प्रकार का बर्तन जिसके द्वारा चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है , यहां अर्घ्य का मतलब चंद्रमा को जल देने से है। महिलाओं को श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल अथवा मिट्टी का करवा भरना चाहिये। इस व्रत में चंद्रमा को अर्ध्य देकर चलनी से चंद्रमा को देखने के बाद पति को देखते है। इसके बाद पति अपने पत्नी को अपने हाथों से पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। इस दिन करवे में जल भरकर कथा सुनने का विधान है। चंद्रमा के माता का कारक होने की वजह से करवाचौथ के दिन किसी भी महिला को अपनी सास , मांँ या फिर दूसरी महिला का अपमान नहीं करना चाहिये। करवा चौथ वाले दिन महिलायें सफेद रंग की चीजें जैसे दही , चावल , दूध या फिर सफेद रंग का कपड़ा किसी को ना दें क्योंकि सफेद रंग चंद्रमा का कारक माना जाता है। इस दिन इन चीजों का दान करने से आपको आपकी पूजा का फल नहीं मिलेगा। इस दिन महिलायें काले, नीले और भूरे रंग के कपड़े पहन कर पूजा ना करें इससे उसको पूजा का फल नहीं मिलता है।चलनी से चांद देखने का कारणकरवा चौथ के दिन महिलायें चलनी से अपनी पति को देखती हैं। चलनी से चांद देखने की इस परंपरा की कल्पना चंद्रमा और भगवान ब्रह्मा से की गई है। चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का स्वरूप माना गया है , साथ ही चांद में शीतलता , शालीनता , प्यार , जगत प्रसिद्धि जैसे गुण समाहित हैं। इसलिये करवा चौथ पर सभी महिलायें चलनी से चांद को देखकर ये कामना करती हैं कि उनका पति भी चांद जैसे गुणों से परिपूर्ण हो।कौन रख सकती हैं यह व्रत ?कुंवारी कन्यायें -- अक्सर कहा जाता है है कि करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलायें ही रख सकती हैं , लेकिन ऐसा नहीं है। मन चाहा वर पाने की इच्छा रखने वाली कुंवारी कन्यायें भी इस दिन करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। कुंवारी कन्याओं को निर्जला की जगह निराहार व्रत रखनी चाहिये क्योंकि निर्जला व्रत शादी के बाद ही रखा जाता है। इस दिन ये व्रती सरगी की जगह फल खाती हैं , इस दिन कुंवारी कन्याओं को चांद देखकर नही बल्कि बिना छलनी के तारों को अर्घ्य देकर व्रत पारण नहीं करना चाहिये।
सगाईशुदा लड़कियां - जिन लड़कियों की सगाई हो चुकी है और कुछ दिनों में शादी होने वाली है वे लड़कियां भी अपने होने वाले पति के लिये करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। सुहागिन महिलाओं की ही तरह ये लड़कियां भी पूरा दिन निर्जला रहकर पति की लंबी आयु के लिये व्रत रखती हैं। सास के यहां से मिली सरगी खाती हैं और रात के समय पति की फोटो या वीडियो कॉल के जरिये पति को देखर व्रत का पारण करती हैं।
पत्नी सहयोगी पति - आजकल नई-नवेली सुहागिनों के पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्यार जताने के लिये करवा चौथ का व्रत रखते हैं। वे भी पत्नी की तरह दिन भर भूखे रहकर अपना प्यार जताते हैं , लेकिन पतियों के लिये करवा चौथ का ऐसा कोई नियम नहीं होता। पत्नी के साथ वे भी दिन भर भूखे-प्यासे रहकर साथ में ही व्रत का पारण करते हैं।इनसे करें परहेजकरवा चौथ के खास मौके पर महिलायें ध्यान रखें कि इस दिन किसी दूसरी महिला की चूड़ी बिल्कुल ना पहनें , ये अशुभ माना जाता है और व्रत कभी भी सफल नहीं होता। इस दिन सुहागिन महिलायें भूल कर भी हाथों को खाली ना रखें , हाथों में चूड़ियां अवश्य पहनी हों। इस दिन सफेद रंग की चूड़ियां बिल्कुल ना पहनें , इसे भी बहुत अशुभ माना जाता है। इस शुभ दिन हाथों में चूड़ियां पहनते समय इस बात का ध्यान भी रखें कि हाथों में सिंगल चूड़ी ना पहनें , बल्कि चूड़ियां जोड़े से पहनें। एक या तीन चूड़ी कभी नहीं पहनें , साथ ही इस बात को ध्यान में रखें कि चूड़ी चटकी हुई ना हो। करवाचौथ की शॉपिंग के दौरान कुछ चीजों को भूलकर भी ना खरीदें। करवाचौथ के दिन ना तो सफेद कपड़े खरीदने और ना ही पहनने चाहिये। इस दिन लाल , पीले , हरे और संतरी रंग के कपड़ों की खरीददारी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन सुहागिन महिलाओं को तेज धार वाली वस्तुओं की खरीददारी नहीं करनी चाहये इनमें चाकू , कैंची और सुई जैसी चीजें शामिल हैं।सोलह श्रृंगार क्या है ?करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाओं को पूर्ण श्रृँगार के साथ तैयार होना चाहिये। मान्यता है कि पूर्ण श्रृंगार में सोलह तरह के श्रृंगार महत्वपूर्ण होते हैं जिनमें सिंदूर , मंगलसूत्र , बिंदी , मेंहदी , लाल रंग के कपड़े , चूड़ियांँ , बिछिया , काजल , नथनी , कर्णफूल (ईयररिंग्स) , पायल , मांग टीका , तगड़ी या कमरबंद , बाजूबंद , अंगूठी , गजरा।